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Shabdbhedi Express: गति इसकी शब्दों को भेदती है, पूरब को पूर्वांचल से जोड़ती है - Dr. Abhishek Rai

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News Entry# 393191
  
Oct 14 (01:31) निजी नहीं, कॉरपोरेट ट्रेन है तेजस (www.amarujala.com)
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News Entry# 393191  Blog Entry# 4457623   
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Oct 14 2019 (15:05)
Station Tag: Lucknow Charbagh NR/LKO added by Sp Sharma^~/1833693

Oct 14 2019 (15:05)
Train Tag: Lucknow Jn. - New Delhi IRCTC Tejas Express/82501 added by Sp Sharma^~/1833693

Oct 14 2019 (15:05)
Train Tag: Gomti Express/12419 added by Sp Sharma^~/1833693
लखनऊ। ट्रेन रेलवे की। ट्रैक रेलवे का। स्टाफ रेलवे का और यहां तक कि तेजस एक्सप्रेस का संचालन कर रही आईआरसीटीसी भी रेलवे का ही अंग है। फिर ट्रेन प्राइवेट कैसे हो गई? ऐसे ही सवालों से पैसेंजर रोजाना दो-चार हो रहे हैं। आईआरसीटीसी अधिकारियों के मुताबिक, पैसेंजरों के लिए यह समझना जरूरी है कि ट्रेन प्राइवेट नहीं कॉरपोरेट है। गत चार अक्तूबर को लखनऊ जंक्शन से नई दिल्ली के बीच तेजस एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुआ। ट्रेन जंक्शन से सुबह 6.10 बजे रवाना होकर दोपहर 12.25 बजे नई दिल्ली पहुंच जाती है और वापसी में दोपहर 3.35 बज चलकर रात 10.05 बजे जंक्शन पहुंचती है। सवा छह घंटे में ट्रेन यात्रा पूरी करती है। लखनऊ-कानपुर पैसेंजर एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने कहा कि पैसेंजरों को रियायतें न देनी पड़ेें, इसलिए तेजस को कॉरपोरेट ट्रेन के तौर पर चलाया जा रहा है। अन्यथा ट्रेन, ट्रैक, स्टाफ वगैरह सब रेलवे का...
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है। ड्राइवर, गार्ड व मेंटेनेंस स्टाफ रेलवे के हैं। और तो और आईआरसीटीसी रेलवे की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई यानी पीएसयू है। वहीं डीआरयूसीसी मेम्बर संजीव कपूर ने कहा कि तेजस एक्सप्रेस को रफ्तार मिल सके, इसलिए रेलवे गोमती जैसी पसंदीदा ट्रेन को फ्लॉप किया जा रहा है। पिछले एक साल में दो सौ से अधिक दिन गोमती कैंसिल रही है। तेजस हाथ घुमाकर कान पकड़ने जैसा मामला है। आईआरसीटीसी अधिकारियों का कहना है कि तेजस को रेलवे ने लीज पर दिया है, जिसका कॉमर्शियल रन हो रहा है। पैसेंजरों को जो सुविधाएं तेजस में दी जा रही हैं, वह अन्य ट्रेनों में नहीं मिलतीं। खाने से लेकर सिक्योरिटी और बीमे से लेकर लेटलतीफी में हर्जाना भी देने का प्राविधान है।53 तरह की रियायतें देता है रेलवेरेलवे ट्रेनों में सफर करने वाले पैसेंजरों को 53 तरह की रियायतें देता है। दिव्यांगजन, कैंसर, एड्स, टीबी समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों, वरिष्ठ नागरिक, राष्ट्रीय पदक विजेता व अवॉर्डी, पुलिस, सेना, पैरामिलिट्री शहीदों के परिवारीजन, छात्र, युवा, कलाकार, किसान, खिलाड़ी, मेडिकल प्रोफेशनल्स आदि भी शामिल हैं। इन्हें रेलवे अधिकतम 75 प्रतिशत तक की छूट टिकट की दर पर देता है। पर, तेजस में पैसेंजरों को यह छूट नहीं मिलती है। इमरजेंसी कोटा व रेलवे पास भी मान्य नहीं है।इसलिए आईआरसीटीसी को मिला जिम्मादरअसल, ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने का फैसला पहली बार लिया गया है। अनुभव के लिए आईआरसीटीसी को तेजस सौंपी गई, जो कि कॉरपोरेट रूप में चलाई जा रही है। एक्सपीरिएंस के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करने की योजना है। अभी तो जो भी मुनाफा या नुकसान होगा, वह अंतत: रेलवे के पास ही रहेगा। पर, ट्रेनों के निजीकरण से रेलवे नुकसान का सौदा नहीं करना चाहती। इसलिए तेजस को मॉडल के तौर पर विकसित करने का प्रयास है। कान घुमाकर पकड़ने वाली बात है90 प्रतिशत मध्यम व गरीब तबके केलोग रेलवे से सफर करते हैं। ऐसे में ट्रेन को कॉरपोरेट कर देने से उपभोक्ताओं का ही नुकसान है। यह कान घुमाकर पकड़ने वाली बात है। दूसरे, ट्रेन का संचालन आईआरसीटीसी कर रही है, जोरेलवे का ही अंग है तो फिर पैसेंजरों को महंगा टिकट बेचने की क्या जरूरत। सिर्फ इसलिए कि सब्सिडी व रियायत न देनी पड़े। त्योहार के बाद तेजस की हालत बदतर हो जाएगी।’ -शिवगोपाल मिश्र, केंद्रीय महामंत्री, ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशनअन्य ट्रेनों में यात्रियों को ऐसी सुविधाएं नहीं ‘यह समझना बहुत जरूरी है कि तेजस प्राइवेट नहीं बल्कि कॉरपोरेट ट्रेन है। जिसे रेलवे ने आईआरसीटीसी को लीज पर दे रखा है। किराया व सुविधाएं तय करने का जिम्मा मिला है। तेजस में कंसेशन नहीं दे रहे हैं तो पैसेंजरों से रिजर्वेशन व सुपरफास्ट चार्जेज भी नहीं लिए जा रहे हैं। ट्रेन ऑपरेशन के एवज में रेलवे को हॉलेज, मेंटेनेंस व लीज चार्ज दिए जा रहे हैं। पैसेंजरों को 25 लाख का बीमा और जो सुविधाएं मिल रही हैं, वह भी दूसरी किसी ट्रेन में नहीं मिल रही हैं।
’-अश्विनी श्रीवास्तव, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी
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