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Mon Apr 24, 2017 20:58:21 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Mon Apr 24, 2017 20:58:21 IST
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Trains in the News    Stations in the News   
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Today (09:12)  Railways eyes Rs 10k cr revenue boost via mega ad platform (epaperbeta.timesofindia.com)
News Entry# 300603   Blog Entry# 2248741     
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Posted by: ❤ WAP7 ❤~  1071 news posts
The Indian Railways is drawing up plans to roll out two lakh screens across the country , targeting revenue to the tune of Rs 10,000 crore in the next 10 years from this mega advertising platform.
Major railway stations will soon have giant digital screens to showcase real-time passenger information and also help the national transporter monetise the opportunity through digital advertising. The Rail Display Network (RDN) is seen as a crucial platform for the transporter to raise funds from non-ticketing sources and strengthen the interface with passengers.
Several top global firms such
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as Google are keen to take part in the project and help design the advertising technology .Microsoft and Reliance have also shown interest, sources said.
The screens will also help improve the appearance of station premises as they will replace all the other media currently in place for advertisements and relaying of passenger-related information. “This is expected to be the biggest advertising platform outside television,“ said an official who did not wish to be identified.
To begin with, the plan is to install RDN at around 400 major stations (A category). The ten der is likely to be awarded by May. Eventually , the proposal is to install about two lakh digital display screens (LED pixel screens and LCD screens) at 2,175 ra ilway stations across the country. The display infrastructure created will be utilised for commercial advertising in defined time frames and formats.
Loco pilots to fast on duty for 36 hours
A Left-affiliated train drivers' association has called for a nationwide protest from 8am on Tuesday wherein pilots will fast for 36 hours while operating trains. The All India Loco Running Staff Association has said the protest is a bid to draw the government's attention “to their unsafe ... working conditions... including 15-20 hour shifts“. Another association, Indian Railways Loco Running Men Organisation, said the stir was “politically motivated“. “We support the demands... but driving trains while fasting is putting people's lives at risk,“ IRLRO's Sanjay Pandi said.
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245 views
Today (16:25)
a2z~   544 blog posts
Re# 2248741-1            Tags   Past Edits
Just DRAWING UP plans
and ROLLING OUT 2 lac screens
is NOT GOING TO HELP much
unless IDENTIFYING potential customers
and REACHING OUT to them is accoMplished.
  
Today (09:12)  फिर हो सकता था रेल हादसा, इतनी बड़ी लापरवाही पर कैसे चुप रहता है प्रशासन? (hindi.oneindia.com)
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News Entry# 300602     
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Apr 24 2017 (09:12)
Station Tag: Unnao Junction/ON added by ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~/1469143

