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Yesterday (22:36)  Activists threaten stir for express train halts at Mukundwadi station (
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News Entry# 332281   Blog Entry# 3229122     
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Aurangabad: After the demand for designated halts to certain express trains at Mukundwadi railway station has continuously gone unheard, railway activists, led by advocacy group Marathwada Railway Vikas Samiti, have threatened an agitation to highlight the demand.
They have sought stops for Jalna-Dadar Janshatabdi, Nanded-Mumbai Tapovan and Mumbai-Nagpur Nandigram express trains for the benefit of passengers.
Advocacy group founder Omprakash Varma, in a memorandum submitted before the South Central Railway (SCR), demanded halts to aforesaid express trains on a trial basis between May 1 and July 31.
the SCR authorities do not pay heed to our demand this time, we will agitate from next month. The railway administration’s apathy has been defeating the purpose of setting up an axillary ‘Mukundwadi’ railway station for Aurangabad. Few key trains must have designated halts,” he said on Thursday.
The ‘D’ category station, which was installed with the Passenger Reservation System (PRS) on April 10 last year, has reportedly seen high ticket sales every day. The increasing load has prompted these activists to raise their demand.
“The daily ticket sale at Mukundwadi is now pegged between Rs 60,000 and Rs 80,000. The sales even cross Rs 1 lakh-mark during festive seasons and vacation periods among other peak days. Needless to say, providing halts to Express trains at Mukundwadi station and revenue generation are linked with each other,” Varma said.
Thrown open to public on January 9, 2000, Mukundwadi railway station was envisaged as the rail facility that would serve northern and eastern parts of the city, including Cidco housing and urban development corporation, Harsul, Chikalthana, Mukundwadi, Pundalik Nagar, Jaybhavani Nagar, Kamgar Chowk, Garkheda and Thackeray Nagar along with nearby localities. Currently, only Marathwada Express and passenger trains make a stop at the Mukundwadi station.

Yesterday (22:40)
AurngabadPurnaAkolaNagpur~   800 blog posts   2 correct pred (33% accurate)
Re# 3229122-1            Tags   Past Edits
तपोवन नंदीग्राम और जनशताब्दी को औरंगाबाद के मुकुंद वाड़ी पर रोकना चाहिए
Yesterday (22:36)  Wait for Mysuru-Bengaluru suburban electric train service gets longer (
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News Entry# 332280     
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Work on transmission line from Yeliyuru substation to Tubinakere yet to commence The wait for intercity suburban electric train services on the Mysuru-Bengaluru section, which will benefit thousands of commuters, is set to get longer.
The work on the 220 kV transmission line from Yeliyuru substation to Tubinakere, a stretch of 4 km, is yet to commence though the Ministry of Railways deposited ₹13.09 crore to the Karnataka Power Transmission Ltd. (KPTCL) exactly a year ago. A letter dated March 23, 2017, written by the railway authorities to KPTCL, sought immediate commencement of the transmission line works by finalising the tenders. This would enable commission of electric traction and introduction of the Mainline Electric Multiple Unit (MEMU) services on the Bengaluru-Mysuru section.

The project entailed establishing railway traction substations to feed overhead electric traction in the section; at Bidadi, Yeliyuru and Mysuru. Though the railway was initially advised to execute the project on its own by KPTCL, it could not be completed as it is not the domain expertise of the railways. Hence it reverted to KPTCL, which has expertise in laying transmission line and it has now promised to expedite the process.
A senior official told The Hindu that 220 kV line was mandatory to operate MEMU services. Without this, only 1 or 2 trains can be operated at a point of time given the present electricity feed from the Bidadi substation. Once the Yeliyuru substation is connected with the 220 kV line at Tubinakere, there will be sufficient load to operate additional trains, he added.
The public is infuriated by the delayed response by KPTCL, a State government body. Incidentally, the project has been completed on a cost-sharing basis with the government chipping in 50% of the cost of electrification (about ₹220 crore).
Though the electrified lines have been commissioned and six pairs of long distance trains are now operational, railway authorities say MEMU services cannot be operated with the present power supply. “MEMU electric services has advantages like better acceleration and faster service,” said the official. “The Tubinakere power line will enable us to operate 6 pairs to 10 pairs of MEMU services,” he added.
Yesterday (22:35)  आरडीएसओ ने तैयार किया 12 हजार हार्स पावर का इंजन (
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New Facilities/TechnologyNR/Northern  -  

