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Today (15:56) बदलाव  / रेलवे के नए एलएचबी कोच में पालतू पशुओं को ले जाने पर लगा प्रतिबंध (www.bhaskar.com)
IR Affairs
NWR/North Western
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News Entry# 369125  Blog Entry# 4021104   
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Nov 19 2018 (15:56)
Station Tag: Jaipur Junction/JP added by SP Sharma~/1833693
Stations:  Jaipur Junction/JP  
अभी तक पुराने कोच वाली ट्रेनों में लगेज की रसीद बनाकर ले जा सकते हैं पशु-पक्षियों को 
Dainik Bhaskar
जयपुर। रेलवे का आधुनिकीकरण हो रहा है और ट्रेनों में एलएचबी कोच लगाए जा रहे हैं। जल्द ही सभी ट्रेनों के पुराने कोच बदल दिए जाएंगे। इससे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा बढ़ेगी, पर एलएचबी कोच वाली ट्रेनों में पालतू पशु-पक्षियों को ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि नए एलएचबी कोच में डॉग बॉक्स की सुविधा नहीं दी गई है।
पुरानी
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ट्रेनों में सुविधा मौजूद
इसलिए पालतू पशु-पक्षियों की बुकिंग भी नहीं होती है। पशु-पक्षियों को पुराने कोच वाली ट्रेनों में ले जाने की सुविधा मौजूद है। एलएचबी कोच को रेलवे का पार्सल विभाग “लाल कोच’ के रूप में पहचानता है। इसमें ट्रेन के पीछे पार्सल का डिब्बा और जनरेटर होता है। ट्रेन में यात्री अपने साथ पालतू पशु-पक्षियों को नहीं ले जा सकते हैं। इन्हें गार्ड केबिन में बने स्पेशल बॉक्स में रखा जाता है।
पशु-पक्षियों को ले जाने के लिए लगेज की रसीद बनवानी पड़ती है। रेलवे इसे लाइव स्टॉक के रूप में गिनता है। लाइव स्टॉक को अकेले नहीं ले जा सकते हैं, देखरेख के लिए एक व्यक्ति का होना जरूरी है। यात्रा के दौरान पशु-पक्षियों के भोजन-पानी की व्यवस्था और उन्हें कुछ हुआ तो उसकी जिम्मेदारी उसमें मौजूद यात्री की होती है।
पालतू पशु-पक्षियों की लगेज के रूप में बुक करता है
रेलवे यात्री का टिकट चेक करने के बाद पालतू पशु-पक्षियों की लगेज के रूप में बुकिंग करता है, लेकिन अब ट्रेनों में लग रहे नए एलएचबी कोच में पालतू पशु-पक्षियों को ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में पैट एनिमल ले जाने के लिए गार्ड के पास कोई जगह नहीं होती है। डॉग बॉक्स भी नहीं है।
प्रीमियम ट्रेनों में एसी कंपार्टमेंट बुक करवाना होगा
रेलवे ऐसी ट्रेनों में एक शर्त पर पशुओं को ले जाने की अनुमति देता है। डॉग ले जाने के लिए एसी फर्स्ट क्लास का पूरा कंपार्टमेंट बुक करवाना होगा, साथ में एक यात्री का होना भी जरूरी है। रेलवे ने इसके लिए निर्धारित वजन निर्धारित किया हुआ है। रेलवे में पशु-पक्षियों को पार्सल नहीं लगेज माना जाता है। पार्सल विभाग के अनुसार पशु या पक्षी के वजन के अनुसार 20, 30 और 40 किग्रा में किराया तय होता है। 
न्यूज : शिवांग चतुर्वेदी
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Today (14:06) अंग्रेजों ने जिस सुरंग से दौड़ाई थी रेल, 140 साल बाद उसके बगल में बने टनल से अब 120 किमी/घंटे की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेन (www.bhaskar.com)
New Facilities/Technology
SER/South Eastern
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News Entry# 369121  Blog Entry# 4020732   
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Nov 19 2018 (14:06)
Station Tag: Posoita/PST added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Nov 19 2018 (14:06)
Station Tag: Goilkera/GOL added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Nov 19 2018 (14:06)
Station Tag: Mahadevsal/MXW added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948
Stations:  Goilkera/GOL   Posoita/PST   Mahadevsal/MXW  
हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग पर चार साल में बना महादेवशाल टनल, 23 नवंबर को गुजरेगी पहली रेल 
जमशेदपुर. चक्रधरपुर रेल मंडल में रेलवे ने 140 साल बाद इतिहास दोहराया है। हावड़ा-मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर गोइलकेरा-पोसैता रेलखंड में 8.041 मीटर व्यास का टनल तैयार है। 23 नवंबर को स्पीड की ट्रायल होगी। देश के 50 प्रमुख प्रोजेक्टों में शामिल इस परियोजना की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय से होती थी। 1881 में ब्रिटिश सरकार ने इसी जगह पर रेल के लिए पहली बार सुरंग बनवाया था। तब यह बंगाल-नागपुर रेलवे का हिस्सा था और इसे सारंडा रेल सुरंग के नाम से जाना जाता है। इसमें ट्रेनें केवल 50 किमी/घंटे की रफ्तार से गुजरती हैं, लेकिन अब ट्रेन 120 किमी/घंटे की स्पीड से दौड़ेगी। चार साल में
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बने इस सुरंग को महादेवशाल टनल के नाम से जाना जाएगा। 23 नवंबर को इस टनल से पहली ट्रेन गुजरेगी।
इसलिए जरूरी था टनल
सामान ढुलाई को सुगम बनाने के लिए रेलवे ने फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की है। फ्रेट कॉरिडोर का सपना नए टनल के बिना पूरा नहीं हो सकता था। इसके निर्माण से ही देश की दो इस्पातनगरी जमशेदपुर और राउरकेला के बीच थर्ड लाइन का काम पूरा हो सकेगा। 