Posted by: ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~  427 news posts
उन्नाव। रेल हादसों की खबरें आए दिन मिलती हैं, लापरवाही से होने वाली ये घटनाएं ज्यादातर देखी-सुनी जा रही हैं। ऐसे में प्रशासन जिसे और चुस्त होना चाहिए उसकी लापरवाही का आलम बड़ा विचित्र है। जिन हालातों से रेल पटरियां गुजर रही हैं उससे तो यही लगता है कि प्रशासन खुद ही किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है! भारी भरकम रेलवे स्टाफ अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं है। जवाबदेही के अभाव में रेल अधिकारियों की मनमानी सर चढ़कर बोल रही है। जबकि मंडल स्तरीय अधिकारी का दौरा, निरीक्षण सब होता है, बावजूद इसके भ्रष्ट अधिकारियों के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
बुलाए जा रहे हैं अनट्रेंड श्रमिक, रेलवे कर्मचारी फरमा रहे हैं आराम अब छोटी-छोटी लापरवाही से होने वाली
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खामियों ने बड़ा रूप ले लिया है। इन खामियों को दूर करने के लिए बाहर से श्रमिक आयात करने पड़ रहे हैं। अनट्रेंड श्रमिक किस तरीके से रेल पटरियों को दुरुस्त करेंगे और इसका कितना लाभ रेलवे को मिलेगा ये भविष्य बताएगा लेकिन विभागीय लापरवाही खुलकर सामने आ रही है जो एक जांच का विषय है। किन कारणों से पिंडाल पूरी तरह जाम हो चुके हैं? किन हालातों में पिंडाल ने पटरियों को पूरी तरीके से जकड़ लिया? पटरी निरीक्षक ने मरमरी कंपनी और अजगैन के बीच के सेक्शन में रेल पटरियों को दुरुस्त करने का काम शुरू किया है, जिसमें ठेकेदारों के द्वारा लगाए गए श्रमिक घरेलू गैस का इस्तेमाल कर जाम हो चुके पिंडाल को गरम करके बाहर निकालते हैं। जबकि रेल कर्मचारी पेड़ के नीचे आराम फरमाते देखे गए। जिसकी तकलीफ ठेकेदार के द्वारा लगाए गए श्रमिकों को है। उनका कहना है कि वो हाड़तोड़ मेहनत करके रेल पटरियों को दुरुस्त कर रहे हैं तब जाकर कहीं शाम को ₹250/- मिलते हैं। वहीं रेलवे कर्मचारी चार-पांच घंटे काम करके कई गुना रकम वसूल कर रहे हैं।
6 महीने में होना चाहिए ओवरहॉलिंग जो नहीं हुआ चाबी मैन की ड्यूटी है कि वो रोज चाबी या पिंडाल पर हथौड़े से चोट करें, जिससे पिंडाल अगर बाहर निकल रही हो तो फिर वापस अपनी जगह पहुंच जाए। इसका एक और फायदा मिलता है कि पिंडाल जाम नहीं हो पाता और पटरियां मौसम के हिसाब से घटती और बढ़ती रहती है। रेलवे मानक के मुताबिक 6 महीने में पिंडाल की ग्रीसिंग भी होनी चाहिए जबकि सूत्र बताते हैं कि कई सालों से पिंडाल की ग्रीसिंग या ओवरहॉलिंग नहीं हुई। जिससे पिंडॉल के साथ लोहे की रेल पटरी भी जाम हो गई और मौसम के असर से पटरियों की ये दुर्दशा हो गई है। नतीजा ये होता कि इस लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ता।
अति व्यस्त रेल मार्ग में से एक लखनऊ-कानपुर-दिल्ली मार्ग लखनऊ-कानपुर-दिल्ली को अति व्यस्ततम मार्गों में से एक कहा जाए तो कोई गलत नही होगा। जिस पर शताब्दी जैसी ट्रेनें रोजाना अपनी स्पीड में दौड़ती हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य महत्वपूर्ण गाड़ियां भी उन्नाव स्टेशन पर दस्तक देती हैं। इसके बाद भी पटरियों के रखरखाव के प्रति रेलवे विभाग गंभीर नहीं है। लगभग चार सालों से तैनात उन्नाव में में पटरी निरीक्षक मो. इरशाद के काम पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। उनकी लापरवाही का खामियाजा आज विभाग उठा रहा है और साथ में यात्री भी उठा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 3 किलोमीटर की रेंज में एक चाबी मैन और एक गैंग काम करती है। चाबी मैन अप और डाउन लाइन दोनों तरफ के पिंडाल और चाबी पर पैनी नजर रखता है। पिंडाल पर पड़ते हथोड़े की आवाज अब कहां सुनाई दे रही है। सूत्रों की माने तो 3 सालों से स्थानीय अधिकारी ने पिंडाल की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और ना ही निश्चित अवधि में पिंडाल की ओवरहॉलिंग हुई। ओवरहॉलिंग न होने के चलते पटरियां जाम हो गईं और पटरियों के जाम होने के चलते पटरियां दाएं-बाएं भागती हैं और नतीजा क्या हो सकता है ये आप खुद सोच सकते हैं।
पुराने ढर्रे पर क्यों टिकी है रेल पटरियों की मरम्मत? पुराने अधिकारी के ट्रांसफर के बाद नए अधिकारी ने पट्टियों की देखरेख के प्रति गंभीरता के साथ काम शुरू किया लेकिन चाबी मैन व गैंग के आदमी अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं जबकि ठेकेदार के द्वारा रखे गए अनट्रेंड श्रमिक गैस सिलेंडर के माध्यम से जाम हो चुकी पिंडाल को गर्म करके निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान कई पिंडाल या चाबी टूट भी जाती हैं, आप साफ देख सकते हैं कि किस तरह ठेकेदार के कर्मचारी गैस सिलेंडर से पिंडाल को गर्म कर रहे हैं, वहीं रेलवे के कर्मचारी पेड़ के नीचे आराम फरमा रहे हैं।
  
