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Sat Jun 24, 2017 05:54:18 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Sat Jun 24, 2017 05:54:18 IST

Blog Entry# 2085840  
Posted: Dec 09 2016 (20:49)

3 Responses
Last Response: Dec 10 2016 (11:56)
  
मौसम की मार
’ यात्री संरक्षा और कोहरे की आड़ में अफसर मनमानी पर उतारू
’ रेल मंत्री सुरेश प्रभु की कार्रवाई से अफसर हैं खफा
नई दिल्ली अरविंद सिंहपटना-इंदौर ट्रेन हादसे को लेकर रेल मंत्री सुरेश प्रभु की ओर से उठाया गया सख्त कदम अब रेल यात्रियों पर भारी पड़ रहा है। यात्री संरक्षा और कोहरे की आड़ में राजधानी-शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम
...
more...
ट्रेन 10-15 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही हैं। कोहरे की शुरूआत में ही ट्रेनों का समयपालन 83 फीसदी से गिरकर 60 प्रतिशत पर आ चुका है। वहीं, पहली बार राजधानी-शताब्दी ट्रेनें रिकार्ड 30 घंटे व मेल एक्सप्रेस 53 घंटे तक लेट हो रही हैं। यह स्थिति आगे भी बने रहने की आशंका है।विदित हो कि सुरेश प्रभु ने कानपुर के पुखराया के पास पटना-इंदौर ट्रेन हादसे के बाद पांच रेल अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की थी। दशकों बाद किसी हादसे के लिए इतने अधिकारियों को नापा गया है। इससे डिविजन स्तर पर डीआरएम और सेक्शन इंजीनियर का वर्ग काफी नाराज हैं। क्योंकि सुरक्षित ट्रेन चलाने के साथ उक्त अधिकारियों पर ट्रेनों का समयपालन बनाए रखने का भारी दबाव रहता है।15 मिनट से अधिक देरी होने पर अधिकारियों तलब करने के साथ दंडनात्मक कार्रवाई ङोलनी पड़ती है।सूत्रों का कहना है कि अधिकारी किसी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। अधिकारियों ने ट्रेन ड्राइवरों को बाकायदा मौखिक आदेश दिए हैं कि किसी भी हालत में दुर्घटना नहीं होनी चाहिए। ट्रेन लेट होने पर उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मकैनिकल (डब्बिे-इंजन) अथव इंजीनियरिंग (पटरी, सग्निल) की हल्की त्रुटि मिलने पर भी ट्रेनों की रफ्तार पर प्रतिबंध लगा दिया है।रेल मंत्रयल के वरष्ठि अधिकारी ने माना कि ट्रेनों का समयपालन गिरकर 60 रह गया है। यानी 100 ट्रेनों में सर्फि 60 ट्रेन समय पर पहुंच रही हैं। समयपालन व राजधानी-शताब्दी के एक दिन लेट होने पर रेलवे बोर्ड में संरक्षा बैठक हुई। लेकिन डिविजन के अधिकारियों का तर्क है कि यदि समयपालन ठीक किया तो ट्रेन हादसे नहीं होने की कोई गारंटी नहीं है। जाहिर है कि आगामी फरवरी तक ट्रेनें टाइम टेबल से नहीं चल सकेंगी।——————-बॉक्सरेल मंत्रलय हादसों पर अंकुश लगाने और घने कोहरे में ट्रेनों को सरपट दौड़ाने के लिए आधुनिक तकनीक लागू करने की दिशा पर काम कर रहा है। वश्वि में दोनों समस्याओं के लिए तमाम तकनीक मौजूद हैं। लेकिन वत्तिीय संकट जूझ रहे रेलवे सस्ती, टिकाऊ और भरोसेमंद देशी तकनीक पर विचार कर रहा है।