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Fri Feb 27, 2015 20:51:03 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsMembersLoginFeedback
Fri Feb 27, 2015 20:51:03 IST
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News Posts by विश्व नाथ**

Page#    Showing 1 to 10 of 2760 news entries  next>>
  
Today (2:48PM)  बिहार के लिए इसी सत्र में होंगी ट्रेनों की घोषणाएं (epaper.livehindustan.com)
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Commentary/Human InterestECR/East Central  -  

News Entry# 214419     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
बिहार से बाहरी राज्यों के लिए लोगों की सबसे ज्यादा आवाजाही होने से वहां पर रेल एक बड़ा मुद्दा होती है। भाजपा के बिहार से जुड़े एक प्रमुख नेता का कहना है कि बिहार में लालू व नीतीश का मुकाबला करने के लिए ज्यादा से ज्यादा रेल सुविधाएं जरूरी है। इन दोनों ने रेल मंत्री रहते हुए बिहार को भरपूर रेल सौगातें दी थी। गौरतलब है कि बीते दो दशकों से रेल मंत्रलय अधिकांश समय बिहार और पश्चिम बंगाल के नेताओं के हाथ में रहा है।
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने बजट पर सबसे पहले अमल करते हुए कहा कि वह अपने सांसद कोष की राशि रेल यात्रियों की सुविधा पर खर्च करेंगे। उन्होंने बजट का स्वागत करते हुए कहा कि कहा, रेल मंत्री ने बजट के माध्यम से पारदिर्शता और सुशासन लाने का प्रयास किया है।
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नई दिल्ली ’ रामनारायण श्रीवास्तवएनडीए सरकार के पहले पूर्ण रेल बजट में सुरेश प्रभु ने राजनीति को दरकिनार कर जमीनी हकीकत सामने रखने की कोशिश की है। दरअसल रेल बजट का यह पहला हिस्सा है। सरकार में सूत्रों के अनुसार जल्दी ही इसी सत्र में जब रेल मंत्री नई रेलगाड़ियों की सूची लेकर आएंगे तो उसमें बिहार की चुनावी पटरी पर तमाम रेलगाडियां दौड़ती नजर आएंगी, जिनमें कई पश्चिम बंगाल तक भी जाएंगी। पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होने हैं। रेल बजट में किसी भी नई ट्रेन की घोषणा न होने से बिहार के भाजपा सांसद कुछ देर के लिए सकते में आ गए, लेकिन जल्दी ही उन्हें बता दिया गया कि रेल मंत्री ने खुद ही कहा है कि रेलगाड़ियों की घोषणा अभी बाकी है। और इसी सत्र में वे इसे करने वाले हैं। बजट भाषण के बाद संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव प्रताव रूडी से बिहार और झारखंड के कई सांसदों ने मुलाकात की। दरअसल कई सांसद नई ट्रेनों की बाद में होने वाली घोषणा को लेकर असमंजस की स्थिति में थे, जिन्हें समझा दिया गया है। पार्टी ने अपने सांसदों से कहा है कि वे रेल मंत्री से मुलाकत कर अपने-अपने सुझाव दें। हालांकि बिहार के भाजपा के तमाम सांसद रेल मंत्री से मिलकर अपने अपने क्षेत्र के लिए रेल सुविधाओं की मांग पहले ही कर चुके है।कानून-व्यवस्था के चलते अटकी बिहार की परियोजनाएं : श्वेतपत्र में कहा गया है कि बिहार, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित इलाकों में कई परियोजनाएं कानून- व्यवस्था की समस्या के चलते अटकी हुई हैं। पूवरेत्तर राज्यों और जम्मू-कश्मीर में इन्हीं कारणों से कई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो रहीं। क्षमता बढ़ाने की जरूरत : झारखंड सहित कई राज्यों में परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बजट से इतर किए गए प्रयासों का जिक्र भी श्वेतपत्र में किया गया है। इसके मुताबिक, रेलवे क्षेत्र में सघन नेटवर्क को देखते हुए क्षमता विस्तार करने की जरूरत है। जिस तरह की वित्तीय स्थिति है उसे देखते हुए मौजूदा परियोजनाओं के पूरा होने में 7 से 10 का समय लगने का अनुमान लगाया गया है। रेलवे लाइनों के दोहरीकरण प्रस्तावों के अलावा तिहरीकरण और चार स्तरीय लाइनों के निर्माण की जरूरत श्वेतपत्र में बताई गई है। आधारभूत परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए राज्यों से वित्तीय सहयोग की जरूरत बताई गई है।
  
Today (2:47PM)  निराश नहीं हों, नई ट्रेनों की सूची बजट सत्र में ही (epaper.livehindustan.com)
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PoliticsER/Eastern  -  

News Entry# 214418   Blog Entry# 1381521 **new     
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Feb 27 2015 (2:47PM)
Station Tag: Bhagalpur Junction/BGP added by विश्व नाथ**/31233

Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और भागलपुर के पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि भागलपुर और बिहार के लोगों को निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि नयी ट्रेनों की सूची इसी बजट सत्र में जारी की जाएगी। भागलपुर को जो तोहफा मिलना है वह मिलेगा। शाहनवाज ने कहा यह शुद्ध रूप से रेलवे के पुनर्निर्माण का बजट है। इसमें रेलवे की सेहत सुधारने से लेकर यात्री सुविधाओं के लिए संरचनात्मक काम के लिए कई अच्छे प्रस्ताव किए गए हैं। सुरक्षा, संरक्षा और सहूलियत को ध्यान में रखा गया है। इन तकनीकी बातों पर अबतक किसी सरकार में बात नहीं होती थी। शाहनवाज ने बताया कि विभिन्न लंबित योजनाओं को कांग्रेस सरकार ने रोक कर रखा था। लेकिन इस बजट में मुंगेर रेल पुल, छपरा रेल पुल, कोसी रेल पुल सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए इस बजट में राशि दी गई है। जहां तक ट्रेन चलाने की बात है...
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तो उसको लेकर निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि नई ट्रेनों की घोषणा अलग से की जाएगी और इसी बजट सत्र में की जाएगी। मंडल कार्यालय की बाबत शाहनवाज ने कहा कि उसके लिए घोषणा करने की जरूरत नहीं है। वह पहले से घोषित है बस राशि का प्रावधान करना है।

  
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Today (3:00PM)        

purshottam grievance succesful   52833 blog posts   3450 correct pred (77% accurate)  
Re# 1381521-1               Tags   Past Edits
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Vikramshila ko LHb kab mil raha hai Shahnawaz ji ye batao Pehle

  
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Today (3:05PM)        

विश्व नाथ**   12900 blog posts   267 correct pred (75% accurate)  
Re# 1381521-2               Tags   Past Edits
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LHB is hifi peoples funda, common passenger needs trains, Punctual train that's it.

  
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Today (3:08PM)        

SRG**   26570 blog posts   89268 correct pred (73% accurate)    
Re# 1381521-3               Tags   Past Edits
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Voh sab budget me nahi bolega.....Really a vague query of sorts.

  
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Today (3:09PM)        

purshottam grievance succesful   52833 blog posts   3450 correct pred (77% accurate)  
Re# 1381521-4               Tags   Past Edits
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Budget to Prabhu ne diya tha ... My query was to Shahnawaz Hussain who talked about LHB 1 year ago.
  
Yesterday (9:40PM)  रेल बजट माने जादू का पिटारा! (www.prabhatkhabar.com)
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Rail Budget

News Entry# 214258     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
देश में रेलवे का महा-विस्तार संभव है और इसकी मदद से बड़ी तादाद में नये रोजगार तैयार होंगे. इसका विस्तार दूसरे कारोबारों के विकास के लिए एक बुनियादी जरूरत है. लेकिन, हमें तय करना है कि हमारी प्राथमिकता में ‘बुलेट ट्रेन’ को होना भी चाहिए या नहीं.शेयर बाजार से खबरें हैं कि दो दिनों से रेलवे से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उछाला दिख रहा है. ऐसी क्या खुशखबरी हो सकती है, जिसे लेकर शेयर बाजार खुश है? क्या निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़नेवाली है? क्या रेलमंत्री सामान्य यात्री सुविधाएं बढ़ा सकते हैं? तमाम खामियों के बावजूद हमारी रेल गरीबों की सवारी है. सिर्फ इसके सहारे वह अपनी गठरी उठाये महानगरों की सड़कों पर ठोकरें खाने के लिए अपना घर छोड़ कर निकलता है. किराया बढ़ने का मतलब है उसकी गठरी पर लात लगाना. रेलगाड़ी औद्योगिक गतिविधि भी है. वह बगैर पूंजी के नहीं चलती. मध्य वर्ग की दिलचस्पी अपनी...
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सुविधा में है. सरकार को तमाम लोगों के बारे में सोचना होता है.क्या राजधानी और शताब्दी का खाना बेहतर हो जायेगा? स्वच्छ भारत के इस दौर में क्या रेलवे प्लेटफॉर्मो की गंदगी कम होगी? क्या रेलवे रिजर्वेशन में दलालों का धंधा खत्म होगा? रेल बजट माहौल भी बनाता है. पिछले कई सालों से इसकी सफलता या विफलता किराये और माल-भाड़े में की गयी कमी-बेशी के आधार पर आंकी जाती रही है. या फिर इस बात से कि किस नेता या किस राज्य सरकार के अनुरोध पर किस शहर से किस शहर तक नयी रेलगाड़ी चलेगी. क्या इस बजट में बिहार के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ट्रेनों की घोषणा होगी? क्या पूर्वोत्तर में भाजपा की पैठ बनाने के लिए बजट का इस्तेमाल होगा?

रेल बजट को देखने के कई नजरिये हैं. राजनीति भी एक नजरिया है. 2012 में रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी को हाथों-हाथ बर्खास्त किया गया. ऐसा पहली बार हुआ जब रेल बजट एक मंत्री ने पेश किया और उसे पास करते वक्त मंत्री दूसरे थे. हर बजट में नयी ट्रेनों की घोषणाएं होती हैं. कौन देखता है कि सभी गाड़ियां चलीं या नहीं. पिछले साल 160 के आसपास गाड़ियों की घोषणा हुई थीं. कितनी चलीं, पता नहीं. कहा जा रहा है कि सुरेश प्रभु लोक-लुभावन घोषणाओं से बचेंगे. वे सुधार समर्थक हैं. आर्थिक सुधार भी हों और जनता भी खुश रहे, यह पेचीदा और मुश्किल काम है. इस लिहाज के रेल बजट जादू का पिटारा है.