Today (09:11)  CR books 27 lakh ticketless travel cases in a year, nets Rs 129cr in fine (epaperbeta.timesofindia.com)
News Entry# 300601   Blog Entry# 2248576     
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Posted by: ❤ WAP7 ❤~  1071 news posts
Carrying out an intensive campaign against ticketless travel, the Central Railway (CR) and registered 26.88 lakh cases of violation in 2016-17. It's a 10 % increase in detection over last year, when 24.31lakh cases were registered.
A CR official said, “We recovered Rs 128.63 crore as fines for ticketless travel as against Rs.120.57 crore in 2015-16--registering an increase of 6.68% in earnings.“
Another official said said, “In March this year, 2.27 lakh cases of ticketlessirregular travel and unbooked luggage were detected as against 1.87 lakh cases during the same month last year -a
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21.4% increase. A total of Rs.10.91crore was recovered in March as fine, which was an increase of 19% compared to march 2016.

  
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Today (14:24)
Going to travel in Nzm Durg HumSafar on 26 April^~   32920 blog posts   25747 correct pred (77% accurate)
Re# 2248576-1            Tags   Past Edits
What a initiative...
Itne ticketless jo pakde gae
Jo nhi pakde jaate unko jod de to ye figure 3 times se jyada hoga
Aur sahi division me aesa hota hoga

  
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Today (16:34)
a2z~   544 blog posts
Re# 2248576-2            Tags   Past Edits
* TTEs have modest targets of revenue collection from ticket less travellers, which is easily achieved. A large number of paxs especially on relatively shorter routes travel without ticket in connivance with TTEs which is financially bleeding IR
* Long time back, I read an article about a TTE of WRly, who did his duty sincerely and individually collected fine in crores in a year inspite of being posted in premium train like MUM-ADI Shatabdi.
* If most of the TTEs work like him, IR will be a rich organisation either through
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fine collection or through big boost in regular ticket collection as practice of ticketless travelling shall stop altogether.
  
Today (09:10)  Power to party offices cut off for Metro-III (epaperbeta.timesofindia.com)
News Entry# 300600     
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Work to build the underground Metro from Colaba to Seepz via the airport gained momentum on Sunday as the authorities disconnected cables supplying electricity to political parties and government offices at Nariman Point.
While disconnecting cables ahead of demolition of the party offices, to pave the way for building a Metro-III station opposite Mantralaya, political party workers protested but were calmed down by police. “The state government has allotted the land to Mumbai Metro Rail Corporation (MMRC). The order of shifting has been issued by the state government, hence they have to oblige,“ an MMRCL spokesperson said.
MMRCL
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had reportedly issued a notice to party offices to vacate by April 21, but parties like NCP and other smaller ones did not do so.
BEST PRO clarified there was no disconnection of power by them in the area.
All political party offices and smaller government offices opposite the legislature have already been given premises to relocate.
The Rs 26,000 crore Colaba-Bandra-Airport-Seepz corridor is 32-km long.
  
