News Super Search
 ♦ 
×
Member:
Posting Date From:
Posting Date To:
Category:
Zone:
Language:
IR Press Release:

Search
  Go  
Full Site Search
  Search  
 
Tue Jul 25, 2017 02:21:19 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Tue Jul 25, 2017 02:21:19 IST
Advanced Search
Trains in the News    Stations in the News   
<<prev entry    next entry>>
News Entry# 288700
  
Dec 15 2016 (13:05)  अब एक पटरी पर नहीं आएंगी दो ट्रेनें (naidunia.jagran.com)
back to top
New Facilities/TechnologyECR/East Central  -  

News Entry# 288700     
   Tags   Past Edits
This is a new feature showing past edits to this News Post.

Posted by: धनबाद मंडल के बिना ECR बेकार है*^~  409 news posts
टे्रनों के सुरक्षित परिचालन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। एक स्टेशन से खुलते ही दूसरे स्टेशन को तत्काल सूचना देनी पड़ती है। लेटलतीफी की यह भी एक वजह है। इसकी रोकथाम के लिए व्यस्ततम रूट में शुमार हावड़ा-नई दिल्ली रेलमार्ग के ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन को डिजिटल सिग्नल सिस्टम से लैस किया गया है।
इस सिस्टम से अब बस एक बटन दबाते ही न केवल सिग्नल ग्रीन होगा, बल्कि अगले स्टेशन को टे्रन आगमन की जानकारी भी मिल जाएगी। कई बार मानवीय भूल के कारण एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आ जाती हैं। मगर यूनिवर्सल फेलसेफ ब्लॉक इंटरफेस (यूएफएसबीआई) से अब इसकी संभावना भी शून्य होगी। पहले चरण में धनबाद रेल मंडल के प्रधानखंता से मानपुर तक यह व्यवस्था बहाल
...
more...
की गई है।
अगले चरण में धनबाद (झारखंड) से सिंगरौली तक फैले सीआइसी सेक्शन को यूएफएसबीआई से लैस किया जाएगा। इसकी मंजूरी रेलवे बोर्ड ने दे दी है। यूएफएसबीआई एक ऐसा उपकरण है जो रेलगाड़ी के पहिये गिनने में सक्षम है। यह पटरी पर दौड़ने वाली यात्री ट्रेन या मालगाड़ी के कुल पहियों की संख्या गिन लेगा।
एक स्टेशन से खुलने के बाद दूसरे तक सभी पहिये पहुंचे या नहीं इसकी भी जानकारी दे देगा। अब अगर उसी पटरी पर दूसरी टे्रन आ गई तो इस उपकरण की मदद से स्टेशन मास्टर को तत्काल इसकी जानकारी मिल जाएगी। कई बार मालगाड़ी की कप्लिंग टूट जाने से डिब्बे दो हिस्से में बंट जाते हैं।
ऐसी घटनाओं के दौरान भी यूएफएसबीआई की मदद ली जा सकेगी क्योंकि रास्ते में डिब्बे अलग होने से अगले स्टेशन तक कम पहिये ही पहुंचेंगे, जिसकी जानकारी मिल सकेगी। इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि अगले स्टेशन पर लाइन क्लीयर होने की जानकारी नहीं लेनी होगी। सिग्नल लोअर यानी ग्रीन तभी होगा जब अगले स्टेशन पर लाइन क्लीयर होगी।
Scroll to Top
Scroll to Bottom


Go to Mobile site
Disclaimer: This website has NO affiliation with the Government-run site of Indian Railways. This site does NOT claim 100% accuracy of fast-changing Rail Information. YOU are responsible for independently confirming the validity of information through other sources.