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Sat May 18, 2013 14:19:38 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsMembersLoginFeedback
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News Entry# 73410  
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इंदौर। रेल बजट में मिली इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस (बेंगलुरू) को नए-नवेले एलएचबी (लिंक हॉफमन बुश) रैक से चलाया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने रेल कोच फैक्टरी कपूरथला को रैक तैयार करने के आदेश दे दिए हैं। नई ट्रेन 15 कोच से चलाई जाएगी।
सुरक्षा, सुविधा और सुंदरता के दृष्टिकोण से जर्मन टेक्नोलॉजी आधारित एलएचबी कोच बेजोड़ होते हैं। अभी तक शताब्दी, राजधानी और दुरंतो एक्सप्रेस के लिए फस्र्ट, सेकंड और थर्ड एसी श्रेणी के एलएचबी कोच डिजाइन किए जा रहे थे। अब सप्ताह में एक दिन चलने वाली इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस के लिए रेलवे बोर्ड ने एसी श्रेणी के अलावा स्लीपर और सामान्य श्रेणी के एलएचबी कोच तैयार करने के आदेश रेल कोच फैक्टरी को दिए हैं। एसी डबल डेकर ट्रेनों के कोच भी एलएचबी श्रेणी के हैं। इंदौर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन भी एलएचबी रैक से चलती है, हालांकि इसमें सिर्फ एसी कोच हैं,
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जबकि यशवंतपुर एक्सप्रेस में सभी श्रेणियों के कोच एलएचबी श्रेणी के रहेंगे।
इसलिए चुनी यशवंतपुर एक्सप्रेस
एलएचबी कोच तेज गति से चलाए जा सकते हैं। इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस देवास, मक्सी, भोपाल, इटारसी, नारखेड़, अमरावती, अकोला और काचेगुड़ा होकर चलेगी, जो काफी लंबा रास्ता है। दूरी जल्द तय करने और यात्रियों के लिए लिहाज से इसे उपयोगी बनाने के लिए ट्रेन को हाईस्पीड रैक उपलब्ध करवाना जरूरी है।
ऑर्डर दिया है, नवंबर के बाद मिलेगा रैक
इंदौर-यशवंतपुर एक्सप्रेस नए एलएचबी रैक से चलाई जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इसके ऑर्डर रेल कोच फैक्टरी को दे दिए हैं। इसका रैक जल्दी नहीं मिल पाएगा क्योंकि फिलहाल कोच निर्माण का काम कुछ धीमा है। फिर भी कोशिश है कि नवंबर के आसपास नया रैक दे दिया जाए।
- रविमोहन शर्मा, डायरेक्टर (कोचिंग), रेलवे बोर्ड
दुर्घटना में एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते ये कोच
- दुर्घटना होने पर एलएचबी कोच सामान्य कोच की तरह एक-दूसरे पर नहीं चढ़ते, बल्कि पलट जाते हैं। इस तरह ये वर्तमान कोच से कहीं ज्यादा सुरक्षित होते हैं।
- इनका एयरोडायनामिक शेप आकर्षक होता है।
- डिजाइन बेहतरीन होती है, इसलिए इनमें बैठना या सोना आरामदायक होता है।
- एलएचबी कोच में लोहे या नुकीली धातुओं का इस्तेमाल नहीं होता। इन्हें स्टेनलेस स्टील से बनाया जाता है। इसलिए चोट लगने की संभावना कम होती है।
- इस तरह के कोचों में चलते समय झटके नहीं लगते। कपलिंग सिस्टम उन्नत तकनीक का होता है।
(रेलवे जनसंपर्क विभाग के मुताबिक)
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