Today (09:10)  Missing the good for the trees? Metro-III means lesser carbon dioxide despite loss of greenery (epaperbeta.timesofindia.com)
News Entry# 300599   Blog Entry# 2248757     
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Posted by: ❤ WAP7 ❤~  1071 news posts
Mass Transit System To Cut 10,000 Tonnes of Emissions: Study
There's been much heartburn over loss of green cover and the impact on the environment owing to metro rail work in south Mumbai. But one fact that's barely got any mention is that a metro connecting the island city to the suburbs would reduce 6.6 lakh vehicle trips daily, equivalent to a reduction of 6,000 to 10,000 tonnes of carbon dioxide (Co2) emissions a year. Given the amount of Co2 trees absorb, it would be akin to having an additional 2.5 lakh-4.5 lakh trees across Mumbai, according to a study .
The
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33-km Metro III line from Colaba to Seepz via Bandra, being built by Mumbai Metro Rail Corporation and its consultants Delhi Metro Rail Corporation, would also help decrease particulate matter, hydrocarbons, nitrogen oxides and carbon monoxide by an equal amount over the city's atmosphere.
The study, in particular, looked at the impact on the Aarey stretch, where activists have opposed felling of trees for a metro rail yard. The number of trees that would have to be cut down for the yard in, what is one of Mumbai's few green lungs, is about 2,300.
Going by accepted standards, Co2 absorbed per tree is 0.022 tonnes a year. Constructing the yard at Aarey would cause a drop in absorption of Co2 by 56 tonnes a year, not to speak of the impact on ecology of the area. However, reduction in Co2 and other pollutants by presence of the metro would be far greater, the benefits thus far outweighing the disadvantages, suggests the study done by Delhi Metro Rail Corporation.
“Metro will eliminate almost 200 times the amount of Co2 added after cutting of trees at Aarey. And over a period of time, replanted trees will also start contributing in terms of absorbing Co2 to bring a sea change in transport and pollution in Mumbai,“ said an MMRC official. A drop in vehicle trips due to the metro will ease road congestion and increase public transport speed, especially buses which are at present slowing down. Congestion on Mumbai roads is estimated at 430 vehicles a km against 91 in Delhi.
Michael Pereira and Avinash Gupte of Mumbai Underground, a pressure group comprising professionals and citizen activists in the field of transport, are convinced the metro is the ultimate panacea for clogged and polluted traffic system.“The underground railway is the answer to traffic problems and pollution,“ they said. “It will be criminal to delay the metro 6070 years after it was first mooted,“ said Pereira.

  
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Today (16:39)
a2z~   544 blog posts
Re# 2248757-1            Tags   Past Edits
It is time for courts/environment ministry to see the environmental impact of projects in totality and not blocking them by just counting the number of trees cut and grant the clearance to such projects on actual merit.
Even if a project helps decrease the chemical and dust pollution, the clearance should come at express speed but at the same time genuine efforts should be made to plant trees in nearby area to the extent possible so at to make the environment even better than before.
  
Today (09:09)  भुसावल-इटारसी के बीच अवैध वेंडरों ने बांटे रूट और ट्रेन (naidunia.jagran.com)
News Entry# 300598   Blog Entry# 2248582     
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Apr 24 2017 (09:09)
Station Tag: Khandwa Junction/KNW added by ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~/1469143

Apr 24 2017 (09:09)
Station Tag: Itarsi Junction/ET added by ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~/1469143

Apr 24 2017 (09:09)
Station Tag: Bhusaval Junction/BSL added by ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~/1469143