पिछले साल एनडीए सरकार के रेल बजट में किराया और माल-भाड़ा बढ़ाने की घोषणा की गयी तो उसे आलोचना का सामना करना पड़ा था. मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ पर पहला हमला तभी शुरू हुआ था. किराया कम रखते हैं तो रेलवे-सेफ्टी, नयी लाइनों को बिछाने और विद्युतीकरण के कामों की अनदेखी होती है. सरकार लोकलुभावन तौर-तरीकों को अपनायेगी या रेलवे के दीर्घकालीन स्वास्थ्य के बारे में विचार करेगी, यह देखनेवाली बात होगी. इसमें सामान्य यात्री की सुविधाओं पर ध्यान होगा या बुलेट ट्रेन की चमक-दमक पर, यह आज पता चलेगा.

रेलगाड़ी हमारी विसंगतियों की कहानी कहती है. अंगरेजों को देश की तमाम खामियों-खराबियों के लिए कोसा जाता है. रेलगाड़ी के लिए हम उनका शुक्रिया अदा कर सकते हैं. उन्होंने अपने कारोबार के लिए ही इसे बनाया, पर राष्ट्रीय आंदोलन को पैर जमाने में भी इसकी भूमिका रही. दूसरी ओर महात्मा गांधी ने ‘हिंद स्वराज’ में आधुनिक सभ्यता के जिन दोषों को गिनाया है उनमें रेलगाड़ी भी है. उनके विचार से रेल नहीं होती तो अंगरेजों का जितना पक्का नियंत्रण हिंदुस्तान पर था, उतना नहीं होता. लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने पर संक्रमण के कारण महामारी फैलती है. रेलगाड़ी के कारण अनाज वहां खिंच जाता है जहां उसकी ज्यादा कीमत मिलती है. इससे अकाल बढ़ते हैं.

गांधी की यह उलटबांसी आधुनिक सभ्यता और तकनीक के मर्म में छिपी इंसान विरोधी प्रवृत्तियों पर रोशनी डालती है. लेकिन गांधी ने देश को समझने के लिए रेल-यात्र ही की थी. उनके दरिद्र नारायण की सवारी है रेलगाड़ी. संचार और संवाद के लिहाज से आधुनिक भारत के सभी रंगों को एक साथ उभारने में रेलगाड़ी का जवाब नहीं. राष्ट्र राज्य को एक बनाये रखनेवाली जीवन रेखा है यह. नरेंद्र मोदी की ‘अच्छे दिनों की सौगात’ रेलगाड़ी पर सवार होकर ही आयेगी. रेलगाड़ी वैसी ही तकनीक है जैसे मोबाइल फोन. अमीर आदमी के इस्तेमाल की चीज गरीबों के इस्तेमाल में भी आ जाती है.

पिछले साल मोदी सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘जीरो डिफैक्ट, जीरो इफैक्ट’ के नाम से जो पहल शुरू की है, उसमें पहली कोशिश रक्षा और रेलवे के क्षेत्र में की गयी है. पिछले साल कैबिनेट ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआइ की सीमा बढ़ा कर 49 और रेलवे के ढांचागत क्षेत्र में 100 फीसदी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इससे रेल परियोजनाओं के आधुनिकीकरण और विस्तार में मदद मिलेगी. एक अनुमान है कि इस क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये की नकदी की जरूरत है. एफडीआइ मंजूरी से प्रस्तावित हाई स्पीड रेल गलियारे की परियोजना में तेजी आयेगी. माल परिवहन के लिए विशेष रेल गलियारे को भी बढ़ावा मिलेगा.

भारतीय रेलवे 6000 हॉर्स पावर के डीजल इंजनों और 12000 हॉर्स पावर के विद्युत इंजनों के देश में ही निर्माण की योजना भी बना रहा है, जिसके लिए पूंजी के अलावा तकनीक की भी जरूरत होगी. इस दिशा में जापान-अमेरिका और कुछ यूरोपियन कंपनियों के साथ बात चल रही है. कारोबारी गतिविधियां बढ़ानी हैं, तो रेल परिवहन ठीक होना ही चाहिए. सौ-सौ डिब्बोंवाली मालगाड़ियां चलाने की जरूरत होगी. रेल परिवहन सड़क परिवहन की तुलना में किफायती है. सड़क परिवहन के मुकाबले इसमें चौथाई से भी कम इंधन लगता है और उससे चार गुना ज्यादा वजन ढोया जा सकता है. पर्यावरण प्रदूषण भी नियंत्रित रहता है.

देश में रेलवे का महा-विस्तार संभव है और इसकी मदद से बड़ी तादाद में नये रोजगार तैयार होंगे. इसका विस्तार दूसरे कारोबारों के विकास के लिए एक बुनियादी जरूरत है. हमारी रेल कई तरह की दिक्कतों और पूंजीगत तंगियों के बावजूद सफलता और कौशल की कहानी है. भारत के पास इस वक्त करीब 65 हजार किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क है, जो दुनिया में तीसरे नंबर पर है. देश के तमाम शहरों का विकास रेलवे स्टेशनों के साथ हुआ है. रेलवे न होता तो वे शहर भी न होते. हमें तय करना है कि हमारी प्राथमिकता में ‘बुलेट ट्रेन’ को होना भी चाहिए या नहीं. इतनी महंगी तकनीक क्या व्यवहारिक होगी? क्या उसके पहले हमें सामान्य रेल व्यवस्था को ठीक नहीं करना चाहिए? पर तकनीक केवल शोशेबाजी ही नहीं होती. दिल्ली मेट्रो की सफलता ने देश के दूसरे शहरों का सपना जगाया है. देखना यह भी है कि इस सपने में क्या वे करोड़ों लोग शामिल हैं, जो सपने देख ही नहीं पाते.
  
