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Wed May 24, 2017 23:34:52 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Wed May 24, 2017 23:34:52 IST
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Blog Posts by IM UR LOVER
Page#    32 Blog Entries  next>>
  
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2809 views
Aug 17 2011 (12:38)   12627/Karnataka Express (PT)
 

Guest: 552cae30   show all posts
Entry# 221776            Tags   Past Edits
kya koi humko bata sakta hai ki yeh train kahan se kahan diesel line par chalti hai kahan electric kahan single par kahan double line kahan triple kya mathura delhi triple line hai

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1679 views
Aug 17 2011 (12:43)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 221776-5            Tags   Past Edits
abi nai milegaa - all edmins here discuss some very important subject ( I THINK SO )

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1969 views
Aug 17 2011 (13:48)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 221776-18            Tags   Past Edits
really im very sorry maidam - but pls give this advice ur admins member too.

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1187 views
Aug 17 2011 (09:38)  
 

WRIK*^   7505 blog posts   131 correct pred (59% accurate)
Entry# 221624            Tags   Past Edits
The following incident happened on the last Saturday (13th August) in 12345 Saraighat Express. Dr. Jayanta Chakrabarty (resident of Kolkata) and her wife Mrs. Subrota Chakrabarty took a ride on this train on the day in 1AC from Howrah to go up to NCB . After having dinner, they tried to take a nap. But just after sometime, the lady started to feel itch on her skin. Mr. Chakrabarty asked her to have patience suggesting allergy. But this problem increased with time. So they, switched on the light and became astonished to discover a huge army of bugs on the bed!
Instantly, he called the TTE and informed him about this. But neither the TTE nor the attendant could solve this. Dr.
...
more...
Chakrabarty requested the TTE to spray some insecticide when the train reaches MLDT. But the TTE could not do this either. Rather he managed 2 beds for the couple in AC after MLDT. The TTE gave him the contact number of ER officials; though they too were unable to suggest something.
Later the Doctor posted a complaint in the complaint book which was given by the TTE (572454/14/08).
Source: Anandabazar (Kolkata edition)

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949 views
Aug 17 2011 (10:24)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 221624-7            Tags   Past Edits
GIFT BY IR

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752 views
Aug 16 2011 (22:46)  
 

IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Entry# 221555            Tags   Past Edits
ऐ मेरे वतन के लोगो ---ज़रा आँख में भर लो पानी ----गुलाम है हम अब भी ----- बेकार गयी शहीदों की कुर्बानी -------------------------------कल आजादी का ढोंग रचाया ---आज गुलामी का चेहरा सामने आया ---- जिसने लाल किले पर तिरंगा फहराया -- देश को आजाद बताया --- उसी के फरमान ने लोकतंत्र की ह्त्या का तांडव रचाया -- खामोश और मौन रह कर अपनी भूख की तड़प को सह कर ,निर्दयी सरकार को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनाने वाले सत्याग्रहियों पर अंगरेजी हुकूमत की बर्बरता और न्रशंसता का वो काला इतिहास दोहराया है -जिसने सम्पूर्ण देश को चकित -भ्रमित और भयभीत कर डाला है --जिस गांधी ने सत्याग्रह और अनशन की ताकत के बल पर इस देश को आजाद कराया -- अंग्रेजो का हजूम जिस आन्दोलन को नहीं रोक पाया - जिस देश ने अहिंसा के बूते पर लड़ने का इतिहास बनाया -- उसे रोंदने के लिए फिर एक बार इसी देश...
more...
में उसी गांधी के नाम पर सरकार चलाने वाले दल बनाने वाले -वोट मांगने वाले हिंसक प्रवृत्ति के नराधम लोग एक आवाज को दबाने की , होंसलो को मिटाने की कोशिश करते नजर आये --देश वासियों का निवाला छीन कर - बच्चो को भूख की तड़प देकर मजलूमों को नोच मोच कर करो का बोझ लादकर खजाना भरने वाले और भ्रष्टाचार की बदोलत देश को लुटने वाले कम्जर्फो पर नकेल डालने की बजायुन्होने सारी मर्यादाये टाक पर रेख दी

  
739 views
Aug 16 2011 (22:49)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 221555-2            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 221555-०
भ्रस्ताचारी ही भ्रष्टाचारी का साथ दे सकते है ---और देते रहेगे ---तभी तो देश का लाखो करोडो रुपया स्विस बैंक में जमा हो गया -- तभी तो केवल दो साल में इस देश में दो लाख हजार करोड़ रुपयों का घोटाला का राज खुल गया - तभी इस देश में तुवर की दाल का भाव आसमान छू गया और भ्रस्त मद मस्त सत्ताधीशो का आशियाना अआस्मान को भी छोटा कर गया --

