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News Entry# 288601
  
Dec 14 2016 (14:06)  फ्लेक्सी फेयर फ्लॉप शो,कोई एक गलत फैसला कैसे किसी चलती चीज को पस्त कर सकता है, इसका एक उदाहरण रेलवे की फ्लेक्सी फेयर स्कीम है (epaper.navbharattimes.com)
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IR AffairsNR/Northern  -  

News Entry# 288601     
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Dec 14 2016 (2:07PM)
Station Tag: New Delhi/NDLS added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज■☆*^~/206964

Dec 14 2016 (2:07PM)
Station Tag: Lucknow Charbagh NR/LKO added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज■☆*^~/206964

Posted by: ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज■☆  4737 news posts
फ्लेक्सी फेयर फ्लॉप शो
कोई एक गलत फैसला कैसे किसी चलती चीज को पस्त कर सकता है, इसका एक उदाहरण रेलवे की फ्लेक्सी फेयर स्कीम है। यह स्कीम बीते 9 सितंबर को पूरे तामझाम के साथ शुरू की गई थी। माना जा रहा था कि इस अनोखी योजना के जरिए रेलवे अपना किराया बढ़ाने की बदनामी से भी बच जाएगा और अपनी तिजोरी भी भर लेगा। मगर पिछले तीन महीनों के अनुभव से यह साफ हो गया है कि तिजोरी भरने के बजाय इस योजना ने यात्रियों को रेलवे से दूर करना शुरू कर दिया है। इस स्कीम के तहत राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों में चार्ट फाइनल होने के बाद उपलब्ध सीटों का किराया हरेक दस फीसदी सीटें भरने
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के बाद दस फीसदी बढ़ा दिया जाता था। किराया बढ़ने की अधिकतम सीमा डेढ़ गुनी तय की गई थी। मगर इस स्कीम के चलते इन ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कम होने लगी। एक अघोषित सूचना के अनुसार फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू होने के दिन से लेकर 31 अक्टूबर तक की अवधि में इन ट्रेनों में 5871 बर्थ खाली रहीं। यही नहीं, इस तिमाही में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले रेलवे की यात्री और माल भाड़े से होने वाली कुल आमदनी में भी 11 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। बढ़ती रेल दुर्घटनाओं के मद्देनजर अब रेल मंत्रालय पर सेफ्टी के इंतजाम बढ़ाने का दबाव आ रहा है। लेकिन वित्त मंत्रालय के इस आग्रह के जवाब में रेल मंत्री ने साफ कह दिया कि इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए उन्हें 1.19 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता चाहिए। अगले पांच साल की अवधि में उन्हें इतनी रकम उपलब्ध कराई जाए, तभी वह सेफ्टी के अजेंडा पर आगे बढ़ सकते हैं। सुरक्षा सरचार्ज लगा कर खुद यह रकम जुटाने का सुझाव उन्होंने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रेलवे के लिए किराये और भाड़े में वृद्धि फिलहाल घाटे का सौदा साबित होगी। फ्लेक्सी फेयर स्कीम के तहत किराया बढ़ोतरी की अधिकतम सीमा को 1.5 से 1.4 गुना करने का फैसला करके अब गलती को सुधारने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह कोशिश भी कितनी कामयाब होती है, वक्त ही बताएगा।
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