Yesterday (7:49PM)  पूर्व रेल मंत्री ने कहा, यह रेल बजट नहीं-एक आइडिया है (www.jagran.com)
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Rail Budget

News Entry# 214245     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा मैंने पूरा रेल बजट पढ़ा नहीं है। सिर्फ सुना है, जिसके आधार पर मैं जो कह सकता हूं, वो यह है कि इस बार जो पेश किया गया है, वह दरअसल रेल बजट ही नहीं है। ये तो यह कहने जैसा है कि मैं चांद पर जाऊंगा। यह एक आइडिया है, एक सपना है लेकिन अहम यह है कि आप वहां पहुंचेंगे कैसे?यह भविष्य की बात है, लेकिन वर्तमान में आपके फंड में लगभग 50 फीसद की कमी है। आप इस अंतर को कैसे दूर करेंगे? इसमें ढेर सारे वादे किए गए हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख नहीं किया गया है। जिन परियोजनाओं की घोषणा की गई है, उनके लिए फंड कहां से आएगा, इसका उल्लेख नहीं है। कोई रोड मैप नहीं है। बिना रोड मैप के गंतव्य स्थल पर कैसे पहुंचा जा सकेगा? यह बजट भविष्य के लिए है। वर्तमान के...
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लिए इसमें कुछ भी नहीं है। मैं इस रेल बजट से निराश हूं।
परिचालन व्यय को कम करने की बात होनी चाहिए। रेलवे की परियोजनाओं व विस्तारीकरण के लिए पैसे कहां से आएंगे? विश्व बैंक, बांड्स व अन्य माध्यमों से धन जुटाने की निर्भरता कैसे कम होगी, इसका भी इसमें कहीं कोई जिक्र नहीं है। मैं रेलवे को एयर इंडिया की दिशा में बढ़ते देख रहा हूं। उसका कोष खाली है। सबसे पहले भारतीय रेलवे की नींव को मजबूत करने और यात्री सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है। अगर भारतीय रेलवे उस तरह से काम नहीं करेगी, जिस तरह से इसे करना चाहिए तो देश की अखंडता पर ही सवालिया निशान लग जाएगा।बुलेट ट्रेन एक अच्छी योजना है लेकिन 'एलिस इन वंडरलैंड' जैसी है।
बुलेट ट्रेन को एक किलोमीटर तक चलाने में लगभग 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। भारतीय रेलवे की मौजूदा हालत देखकर क्या इसे व्यावहारिक कहा जा सकता है? रेलवे हमारे देश की जीवन रेखा है। हमें इसकी देखभाल करनी होगी। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसके लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए।
मैंने हमेशा इस बात को माना है कि हमारी राजनीतिक व्यवस्था रेलवे की ताकत को समझ नहीं पाई है। राजनीतिक व्यवस्था इस आसान सी बात को भी नहीं समझ पाई है कि रेलवे देश के जीडीपी में 2.5 फीसद का योगदान कर सकता है। रेलवे के बिना मुद्रास्फीति को भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह माल को ढोने का भी काम करती है। रेलवे हमारी आधारभूत संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कांग्रेस नेता और पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने कहा कि इस रेल बजट से उन्हें निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार यह कह कर अपना पीठ तपथपाना चाह रही है कि रेल भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गई है लेकिन यह कहकर आम जनता से धोखा किया जा रहा है। जब हमने रेल बजट पेश किया था उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की जो कीमत थी अब आधी रह गई है। इसे देखते हुए रेल भाड़े में कमी की जानी चाहिए थी।
कांग्रेस के राजीव शुक्ला, जयप्रकाश जायसवाल ने भी रेल बजट की आलोचना करते हुए इसे निराशाजनक बताया है। इन लोगों का कहना है कि इसमें जो घोषणाएं हुई है उसपर भी कोई अमल नहीं होने वाला। बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रेल बजट को आंखों में धूल झोंकने वाला बताया है।
इसी तरह से आम जनता भी इस रेल बजट से संशय की स्थित में हैं। बजट में कोई नए ट्रेन की घोषणा नहीं की गई है। साथ ही सुरक्षा को लेकर भी कोई खास घोषणा नहीं की गई है। लोगों का कहना है कि बजट में घोषणाएं तो हर बार होती है लेकिन उस पर अमल नहीं होता। इस लिए हमने सरकार से उम्मीद करनी ही छोड़ दी है। टिकटों को लेकर परेशान लोगों ने कहा कि इस समस्या को लेकर कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है।
ट्रेनों आैर स्टेशनों पर साफ सफाई के बारे में घोषणाएं तो की गई है लेकिन लोग इसे लेकर कोई खास उत्साहित नहीं हैं। उनका मानना है कि जब कुछ होगा तभी हम विश्वास कर सकते हैं। क्योंकि इतने सालों में अबतक तो कुछ नहीं हुआ। रेल बजट में जो घोषणाएं की गई है उनपर कितना अमल होता है यह तो समय ही बताएगा।
  
