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6 जुलाई, समय 11 बज कर 55 मिनट। जिले के इतिहास में यह दिन यादगार बन गया। सांसद व रेलवे अधिकारियों ने जैसे ही रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखा ट्रेन को रवाना किया, लोग इस अविस्मरणीय पल के साक्षी बन गए। इसके साथ ही लोगों का दशकों पुराना सपना सच में साकार हो गया। एक ऐसा सपना जिसे गुलाम भारत में देखा गया था। इस ख्वाब को हकीकत में बदलने में जहां पूरे 84 साल लग गए, वहीं आजादी के 65 वर्ष बाद लोगों की चिर परिचित मांग पुरी हुई।सबसे पहले वर्ष 1928 में सीतामढ़ी से कोलकाता के बीच ट्रेन सेवा बहाल करने की मांग उठी थी। बाद में जब देश आजाद हुआ था, तब फिर मांगे जवान हुई। इस दौरान सरकारें आती गई। वोट की फसल काटती गई, जब मेहनताने की बात आई तो सरकारें वायदें भूलती गई। जनता एक के बाद एक जन प्रतिनिधि को सबक सिखाती... Read more...
गई और लोग महा नगरों तक ट्रेन सेवा बहाल कराने के अपने ही सपनों को भूलती रहीं। पिछले एक दशक में जब रेलवे की कमान नीतीश, राम विलास व लालू को मिली तो लोगों में फिर उम्मीद जगी। लेकिन मसौदा कागजों तक झुलता रहा। आखिरकार सीतामढ़ी सीट से चुने गए अजरुन राय रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य बनाए गए। अजरुन ने अपने पद का पुरा फायदा उठाते हुए इलाके के विकास पर पुरा ध्यान दिया। परिणाम स्वरूप शुक्रवार को सीतामढ़ी से कोलकाता के लिए ट्रेन चलनी शुरू हुई। शुक्रवार को हजारों लोग सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन पर इस एतिहासिक पल को देखने उमर पड़े। झंडी दिखाते ही ट्रेन दौड़ पड़ी। ट्रेन के दौड़ते ही जहां मौजूद जन मानस में गर्व की अनुभूति हुई, वहीं लोगों के जेहन में ट्रेन की गति जैसी खुशी भी दौड़ने लगी। उम्मीदें हिलोड़ मारने लगी। ट्रेन के चलते ही सांसद अजरुन राय भी सीतामढ़ी - कोलकाता एक्सप्रेस पर सवार हो निकल पड़े। पीछे पीछे लोग अजरुन की जयकार लगाते दिखे। आजादी के 65 वर्ष बाद जिले वासियों का सपना पुरा हो गया। सीतामढ़ी से शुक्रवार को मिथिलांचल एक्सप्रेस कोलकाता के लिए रवाना हुई। इसके साथ ही मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी का कोलकाता व दक्षिण भारत के साथ संबंध बहाल होने की बुनियाद पड़ी । मैथिल व बांगला संस्कृति अब एक नये संस्कृति की सूत्रपात का वाहक बनेगी।