  
741 views
Aug 16 2011 (22:54)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 221555-3            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 221555-2
कैसे दुष्ट है जो अपने गिरबान में नहीं झाँक रहे है -जो हर दिन अपना जन्म दिन मनाते है दौलत लुटाते है -दौलत में नहाते है --दौलत बटोरने में दिन गुजरते है और रातो को मद मस्त होकर देश की आजादी को कलंकित करते है --हम अपने आप को आजाद मानते है मगर दुष्टता की अति करने वालो को अपने वोट से अपना आका बनाते है --हम उन पर क्या लानत भेजे --हम तो अपने आप पर शर्माते है --जो पुरे देश में चाँद इमानदार लोग नहीं धुंध पाते है ---मनमोहन जैसे इमानदार ही jab ऐसे दलदल में धंसकर बेईमान और बर्बर बन जाते है तो सियासत की इस नंगाई को देख कर ही हम
...
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सहम जाते है ---
  
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1197 views
Aug 15 2011 (14:42)  
 

Nitish kumar*^~   13642 blog posts   1208 correct pred (69% accurate)
Entry# 220591            Tags   Past Edits
हर इन्देपेंदेंस डे के दिन एक नयी ट्रेन की सुरुआत करनी चाहिए गोवत को यह एक मेरा सुझाव है....जय हिंद !

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Aug 15 2011 (17:15)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220591-5            Tags   Past Edits
nitइसh - और भी कई सुझाव है मेरे पास -- प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस के दिन हम अपनी बाईक -कार - को विराम देवे -ताकि कम से कम एक दिन तो बेशकीमती पेट्रोल की अब्चत हो -- पर्यावरण एक दिन के लिए ही सही - साफ़ रहेगा --- इस दिन हम किसी अनपढ़ को पढ़ाने का जिम्मा लेवे --- इसी दिन हम कही अपने आस पास के ही क्षेत्र में पोधे लगाने का काम कर ले और उसकी सुरक्षा की व्यवस्था कर लेवे - ऐसे एक नहीं अनेको उपाय है -- जो हमारे द्वारा किया जा सकता है ---ट्रेन चलाने से कुछ नहीं होगा --- हमारी व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं है की हम ट्रेन्स ज्यादा चला सके -- जब तक अंग्रेजो के जमाने में डाले गए पुल और पुलिया और पटरियों का नवीनीकरण नहीं होगा तब तक हम्बुल्लेट ट्रेन का सिर्फ सपना ही देख सकते है -- तेज गति की ट्रेन्स -...
more...
नई नई ट्रेन --दुरोंतो -राजधानी आदि नई नई चलाने का मांग करने का जब तक कोई औचित्य नहीं है जब तक की हमारी रेलवे अपने यात्रिओ की सुरक्षा की व्यवस्था को चाक चोबंद ना कर लेती -----

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2216 views
Aug 15 2011 (12:03)   12437/Secunderabad - Hazrat Nizamuddin Rajdhani Express
 

Guest: 84a4e2b7   show all posts
Entry# 220479            Tags   Past Edits
please start it from tirupati. it will be helpful to the vips who are directly go to delhi sir. i know it will be huge success

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Aug 15 2011 (16:17)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220479-9            Tags   Past Edits
@venkat వెంకట్**: Re# 220479-7
THNKS FOR THIS NEWS

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Aug 15 2011 (10:33)  
 

Guest: 455dcf43   show all posts
Entry# 220396            Tags   Past Edits
(1) Is there any cloak room for luggage available at Amritsar Jn station 24 hours all days? (2) Is there any cloak room for luggage available at NDLS station 24 hours all days? (3) What about getting a non-ac/ac retiring room for 3 passengers at Amritsar Jn? (4) What about getting a non-ac/ac retiring room for 3 passengers at NZM?

  
1622 views
Aug 15 2011 (10:39)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220396-1            Tags   Past Edits
YES ur all query

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Aug 15 2011 (00:08)  
 

Guest: 3fbe7773   show all posts
Entry# 220278            Tags   Past Edits
Swathantrya Dhina subhakankshalu to all.