Yesterday (12:56PM)  Railway Budget 2015: Will increase track capacity by 10% to 1.38 lakh km, says Suresh Prabhu (economictimes.indiatimes.com)
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Rail Budget

News Entry# 214102     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
Stating that Railways will go through transformation in five years, Rail Minister Suresh Prabhu in his budget speech said, "We will increase track capacity by 10 per cent to 1.38 lakh km." Prabhu said that Rs 8.5 lakh crore will be invested in Railways over 5 years. Stating that Railways has to keep a tighter control on costs, Prabhu said, "Railways will be able to raise finances via SPVs, partnerships."
Stressing on the need to work towards PM Narendra Modi's 'Swachh Bharat' drive, Prabhu in his budget speech said, "17,000 more toilets will be replaced by bio-toilets."
"We will make cleanliness a major initiative. We will engage private agencies & set up waste-to-energy conversion plants," Prabhu said.
Outlining his vision
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for Indian Railways, Suresh Prabhu in his budget speech talked about four main goals that PM Narendra Modi government will work on to get railways out ..
  
Yesterday (12:25PM)  Railway Budget 2015: Railways can play prime role in poverty elimination, says Suresh Prabhu (economictimes.indiatimes.com)
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Rail Budget

News Entry# 214100     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
Presenting his maiden Railway Budget, Rail Minister Suresh Prabhu on Thursday said that Railways can play a very important role in PM Narendra Modi's ambition of eliminating poverty from the country.
"I thank people for giving me this opportunity. PM challenged us when he talked about the need for about poverty elimination," Prabhu said. "This is an organisation that touches the heart of all Indians. Railways can play a prime role in PM's dream of eliminating poverty from India."
  
Feb 25 (10:23PM)  न बना वाशिंग पीट, न पूरा हुआ कारखाना (www.jagran.com)
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Rail BudgetECR/East Central  -  

News Entry# 213982     
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Feb 25 2015 (10:24PM)
Station Tag: Dauram Madhepura/DMH added by विश्व नाथ**/31233

Feb 25 2015 (10:24PM)
Station Tag: Madhupur Junction/MDP added by विश्व नाथ**/31233

Feb 25 2015 (10:24PM)
Station Tag: Saharsa Junction/SHC added by विश्व नाथ**/31233

Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
कोसी का इलाका रेल के क्षेत्र में काफी पिछड़ा है। एक तरफ देश में बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही है। वहीं दूसरी ओर कोसी में छोटी ट्रेन चलती है। बड़ी रेल लाइन 2005 में निर्माण होने के बाद आशा जगी की रेल क्षेत्र में कोसी का भी विकास होगा, परंतु नौ वर्षो के बाद भी स्थिति जस की तस बन हुई है। विगत छह वर्षो से वाशिंग पीट का निर्माणाधीन है। जिसके कारण ट्रेनों की मरम्मत तथा साफ-सफाई के लिए बरौनी भेजा जाता है। पिछले रेल बजट में कोसी के लिए अधूरी परियोजना हेतु कम ध्यान दिया गया। लेकिन इस बार रेल बजट से लोगों को काफी उम्मीदें है।
सहरसा-फारबिसगंज अमान परिवर्तन हेतु राशि उपलब्ध हो ताकि छोटी लाइन से लोगों को निजात मिले। मालूम हो कि विगत दो वर्षो से सहरसा-राघोपुर के बीच ट्रेन चलती है। जबकि फारबिसगंज
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से राघोपुर तक अमान परिवर्तन का कार्य काफी मंथर गति से किया जा रहा है।
मधेपुरा रेल कारखाना
मधेपुरा में प्रस्तावित रेल इंजन कारखाना की घोषणा भी आज तक अधर में है। जबकि इसके साथ छपरा में घोषित कारखाना का काम पूरा हो गया। इस बार रेल बजट में रेल इंजन कारखाना की पहल पर राशि मिलने की उम्मीद है।
लंबी दूरी के ट्रेन की उम्मीद
अमान परिवर्तन के नौ वर्षो के बाद भी देश के सभी महानगरों के लिए ट्रेन अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिसके कारण खगड़िया-मानसी तथा बरौनी-समस्तीपुर जाकर यहां के लोगों को लम्बी दूरी की ट्रेन पकड़ने में काफी दिक्कतें होती है। कोसी के लोगों को उम्मीद है सहरसा से मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता, दिल्ली के लिए नई ट्रेन मिले।
ट्रेनों का नियमितीकरण
पुरबिया, गरीब रथ, जनसाधारण, जानकी एक्सप्रेस ट्रेनों को साप्ताहिक के बदले प्रतिदिन चलाने तथा लंबी दूरी की ट्रेनों में पेंटीकार एवं सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता है।
रात्रिकालीन ट्रेन की मांग
लोगों को राजधानी जाने के लिए रात्रिकालीन ट्रेन चलाने की जरूरत है। जिसकी मांग बहुत दिनों से हो रही है।
रेल लाइन का विस्तार की मांग
जंक्शन स्थित मात्र तीन रेल लाइन पर 12 जोड़ी ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। जिसके कारण प्राय: ट्रेन लाइन के कारण विलंब से चलती है। रेल बजट में रेल ट्रैक का विस्तार की महती आवश्यकता है। ताकि नई ट्रेनों का परिचालन हो सके। रेल यात्रियों ने प्लेटफार्म पर साफ-सफाई, बिजली, पानी तथा सुरक्षा पर रेल बजट में लोगों ने उम्मीद बांध रखी है। बहुत जल्द कोसी क्षेत्र में रेल का विकास की संभावना जतायी गई है।
  
