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Tue Feb 21, 2017 13:22:48 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
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News Entry# 287877
  
छूट जा रही है आगे की ट्रेन
ट्रेनों के लेट होने से यात्रियों की आगे की ट्रेन छूट जा रही है। ट्रेन छूट जाने से यात्रियों की पूरी यात्र ही खराब हो जा रही है।
कोल्ड रूम में तब्दील हुआ वार्ड, ठिठुर रहे मरीज
दिल्ली से आने वाली ट्रेनें कोहरे की चपेट में
यह
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ट्रेनें रही लेट
पांच डिग्री सेल्सियस नीचे गिरा न्यूनतम तापमान
गोरखपुर वरिष्ठ संवाददाताएक महीने से बंद कानपुर रूट मंगलवार को पूरी तरह खुल गया। रूट खुलने और सभी गाड़ियों के मेन लाइन से आने-जाने के बाद भी उनकी लेटलतीफी बदस्तूर जारी है। बरौनी से चलकर दिल्ली जाने वाली 12553 वैशाली एक्सप्रेस मंगलवार को इस कदर लेट हुई कि यात्रियों को पूरी रात जंक्शन पर ही बितानी पड़ी। 12 घंटे से अधिक लेट हो जाने से यह ट्रेन बुधवार को गोरखपुर पहुंचेगी। जानकारों के अनुसार डायवर्जन से ज्यादा मार कोहरे की है। कोहरे के कारण ज्यादातर ट्रेनें धीमी चाल से चल रहीं हैं। कोहरे का सबसे ज्यादा असर दिल्ली और जम्मू से आने वाली ट्रेनों पर पड़ रहा है। प्लेटफार्म का भी कोई भी ठिकाना नहीं : ट्रेनों के लेट होने के साथ इनका प्लेटफार्म भी बदल जा रहा है। दरअसल लेट हो जाने के कारण उसके निर्धारित प्लेटफार्म पर दूसरी ट्रेनें आ जा रही हैं जिसकी वजह से प्लेटफार्म बदलना पड़ रहा है। इससे यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर वरिष्ठ नागरिक बहुत परेशान हो रहे हैँ।
ट्रेनों की लेटलतीफी के बीच यात्रियों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तो ठण्ड में प्लेटफार्म पर रात गुजारनी पड़ रही है और दूसरे पैसे की किल्लत के कारण खाने-पीने की दिक्कत हो रही है। हमेशा अपने समय पर चलने वाली कुशीनगर और एलटीटी एक्सप्रेस अभी भी नहीं सुधर पा रही है। कुशीनगर एक दिन निरस्त कर दिए जाने के बाद भी समय से नहीं चल पा रही है। सोमवार को जाने वाली कुशीनगर एक्सप्रेस मंगलवार को रवाना हुई।
गोरखपुर कार्यालय संवाददातानजारा एक- इमरजेंसी वार्ड के बेड 33 पर भर्ती तरकुलहा निवासी वीरेन्द्र को तेज बुखार है। वह रात में ठिठुरने को मजबूर है। वार्ड की खुली खिड़कियों से ठंडी हवाएं उसे कंपाकर मुसीबत और बढ़ा रहीं हैं। अस्पताल से उसे एक अदद कंबल तक नहीं मिला। नजारा दो- इमरजेंसी वार्ड के बेड 38 पर भर्ती कुशीनगर के हाटा निवासी भुक्खल को सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत है। बीते दो रात से वह वार्ड में ठंड के कारण सो नहीं सका है। ठंड से बचने के लिए मंगलवार को उनके परिजन रामसुमेर ने घर से दो रजाई मंगाई।यह दो नजारे मंगलवार की रात करीब 10.30 बजे के हैं। जिला अस्पताल के इमरजेंसी में मरीज ठंड से ठिठुर रहे हैं। ठंड से परेशान मरीज दो से तीन कंबल तक ओढ़े हुए हैं मगर उन्हें राहत नहीं मिल रही है। वार्ड के अंदर ठंडी हवाएं चल रहीं हैं। कोल्ड रूम बने वार्ड : सर्दी का मौसम जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए आफत बन गया है। अस्पताल की खुली हुई खिड़कियां मरीजों के लिए मुसीबत बन गई हैं। रात में महानगर में पारा लुढ़क कर 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पारा गिरने के कारण वार्ड ठंडे कमरे में तब्दील हो जा रहे हैं। 