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4444 views
Aug 15 2011 (09:13)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220278-69            Tags   Past Edits
@KALINGAS**: Re# 220278-68
Today (8:53AM)
Re# 220208-55 Reply Add Bookmark Remove Post
Author: IM UR LOVER 25 blog posts 6 correct pred (100% accurate) chat
@...
more...
class="reversehighlighted">IM UR LOVER: Re# 220208-52
प्यारे दोस्तो, एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत 64 वर्षो का सफर तय कर चुका है। यह हम सभी के लिए गौरव और खुशी का क्षण है। साथ ही हमें एक राष्ट्र के रूप में अपने विचारों को पुनर्जीवित करने, अपनी प्रगति की समीक्षा करने और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए नई रणनीतियां बनाने की भी जरूरत है, जो 21वीं सदी के भारत के समक्ष मुंह बाए खड़ी हैं। मेरा मानना है कि ऊर्जा और प्रेरणा से भरे युवा हमारी सबसे बड़ी संपदा हैं।
भारत के पास ऐसे 60 करोड़ से भी अधिक युवा हैं और देश के समक्ष स्थित चुनौतियों का सामना करने, उपलब्ध संसाधनों का उपयुक्त दोहन करने और वर्ष २क्२क् तक आर्थिक रूप से विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वे हमारी सबसे बड़ी उम्मीद हैं। यहां मैं विशेष रूप से दो युवाओं के बारे में बताना चाहूंगा, जो इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण हैं कि प्रेरणा से भरे युवा किस तरह खुद को और समाज को बदल सकते हैं।
मैं कर सकता हूं : दोस्तो, जब मैं भारत का राष्ट्रपति था, तब 28 अगस्त 2006 को मैं आंध्रप्रदेश के आदिवासी विद्यार्थियों के एक समूह से मिला। मैंने उन सभी से एक ही सवाल किया : ‘तुम क्या बनना चाहते हो?’ कई छात्रों ने इस सवाल का अपनी तरह से जवाब दिया, लेकिन नौवीं कक्षा में पढ़ रहे एक दृष्टिबाधित लड़के ने कहा कि ‘मैं भारत का पहला दृष्टिबाधित राष्ट्रपति बनूंगा।’ मुझे उसकी महत्वाकांक्षा अच्छी लगी, क्योंकि अपने लिए छोटे लक्ष्य तय करना एक अपराध है।
मैंने उसे शुभकामनाएं दी। इसके बाद उस लड़के ने कड़ी मेहनत की और 10वीं की परीक्षा में 90 फीसदी अंक पाए। बारहवीं की परीक्षा में उसने और अच्छा प्रदर्शन करते हुए ९६ फीसदी अंक पाने में कामयाबी हासिल की।
उसका अगला लक्ष्य था एमआईटी कैम्ब्रिज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई। उसकी कड़ी मेहनत और लगन के कारण उसे न केवल एमआईटी कैम्ब्रिज में सीट मिली, बल्कि उसकी फीस भी माफ कर दी गई। उसकी प्रतिभा को देखते हुए जीई (जनरल इलेक्ट्रिक) के वालंटियर्स ने उसकी अमेरिका यात्रा के लिए आर्थिक मदद की।
जब जीई ने उसका ग्रेजुएशन पूरा होने पर उसके समक्ष जॉब का प्रस्ताव रखा, तो उसने जवाब दिया कि यदि वह भारत का राष्ट्रपति नहीं बन पाया तो जरूर इस पर विचार करेगा। इस लड़के का आत्मविश्वास अद्भुत है। संकल्प और दृढ़ता एक दृष्टिबाधित लड़के के जीवन में भी व्यापक बदलाव ला सकते हैं।
सपनों से सोच, सोच से हकीकत : 7 जनवरी २क्११ को मैं मीनाक्षी मिशन हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी कैंसर यूनिट का शुभारंभ करने मदुरै गया था। कार्यक्रम के दौरान अचानक मैंने देखा कि एक व्यक्ति मेरी तरफ बढ़ा चला आ रहा है। मुझे उसकी शक्ल जानी-पहचानी लगी।
करीब आने पर मैंने देखा कि वह मेरा पूर्व ड्राइवर था। 1982 से 1992 के दौरान जब मैं हैदराबाद में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब का डायरेक्टर था, तब वह मेरे लिए काम किया करता था। उसका नाम था वी काथिरेसन। उन दस सालों के दौरान मैंने गौर किया था कि जब वह कार में मेरी प्रतीक्षा किया करता था तो वह उस समय का उपयोग कुछ न कुछ पढ़ने में करता था।

