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Sat Jun 24, 2017 06:05:56 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Sat Jun 24, 2017 06:05:56 IST
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News Entry# 286854
  
पटना : एक तो बिहार और ऊपर से रेलवे का टीटीई, तो फिर क्या कहने. बिहार में बहारे है जैसे नारों की बहती गंगा में भला कौन है, जो हाथ धाेना नहीं चाहेगा. लिहाजा, यहां से परिचालित होने वाली ट्रेनों में भी रेवले के टीटीई बहार की बहती गंगा में हाथ धोने में कोई कसर नहीं छोड़ते, मगरबहार की बहती बयार में जेब को नोटों की गरमी देने के फेर में एक टीटीई जज साहब के सामने पड़ गया. रिश्वत के लिए हाथ फैलाने के साथ ही जज साहब ने ऐसी नसीहत दी कि बेचारे रेलवे के टीटीई साहब पानी-पानी हो गये.

वाकिया
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है कि पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय भागलपुर से बिहार की राजधानी आने के लिए एक ट्रेन में जेनरल टिकट लेकर एसी थ्री बोगी में बैठ गये. वे यह सोचकर एसी थ्री बोगी में बैठने के लिए आगे बढ़े कि यदि कोई टीटीई मिल गया, तो वे रसीद कटवा लेंगे. यह सोचकर जब वे एसी थ्री बोगी में बैठने गये, तो एक टीटीई मिल गया. उसने जज साहब से कहा कि आप सौ रुपये दे दीजिए और आराम से बैठकर पटना तक चलिए, लेकिन जज साहब ने सौ रुपये की रिश्वत देने के बजाय 150 रुपये की रसीद कटवाना बेहतर समझा.

न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय बताते हैं कि क्या हमेशा अपने अधिकारों को लेकर हल्ला बोलनेवाले हम सभी को कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन नहीं करना चाहिए? अब आपको एक वाक्या सुनाता हूं. मैं ट्रेन से भागलपुर से पटना आ रहा था. मुझे जेनरल टिकट मिला, लेकिन एसी थ्री टीयर बोगी में बैठने के लिए गया. यह सोच कर कि रेलवे की रसीद कटा कर पटना चला जाऊंगा. तुरंत ही टीटीई मिल गया. उन्होंने बताया कि टीटीई ने उनसे कहा कि सौ रुपये दे दीजिए और आराम से बैठ कर पटना तक चलिए, जबकि रसीद 150 रुपये की कटानी पड़ी. यह रेलवे के खाते में गया, जो अंतत: देश के काम आयेगा. अब सोचिए कि हम अपने कर्तव्यों के प्रति कितने ईमानदार हैं?

देश के प्रति करें अपने कर्तव्यों का निर्वहन

अधिवक्ता परिषद की ओर से बीआईए हॉल में संविधान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय ने कर्तव्यों पर फोकस करते हुए कहा कि हम सबको अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि हमें यह ध्यान रखना होगा कि हम परिवार, समाज, देश अौर प्रकृति के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करें. सिविल रिस्पांसिबिलिटी में ये सभी चीजें ध्यान रखनी होती है. हर मतदाता का वोट देने का अधिकार तो है. लेकिन, कर्तव्य भी है. ताकि, वह बूथ पर जाये और अपने लिए एक बेहतर व्यक्ति चुने. लेकिन, अपर क्लास वोट देने नहीं जाता. अब टैक्स का हाल देखिए, महज एक प्रतिशत लोग टैक्स अदा करते हैं. जबकि, देश का आधार इसी पर टिका है.

हम क्यों पहुंचाते हैं राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान

न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय ने कहा कि इसके उलट हम क्या करते हैं आक्रोशित होने पर नेशनल प्रोपर्टी को बरबाद करते हैं. बसों और ट्रेनों को नुकसान पहुंचाते हैं. मुझे पता है कि किउल और गया रेलवे रूट में ज्यादातर लोग टिकट नहीं खरीदते हैं. स्कूल और अस्पताल अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं. यही वजह है कि शिक्षकों और डाक्टरों की जो प्रतिष्ठा थी, वो खत्म हो गयी है. कार्यक्रम को पूर्व न्यायाधीश एन सिन्हा ने भी संबाेधित किया. धन्यवाद ज्ञापन परिषद के महामंत्री संजीव कुमार ने किया.
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