महादेव टनल से होकर डबल डेकर भी चलेगी
थर्ड रेल लाइन के लिए बनाई गई सुरंग का कुल व्यास 8.041 मीटर है। सुरंग से ओवर डिजाइन स्ट्रक्चर वाली कोई भी ट्रेन आसानी से गुजर सकेगी। आकार के कारण इसमें से डबल डेकर ट्रेन को भी चलाया जा सकेगा। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया गया है। अंग्रेजों के बनाए सारंडा सुरंग से ट्रेन 50 किमी/घंटे की स्पीड से गुजरती थीं।
  
Today (14:57) Railways to build 3,000-km wall to guard tracks, keep away people (www.msn.com)
IR Affairs
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News Entry# 369124  Blog Entry# 4020901   
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This is a new feature showing past edits to this News Post.
After the incident in Amritsar last month, when a train mowed down 60 people who had gathered on the tracks to watch a Ravan effigy being burnt at a Dussehra celebration, the Indian Railways has decided to build 3,000 km of walls to fence its tracks and ward off trespassers in residential areas. Railway Minister Piyush Goyal is learnt to have taken the decision days after the Amritsar mishap. The Railways has estimated that the project will cost about Rs 2,500 crore.
At a height of 2.7 metres, the RCC (reinforced cement concrete) walls will come up along railway tracks which are flanked by residential areas, in suburban as well as non-suburban areas.
“This
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will prevent trespassing as well as cattle straying into the tracks in areas which are vulnerable. The height is such that dumping waste on the track will also not be easy,” said Vishwesh Chaube, Railway Board Member (Engineering), who is finalising the project.
The Commission of Railway Safety stipulates that in order to obtain safety clearance for train speeds of 160 kmph, the railway tracks need to be fenced or walled. With more stretches set to get a speed upgrade, walls along tracks have become necessary and the decision is linked to that as well, said sources.
The boundary walls are also being planned at vulnerable areas along the Golden Quadrilateral and its diagonals.
Before the Amritsar incident, the zonal railways had chalked out plans to build 2,000 km of walls in some areas identified as problematic. A part of Budget 2018-19, these works, estimated to cost about Rs 650 crore, were being funded by the Rashtriya Rail Sanrakshana Kosh — the Rs 1 lakh crore special safety fund to be utilised in five years. Officials said tenders have already been floated, and are likely to be finalised by next month.
The fresh thrust after the Amritsar mishap is estimated to cover all vulnerable stretches in populated areas. “The new project is over and above what we have been working on this year,” said Chaube.
In the last three years, at least 49,790 people have been mowed down by trains — a large number of the accidents occurred in densely populated suburban areas. As per law, Railways treats these deaths as acts of trespassing and negligence on the part of road users.
The report of the high level safety review committee, headed by scientist Anil Kakodkar, had said that in the Mumbai suburban railway area, trespassing takes place mainly due to lack of barricading, fencing, absence of adequate number of pedestrian overbridges, reluctance to replace pedestrian level crossings with foot overbridges etc.
Following this, the Railways has been erecting walls and fences in short stretches, wherever necessary, but the exercise was largely a local-level endeavour. Adding to the transporter’s problem, residents have often objected to walls being constructed. In the past, when walls were constructed, bricks were pilfered and iron fences stolen.
In Amritsar, however, the boundary walls were not enough to keep away the people, who are reported to have scaled the walls for a better view. According to officials, many people entered the tracks from nearby level crossing as well.
Over 60 people were killed and 74 injured after a speeding train mowed down a crowd of Dussehra revelers, who had spilled over to railway tracks to witness the celebrations. The accident occurred at Joda Phatak near Amritsar in Punjab, India, on Oct. 19, 2018. Describing the accident as "heart-wrenching," Prime Minister Narendra Modi tweeted, "Extremely saddened by the train accident in Amritsar... Have asked officials to provide immediate assistance that is required."