  
4465 views
Aug 15 2011 (09:19)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220278-71            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 220278-70
आजादी आजादी की 65वीं सालगिरह पर भारत सिर्फ अपनी दुविधाओं से नहीं जूझ रहा बल्कि दुनिया के हर देश की अर्थव्यवस्था एक दूसरे से गुंथी हुई है। यह अनिश्चितता का काल है। यूरोप और अमेरिका मंदी और दंगों का सामना कर रहे हैं। रूस घर में ही पनपे फासीवाद से जूझ रहा है और चीन अपनी अंतहीन आकांक्षाओं की गिरफ्त में है। ऐसे बदलावों के दौरान हमें यह सोचना जरूरी है कि भविष्य के भारत की तस्वीर कैसी होगी।
हम समाजवाद और पूंजीवाद के बीच झूलते रहते
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हैं। लेकिन दोनों के बीच एक स्वाभाविक तकरार है। इसलिए यह सवाल पैदा होता है कि दीर्घकालीन विकास के लिए किस तरह के मॉडल की जरूरत है। भारत की वास्तविकताएं बाकी देशों से अलग हैं। भारी आबादी और खंडित पहचानों वाले इस देश में आर्थिक असमानताएं है। इस समय दुनिया में कोई भी मॉडल ऐसा नहीं है जो भारत की दिक्कतें पूरी तरह सुलझा दे। इसलिए हमें भारतीय मॉडल का विकास करना होगा। 64 साल के स्वतंत्र लोकतंत्र के बाद आज हमारी जरूरत हिंदुस्तानी विचारों से बने हिंदुस्तानी मॉडल की है।
आजादी के बाद देश में विमर्श और बहस के मुद्दे लगातार बदलते और बढ़ते रहे हैं। बहसों का ना सिर्फ दायरा बढ़ा है, बल्कि इनकी संख्या भी बढ़ी है। लेकिन बहसों की बहुलता से यह नहीं कहा जा सकता कि हम ऐसे समाज में तब्दील हो गए हैं जो बहस के जरिए अपनी समस्याओं को सुलझा ले।
बहस की तादाद बढऩा कुछ लोगों की बुद्धिमानी या संवाद की शक्ति का संकेत देती हैं। सिविल सोसाइटी और सरकार अंतहीन बहस कर सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन बहसों से समस्याएं सुलझ जाएंगी। किसी भी समाज में बहस और संघर्षों का स्तर बदलता रहता है। समाज में पैदा चिंता, सरकार और देश के नेतृत्व में इसके विश्वास के स्तर से इनमें उतार-चढ़ाव आते हैं। लेकिन वास्तविक बदलावों के लिए बहसों के साथ सही और सटीक काम किए जाने की जरूरत है।
पूरी दुनिया में इस समय मध्य वर्ग भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अक्षमता और सामाजिक अन्याय से दुखी है और इससे लड़ रहा है। मि और मध्य पूर्व में मध्य वर्ग की सक्रियता ने वहां की सरकारों और तानाशाहों की सत्ता छीन ली।
भारत में भी सिविल सोसाइटी को मध्य वर्ग के इसी गुस्से से समर्थन मिल रहा है। मध्य वर्ग बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और सामाजिक सेवाओं की गैरमौजूदगी और इंसाफ दिलाने में नाकाम हो रही अदालतों की वजह से गुस्से से उबल रहा है। देश में यह वर्ग सबसे मुखर है। लेकिन उसकी यह मुखरता लोकतंत्र में भागीदार होगी, यह जरूरी नहीं क्योंकि मध्य वर्ग कभी लोकतंत्र में शामिल नहीं होता, वह कम ही वोट करता है। एक लोकतांत्रिक देश में मध्यवर्ग की अगुवाई में होने वाले किसी भी बदलाव की यह एक बड़ी खामी है।