Feb 25 (10:01PM)  Govt to embark on rail investment splurge thanks to cheap oil (www.thehindubusinessline.com)
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Rail Budget

News Entry# 213979     
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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
India's decrepit state-run train services stand to receive at least a 25 per cent boost in investment to over $9 billion, funded solely by falling fuel costs, according to officials familiar with a railway budget set to be unveiled on Thursday.The world's fourth largest rail network could get even more if Prime Minister Narendra Modi makes it a priority, as China did during its rapid economic growth over the past two decades.There are high hopes that his nine-month-old government will plough money into investment in infrastructure needed to haul the economy out of a rut when it presents its first annual federal budget on Saturday.The separate rail budget - a relic of the country's British colonial past - could show how far Modi's India is prepared to drive investment in a vital transport sector."The fall in diesel prices and a pick-up in freight earnings have given us a golden chance...
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to raise investments," said one government official.Falling oil prices have saved billions of dollars in federal subsidy spending across the economy, but Finance Minister Arun Jaitley is under pressure to prevent the fiscal deficit from busting a target of 3.6 per cent of gross domestic product.
Railway Minister Suresh Prabhu, according to the officials, has factored in savings from cheaper diesel totalling between Rs. 12,000-15,000 crore ($1.9 billion-$2.4 billion) in the 2015/16 fiscal year, starting on April 1.
But, he has also asked the finance ministry for an extra Rs. 20,000 crore ($3.2 billion) to invest in track and rolling stock upgrades for a network used by some 25 million passenger each day.
He is unlikely to get that much, though one official with knowledge of the budget discussions expected a significant increase in federal funding for the railways.
In 2014/15, Rs. 45,450 crore ($7.30 billion) was budgeted for investment in the railway - with the government providing 66 per cent and the rest coming from internal resources.
INDIA'S BIGGEST EMPLOYER
An increase in the federal budget allocation would go some way to offset disappointment at the lack of private sector interest in investing in railways, after Modi's government last year suggested public-private partnerships for new routes.
As usual in India, lawmakers have made populist calls for the windfall from reduced diesel costs to be used to slash already heavily subsidised fares. But Prabhu is unlikely to pay much heed.
"There is no plan to cut passenger fares," a senior government official told Reuters.
At the same time, revenues from freight are expected to increase as the economy improves. Freight heavily subsidises passenger traffic in India, making it more expensive than road transport.
Providing jobs for 1.3 million people, the railway is India's largest single employer, and reform is politically sensitive. Successive governments have backed away from modernisation, preferring instead to use the system to provide cheap transport and jobs.
Years of under-investment, however, means services are slow and plagued by frequent accidents.
There are over 300 projects pending that need about Rs. 1.8 lakh crore ($28.91 billion), said the senior official.
But burdened by a rising wage bill and pensions, investment fell to less than 8 per cent of an estimated Rs. 1.61 lakh crore revenue in the current financial year, compared to 25 per cent seven years earlier.
  
Feb 25 (9:52PM)  रेल बजट में कई नयी योजनाएं पेश कर सकते हैं सुरेश प्रभु (www.prabhatkhabar.com)
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Rail Budget