300 बेड वाले अस्पताल के वार्ड रात में कोल्ड रूम में तब्दील हो जा रहे हैं। मरीज रात में ठिठुरने को मजबूर हैं। ठंड के कारण कुछ मरीजों की हालत भी नाजुक हो गई है। खिड़कियों पर लगे हैं प्लास्टिक के चद्दरसर्दी के मौसम में जिला अस्पताल ठंडे अस्पताल में तब्दील हो जा रहा है। इसकी वजह है अस्पताल में खिड़कियों का खुला होना। खिड़कियों पर न तो शीशे के दरवाजे हैं न ही लकड़ियों के। ठंडी हवाओं को रोकने के लिए अस्पताल प्रशासन ने प्लास्टिक के चद्दर को टांगा हैं लेकिन इससे भी कोई फायदा मरीजों को नहीं हो रहा है। दो साल में नहीं तैयार हो सका प्रस्ताव जिला अस्पताल में पिछले दो वर्ष से ठंड के दौरान मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए एसआईसी ने अस्पताल के वाडरें की खिड़कियों पर शीशे के दरवाजा लगवाने का फैसला किया। दो साल पहले उन्होंने अवर अभियंता को प्रस्ताव तैयार करने को निर्देश दिया। अवर अभियंता ने एक साल बाद प्रस्ताव तैयार कर अस्पताल प्रशासन को सौंपा। पिछले एक साल से प्रस्ताव अलग-अलग टेबलों पर धूल फांक रहा है। वर्जन तीमारदार ठंड बढ़ गई है। अस्पताल से कंबल नहीं मिला है। ठंउ लगने पर घर से एक कंबल मंगाया गया।तेतरी देवी , तीमारदारमां तीन दिन से अस्पताल में भर्ती है। रात में ठंड बढ़ जा रही है। मां की तबियत बिगड़ जा रही है। अस्पताल से सिर्फ एक ही कंबल मिला है। जोगिन्दर, तीमारदारपिता जी को पहले से ही ठंड लगी थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। हालत बिगड़ी तो यहां भर्ती कराया। यहां ऐसे वार्ड में भर्ती करा दिया जिसमे खिड़की खुली है। गोरख, तीमारदारवर्जनवार्ड में शीशा लगवाने का प्रस्ताव शासन से पास हो गया है। बजट का प्रबंध किया जा रहा है। तब तक अस्पताल प्रबंधन ने ठंड से निपटने के लिए मरीजों को जरूरत के हिसाब से कंबल देने का निर्देश दिया गया है।डॉ. एचआर यादव, एसआईसी जिला अस्पताल
दिल्ली से गोरखपुर और बिहार जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें चार से 13 घंटे तक लेट चल रही हैं। सुपरफास्ट ट्रेन बिहार सम्पर्क क्रांति 12565 जिसे सोमवार की देर रात दो बजे गोरखपुर पहुंचना था वह 13 घंटे लेट होकर मंगलवार को दोपहर तीन बजे पहुंची।
ट्रेन लेट12553 वैशाली एक्सप्रेस 11.18 घंटे11554 वैशाली एक्सप्रेस 4.10 घंटे15707 आम्रपाली एक्सप्रेस 3.10 घंटे12556 गोरखधाम एक्सप्रेस 5 घंटे 12565 बिहार संपर्कक्रांति एक्स. 8.30 घंटे12566 बिहार संपर्कक्रांति एक्स. 11.20 घंटे12558 सप्तक्रांति एक्सप्रेस 6.00 घंटे12542 गोरखपुर-एलटीटी एक्स. 2.10 घंटे15047 कोलकाता-गोरखपुर एक्स. 6.08 घंटे 15003 चौरीचौरा एक्सप्रेस 9.30 घंटे11015 कुशीनगर एक्सप्रेस 11.18 घंटे
गोरखपुर। मंगलवार को मौसम साफ होते ही पारे के तेवर चढ़ गए। न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क गया जिसके कारण ठंड बढ़ गई। हालांकि मंगलवार को खिली धूप ने लोगों को थोड़ी राहत भी दी। बीते चार दिनों से मौसम ने तेवर बदला है। मंगलवार की सुबह से ही जबर्जस्त ठंड रही। आसमान में कोहरा छाया रहा। घने कोहरे से सुबह 11 बजे तक सूरज के दर्शन नहीं हुए। कोहरे के कारण न्यूनतम तापमान में जोरदार गिरावट हुई। सोमवार को न्यूनतम तापमान 15.6 डिग्री सेल्सियस था। सिर्फ 24 घंटे में ही यह गिर कर 10.9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इसके कारण सूर्यास्त के बाद ठंड व गलन बढ़ गई। ठंड से शहरवासियों को राहत दिन में करीब 11.30 बजे से मिली। दोपहर में कोहरा छंटा जिसके बाद धूप खिली। इससे अधिकतम तापमान में बढ़ोत्तरी हुई। सोमवार को अधिकतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस था जो कि मंगलवार को बढ़ कर 21.4 डिग्री सेल्सियस हो गया।
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