  
4468 views
Aug 15 2011 (09:20)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220278-72            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 220278-71
लोकतंत्र के आयामों को आम आदमी ही आकार देता है। आम लोगों के अखबार बिजनेस भास्कर के हर पाठक को यह पता है कि देश में परिवर्तन की जो मौजूदा लहर दिख रही है वह इतनी मजबूत नहीं है कि कोई वास्तविक सुधार हो सके। क्या इसका मतलब यह है कि ग्लोबल अनिश्चितता के इस दौर में हमारे यहां कोई परिवर्तन नहीं होगा? क्या इसका मतलब यह है कि हम कभी एक सफल देश के तौर पर दुनिया के सामने हम नहीं आ सकेंगे? एक चीनी विशेषज्ञ ने मुझसे कहा था- 'जब हम भारत की ओर देखते हैं तो कई संघर्ष दिखाई पड़ते हैं। देश के आकार और लोकतंत्र के कारण दिक्कतें और भी जटिल
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हो जाती हैं।
हम भारत को अपने लिए चुनौती नहीं मानते क्योंकि चीन को भारत की मुश्किलों का पता है। हम भारत से सीखते हैं लेकिन अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए हम उसके तरीके नहीं अपनाते। चीनियों को समस्याएं सुलझाने के अपने नजरिये पर पूरा भरोसा है।' चीनी अपने तरीके में इतने सफल हैं कि पूरी दुनिया अभी तक यह समझ नहीं पाई कि उसे क्या नाम दें। चीन ने अपनी ज्यादातर समस्याएं सुलझा ली हैं, लेकिन भारत में बाल मृत्यु दर, साक्षरता, बेरोजगारी, शहरीकरण और बढ़ती असमानता जैसी बुनियादी समस्याएं अब भी बरकरार हैं।
भारत अतिवाद के बीच झूल रहा है। समाजवाद से कल्याणवाद और फिर पूंजीवाद तक। लेकिन हम तार्किक और न्यायपूर्ण सुसंगत विकास के अपने घोषित लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई अपना तरीका विकसित नहीं कर पाए हैं। इस दुविधा को मिटाने और यहां तक कि इसे पहचान कर इस पर काम शुरू करने तक में हम नाकाम रहे हैं। हम बाहर के किसी बने-बनाए और खामियों से भरे आर्थिक मॉडल को अपनाने का आसान तरीका अपनाते हैं।
भारत में सिर्फ अर्थव्यवस्था पर आधारित कोई मॉडल सफल नहीं हो सकता है। सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक बुनियाद के बिना किसी भी मॉडल का असफल होना तय है। हम अपनी समस्याओं को इसलिए नहीं समझ पाते क्योंकि इसे समझने वाले सभी अर्थशास्त्री हैं। अर्थशास्त्र गणित नहीं है। हालांकि अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अर्थशास्त्रीयों से ज्यादा गणितज्ञों को ही मिला है।
अर्थशास्त्री और अर्थशास्त्र भगवान की तरह हमारी राजनीति, हमारे समाज और हमारी ब्यूरोक्रेसी पर हावी है। यह एक ऐसा भगवान है जिसकी बात सर्वोच्च है और सबपर लागू हो रही है। मगर सिर्फ पश्चिमी संस्कृति में एक ही भगवान सर्वोच्च होता है। भारत में तो लाखों भगवानों को मानने की परंपरा रही है। यहां कोई एक भगवान सर्वोच्च नहीं है।
यह आलोचना भी वाजिब है कि मीडिया भी एक और भगवान बन गया है। यह नया भगवान कइयों की तकदीर तय कर रहा है और हर किसी के बारे में फैसला लिये बैठा है। मीडिया का यह नजरिया आम लोगों की बुद्धिमता का अपमान है।
संपादक यह भूल गए हैं जनता जब किसी मुद्दे पर एकमत होती है तो वह मत किसी भी बुद्धिमान आदमी के मत से ज्यादा भारी होता है। हमारे यहां बुद्धिमान लोगों की भरमार है। यह सब जानते हैं। लेकिन उनके पास नए विचार नहीं हैं। दूसरा सच यह है कि यह बुद्धिमान लोग अंग्रेजी में बहस करते हैं, बात करते हैं और अंग्रेजी ही समझते हैं। इससे वे भारत की वास्तविकताओं से कट जाते हैं।
हिंदुस्तान कहीं अपना रास्ता भटक रहा है और खो रहा है। जब तक हमारे मौलिक विचार इतने धारदार न हों कि उन्हें सही मायने में रचनात्मक तौर पर लागू किया जा सके तब तक एक राष्ट्र के तौर पर अपनी संभावनाओं के दोहन में हम पीछे रहेंगे। पूरी दुनिया में छाई मंदी का असर हम पर भी पड़ेगा। लेकिन भारत के लिए मौके और चुनौतियां बाकी दुनिया से बड़ी होंगी। अगर अगले एक दशक में हम अपनी समस्याओं का मौलिक और भारतीय हल नहीं ढूंढ पाए तो फिर हम अपनी पिछले पांच साल की गति कभी दोबारा हासिल नहीं कर पाएंगे।
भारत की तरक्की को प्रतिस्पद्र्धा की राजनीति और भ्रमित करने वाले मॉडलों में डूबने नहीं दिया जा सकता। स्वतंत्र विचारों वाले नेताओं को आगे आने की जरूरत है। आइए हम इन नए विचारों के साथ आजादी की सालगिरह का जश्न मनाएं। ऐसा ही एक विचार है 'वित्तीय समायोजन से कैसे सामाजिक समायोजन कैसे हासिल किया जाए।
(क. यतीश राजावत - लेखक दैनिक भास्कर समूह के प्रबंध संपादक हैं, editor@businessbhaskar.net)

