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Yesterday (20:11) ट्रैक पर नहीं उतरी ऋषिकेश-बाड़मेर ट्रेन (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NER/North Eastern
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News Entry# 422808  Blog Entry# 4759369   
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Oct 26 2020 (20:11)
Station Tag: Haridwar/HW added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Haridwar/HW  
जागरण संवाददाता, हरिद्वार: त्योहारी सीजन में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे प्रशासन की ओर से नियमित ट्रेनों के अलावा 52 त्योहार स्पेशल ट्रेनों की भी घोषणा की गई है। इनमें देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से संचालित कई ट्रेन शामिल हैं। इन ट्रेनों में ऋषिकेश-बाड़मेर का संचालन 21 अक्टूबर से होना था, लेकिन पांच रोज बीतने के बाद भी इस ट्रेन का कुछ अता-पता नहीं है। मंडल कार्यालय से घोषणा के बाद भी ट्रेन का संचालन न होने से यात्रियों में भ्रम की स्थिति है।
कोरोना संक्रमण के चलते 24 मार्च से करीब सवा दो महीने के लिए ट्रेनों का संचालन बंद रहा था। एक जून से तीन स्पेशल जनशताब्दी देहरादून-नई दिल्ली, काठगोदाम और अमृतसर जनशताब्दी के संचालन से यात्रियों को
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फौरी राहत मिली। इधर, एक अक्टूबर से हरिद्वार-उदयपुर सिटी का संचालन होने से यात्रियों ने राहत महसूस की। इसके बाद देहरादून-नई दिल्ली शताब्दी और हरिद्वार-लोकमान्य तिलक टर्मिनस का संचालन शुरू हुआ। इन नियमित ट्रेनों के अलावा रेलवे प्रशासन की ओर से 52 त्योहार स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की गई है। इनमें देहरादून और हरिद्वार से संचालित चार ट्रेनें मसूरी, जबलपुर, बांद्रा-हरिद्वार और ऋषिकेश-बाड़मेर शामिल हैं। इनमें से तीन ट्रेनें तो संचालित हो गई हैं, लेकिन गाड़ी संख्या 4887 ऋषिकेश-बाड़मेर का अभी तक संचालन शुरू नहीं हुआ है। जबकि, इसका संचालन 21 अक्टूबर से नियत था।
वर्तमान में हरिद्वार से छह जोड़ी ट्रेनों का हो रहा संचालन: वर्तमान में हरिद्वार से छह जोड़ी और देहरादून से पांच जोड़ी ट्रेनों का संचालन हो रहा है। कोरोना से पहले यानि सामान्य दिनों में हरिद्वार से 43 जोड़ी ट्रेनों का संचालन होता था। इधर, हावड़ा रूट पर कोई भी ट्रेन न होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों की मुश्किलें बढ़नी तय है। छठ पूजा पर सिडकुल की औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कार्मिक बड़ी संख्या में घर जाते हैं। वरिष्ठ नागरिक सामाजिक संगठन समेत व्यापारिक संगठन भी हावड़ा रूट पर ट्रेनों के संचालन की मांग कर चुके हैं। इस रूट पर ट्रेन संचालन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है।
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पंजाब में किसानों के आंदोलन के चलते ऋषिकेश-बाड़मेर त्योहार स्पेशल का 21 अक्टूबर से संचालन शुरू नहीं हो पाया है। छह नवंबर से इस ट्रेन के संचालित होने की बात कही जा रही है। हावड़ा रूट पर ट्रेन संचालित किए जाने का मामला हायर लेवल का है।
दिनेश कुमार, स्टेशन अधीक्षक, हरिद्वार
Yesterday (20:10) ऊंचे रेलवे ट्रैक से बंटने नहीं देंगे शहर : विज (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
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News Entry# 422807  Blog Entry# 4759368   
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Oct 26 2020 (20:10)
Station Tag: Pathankot Junction/PTK added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Pathankot Junction/PTK  
जागरण संवाददाता, पठानकोट : शहर के बीचों-बीच से गुजरते रेलवे ट्रैक के ऊंचा होने के बाद पैदा हुई समस्या को लेकर स्थानीय विधायक भी आगे आ गए हैं। विधायक ने कहा कि रेलवे ट्रैक ऊंचा होने के कारण लोगों को जो समस्या आ रही है उससे वह भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। लिहाजा, जैसे ही ट्रैक को ऊंचा करने का काम पूरा हो जाएगा उसके बाद सरकार के विशेष फंड से ट्रैक के दोनों और टाइलें लगवाकर इसका समाधान करवा दिया जाएगा।
बीती 17 अक्टूबर को पठानकोट रेलवे यार्ड से चक्की क्वारी तक ट्रैक को ऊंचा किए जाने के कारण पैदा हुई समस्याओं पर फोकस करते हुए दैनिक जागरण ने रेलवे ट्रैक किया ऊंचा, दो भागों में बंटी शहर की एक