ऑनलाइन मॉनिटरिंग आफ रोलिंग स्टॉक (ओएमआरएस) :रेल मंत्रलय का मैकेनिकल विभाग आरेएमआरएस तकनीक को विकसित किया है और इसका सफल टेस्ट भी किया जा चुका है। इस तकनीक की विशेषता यह होगी कि चलती ट्रेनों व मालगाड़ियों का मकैनिकल-इंजीनियरिंग एक्स-रे करना संभव होगा। यानी चलती ट्रेन के पहियों व बियरिंग में होने वाली त्रुटियों को सेंसर पकड़ लेंगे। अभी यह काम मैन्युअल होता है। ओएमआरएस तकनीक में पटरी किनारे बॉक्स लगेंगे। इसमें त्रुटि पकड़ने के लिए सूक्ष्म माइक्रोफोन व सेंसर हैं। कोच, वैगन, इंजन खामी को जीपीएस के जरिए डिविजन में स्थापित कंट्रोल रूम तक भेज देंगे। जिससे अगले स्टेशन पर खामी को दूर कर दिया जाता है। फिलहाल देशभर में 25 स्थानों (पटरियों) पर डिवाइस लगाए जाएंगे। एक डिवाइस 600 किलोमीटर दूरी तक ऑनलाइन मॉनिटरिंग करेगा। इस प्रकार प्रथम चरण में 15000 किलोमीटर सुरक्षित होगा।त्रिनेत्र :ट्रेन के इंजनों में लगने वाली तकनीक त्रिनेत्र की प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गत माह रेलवे के चिंतन शिविर कर चुके हैं। कोलकता मेट्रो के जीएम एम.सी. चौहान ने तीन स्तरीय निगरानी वाली तकनीक का प्रस्तुतिकरण चिंतन शिविर में किया था। इंजन में लगा त्रिनेत्र डिवाइस में उच्च क्षमता का आप्टिकल वीडियो कैमरा, अति संवेदनशील इंफ्रारेड कैमरा और रेडार आधारित ट्रैरेन मै¨पग सस्टिम लगा होगा। इन उपकरणों की मदद से ड्राइवर को 1200 मीटर पहले ही सग्निल की स्थिति की सटीक जानकारी देगा। रेलवे मंत्रलय ने टाटा की मदद से दक्षिण भारत में इसका सफल टेस्ट कर लिया है। अब उत्तर भारत में इस तकनीक को परखा जाएगा। इससे पटरी की क्षमता का उपयोग 50 फीसदी से बढ़कर 80 प्रतिशत हो जाएगा। यानी अधिक ट्रेनें चलाई जा सकेंगी।—————भ् देश में कुल 68 हजार किलोमीटर लंबी पटरियों में सर्फि उत्तर भारत में 10,000 किलोमीटर में यात्री ट्रेनें कोहरे में फंसती हैं। देश के शेष हस्सिे में ट्रेनें फुल स्पीड पर दौड़ रही हैं।भ् रेल मंत्रलय के आंकड़ों के अनुसार महज तीन माह (दिसंबर-फरवरी) में कोहरे के कारण 18,000 यात्री ट्रेनें लेटलतीफी का शिकार होती हैं। यानी प्रतिदिन चार लाख यात्री ट्रेनों की देरी से बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। जबकि हर रोज लंबी दूरी की ट्रेनों में 12 लाख यात्री सफर करते हैं।भ् एक अनुमान के मुताबिक ट्रेन लेट होने पर टिकट रिफंड और मालगाड़ियों का परिचालन प्रभावित होने से रेलवे को सालाना लगभग 1000 से 1200 करोड़ का नुकसान सहना पड़ता है।

  
1604 views
Dec 09 2016 (20:49)
Proud atheist~   4434 blog posts   37 correct pred (63% accurate)
Re# 2085840-1            Tags   Past Edits
Fog mere khayal se jab se trains chal rahi hain us samay se hi fog ka adverse effect raha hoga trains ki movement par aaj tak koi thos kadam nahi liya isko counter karne ke liye aur koi future plan bhi nahi hai..

  
1581 views
Dec 09 2016 (20:54)
DhnEcr~   5358 blog posts
Re# 2085840-2            Tags   Past Edits
Technological advancement ek baat hai aur uska application alag. So many techniques still none in use.

  
1020 views
Dec 10 2016 (11:56)
manishiisc   13 blog posts
Re# 2085840-3            Tags   Past Edits
There is always a way to make things work. One can always find thousands of way to derail any plan. Unfortunately railway employs choose second option. IR is already under pressure, and if they do not improve now, Railways will be carrying goods only...The flights are becoming affordable day by day and they are penetrating in smaller city as well.

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