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Aug 14 2011 (21:40)  
 

Cheetah*^~   15923 blog posts   54755 correct pred (63% accurate)
Entry# 220208            Tags   Past Edits
@All My Indian Brothors, Sisters(All Member, Admins, Guest & Respected Moderator Sir..
************************************************** ********************
Aao desh ka samman kare, ,
shahido ki shahadat yaad kare, ,
ek baar fir se rashtra ki kamaan..
Hum
...
more...
Hindustani apne haath dhare.., ,
Aao.. Swantantra diwas kaa maan kare, ,
Happy Independence Day In Advance.

41 posts - Sun Aug 14, 2011

  
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Aug 14 2011 (23:26)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220208-47            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 220208-46
और अंत में -- आपका यह lover जा रहा है इस गीत के कुछ बोलो को देकर -हम तो जाते अपने गाम - सबको राम राम राम राम सबको राम राम राम --

  
1218 views
Aug 14 2011 (23:27)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220208-48            Tags   Past Edits
@Happy Independence Day 2 All**: Re# 220208-45
shukriya ajhar bhai jaan

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Aug 15 2011 (08:47)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220208-52            Tags   Past Edits
@guest: Re# 220208-51
मनमोहन सिंह, नेहरू और इंदिरा के बाद सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहने का गौरव पहले ही हासिल कर चुके हैं। राष्ट्रीय अखंडता का प्रतीक रहे लाल किले पर देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने सबसे ज्‍यादा 17 बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इंदिरा गांधी ने देश की प्रधानमंत्री के नाते 16 बार तिरंगा फहराया।

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Aug 15 2011 (08:53)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220208-55            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 220208-52
प्यारे दोस्तो, एक स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत 64 वर्षो का सफर तय कर चुका है। यह हम सभी के लिए गौरव और खुशी का क्षण है। साथ ही हमें एक राष्ट्र के रूप में अपने विचारों को पुनर्जीवित करने, अपनी प्रगति की समीक्षा करने और उन चुनौतियों का सामना करने के लिए नई रणनीतियां बनाने की भी जरूरत है, जो 21वीं सदी के भारत के समक्ष मुंह बाए खड़ी हैं। मेरा मानना है कि ऊर्जा और प्रेरणा से भरे युवा हमारी सबसे बड़ी संपदा हैं।
भारत
...
more...
के पास ऐसे 60 करोड़ से भी अधिक युवा हैं और देश के समक्ष स्थित चुनौतियों का सामना करने, उपलब्ध संसाधनों का उपयुक्त दोहन करने और वर्ष २क्२क् तक आर्थिक रूप से विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए वे हमारी सबसे बड़ी उम्मीद हैं। यहां मैं विशेष रूप से दो युवाओं के बारे में बताना चाहूंगा, जो इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण हैं कि प्रेरणा से भरे युवा किस तरह खुद को और समाज को बदल सकते हैं।
मैं कर सकता हूं : दोस्तो, जब मैं भारत का राष्ट्रपति था, तब 28 अगस्त 2006 को मैं आंध्रप्रदेश के आदिवासी विद्यार्थियों के एक समूह से मिला। मैंने उन सभी से एक ही सवाल किया : ‘तुम क्या बनना चाहते हो?’ कई छात्रों ने इस सवाल का अपनी तरह से जवाब दिया, लेकिन नौवीं कक्षा में पढ़ रहे एक दृष्टिबाधित लड़के ने कहा कि ‘मैं भारत का पहला दृष्टिबाधित राष्ट्रपति बनूंगा।’ मुझे उसकी महत्वाकांक्षा अच्छी लगी, क्योंकि अपने लिए छोटे लक्ष्य तय करना एक अपराध है।
मैंने उसे शुभकामनाएं दी। इसके बाद उस लड़के ने कड़ी मेहनत की और 10वीं की परीक्षा में 90 फीसदी अंक पाए। बारहवीं की परीक्षा में उसने और अच्छा प्रदर्शन करते हुए ९६ फीसदी अंक पाने में कामयाबी हासिल की।
उसका अगला लक्ष्य था एमआईटी कैम्ब्रिज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई। उसकी कड़ी मेहनत और लगन के कारण उसे न केवल एमआईटी कैम्ब्रिज में सीट मिली, बल्कि उसकी फीस भी माफ कर दी गई। उसकी प्रतिभा को देखते हुए जीई (जनरल इलेक्ट्रिक) के वालंटियर्स ने उसकी अमेरिका यात्रा के लिए आर्थिक मदद की।
जब जीई ने उसका ग्रेजुएशन पूरा होने पर उसके समक्ष जॉब का प्रस्ताव रखा, तो उसने जवाब दिया कि यदि वह भारत का राष्ट्रपति नहीं बन पाया तो जरूर इस पर विचार करेगा। इस लड़के का आत्मविश्वास अद्भुत है। संकल्प और दृढ़ता एक दृष्टिबाधित लड़के के जीवन में भी व्यापक बदलाव ला सकते हैं।
सपनों से सोच, सोच से हकीकत : 7 जनवरी २क्११ को मैं मीनाक्षी मिशन हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी कैंसर यूनिट का शुभारंभ करने मदुरै गया था। कार्यक्रम के दौरान अचानक मैंने देखा कि एक व्यक्ति मेरी तरफ बढ़ा चला आ रहा है। मुझे उसकी शक्ल जानी-पहचानी लगी।
करीब आने पर मैंने देखा कि वह मेरा पूर्व ड्राइवर था। 1982 से 1992 के दौरान जब मैं हैदराबाद में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैब का डायरेक्टर था, तब वह मेरे लिए काम किया करता था। उसका नाम था वी काथिरेसन। उन दस सालों के दौरान मैंने गौर किया था कि जब वह कार में मेरी प्रतीक्षा किया करता था तो वह उस समय का उपयोग कुछ न कुछ पढ़ने में करता था।

