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Thu Jun 20, 2013 19:02:28 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsMembersLoginFeedback
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News Entry# 65805  
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नई दिल्ली
ममता बनर्जी की नाराजगी का शिकार हुए पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी की जगह मुकुल रॉय की रेल मंत्रालय में ताजपोशी होगी। शुरुआती असहमति के बावजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ममता ने इसके लिए तैयार कर लिया है। मंगलवार सुबह रॉय को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही त्रिवेदी के रेल बजट के किराया वृद्धि के तीखे प्रस्तावों की रुखसती तय है। रॉय संसद में रेल बजट पर चर्चा का जवाब देने के दौरान ही साधारण क्लास की किराया वृद्धि को वापस लेने और स्लीपर क्लास के किरायों में आंशिक कमी का ऐलान कर सकते हैं। वातानुकूलित श्रेणियों के किरायों में भी राहत संभव है। ममता के निर्देश पर रविवार शाम प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज चुके त्रिवेदी का इस्तीफा सोमवार को मंजूर हो गया। शाम को प्रधानमंत्री की ओर से रॉय को कैबिनेट मंत्री बनाने
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का प्रस्ताव राष्ट्रपति भवन भेज दिया गया। शपथ ग्रहण के बाद रॉय ही सदन में रेल बजट पर चर्चा का जवाब देंगे और इसकी पूरी संभावना है कि वह त्रिवेदी के किराया वृद्धि के प्रस्तावों पर कैंची चलाएंगे। त्रिवेदी ने अपने बजट में साधारण दर्जो में 2 पैसे, स्लीपर क्लास में 5, वातानुकूलित श्रेणियों में क्रमश: 10 (थर्ड एसी), 15 (सेकेंड एसी) और 30 पैसे (फ‌र्स्ट एसी) प्रति किमी वृद्धि का प्रस्ताव किया था। सूत्रों के अनुसार ममता की मंशा है कि साधारण दर्जे में वृद्धि पूरी तरह रद की जाए, स्लीपर क्लास की वृद्धि घटाकर 2 या 3 पैसे प्रति किमी पर लाई जाए। उनकी नजर में एसी क्लास की किराया वृद्धि भी ज्यादा है, लिहाजा थर्ड एसी में बढ़ोतरी को 5 पैसे, सेकेंड एसी में 10 और फ‌र्स्ट एसी में 15 पैसे करना उचित होगा। अभी रेलवे को यात्री किराये से सालाना करीब 26 हजार करोड़ की आय होती है। इसमें से 20 हजार करोड़ अकेले स्लीपर क्लास से आते हैं। त्रिवेदी के किराया वृद्धि के प्रस्तावों से 2012-13 में रेलवे को 8000 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होने वाली थी। यदि कटौतियां हुई तो फायदा घटकर 3000 करोड़ रह जाएगा। वातानुकूलित श्रेणियों में प्रस्तावित किराये में कटौती नहीं होती है तो रेलवे को 4000 करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। इसकी भरपाई रेलवे माल ढुलाई से करने की कोशिश करेगी, जहां बजट से पहले ही 20 फीसदी तक की वृद्धि की जा चुकी है। इससे पहले, ममता ने लोस में पार्टी नेता सुदीप बंदोपाध्याय और विश्वस्त मुकुल रॉय के साथ संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें राजी कर लिया। मुकुल के नाम पर प्रधानमंत्री को कुछ आशंकाएं थीं। यही कारण था कि पिछली बार ममता ने मुकुल को रेल मंत्रालय में स्थापित करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में त्रिवेदी आसीन हो गए थे। इस बार जबकि ममता मुकुल के नाम पर अडिग थीं तो प्रधानमंत्री चाहते थे कि कम से कम रेल बजट पारित होने तक इंतजार करें, लेकिन ममता ने दो टूक कह दिया कि वह इससे सहमत नहीं हैं। बताते हैं कि उन्होंने राजग काल में रेल बजट के दौरान मंत्रालय में हुए फेरबदल का उदाहरण देते हुए कहा, उस वक्त उन्होंने रेल बजट पेश किया था लेकिन संसद में जवाब नीतीश कुमार ने दिया था। सूत्र बताते हैं कि सरकार ने सुदीप बंदोपाध्याय को प्रोन्नत करने का भी प्रस्ताव दिया था लेकिन ममता की जिद के सामने सरकार को झुकना पड़ा। माना जा रहा है कि भविष्य में जहाजरानी मंत्रालय में खाली हुई जगह पर तृणमूल से किसी महिला सांसद को शामिल कराने की कोशिश होगी। ममता ने संसद के सेंट्रल हाल में पार्टी के सभी सांसदों के साथ भी बैठक की, जिसमें त्रिवेदी भी मौजूद थे। बताया जाता है कि उन्होंने सभी सांसदों को जनता से जुड़े मुद्दों पर सतर्क रहने की ताकीद करने के साथ ही यह संकेत भी दे दिया कि अनुशासन के मुद्दों पर किसी को नही बख्शा जाएगा। ममता ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में पीएम के साथ बैठक को संतोषप्रद बताते हुए कहा, एनसीटीसी, रेल यात्री किराया में बढ़ोत्तरी जैसे सभी मुद्दों पर चर्चा हो गई है। किराया पर फैसला प्रधानमंत्री लेंगे, लेकिन उन्होंने इसका भी परोक्ष संकेत दे दिया कि साधारण और स्लीपर क्लास के किराए को ठीक किया जाएगा।
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