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Posted by: विश्व नाथ**  2758 news posts  
रेलवे की वित्तीय खस्ताहाली के बीच रेल मंत्री सुरेश प्रभु कल अपना पहला बजट पेश करेंगे जिसमें किराये-भाड़े पर लोगों की नजर होगी साथ ही लोग यह भी देखेंगे कि बजट सेवाओं में सुधार, सुरक्षा और साफ सफाई के लिए क्या पहल की जा रही है. बजट में नई सरकार के 'मेक इन इंडिया' पहल से जुडे प्रस्ताव शामिल किए जाने की भी संभावना है.रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा डीजल के दाम में कमी के बावजूद किराये में कटौती की संभावना से इनकार कर चुके हैं, लेकिन प्रभु के समक्ष अपने बजट में रेलवे की आमदनी और भारी आवश्यकताओं के बीच संतुलन साधने की एक बडी चुनौती होगी.प्रभु माल-भाड़े को उंचा कर यात्री सेवाओं को सस्ता रखने की 'आडी सब्सिडी' को घटाने के बारे में योजना का खुलासा कर सकते हैं. रेलवे में आडी सब्सिडी 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी है. साथ ही वह माल भाड़े में वृद्धि या बिना...
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वृद्धि के वस्तुओं की कुल राष्ट्रीय ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढाने के लिये उपायोग की भी घोषणा कर सकते हैं.उल्लेखनीय है कि 2012-13 से पहले 10 साल तक रेल किराये में कोई वृद्धि नहीं हुई. तत्कालीन रेल मंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी ने 2012-13 में रेल किराये में वृद्धि की लेकिन बाद में द्वितीय तथा स्लीपर क्लास में की गयी वृद्धि को वापस ले लिया गया. उसके बाद रेल किराये में वृद्धि हो रही है. पिछले साल जुलाई में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के पहले रेल बजट में यात्री किराये और माल भाड़े में क्रमश: 14.92 प्रतिशत तथा 6.5 प्रतिशत की वृद्धि की गयी.हालांकि डीजल के दाम में कमी जरुर हुई लेकिन दूसरी तरफ बिजली की लागत चार प्रतिशत से अधिक बढी है जो ईंधन समायोजन लागत के लिये संतुलन का काम किया है. रेलवे 2013 से शुल्क समीक्षा नीति को अपना रहा है. रेलवे फिलहाल 1,57,883 करोड रपये मूल्य की 676 परियोजनाओं को मंजूरी मिली हुई है और इनमें से केवल 317 परियोजनाएं पूरी की जा सकती हैं और 359 परियोजनाओं के लिये 1,82,000 करोड रपये की जरुरत होगी.रेलवे को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने के लिये कोष की जरुरत है. ऐसे में एक सुधारक के रुप में पहचाने जाने वाले प्रभु रेलवे के लिये निजी निवेश आकर्षित करने को लेकर रुपरेखा प्रस्तुत कर सकते हैं. कोष की बाधाओं को देखते हुए वह नई ट्रेनों और परियोजनाओं की घोषणा को लेकर थोडा ठंडा रुख अपना सकते हैं.सूत्रों के अनुसार कोष का आबंटन केवल उन्हीं परियोजनाओं के लिये किया जाएगा जो रणनीतिक रुप से महत्वपूर्ण हैं. इसमें पूरा होने के करीब पहुंच चुकी महत्वपूर्ण नई रेल लाइन, डबल लाइन तथा रेल मार्ग का विद्युतीकरण शामिल हैं. वित्त वर्ष 2015-16 के लिये करीब 50,000 करोड रपये के सकल बजटीय समर्थन की मांग के अलावा रेलवे ने वित्त मंत्रालय से रेल सुरक्षा कोष के रुप में 20,000 करोड़ रपये की मांग की है ताकि मानव रहित रेलवे क्रासिंग को खत्म किया जा सके. देश में ट्रेन हादसों का यह एक प्रमुख कारण है.प्रभु राज्य सरकारों तथा अन्य बाहरी एजेंसियों को शामिल कर परियोजनाओं को पूरा करने के लिये संयुक्त उद्यम व्यवस्था की घोषणा करेंगे. रेल मंत्री ने किराये में वृद्धि से पहले यात्री सुविधाओं में सुधार पर जोर दिया हैं ऐसे में रेल परिसरों में यात्रियों के लिये सुविधाओं को बेहतर बनाने में सीएसआर (कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी) कोष के उपयोग समेत कई उपायों की घोषणा की जा सकती है.
प्रभु राजस्व बढाने पर ध्यान दे सकते हैं और संसाधन में इजाफा के लिये कुछ नये तरीकों की घोषणा कर सकते हैं. इसमें विज्ञापनों से आय प्राप्त करना तथा अतिरिक्त जमीन के उपयोग समेत अन्य गैर-शुल्क उपाय शामिल हैं. 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत रेल बजट में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिये जाने की संभावना है और इसके लिये सभी डिब्बों में कूडादान रखने के अलावा 100 और रेलगाडियों में ह्यचलती ट्रेन में साफ-सफाई की सुविधाह्ण का विस्तार किये जाने के प्रस्ताव जैसे उपाय किये जा सकते हैं.
'क्लीन ट्रेन स्टेशन स्कीम' के तहत ट्रेन और स्टेशनों पर जैव-शौचालय स्थापित किये जाएंगे. राजग सरकार के बुलेट ट्रेन के वादे को ध्यान में रखकर प्रभु मुंबई-अहमदाबाद के बीच महत्वकांक्षी तीव्र गति वाली ट्रेन परियोजना के लिये आगे के कदम की घोषणा कर सकते हैं. साथ ही प्रस्तावित हीरक चतुर्भुज मार्ग के लिये सर्वे कार्यक्रम का भी ऐलान किया जा सकता है.राजधानी और शताब्दी मार्गों पर यात्रा समय में कमी लाने के लिये बजट में बहु-प्रतीक्षित 20 ट्रेन खरीदने की योजना की भी घोषणा की जा सकती है. बजट में मोदी सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लिये रेलवे के चेन्नई कारखाने में उपयुक्त डिब्बों के विनिर्माण की योजना की भी घोषणा की जा सकती है.
100 स्टेशनों का फिर से विकास, बाजार परिसरों के निर्माण के लिये खाली जगहों का उपयोग तथा अन्य वाणिज्यिक परियोजनाओं के बारे में बजट में जिक्र किया जा सकता है. इंटर-सिटी सेवाओं में यात्रा को और आरामदायक बनाने के लिये 2015-16 के रेल बजट में एसी रैक शामिल किये जाने की भी घोषणा किये जाने की उम्मीद है.बजट में मेक इन इंडिया अभियान के तहत इंजन में लगने वाले क्रैंक शाफ्ट, अल्टरनेटर्स और फोर्जड व्हील्स जैसे उपकरणों के आयात के बजाए उसका देश में ही विनिर्माण का प्रस्ताव किया जाएगा. प्रभु रेलवे को शारीरिक रुप से नि:शक्त लोगों के लिये ज्यादा बेहतर बनाने के इरादे से कुछ उपायों की घोषणा कर सकते हैं. इसमें दृष्टिहीन यात्रियों के लिये सभी नये डिब्बों में ब्रेल निर्देशक लगाये जाने का प्रस्ताव शामिल है.
सूत्रों के अनुसार इस साल के रेल बजट में ग्राहकों की संतुष्टि पर विशेष जोर होगा. इसके तहत इंटर-सिटी सेवाओं के लिये डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (डेमू) ट्रेनों में एसी डिब्बे लगाया जाना तथा डीजल इंजन कैब्स में तेज आवाज में कमी लाने का प्रस्ताव किया जा सकता है. पूर्वोत्तर क्षेत्र में संपर्क बढाने के लिये प्रभु राष्ट्रीय परियोजना के रुप में इन क्षेत्रों के लिये डेमू सेवाओं की घोषणा कर सकते हैं.
रेलवे ने कमाई बढाने के लिये प्रीमियम ट्रेनें पेश की है. अब उपयोग के लिहाज से शौचालयों को ज्यादा बेहतर बनाने समेत डिब्बों को उन्नत बनाया जाएगा. इसके लिये नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन की सेवा ली जा सकती है. रेल बजट में आईटी सेवाओं के व्यापक उपयोग की भी घोषणा की जा सकती है. इसमें ट्रेनों के प्रबंधन समेत यात्रियों के लिये एप्स का विकास तथा रेल परिसरों में वाई-फाई सेवाएं देना शामिल हैं.बजट में सौर उर्जा समेत हरित उर्जा के उपयोग की भी घोषणा की जा सकती है. इसके अलावा जल शोधन संयंत्र समेत जल संरक्षण के उपायों की भी घोषणा किये जाने की उम्मीद है.
  
