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News Entry# 381008
  
Apr 22 (19:29) 130 साल बाद फिरंगी छाया से मुक्त हुआ कोटद्वार रेल स्टेशन, पढ़िए पूरी खबर (m.jagran.com)
New Facilities/Technology
NR/Northern
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News Entry# 381008  Blog Entry# 4298666   
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Apr 22 2019 (19:29)
Station Tag: Najibabad Junction/NBD added by Sp Sharma^~/1833693

Apr 22 2019 (19:29)
Station Tag: Kotdwar/KTW added by Sp Sharma^~/1833693
Stations:  Najibabad Junction/NBD   Kotdwar/KTW  
कोटद्वार, अजय खंतवाल। आखिरकार कोटद्वार रेलवे स्टेशन फिरंगी छाया से पूरी तरह मुक्त हो ही गया। अंग्रेजी शासनकाल में स्थापित इस रेलवे स्टेशन में अभी तक रेल का संचालन अंग्रेजों की ओर से स्थापित ढिबरी (चिमनी) व्यवस्था से होता आ रहा है। लेकिन, अब रेल महकमे ने स्टेशन को अंग्रेजों की इस व्यवस्था से आजाद करते हुए यहां पर ऑटोमेटिक सिग्नल लगाने का कार्य शुरू कर दिया है। 
कोटद्वार रेलवे स्टेशन अंग्रेजी शासनकाल के दौरान वर्ष 1889-90 में स्थापित हुआ था। 130 साल के इस लंबे कालखंड में कोटद्वार शहर ने कई बदलाव देखे, लेकिन रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाएं जहां की तहां चलती रहीं। हालांकि, कहने को वर्ष 2002-03 में इस स्टेशन को 'मॉडल' स्टेशन में तब्दील करने के लिए एक करोड़
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की धनराशि स्वीकृत हुई। लेकिन, इस धनराशि से ले-देकर स्टेशन में लग पाया एक अदद 'अप्पू'। वर्ष 2010 में इस स्टेशन को 'आदर्श' स्टेशन के रूप में विकसित करने की बात चली, लेकिन तस्वीर फिर भी नहीं बदली। अलबत्ता! 'आदर्श' के नाम पर कुछ भवनों का रंग-रोगन और कुछ नवनिर्माण जरूर हुए, लेकिन न तो पटरियों की सुध ली गई, न ही यात्रियों की ही। 
ऐसे होता है ट्रेन का संचालन
रेलवे के इस 'मॉडल-आदर्श' रेलवे स्टेशन में अभी तक ट्रेन सिग्नल कैरोसिन (मिट्टी तेल) से जलने वाली 'ढिबरी' से ही संचालित होते हैं। कर्मचारी सिग्नल पोस्टों पर लगे बॉक्स के भीतर 'ढिबरी' जलाकर रख देते हैं। जब रेल रोकनी हो तो पटरी के किनारे लगे लीवर को खींचकर 'लाल' सिग्नल ढिबरी के आगे कर दिया जाता है। इसी तरह रेल को रवाना करते वक्त लीवर छोड़ते ही 'हरा' सिग्नल ढिबरी के आगे आ जाता है।
अपग्रेड हुआ ट्रैक, ऑटोमेटिक हुए सिग्नल
उत्तर रेलवे की ओर से नजीबाबाद-कोटद्वार के मध्य रेल ट्रैक पर जल्द ही इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाए जाने की तैयारी है। इसके लिए ट्रैक की मरम्मत कर पूरे ट्रैक पर विद्युत लाइन भी बिछा दी गई है। साथ ही कोटद्वार-नजीबाबाद के मध्य अंग्रेजों के जमाने में लगे सिग्नलों को बदलकर उनके स्थान पर नए ऑटोमेटिक सिग्नल लगाए जा रहे हैं। 
बोले स्‍टेशन मास्‍टर
आशीष बिष्ट (स्टेशन मास्टर, कोटद्वार रेलवे स्टेशन) का कहना है कि ट्रैक को अपग्रेड किया जा रहा है। इसी क्रम में पुराने सिग्नल को हटाकर नई ऑटोमेटिक सिग्नल प्रणाली भी लगाई जा रही है। नई प्रणाली से कर्मियों को काफी फायदा होगा।
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