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तिहाई आबादी शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद मोहल्ला निवासियों ने विधायक अमित विज को समस्या संबंधी अवगत करवाया था। विधायक ने समस्या का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री को इससे अवगत करवाते हुए विशेष फंड की मांग की।
विधायक अमित विज ने कहा कि पठानकोट-चक्की क्वारी रेलवे ट्रैक का काम पूरा होते ही इसके साथ इंटरलाकिग टाइलें लगाई जाएंगी। यहां पर इस रेलवे लाइन की क्रासिग पड़ती है, वहां पर रैंप बनाए जाएंगे ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी पेश न आए। विधायक ने कहा कि कोरोना के शुरुआती दिनों में उक्त योजना को लेकर चार करोड़ रुपये के विशेष फंड की मांग की गई थी। लेकिन, कोरोना के चलते इसका काम बीच में ही रह गया। अब मुख्यमंत्री ने मांग को मंजूर कर लिया है और जल्द फंड रिलीज हो जाएगा। इसके बाद काम शुरू करवा दिया जाएगा। तब तक रेलवे ट्रैक को ऊंचा करने का काम पूरा हो जाएगा। रेलवे लाइन बनने के बाद यहां पर रेलवे के इलेक्ट्रिक पोल लगाने संबंधी कहा कि यहां पर कभी कभार ही मालगाड़ी आती है। इसलिए, यहां पर इलेक्ट्रिक पोल नहीं लगने दिए जाएंगे। इस संबंध में वह शीघ्र ही रेलवे विभाग के उच्चाधिकारियों से बात करेंगे।
नई दिल्ली ऑटो डेस्क। Anand Mahindra : महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने अपनी 'मेड इन इंडिया' बोलेरो पिकअप वैन को बांग्लादेश ले जाने के लिए भारतीय रेलवे के प्रयासों की सराहना की है। बता दें, बोलेरो को महाराष्ट्र के नवी मुंबई से ले जाकर बांग्लादेश के बेनापोल में उतारा गया है।
जिसके चलते आनंद महिंद्रा ने रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा पोस्ट किए गए एक ट्वीट को कैप्शन के साथ साझा करते हुए लिखा, "बंबइया बोलरो बांग्लादेश में बेनापोल जा रही है। मुझे यह सुनने में कफी अच्छा लगा। मुस्कुराती हुई आंखों और मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ भारतीय रेलवे का धन्यवाद ...।"
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ट्वीट में एक वीडियो को भी दिखाया गया था जिसमें एक बोलेरो पिक-अप वैन दिखाई दे रही थी इस वैन को ट्रेन के अंदर चलाया जा रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस ट्वीट में उल्लेख किया कि भारतीय रेलवे ने नवी मुंबई से कुल 87 पिक-अप वैन उतारे हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कैसे रेलवे देश से ऑटोमोबाइल के निर्यात को बढ़ावा दे रहा है। पीयूष गोयल ने लिखा "सुरक्षित, तेज और किफायती लॉजिस्टिक समाधान की पेशकश करते हुए रेलवे ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए एक पसंदीदा मोड के रूप में उभर रहा है।" 
Bambaiyya Boleros going to Benapole in Bangladesh. I like the sound of it. 😊 Thank you Indian Railways.... click here rel="nofollow
जानकारी के लिए बता दें, इस महीने की शुरुआत में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ऑटो उद्योग को वाहनों के ट्रांसपोर्ट के लिए रेल नेटवर्क का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उन्होंने कहा कि रेलवे का लक्ष्य ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट में 2021-22 के अंत तक 20 प्रतिशत और 2023-24 तक 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल करना है।
बताते चलें हाल के दिनों में किआ मोटर्स, मारुति सुजुकी और हुंडई जैसे ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने भी अपने वाहनों के लिए रेलवे को इस्तेमाल किया है। वहीं, इस साल अप्रैल से सितंबर तक रेलवे ने पिछले वर्ष 731 रेक के मुकाबले ऑटोमोबाइल की 836 रेक भरी हैं।
नई दिल्ली, आइएएनएस। कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाचार एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के कई हिस्सों में अनिश्चितकालीन 'किसान रेल रोको' (Kisan Rail Roko) आंदोलन ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) समेत कई राज्यों में मालगाड़ियों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है। 
बता दें कि पंजाब में किसान संसद से पारित विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसान संगठन इन कृषि कानूनों को रद करने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए उत्तर रेलवे ने कई यात्री ट्रेनों को भी रद