Feb 25 (9:48PM)  लीक से काफी हटकर होगा प्रभु का पहला रेल बजट (www.jagran.com)
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रेलमंत्री सुरेश प्रभु गुरुवार को लोकसभा में 2015-16 का रेल बजट पेश करेंगे। उनका प्रयास रेलवे को पुरानी जकड़न से मुक्त कर विकास व आधुनिकीकरण के फास्ट ट्रैक पर डालना और यात्रियों को सुरक्षित व सुविधाजनक सफर का अहसास कराने का होगा। यह प्रभु का पहला रेल बजट है।
लिहाजा उनसे किसी चमत्कार की उम्मीद उचित नहीं होगी। लेकिन वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई रेलवे के कायाकल्प की मुहिम को आगे बढ़ाने व मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश अवश्य करेंगे। इसके लिए किराये-भाड़े के प्रत्यक्ष रूट के बजाय फंड जुटाने के परोक्ष व नवोन्मेषी उपायों पर जोर रहेगा। बुधवार शाम रेल बजट को अंतिम रूप देते हुए प्रभु ने कहा भी, 'कठिनाई है, लेकिन उम्मीदों को पूरा करने की कोशिश करूंगा।'
प्रमुख सुधारों का होगा खाका
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रेल बजट में रेलवे के प्रशासनिक, प्रबंधकीय, प्रक्रियागत व नीतिगत सुधारों का खाका होगा। निर्माणाधीन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने, जरूरी नए प्रोजेक्टों के लिए संसाधनों का जुगाड़ करने व रेलवे को आधुनिक चेहरा देने के लिए निजी व विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के नवोन्मेषी उपाय भी झलकेंगे। बजट में कुछ हाईस्पीड व सेमी हाईस्पीड रेल परियोजनाओं के पीपीपी प्रमोटरों और वित्तपोषक एजेंसियों का ब्यौरा सामने आ सकता है।
यात्रियों के लिए होंगी सौगातें
रेल बजट में आम और खास दोनों तबकों के लिए सौगातें होंगी। इनमें संपन्न यात्री वर्ग के लिए स्टेशनों व ट्रेनों को आधुनिक व सुविधा संपन्न बनाने के उपाय होंगे। आम यात्रियों को सहज, सुलभ व किफायती यात्रा प्रदान करने के कदम उठाए जाएंगे। गरीबों के लिए ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों व ज्यादा साधारण दर्जे की बोगियों के इंतजाम संभव हैं। छात्रों, बेरोजगारों व महिलाओं के लिए रियायतों या सहूलियतें मिलने की संभावना है।
नई ट्रेनों व नई परियोजनाओं का एलान सीमित रहेगा। इसके बजाय ट्रेनों को समय पर व सुरक्षित ढंग से चलाने का प्रयास होगा। प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए आवंटन बढ़ेगा। राज्यों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास भी होंगे। नए प्रतिष्ठान खड़े करने व मौजूदा के विस्तार व स्टेशनों, लाइनों, कारखानों, पुलों, बोगियों, वैगनों को आधुनिक बनाने की योजनाएं होंगी।
लेवल क्रॉसिंग बड़ी चुनौती
संरक्षा व सुरक्षा पर प्रभु का संकल्प देखने लायक होगा, क्योंकि अब तक महज बातें हुई हैं। सबसे बड़ी चुनौती साढ़े बारह हजार लेवल क्रॉसिंगों पर ओवरब्रिज/अंडरब्रिज बनाने या चौकीदार तैनात करने की है। इसके लिए विशेष कोष का एलान हो सकता है। पुनर्गठन पर प्रभु का खासा जोर है। चर्चा है कि जोनों की संख्या भी घटाई-बढ़ाई जा सकती है।
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