Posted by: ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~  427 news posts
खंडवा। नईदुनिया प्रतिनिधि
गर्मी में ट्रेनों में भीड़ बढ़ने के साथ ही अवैध वेंडर भी बढ़ गए हैं। रेलवे के जानकारों के अनुसार भुसावल से इटारसी के बीच ट्रेनों में 650 से अधिक अवैध वेंडर सक्रिय हैं। इन अवैध हॉकर व वेंडरों ने रूट और ट्रेन बांध रखे हैं। ट्रैक पर रॉन्ग साइड से सामग्री बेचना, ट्रेन आते ही स्टेशन पर सक्रिय होना और चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने के नजारे आम हो गए हैं। यह अवैध वेंडर यात्रियों से मनमानी राशि वसूल रहे हैं, इस दौरान कई बार विवाद की स्थिति भी बन रही है।
खंडवा
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जंक्शन से रोजाना 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। इटारसी से भुसावल के बीच ट्रेनों में सैंकड़ों अवैध वेंडरों ने ट्रेन और रूट बांट लिए हैं। ग्रीष्मकाल में ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ने के साथ ही अवैध वेंडर भी सक्रिय हैं। खंडवा स्टेशन पर वैध वेंडरों की संख्या 100 से भी कम है लेकिन यहां इससे दोगुने अवैध वेंडर सक्रिय नजर आते हैं। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के आते ही वे कोच की खिड़कियों के पास मंडराने लगते हैं। अवैध वेंडरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि रेलवे ट्रैक पर रॉन्ग साइड से भी खाद्य व पेय सामग्री बेचते हैं।
पीछे से करते हैं प्रवेश
अधिकांश अवैध वेंडर ट्रेन आने के पहले स्टेशन परिसर में पीछे से प्रवेश करते हैं। ट्रेन में सवार होकर व ट्रैक पर घूमकर सामग्री बेचते हैं और ट्रेन रवाना होते ही भाग जाते हैं। अवैध वेंडरों द्वारा यात्रियों से विभिन्न सामग्रियों के मनमाने दाम भी वसूले जा रहे हैं। यह ट्रेन में यात्रियों से विवाद भी करते हैं।
ब्रिज के नीचे वेंडरों ने बनाया अड्डा
रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों ने लेटफॉर्म नंबर एक व दो के बीच बने ब्रिज के नीचे अड्डा बना लिया है। यहां सामान रखते हैं लेकिन रेलवे प्रशासन और आरपीएफ को नजर नहीं आता। जीआरपी थाने, कंट्रोल पैनल, प्याऊ और यात्री सहायता केंद्र के बाहर अवैध वेंडर आइस बॉक्स, बाल्टी और पेटी रखते हैं। कंट्रोल पैनल और प्लेटफॉर्म नंबर छह के पास इटारसी और भुसावल से आने वाले अवैध वेंडरों का भी जमावड़ा लगा रहता है।
न अधिकारियों का खौफ, न कार्रवाई का डर
- रविवार दोपहर 1 बजे खंडवा स्टेशन पर पहुंची लश्कर सुपर फास्ट ट्रेन में प्लेटफॉर्म नंबर छह की ओर से अवैध वेंडर ने प्रवेश किया। यहां पानी की बोतल के लिए 25 रुपए मांगे। स्लीपर कोच के कई यात्रियों ने 25 रुपए चुकाकर पानी की बोतलें खरीदीं।
- रविवार दोपहर 1.20 बजे अवैध वेंडर शीलतपेय लेकर प्लेटफॉर्म नंबर तीन पर खड़ी ट्रेन में घुसा। इसी तरह दूसरा वेंडर अपना सामान बेचकर पटरी पार करता हुआ प्लेटफॉर्म नंबर दो पर आया। इन्हें न अधिकारियों का खौफ है न कार्रवाई का डर।
- दोपहर दो बजे कामायनी एक्सप्रेस में अवैध वेंडर ने यात्रियों को सामान बेचा तभी ट्रेन रवाना हो गई, इसके बाद वेंडर ने ट्रेन के साथ दौड़ लगाई और यात्री से रुपए लिए।
- महाराष्ट्र के क्षेत्रों से ट्रेन में वड़ा पाव लेकर अवैध वेंडर सवार होते हैं, खंडवा से खिलौने लेकर कई महिलाएं सवार होती हैं, हरदा से भेल व ककड़ी लेकर नाबालिग वेंडर ट्रेन में चढ़ते हैं। सभी स्टेशनों से शीतल पेय व पानी की बॉटल लेकर भी वेंडर ट्रेनों में अवैध कारोबार करते हैं।
- महाराष्ट्र से मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेनों में अवैध वेंडरों ने रूट बांट लिए हैं। भुसावल से बुरहानपुर, बुरहानपुर से खंडवा, खंडवा से हरदा और हरदा से इटारसी के बीच यह वेंडर अपने-अपने रूट में ट्रेन में सवार होते और उतरते हैं।
चल रही कार्रवाई
प्लेटफॉर्म सहित स्टेशन परिसर में अवैध वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करते है। वाणिज्यिक विभाग और आरपीएफ द्वारा भी कार्रवाई की जा रही है। फुट ओवर ब्रिज और अन्य क्षेत्र में अवैध वेंडर सामान रख रहे है तो उसे जब्त करने के निर्देश दिए जाएंगे।
- आलोक चौरे, स्टेशन प्रबंधक

