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News Entry# 288877
  
Dec 16 2016 (22:42)  ट्रेन के साथ जबलपुर से सुकरी तक का ट्रेक भी बनेगा ग्रीन कॉरीडोर (mnaidunia.jagran.com)
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News Entry# 288877     
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Posted by: HA1~  51 news posts
रेलवे प्रदेश में पहला ग्रीन कॉरीडोर 46 किमी लंबे जबलपुर से सुकरी ट्रैक को बनाने जा रही है। इसके लिए इस रूट पर चलने वाली सुकरी-मंगेला पैसेंजर के सभी कोच में बॉयो टायलेट लगा दिए गए हैं। इसके अलावा इस रूट से सिर्फ वही ट्रेन गुजर सकेगी जिसके सभी कोचेस में बायो टायलेट लगा हो। वहीं रेलवे द्वारा ट्रैक के दोनों ओर पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके बाद सतना से रीवा रेलवे ट्रैक को ग्रीन कॉरिडोर में बदलने की प्लानिंग है।
जबलपुर से सुकरी तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन में 5 कोच हैं। सभी कोच में तकरीबन 20 बायो टायलेट लगा दिए गए हैं। इस ग्रीन रूट को मार्च 2017 तक नैनपुर तक बढ़ाया जाएगा और फिर बालाघाट से गोंदिया तक ग्रीन
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कॉरीडोर बनाने का प्रस्ताव है। दरअसल यह रूट नया है, इसलिए इसे ग्रीन बनाने मेंटेनेंस शुरू कर दिया गया है।
क्या है रेलवे का ग्रीन कॉरीडोर
रेलवे के ग्रीन कॉरीडोर का मतलब कि चिन्हित रेलवे रूट साफ-सुथरा और हरियाली से भरपूर हो। उस रूट पर चलने वाली सभी कोच में बायो टायलेट लगा हो जिससे ट्रैक पर गंदगी न हो। इससे ट्रैक और स्लीपर को नुकसान नहीं होता। मेंटेनेंस का खर्च भी कम हो जाता है। ट्रैक के दोनों ओर पेड़-पौधे लगे होने से पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। वहीं ट्रैक पर काम करने कर्मियों को भी स्वच्छ माहौल मिलेगा। ट्रैक की लाइफ भी दोगुना बढ़ जाएगी।
देश में रेलवे ट्रैक ग्रीन कॉरिडोर
- जम्मूतवी रेलवे ट्रैक, पोरबंदर रेलवे ट्रैक, रमेश्वरम्‌ रेलवे ट्रैक, ओखा रेलवे ट्रैक।
दूसरे चरण में सतना से रीवा तक बनेगा ग्रीन कॉरीडोर
सतना से रीवा के बीच सिंगल रेलवे लाइन है। अभी रीवा से आगे रेल लाइन नहीं है। इस रेलवे ट्रैक को ग्रीन कॉरीडोर बनाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि अभी तक काम पूरा नहीं हुआ है। इस प्लानिंग में इस रूट पर चलने वाली सभी ट्रेन में 100 फीसदी बायो टायलेट लगे होना अनिवार्य है। जिन कोच में बायो टायलेट नहीं होंगे, उन्हें यहां चलने की परमिशन नहीं होगी।
ट्रेनों में अब तेजी से बायो टायलेट लगाए जा रहे हैं। इससे रेलवे ट्रैक को ग्रीन और साफ-सुधरना बनाए रखने में मदद मिल रही है। सुकरी तक चलने वाली ट्रेन के सभी कोच में बायो टायलेट लगा दिए हैं। अब जल्द ही सतना से रीवा रेलवे ट्रैक को भी ग्रीन बनाया जाएगा। -राजेश अग्रवाल, सीएमई, पमरे
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