News Entry# 332279     
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Mar 22 2018 (22:35)
Station Tag: Lucknow Charbagh NR/LKO added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964
Stations:  Lucknow Charbagh NR/LKO  
डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक में तब्दील करेगा आरडीएसओ
लखनऊ। कार्यालय संवाददाता
एक्सप्रेस व मेल ट्रेनों के साथ आरडीएसओ मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ाएगा। आरडीएसओ ने 12 हजार हार्स पावर वाला इंजन तैयार कर लिया है। फिलहाल अभी एक ही इंजन बनाया गया है। जल्द ही इस ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। इन इंजनों को मालगाड़ियों में लगाया जाएगा।
रेलवे की कमाई का सबसे बड़ा
जरिया मालगाड़ियां है। मौजूदा मालगाड़ियों की रफ्तार 40 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक नहीं है। जानकारों की मानें तो मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ने से रेलवे की आमदानी में खासी बढ़ोत्तरी होगी। इसको लेकर आरडीएसओ ने काम शुरू कर दिया है। मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए आरडीएसओ ने 12 हजार हार्स पावर का इंजन तैयार कर लिया है। वहीं, रेलवे मालगाड़ियों के लिए एक अलग कारिडोर के निर्माण में लगा हुआ है। आरडीएसओ के महानिदेशक एम हुसैन ने बताया कि इंजन का ट्रायल जल्द शुरू किया जाएगा।
डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक में बदलेगा आरडीएसओ
रेल मंत्री ने 2022 तक सभी ट्रेनों में इलेक्ट्रिक इंजन लगाए जाने की बात कही है। इससे पहले से पटरियों पर दौड़ रहे डीजल इंजनों का भविष्य अंधेरे में आ गया था। आरडीएसओ ने डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक में तब्दील करने की तैयारी शुरू कर दी है। आरडीएसओ ने तीन हजार हार्स पावर के एक डीजल इंजन में ट्रांसफार्मर सहित कई उपकरण लगा कर उसको इलेक्ट्रिक इंजन में तब्दील किया है। आरडीएसओ के महानिदेशक एम हुसैन के अनुसार अभी डीजल इंजनों पर ईधन के रुप में रेलवे को 25 हजार करोड़ रुपए खर्च करना पड़ते हैं। इलेक्ट्रिक इंजन आने के बाद ये खर्च बहुत कम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि 3 हजार हार्स पावर वाले इंजन को इलेक्ट्रिक में बदला जा रहा है। उसका प्रोटोटाइप लगभग तैयार हो गया है।
Yesterday (22:34)  NextNext share GoogleTwitterFacebook दार्जिलिंग टॉय ट्रेन को किराये पर ले सकेंगे टॉय ट्रेन में नई वातानुकूलित बोगियां जोड़ी जाएंगी (
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Commentary/Human InterestNFR/Northeast Frontier  -  

News Entry# 332278     
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Mar 22 2018 (22:34)
Station Tag: Darjeeling/DJ added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964
Stations:  Darjeeling/DJ  
दार्जिलिंग टॉय ट्रेन को किराये पर ले सकेंगे
टॉय ट्रेन में नई वातानुकूलित बोगियां जोड़ी जाएंगी
Click here to enlarge image
सुकना (दार्जिलिंग) ’ एजेंसियांरेलवे एक सदी पुरानी दार्जिलिंग टॉय ट्रेन की भव्य विरासत में और चार चांद लगाने की तैयारी में है। रेलवे बोर्ड के मुताबिक टॉय ट्रेन सेवा के लिए पैकेज लाए जाएंगे और लोग ट्रेन को किराये पर भी ले सकते
हैं। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने कहा कि टॉय ट्रेन में नई तथा वातानुकूलित बोगियां जोड़ी जाएंगी। यह टॉय ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी के मैदानों से 2,000 मीटर की चढ़ाई करती है। लोहानी ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) हमारे लिए महत्वपूर्ण लाइन है। यह विश्व धरोहर है। हम इसकी महत्ता जानते हैं। यह दुनियाभर के पर्यटकों में मशहूर है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने पिछले साल गोरखालैंड आंदोलन के दौरान सोनादा और गयाबाड़ी स्टेशनों को पहुंचे नुकसान के बारे में कहा कि वह इनका निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहले डीएचआर को विश्व धरोहर का तमगा मिला था। उन्होंने कहा कि हम टॉय ट्रेन की भव्य विरासत को और बढ़ाएंगे। हम यह भी अध्ययन करेंगे कि इस लाइन में क्या कमी है और हम उसे सुधारने की कोशिश करेंगे। यूनेस्को ने वर्ष 1999 में डीएचआर को विश्व धरोहर का दर्जा दिया था। लोहानी ने कहा कि रेलवे भाप के इंजनों के पुनर्निर्माण पर जोर देगा जो पर्यटकों के बीच बहुत मशहूर थे। डीएचआर का निर्माण वर्ष 1879 से 1881 के बीच किया गया और यह करीब 88 किलोमीटर लंबा है।
मीटर की चढ़ाई करती है ट्रेन न्यू जलपाईगुड़ी के मैदानों से पहाड़ों पर
किलोमीटर लंबा है दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
Yesterday (22:33)  महंगे रेल टिकट पर मच्छर बने हमसफर, गोरखपुर से आनंदविहार तक जाने वाली लग्जरी ट्रेन (
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Other NewsNER/North Eastern  -  