  
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Today (14:26)
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Re# 2248582-1            Tags   Past Edits
Bhusawal itarsi Bhopal section me sabse jyaada choriya bhi hoti hai.
  
Today (09:08)  Railways eyes Rs 10k cr from 2L LED screens (epaperbeta.timesofindia.com)
News Entry# 300597     
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Posted by: ❤ WAP7 ❤~  1071 news posts
The Indian Railways plans to roll out 2 lakh LED screens at major railway stations with a target of generating Rs 10,000 crore in revenue in the next 10 years, reports Mahendra Singh. Giant digital screens will showcase real-time information for passengers and will help the transporter generate revenue through digital advertising.Top global firms such as Google are keen to take part in the project and help design the advertising technology . Microsoft and Reliance have shown interest to be part of the project, sources said.


  
Today (09:07)  रेल मंत्री प्रभु ने बताया फंडा, न फंड की कमी न हस्तक्षेप... अब काम करके दिखाओ (naidunia.jagran.com)
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News Entry# 300596   Blog Entry# 2248764     
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Apr 24 2017 (09:07)
Station Tag: Raipur Junction/R added by ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~/1469143

Posted by: ये क्या हो रहा है इंडियन रेलवे में~  427 news posts
रायपुर। नया रायपुर में पहली बार 62वां राष्ट्रीय रेल सप्ताह समारोह हुआ, जिसमें पहुंचे रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने शनिवार को 131 कर्मियों को उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से नवाजा। इसमें बिलासपुर जोन के दो अफसर और तीन कर्मचारी शामिल हैं।
रेलवे जोन में सबसे ज्यादा पांच शील्ड दक्षिण मध्य रेलवे व दो मध्य रेलवे को मिले। इस दौरान प्रभु ने आह्वान किया कि न तो फंड की दिक्कत है, न कोई हस्तक्षेप। अब आपको काम करके दिखाना है। हमने आपको शक्ति दे दी है। रेलवे की प्राथमिकता मंत्री या जनप्रतिनिधि नहीं, रेलवे बोर्ड तय करता है।
सत्य
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साईं अस्पताल सभागृह में हुए समारोह में रेलवे बोर्ड समेत देशभर के अफसर-कर्मी शामिल हुए। इनसे प्रभु ने कहा कि अभी तक ट्रैक नहीं केवल ट्रैफिक बढ़ रहा था। हम ट्रैक बढ़ाने की कवायद में जुटे हैं। इससे एक-दो साल कष्ट रहेगा, लेकिन बाद में ट्रेनों की संख्या व उनकी रफ्तार बढ़ाई जा सकेगी।

  
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Today (16:43)
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Re# 2248764-1            Tags   Past Edits
Gestation period is always painful and troublesome.
Unfortunately, the gestation period of Rly projects is not just 9 months, but a much longer period of 4-5 years. Till then patience is required at our end.
Let us hope, the Rly Men of India shall prove their mettle by then.
  