  
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Aug 15 2011 (08:53)
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Re# 220208-56            Tags   Past Edits
@IM UR LOVER: Re# 220208-55
मैंने उससे पूछा तुम फुर्सत के क्षणों में कुछ न कुछ पढ़ते क्यों रहते हो? उसने जवाब दिया कि उसके बच्चे उससे बहुत सवाल पूछते हैं। इसलिए उसने पढ़ना शुरू कर दिया है, ताकि उनके सवालों का कुछ तो जवाब दे पाए। पढ़ाई के प्रति उसकी इस लगन ने मुझे प्रभावित किया।
मैंने उससे कहा कि वह पत्राचार पाठ्यक्रम के जरिये फिर से पढ़ाई की शुरुआत करे और बारहवीं पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए तैयारी करे। उसने इसे एक चुनौती की तरह लिया। बीए
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पास करने के बाद उसने इतिहास में एमए किया। इसके बाद उसने राजनीति विज्ञान में एमए के साथ ही बीएड व एमएड भी किया।
फिर उसने डॉक्टोरल स्टडीज के लिए पंजीयन कराया और वर्ष 2001 में उसने पीएचडी कर ली। तमिलनाडु सरकार के शिक्षा विभाग में उसने कई वर्षो तक सेवाएं दी। वर्ष 2010 में वह मदुरै के निकट मेल्लुर में शासकीय कला महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक बन गया।
हाल ही में, लगभग दस दिन पहले कोविलपट्टी तमिलनाडु के यूपीएमएस स्कूल में मेरी फिर प्रोफेसर काथिरेसन से भेंट हुई। मैंने सभी से उनका परिचय कराया और बताया कि किस तरह वे दो दशक की कड़ी मेहनत के बाद पीएचडी ग्रेजुएट और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बन पाए हैं। उनकी प्रेरक कहानी ने युवा श्रोताओं को बहुत प्रभावित किया।
निष्कर्ष : ‘मैं क्या कर सकता हूं’ : दोस्तो, हमारा देश आजादी के 65वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस मौके पर मैं आपसे एक बहुत अहम बिंदु पर बात करना चाहता हूं, जो वर्ष 2020 तक आर्थिक रूप से विकसित देश के निर्माण के हमारे लक्ष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
यकीनन, हम सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं, जिसके कारण हमारा देश आठ फीसदी की विकास दर के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन हमारे समक्ष कई गंभीर चुनौतियां भी हैं।
ये हैं भ्रष्टाचार और नैतिक पतन, पर्यावरण को क्षति और समाज में बढ़ती संवेदनहीनता। कुछ बुराइयां हैं, जिन्हें युवावस्था की भलाइयों से परास्त किया जा सकता है। ऐसी बुराइयां आखिर आती कहां से हैं? तमाम बुराइयों की जड़ है अंतहीन लोभ।
भ्रष्टाचार मुक्त और नैतिक समाज और स्वच्छ पर्यावरण के लिए ‘मैं क्या ले सकता हूं’ के स्थान पर ‘मैं क्या दे सकता हूं’ की भावना आनी चाहिए। देश के नागरिकों और खास तौर पर युवाओं को खुद से यह सवाल बार-बार पूछना चाहिए : ‘मैं अपने देश को क्या दे सकता हूं।’
क्या मैं पर्यावरण के लिए कुछ कर सकता हूं? क्या मैं इस धरती और इस पर रहने वाले मनुष्यों की रक्षा पर्यावरण की क्षति से होने वाली आपदाओं से कर सकता हूं? अरबों लोगों के लिए अरबों वृक्ष, इस बात को ध्यान में रखते हुए आज हम यह तय कर सकते हैं कि हम सभी पांच-पांच पौधे रोपेंगे और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे।