News Entry# 332277     
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Mar 22 2018 (22:33)
Station Tag: Gorakhpur Junction/GKP added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964

Mar 22 2018 (22:33)
Station Tag: Gonda Junction/GD added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964

Mar 22 2018 (22:33)
Train Tag: Gorakhpur - Anand Vihar Terminal Humsafar Express (Via Basti)/12595 added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964

Mar 22 2018 (22:33)
Train Tag: Anand Vihar Terminal - Gorakhpur Humsafar Express (Via Basti)/12596 added by ☆अलविदा गोंडा मीटरगेज ■☆*^~/206964
ट्विटर पर हुई शिकायत के बाद हरकत में आया रेल प्रशासन
’ लग्जरी ट्रेनों में रेलवे की व्यवस्था की खुली पोल
आपको शायद एक बार सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा लेकिन रेलवे की सुविधाओं की पोल खोलने के लिए एक ये शिकायत ही काफी है। कहने को पूवरेत्तर रेलवे की प्रीमियम ट्रेन लेकिन सुविधा ऐसी कि आपको मंहगे रेल टिकट पर ट्रेन में मच्छरों का हमसफर बनना पड़ता है। हालांकि ट्विटर पर हुई शिकायत के बाद रेल प्रशासन हरकत में आया और यात्रियों की सुविधा के प्रति डीआरएम ने अपनी प्रतिबद्धता का आश्वासन
दिया है। आठ मार्च की देर रात लगभग साढ़े 12 बजे गोरखपुर से आनंदविहार तक जाने वाली 12595 हमसफर एक्सप्रेस में यात्र कर रहे सत्संग कुमार ने रेलवे के ट्विटर पर एक शिकायत की। लिखा कि इस ट्रेन के थर्ड एसी कोच पी1-बी 18 व 12 पर उनका रिजर्वेशन है। लेकिन इस कोच में बहुत मच्छर भरे पड़े हैं। उन्होंने साफतौर पर कहा कि क्या इसीलिए यात्री इतनी बड़ी राशि टिकट के लिए खर्च करते हैं। रेलवे से इस परेशानी यात्रियों को निजात दिलाने की मांग की। ट्विटर पर शिकायत मिलते ही रेल मंत्रलय हरकत में आया और पूवरेत्तर रेलवे लखनऊ की डीआरएम विजयलक्ष्मी कौशिक की ओर से अफसरों को जरूरी निर्देश दिये गये। बता दें कि हमसफर एक्सप्रेस को रेलवे की ओर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यात्रियों के लिए मुफीद एक लग्जरी ट्रेन के नाम पर चलाया जा रहा है। सप्ताह में अलग-अलग दिनों में यह अलग-अलग रूट से चलती है। पहले भी हुई कई शिकायतें : यह पहली बार नहीं है कि जब हमसफर जैसी स्पेशल और लग्जरी ट्रेनों में यात्रियों ने शिकायतें की हों। अधिकारियों और स्टाफ की लापरवाही की वजह से लगभग आये दिन तरह-तरह की शिकायत पोर्टल पर आती रहती है। इन ट्रेनों में होने वाली खाद्य पदार्थो की सप्लाई की गुणवत्ता पर भी कई बार सवाल उठाये जा चुके हैं।
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