आगरा से हजरत निजामुद्दीन के बीच 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से गतिमान एक्सप्रेस चलाने के बाद रेलवे ने अब दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-गया-हावड़ा रूट पर 200 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने की योजना है। रेलवे ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए रेलवे बोर्ड द्वारा इस रेलखंड को उच्चीकृत करने के लिए 7500 करोड़ रुपये की धनराशि अभी हाल ही में स्वीकृत की गई है। इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद को सौंपी गई है।

पिछले साल ही एनसीआर को देश की सबसे तेज गति
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वाली ट्रेन गतिमान मिली। अब इसके बाद रेलवे ने दिल्ली-हावड़ा रूट पर भी सेमी हाई स्पीड ट्रेन चलाने की तैयारी की है। इसके लिए अब इस रूट को मॉडिफाई किया जाना है। यहां ट्रैक को भी इस लायक बनाया जाएगा, ताकि उसमें 200 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन चल सके। ओवर हेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) भी संबंधित रूट की अपग्रेड होगी। रेलवे की तैयारी है कि पहले चरण में जिन ट्रेनों में एलएचबी कोच है उन्हें 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ाया जाए।
इस रूट पर अभी प्रयागराज एक्सप्रेस, महाबोधि, पूर्वा, पुरुषोत्तम, स्वतंत्रता सेनानी, शिवगंगा आदि ट्रेनें ही है, जिसमें एलएचबी कोच लगे हुए हैं। यहां रेेल कोच फैक्ट्री कपूरथला द्वारा जैसे-जैसे एलएचबी कोच की उपलब्ध कराए जाएंगे, वैसे-वैसे इस रूट पर चलने वाली हर एक ट्रेन को उससे लैस किया जाता रहेगा। रेलवे बोर्ड ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेशन की जिम्मेदारी एनसीआर के इलाहाबाद मंडल को दी है। इसके लिए बोर्ड ने कुल 7500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए है। डीआरएम इलाहाबाद एसके पंकज ने इसकी पुष्टि की है।
‘यह कार्य पूरा होने में दो से तीन साल का वक्त लग सकता है। कार्य पूरा होने के बाद इस रूट पर ट्रेनें 200 किमी प्रतिघंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।’
- एसके पंकज, डीआरएम, इलाहाबाद।
  
अगर आप वादियों की सैर करना चाहते हैं तो तैयार हो जाइए और बुकिंग करा लिजिए। दो स्पेशल ट्रेनों का शेड्यूल और टाइमिंग्स जारी की गई हैं। उत्तर रेलवे अंबाला इस बार कालका-शिमला रेल ट्रैक पर दो स्पेशल लग्जरी ट्रेन चलाने जा रहा है। यह दोनों ट्रेनें डुप्लीकेट शिवालिक एक्सप्रेस के नाम से चलेंगी।
उत्तर रेलवे अंबाला मंडल के डीआरएम दिनेश कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 मई से ट्रेनें ट्रैक पर दौड़ने लगेंगी। पहली डुप्लीकेट शिवालिक ट्रेन सुबह 6.30 बजे और दूसरी शिवालिक इसके एक घंटे बाद चलाई जाएगी। इन दो लग्जरी ट्रेनों के चलने से करीब 500 अतिरिक्त यात्री को टॉयट्रेन से शिमला तक सैर कर सकेंगे।
डीआरएम
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ने बताया कि जिन लोगों की शिवालिक एक्सप्रेस में वेटिंग होगी, उन्हें पहली डुप्लीकेट शिवालिक में कंफर्म सीट मिलेगी। पहली डुप्लीकेट शिवालिक एक्सप्रेस में भी वेटिंग होगी तो दूसरी डुप्लीकेट शिवालिक एक्सप्रेस में पैसेंजर को कंफर्म सीट मिल जाएगी। इस ट्रेन की ऑनलाइन बुकिंग आरक्षण सेंटरों पर भी बुकिंग होगी।
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