  
Today (14:11) चाईबासा - मालुका स्टेशन के बीच रेल लाइन पर फिर मिली बुजुर्ग महिला की लाश (www.jagran.com)
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News Entry# 369123  Blog Entry# 4020748   
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Nov 19 2018 (14:11)
Station Tag: Maluka/MLKA added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Nov 19 2018 (14:11)
Station Tag: Chaibasa/CBSA added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948
Stations:  Chaibasa/CBSA   Maluka/MLKA  
संवाद सूत्र, जगन्नाथपुर : चाईबासा-मालुका रेल लाइन पर डेढ़ माह में तीन बुजुर्ग महिलाओं की लाश मिलने से सनसनी फैल गई है। रेल लाइन पर लगातार मिल रही लाशों की गुत्थी सुलझाने में पुलिस अभी तक नाकाम साबित हुई है। शुक्रवार को रेलवे किलोमीटर संख्या 35/9/11 उलिहातु के पास एक महिला की रेलवे ट्रेक पर लाश मिली है। लाश को कब्जे में लेकर रेल पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। रेलवे किलोमीटर संख्या 351 रेलवे लाईन के आसपास डेढ़ माह के अंदर यह तीसरी लाश मिली है। शुक्रवार को सुबह 6.30 बजे असिस्टेंट स्टेशन मास्टर को सुकरा फाटक के पास मालुका स्टेशन व उलिहातु के बीच रेंल पटरी के किनारे लाश पड़ी होने की सूचना ट्रेन चालक से मिली। उसके बाद रेल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के अनुसार ट्रेन की चपेट में आने से महिला का सिर सहित पैर बुरी तरह कट गया। लाश की...
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पहचान उलिहातु निवासी जुनाई ¨सकु (55 वर्ष) के रूप में की गई। सूचना पाकर मृत महिला के परिजन रेलवे पटरी के समीप पहुंचे। मृत महिला की पहचान उनके बड़े बेटे बीर¨सह ¨सकू ने की। बीर¨सह ¨सकू ने बताया कि उसकी मां जूनाई ¨सकु गुरुवार रात से घर से लापता थी। सुबह पता चला कि मां का शव रेलवे पटरी पर पड़ा है। मां की दिमागी हालत थोड़ी ठीक नहीं थी। जानकारी हो कि इसी रेल क्षेत्र में पहली लाश 4 अक्टूबर, दूसरी लाश 4 नवंबर को तथा तीसरी लाश 16 नवंबर को मिली है।
  
Today (14:09) कतरास - निचितपुर रेल लाइन पर फैसला 22 नवंबर को (www.prabhatkhabar.com)
New/Special Trains
ECR/East Central
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News Entry# 369122  Blog Entry# 4020743   
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Nov 19 2018 (14:09)
Station Tag: Ranchi Junction/RNC added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Nov 19 2018 (14:09)
Station Tag: Nichitpur/NPJE added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948

Nov 19 2018 (14:09)
Station Tag: Katrasgarh/KTH added by 12649⭐️ KSK ⭐️12650^~/1203948
धनबाद : कतरास-निचितपुर रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों के परिचालन को लेकर 22 नवंबर को फैसले की उम्मीद है. इस रेल खंड के निरीक्षण के लिए कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी राम कृपाल धनबाद आ रहे हैं. निरीक्षण के उपरांत वह निर्णय लेंगे की इस रेल खंड पर ट्रेन का परिचालन संभव है या नहीं. यदि सब कुछ ठीक रहा तो सीआरएस की अनुमति मिल जायेगी और उसके बाद ट्रेन का परिचालन शुरू हो जायेगा. निरीक्षण के दौरान धनबाद रेल मंडल प्रबंधक अनिल कुमार मिश्र सहित अन्य अधिकारी भी साथ होंगे. अब तक चलती थी मालगाड़ी कतरासगढ़-निचितपुर रेल मार्ग पर पिछले कई दशक से सिर्फ मालगाड़ियों का परिचालन ही होता था. इस कारण इस रेल मार्ग पर मंडल का ज्यादा ध्यान नहीं रहता था. लेकिन डीसी रेल लाइन बंद होने के बाद कतरास पूरी तरह से ट्रेन मार्ग से कट गया. ऐसे में कतरास को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए धनबाद रेल मंडल...
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ने इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों के परिचालन की पहल की और इसीआर जीएम से अनुमति मिल गयी. धनबाद रेल मंडल ने पिछले दो माह से इस रेल मार्ग पर युद्ध स्तर पर कार्य किया. रेलवे ट्रैक के साथ ही सिग्नल, केबल, ओवर हेड तार, पैनल सहित अन्य कार्य किये गये.  दिसंबर के अंत तक चलेगी मेमू ट्रेन डीआरएम अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि कतरासवासियों के लिए यह मार्ग वरदान साबित होगा. वहां की जनता को रांची के लिए मेमू ट्रेन मिल जायेगी. मेमू ट्रेन दिसंबर माह के अंत तक चलेगी, जो प्रतिदिन एक फेरा लगायेगी. यह ट्रेन गोमो होते हुए चंद्रपुरा जायेगी.  मेमू ट्रेन  में दोनों तरफ इंजन रहने के कारण गोमो में इंजन बदलने का झंझट नहीं रहेगा और ट्रेन नियमित चलेगी. रेल अधिकारियों ने बताया कि कतरास-निचितपुर रेल मार्ग पर मेमू ट्रेन के परिचालन होते ही निचितपुर हॉल्ट का कायाकल्प हो जायेगा. हॉल्ट के विस्तार के साथ अन्य सुविधाएं बहाल की जायेगी.
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