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कर दिया है। उत्तर रेलवे (Northern Railways) के मुताबिक, इससे अर्थव्‍यवस्‍था भी प्रभावित हो रही है। किसानों के आंदोलन के कारण माल ढुलाई ठप पड़ी हुई है। 
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार (Deepak Kumar) ने कहा कि मालगाड़ी सेवा ठप पड़ने के साथ ग्राहक को आश्‍वस्‍त करना मुश्किल है कि उनका माल समय पर उनके गंतव्य स्थान तक पहुंच जाएगा। किसान आंदोलन के चलते मालगाड़ी सेवा ठप पड़ने से कोयला, सीमेंट, उर्वरक और कंटेनरों का परिवहन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। आंदोलन के चलते कई दूसरी ट्रेनें भी प्रभावित हुई हैं। 
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर रेलवे औसतन प्रतिदिन पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करते हुए लगभग 50 से 70 मालगाड़ियों का संचालन करता है। यही कारण है कि किसान आंदोलन के चलते इन राज्‍यों में माल ढुलाई प्रभावित हुई है।
बीते छह अक्‍टूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से अपना रेल रोको आंदोलन और रेल ट्रैकों पर धरना प्रदर्शन को बंद करने की गुजारिश की थी। उन्‍होंने कहा था कि रेल रोको आंदोलन के कारण राज्य में कोयले, यूरिया और डीएपी भारी कमी हो गई है। यही नहीं थर्मल प्लांटों के पास कोयले का भंडार भी कम हो गया है। इससे राज्‍य में बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। यही नहीं धान के सीजन के बावजूद अनाज दूसरे राज्यों को न भेजे जाने की वजह से गोदाम भी खाली नहीं हो पा रहे हैं।
Yesterday (20:05) Jammu Railways: आठ माह से बंद रेल यातायात बहाल ना होने से भीख मांगने को मजबूर हुए हजारों परिवार (m.jagran.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
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News Entry# 422804  Blog Entry# 4759365   
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Oct 26 2020 (20:05)
Station Tag: Jammu Tawi/JAT added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Jammu Tawi/JAT  
जम्मू, जागरण संवाददाता: बीते आठ माह से जम्मू में रेलवे यातायात बहाल ना होने से हजारों रुपयों के आगे पेट की भूख को शांत करना चुनौती बन गया हैं। जम्मू रेलवे स्टेशन पर तीन सौ से अधिक टैक्सी, इतनी ही संख्या में सवारी आटो चलते हैं। इसके अलावा मंगल मार्केट, शिव मार्केट और रेलवे मार्केट में भी सैंकड़ों दुकानों हैं, जिनमें हजारों की संख्या में लोग काम करते हैं। इसके साथ दो सौ से अधिक कुली भी रेलगाड़ियों के संचालन पर आश्रित हैं। पहले कोरोना और अब किसान आंदोलन के चलते इन जम्मू में रेल यातायात बहाल नहीं हो पाया हैं।
सोमवार को रेलवे स्टेशन में काम करने वाले दुकानदारों, श्रमिकों और ट्रांसपोर्टरों के समर्थन में नेशनल पैंथर्स ट्रेड यूनियन सामने आई। यूनियन
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के सदस्यों ने जम्मू रेलवे प्रबंधन से भेंट कर रेलमंत्री को ज्ञापन सौंपा। ट्रेड यूनियन के जिला प्रधान मनोज कुमार ने बताया कि रेल प्रबंधन के अनुसार जम्मू में रेल यातायात को पहले की तरह बहाल करने के लिए जिला आयुक्त जम्मू की इजाजत जरूरी हैं। जिला आयुक्त द्वारा अनुमति मिलने के बाद हीं रेल यातायात पहले की तरह बहाल हो सकती हैं। मनोज ने कहाकि भारत में सबसे अधिक कोरोना संक्रमण के मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं, लेकिन वहां रेल यातायात पूरी तरह से बहाल हो गया हैं। इसके बाद बिहार में भी कोरोना के कई मामले थे, वहां भी भारतीय रेलवे ने यातायात बहाल कर दिया हैं।
जम्मू में ऐसा क्या है कि रेलगाड़ियों का संचालन नहीं हो पा रहा। वहीं, उन्होंने केन्द्रीय सरकार की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहाकि एक माह से पंजाब में जारी किसान आंदोलन के चलते रेल यातायात बंद हैं। एक माह बीतने के बावजूद रेल ट्रैक के ना खुलवा पाना से सरकार की कमजोरी साफ नजर आ रही हैं। उन्होंने ज्ञापन में रेल यातायात को शीघ्र बहाल करने, रेल यातायात बंद होने से पीडित लोगों को मुआवजा देने और रेलवे स्टेशन के भीतर सभी प्रवेश करने देने की मांग रेलमंत्री और प्रदेश सरकार से की।
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