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जिंदगी में शादी के अलावा ट्रेन में RAC ही एक ऐसी स्थिति है,जिसमें दो अजनबी साथ निभाने को मजबूर होते है। - Junaid

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Mon Jul 22 00:31:51 IST
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News Entry# 385023
  
बनारस वही जगह है जहां अपने पिछले कार्यकाल में पीएम नरेंद्र मोदी ने एक सभा में भारतीय रेलवे को न बेचने की क़सम खाई थी।
हालांकि उसके बाद भी मोदी-1 सरकार पर्दे के पीछे रेलवे को टुकड़ों टुकड़ों में बेचने की कार्रवाई जारी रखे रही।
बंपर जीत के बाद सत्ता पर दोबारा काबिज़ हुई मोदी-2 सरकार ने शपथग्रहण के एक पखवाड़े में ही बनारस के डीरेका समेत 7 रेलवे कारखानों को निगम बनाने के बहाने निजी हाथों में देने की कोशिश शुरू हो गई है।
ख़बर
...
more...
के अनुसार, मोदी सरकार वाराणसी के डीरेका समेत रेलवे के सात कारखानों को निगम बनाने का फैसला कर लिया है।
दोबारा पीएम बनने के तुरंत बाद ही नरेंद्र मोदी ने सभी सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में देने के लिए 100 दिन का एक्शन प्लान दे दिया है।
रेलवे बोर्ड ने 18 जून को अगले 100 दिन के एक्शन प्लान में अपनी सभी प्रोडक्शन यूनिटों को एक कंपनी बनाकर उसके अधीन करने का प्रस्ताव दिया है।
निजी लाभ पर रहेगा ध्यान
प्लान के मुताबिक, सभी उत्पादन इकाईयां निजी लाभ के आधार पर कामकरेंगी।
इन सातों कारखानों को भारतीय रेलवे की नई इकाई इंडियन रेलवे रोलिंग स्टॉक कंपनी के अंडर लाया जाएगा, जिसका मैनेजिंग डायरेक्टर अलग होगा।
इस योजना के तहत रायबरेली के माडर्न कोच फैक्ट्री का भी निगमीकरण किया जाएगा।
जिन प्रोडक्शन यूनिटों को निगम बनाए जाने हैं, उनमें हैं- चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स आसनसोल, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, डीजल रेल इंजन कारखाना वाराणसी, डीजल माडर्नाइजेशन वर्क्स पटियाला, व्हील एंड एक्सल प्लांट बेंगलुरु, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला
और माडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली।
लागू होगी ठेकाप्रथा
अभी तक इन उत्पादन इकाईयों के कर्मचारी भारतीय रेलवे के केंद्रीय कर्मचारी हैं और उनपर रेल सेवा अधिनियम लागू होता है। इन कर्मचारियों को केंद्र सरकार की सुविधाएं मिलती हैं। जीएम ही पूरी यूनिट के लिए ज़िम्मेदार होते हैं।
निगमीकरण के बाद ग्रुप सी और डी का कोई भी कर्मचारी भारतीय रेलवे का हिस्सा नहीं होगा।
ग्रुप सी और ग्रुप डी के कर्मचारी निगम के कर्मचारी हो जाएंगे जिनपर रेल सेवा अधिनियम लागू नहीं होगा और कांट्रैक्ट पर कर्मचारी रखे जाएंगे।
कर्मचारियों को केंद्रीय सरकार की सुविधाएं नहीं मिलेंगी, सेवा शर्ते भी बदल जाएंगी।
इसे लागू करने के पीछे सरकार का तर्क है कि निगमों पर सरकार की ज्यादा जिम्मेदारी नहीं होगी और उन्हें अपना खर्च खुद जुटाना होगा।
जरूरत पड़ने पर सरकार फंड का इंतजाम करेगी लेकिन आयात या निर्यात के लिए रेलवे बोर्ड पर नई कंपनी निर्भर नहीं रहेगी।
पीएम ने निगम न बनाने का किया था वादा
लेकिन कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों का कहना है कि जिन इकाइयों के पास ज्यादा जमीन और करोड़ों की मशीनें हैं उनका निगमीकरण किया जा रहा है।
ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी और ठेके पर भर्तियां होंगी।
कर्मचारियों को किसी भी तरह की सरकारी सुविधा नहीं मिलेगी। स्वायत्तता देने के नाम पर निगम को घाटे में दिखाया जाएगा और फिर धीरे से निजी कंपनियों को उन्हें बेच दिया जाएगा।
बनारस के डीरेका कर्मचारी परिषद के संयुक्त सचिव वीडी दुबे ने जीएम रश्मि गोयल के नाम को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।
उत्पादन इकाइयों के निगमीकरण के प्रस्ताव से कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। डीरेका में करीब 6000 कर्मचारी हैं।
चिट्ठी में कहा गया है कि डीरेका के विस्तारीकरण का शिलान्यास करते हुए खुद प्रधानमंत्री मोदी ने इसके निगमीकरण से इनकार किया था