या क्या मैं कुछ संवेदनाओं का परिचय दे सकता हूं? क्या मैं उन लोगों की सेवा कर सकता हूं, जो कष्ट में हैं और उनकी मदद करने वाला कोई नहीं है? हम किसी अस्पताल जाकर उन मरीजों को थोड़ी-सी खुशी दे सकते हैं, जिनसे मिलने कोई नहीं आता। आप फूल दे सकते हैं, फल दे सकते हैं, उनके मन में कुछ उत्साह जगा सकते हैं।
या फिर क्या मैं मुस्कराहटें बांट सकता हूं? क्या मैं अपने देशवासियों के लिए कुछ ऐसा कर सकता हूं कि उनके जीवन में मुस्कराहटें खिल जाएं? आज के दिन हर युवा यह शपथ ले सकता है कि मैं अपनी मां को खुशियां दूंगा। मां खुश होंगी तो घर खुश होगी, घर खुश होगा तो समाज खुश होगा और समाज खुश होगा तो पूरा देश खुश होगा।
या क्या मैं गांवों की स्थिति सुधारने के लिए ही कुछ प्रयास कर सकता हूं? क्या मैं प्रोवाइडिंग अर्बन एमेनेटीज इन रूरल एरियाज (पीयूआरए) कार्यक्रम के जरिये अपने गांव और देशभर के गांवों की तस्वीर बदल सकता हूं?
दोस्तो, मैं चाहूंगा कि यह लेख पढ़ने वाला हर व्यक्ति ‘मैं क्या दे सकता हूं’ अभियान (www.whatcanigive.info) का एक हिस्सा बने। मैंने और मेरी युवा टीम ने अभियान के लिए नौ चेप्टर तय किए हैं, जो कई महत्वपूर्ण सामाजिक, नैतिक और पर्यावरणगत प्रश्नों का सामना करते हैं। इस अभियान के केंद्र में हैं देश के युवा।
‘मैं क्या दे सकता हूं’ अभियान का लक्ष्य है नैतिक रूप से संपन्न युवाओं की पीढ़ी तैयार करना। हम युवाओं को बदल पाए तो देश को भी बदल पाएंगे। पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।
लेने के बजाय देने का भाव
भ्रष्टाचार मुक्त समाज के लिए ‘मैं क्या ले सकता हूं’ के स्थान पर ‘मैं क्या दे सकता हूं’ की भावना आनी चाहिए। देश के नागरिकों और खास तौर पर युवाओं को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए : ‘मैं देश को क्या दे सकता हूं।’
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
लेखक
भारत के पूर्व राष्ट्रपति हैं।

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Aug 14 2011 (21:34)  
 

12121 Ashish tiwari   1085 blog posts   2875 correct pred (59% accurate)
Entry# 220202            Tags   Past Edits
jabalpur se 17/09/2011 ko 11 jyoterling ki train ja rahi haiisme ltc hogi kya

  
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Aug 14 2011 (21:36)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220202-1            Tags   Past Edits
bilkul hogi - aap iske liye kisee E_TICKIT agent se contact kare

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Aug 14 2011 (21:54)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220202-5            Tags   Past Edits
yes aap bhee bilkul kar sakte hai
  
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Aug 14 2011 (21:16)   15012/Chandigarh - Lucknow Jn. Express
 

Guest: 256173c0   show all posts
Entry# 220198            Tags   Past Edits
does this train stops at chandausi??

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Aug 14 2011 (21:20)
IM UR LOVER   81 blog posts   33 correct pred (56% accurate)
Re# 220198-4            Tags   Past Edits
yes sir
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