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News Entry# 288700
  
Dec 15 2016 (13:05)  अब एक पटरी पर नहीं आएंगी दो ट्रेनें (naidunia.jagran.com)
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New Facilities/TechnologyECR/East Central  -  

News Entry# 288700     
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Posted by: Few SF trains in NCR have silver spoon of PRIORITY*^~  389 news posts
टे्रनों के सुरक्षित परिचालन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। एक स्टेशन से खुलते ही दूसरे स्टेशन को तत्काल सूचना देनी पड़ती है। लेटलतीफी की यह भी एक वजह है। इसकी रोकथाम के लिए व्यस्ततम रूट में शुमार हावड़ा-नई दिल्ली रेलमार्ग के ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन को डिजिटल सिग्नल सिस्टम से लैस किया गया है।
इस सिस्टम से अब बस एक बटन दबाते ही न केवल सिग्नल ग्रीन होगा, बल्कि अगले स्टेशन को टे्रन आगमन की जानकारी भी मिल जाएगी। कई बार मानवीय भूल के कारण एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आ जाती हैं। मगर यूनिवर्सल फेलसेफ ब्लॉक इंटरफेस (यूएफएसबीआई) से अब इसकी संभावना भी शून्य होगी। पहले चरण में धनबाद रेल मंडल के प्रधानखंता से मानपुर तक यह व्यवस्था बहाल
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की गई है।
अगले चरण में धनबाद (झारखंड) से सिंगरौली तक फैले सीआइसी सेक्शन को यूएफएसबीआई से लैस किया जाएगा। इसकी मंजूरी रेलवे बोर्ड ने दे दी है। यूएफएसबीआई एक ऐसा उपकरण है जो रेलगाड़ी के पहिये गिनने में सक्षम है। यह पटरी पर दौड़ने वाली यात्री ट्रेन या मालगाड़ी के कुल पहियों की संख्या गिन लेगा।
एक स्टेशन से खुलने के बाद दूसरे तक सभी पहिये पहुंचे या नहीं इसकी भी जानकारी दे देगा। अब अगर उसी पटरी पर दूसरी टे्रन आ गई तो इस उपकरण की मदद से स्टेशन मास्टर को तत्काल इसकी जानकारी मिल जाएगी। कई बार मालगाड़ी की कप्लिंग टूट जाने से डिब्बे दो हिस्से में बंट जाते हैं।
ऐसी घटनाओं के दौरान भी यूएफएसबीआई की मदद ली जा सकेगी क्योंकि रास्ते में डिब्बे अलग होने से अगले स्टेशन तक कम पहिये ही पहुंचेंगे, जिसकी जानकारी मिल सकेगी। इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि अगले स्टेशन पर लाइन क्लीयर होने की जानकारी नहीं लेनी होगी। सिग्नल लोअर यानी ग्रीन तभी होगा जब अगले स्टेशन पर लाइन क्लीयर होगी।
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