1 Public Posts - Mon Jun 24, 2019

45 Public Posts - Tue Jun 25, 2019

  
422 views
Jun 25 (16:55)
kedarc68   181 blog posts
Re# 4350980-51            Tags   Past Edits
BSNL is a classic case. It had monopoly for decades. It laid millions of km of telephone cable, erected thousands of mobile towers, and later optical fibers. It also employed huge number of employees to look after the network. The service it offered was at best bad, worse in most cases. With invasion of private players and mobiles, BSNL started losing customers and has kept losing them till now. Now whatever income comes in isn't enough to just pay salaries to the staff and pensions to ex-employees and their nominees. For paying salaries, it hasn't paid its suppliers for months. It also has some loans. It never thought to upgrade to 4G (never had the money, and no one wants to give loans to it) while government plans to roll out 5G in this fiscal. Last week only, it asked the government to infuse some money so it can pay this...
more...
month's salaries and pensions. It is in fact in ICU. It may close down.

  
415 views
Jun 25 (17:05)
Ratnakar^~   5989 blog posts   4590 correct pred (85% accurate)
Re# 4350980-52            Tags   Past Edits
Bsnl's main cause of failure is its lazy/arrogant employees. When one complained it took a lot of time to act upon it and if reminded customer was simply chided off. There was too much of this 'chalta hai' attitude. Here is what the private players took advantage of. Their customers also had problems but they solved it quickly. Bsnl was cheap, network was OK but still went to loss, why? Because of its employees attitude who took their job for granted and did not paid any heed to customer satisfaction. And when they started improving they were way behind the rival companies like vodafone and airtel. And with arrival of jio to even these private players losed their customers.

  
357 views
Jun 26 (12:24)
® राहुल जैन ™18 🚅🚃🚃🚃🚃🚃🚃🚃🚃🚃🛌 ☺ Chai Wal*^~   15010 blog posts   14940 correct pred (63% accurate)
Re# 4350980-53            Tags   Past Edits
kai bar counter pe jhagda kia ki ticket dete jaldi jaldi train khadi hai
aur waha madam dhire dhire ticket kaat rahi hai aur mere no aaya to uthke nikal leti
phirr bahar machine lag gayi ek banda bula bula k ticket deta hai aur ab online ho gaya
ab soacho kitni sarkari naukari aane se pahle he mar gayi
isiliye
...
more...
ye sarkar se gussa hai

  
Jun 26 (12:31)
Softwares Cafe^~   78173 blog posts   47630 correct pred (79% accurate)
Re# 4350980-54            Tags   Past Edits
Bhai population control krle to sb problem solve ho jae
.
Dusri baat
For the ease technology use krni pdti h
Is tarah to kbi aage hi nhi badh paenge
2
...
more...
hi kaam ho skte h
Sbko aaram wali naukriya dede
Ya phir development ki demand bnd krde
.
Sb problem ka main kad h ki population jyda h demand jyda h
But fullfill koi nhi kr skta
.
China ka example nhi lia ja skta kuki vha communist h
Unhone 1 child policy laga di
India me 2 child b laga doge to religion ka mudda utha denge jo dharam ka theka liye AC me bethe h.
.
Isly India me jo chl rha h chlne do
Koi kuch nhi kr skta jb tk koi bada step nhi kia ja skta
Opposition bolt ah naukri nhi h jb unse pucho aap kese naukri doge to bolte h jo sarkair naukri khali pdi h usde bharenge
.
See 2 crore se jyda ki demand h aur sarkair naukri h 10-12 lakh mushkil se
.
Solution kisi k pass nhi h
Kuki iska solution sirf population control h
6-7 saal me hm sbse aage honge
Itne logo ka demand kese pura krenge ye govt aur bhagwan jane

  
218 views
Jun 28 (02:27)
WR BRC Rules~   257 blog posts   175 correct pred (64% accurate)
Re# 4350980-55            Tags   Past Edits
Sahi pakde hai
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