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News Entry# 419014
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय

विश्व हाथी दिवस की पूर्व संध्या पर भारत में मानव–हाथी टकराव से निपटने के सर्वोत्तम उपायों का संकलन जारी किया गया

प्रविष्टि तिथि: 10 AUG 2020 3:34PM
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by PIB Delhi
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने विश्व हाथी दिवस की पूर्व संध्या पर आज नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि मानव और पशुओं के बीच टकराव की बढती घटनाओं से निपटने के लिए जंगलों में ही जानवरों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।


हम "Fodder and Water Augmentation in Jungle Area" कार्यक्रम में LIDAR टेक्नोलॉजी से सर्वे कर रहे हैं। जिसके तहत दिसंबर के बाद जो काम होगा, उसके सहारे अगले साल से जंगलों में पानी, घास और खाद्य बहुत अच्छी मात्रा में पैदा होगा, #HumanAnimalConflict कम होगा यह मुझे पूरा विश्वास है | pic.twitter.com/GV3mLAes7t

— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) August 10, 2020
पर्यावरण मंत्री श्री जावड़ेकर ने कहा कि भारत हाथियों और अन्य जानवरों को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है और मानव-पशु टकराव को समाप्त करने के लिए एक ठोस, व्यावहारिक और किफायती समाधान लाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री जावड़ेकर ने क्षमता निर्माण और वन कर्मचारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।





विश्व हाथी दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम के दौरान ‘भारत में मानव–हाथी टकराव प्रबंधन के सर्वोत्तम उपाय’ पर एक पुस्तिका जारी करते हुए पर्यावरण मंत्री ने कहा कि मानव और हाथी दोनों के बीच टकराव को कम करने और दोनों के मूल्यवान जीवन को बचाने के लिए मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।



यह पुस्तिका हाथियों के प्रबंधन के विभिन्न आविष्कारों की एक चित्रमय मार्गदर्शिका है जिन्हें हाथी वाले देशों द्वारा अपनाया गया है। यह पुस्तिका स्थान विशेष में हाथियों के संकट कम करने के उपायों को अपनाने के लिए एक संदर्भ पुस्तिका के रूप में कार्य करती है जिसे मानव-हाथी टकराव को कम करने के लिए अपनाया जा सकता है।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण राज्य मंत्री श्री बाबुल सुप्रियो ने देश में हाथियों की बढ़ती संख्या पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाथियों को बचाने और हाथी-मानव टकराव से दृढ़ता से निपटने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार निर्दोष जानवरों की हत्या बर्दाश्त नहीं करेगी और मानव-पशु टकराव से निपटने के लिए केंद्र सरकार सर्वोत्तम उपायों को अपना रही है।



इस कार्यक्रम के दौरान श्री प्रकाश जावड़ेकर और श्री बाबुल सुप्रियो ने मंत्रालय के अधिकारियोंके साथ मिलकर मानव-हाथी टकराव पर एक पोर्टल का बीटा संस्करण भी लॉन्च किया। वास्तविक समय पर जानकारी के संग्रह और सही समय पर मानव-हाथी टकरावों को निपटाने के लिए मानव हाथी टकराव पर ‘सुरक्ष्या’ नामक राष्ट्रीय पोर्टल आंकड़ा संग्रह प्रोटोकॉल, डेटा ट्रांसमिशन पाइपलाइन, और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल सेट करने में मदद करेगा ताकि नीति निर्माताओं को इन एचईसी आंकड़ों का लाभ उठाते हुए नीति निर्माण और टकराव को कम करने की कार्य योजना बनाने में मदद मिल सके। अभी पोर्टल का बीटा संस्करण डेटा परीक्षण के लिए शुरू किया जा रहा है। सभी राज्यों द्वारा इसे अपनाने के लिए वर्ष के अंत तक पूरे भारत में इसे जारी करने की संभावना है।



हर साल 12 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व हाथी दिवस एक अंतर्राष्ट्रीय वार्षिक कार्यक्रम है, जो दुनिया भर के हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए समर्पित है। विश्व हाथी दिवस का लक्ष्य हाथी संरक्षण पर लोगों में जागरूकता पैदा करना और जंगली तथा पालतू हाथियों के बेहतर संरक्षण और प्रबंधन के लिए जानकारी और सकारात्मक समाधानों को साझा करना है।


Environment Minister @PrakashJavdekar releases document on Best Practices on Human #Elephant Conflict#WorldElephantDay2020 @moefcc pic.twitter.com/JqafXpfFau

— PIB India (@PIB_India) August 10, 2020
एशियाई हाथियों को संकटग्रस्त प्रजातियों की आईयूसीएन की रेड लिस्ट में ‘विलुप्तप्राय’ प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। ऐसा भारत को छोड़कर अधिकांश हाथी वाले देशों के संदर्भ में किया गया है, जहां हाथियों के अनुकूल निवास स्थान की कमी और उनके अवैध शिकार के कारण उनकी संख्या में काफी कमी आई है। एक अनुमान के अनुसार, दुनिया में लगभग 50,000 -60000 एशियाई हाथी हैं। भारत में उन हाथियों की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी रहती है।

फरवरी 2020 में गुजरात के गांधी नगर में हाल ही में संपन्न सीएमएस-13 की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ में प्रवासी प्रजातियों के सम्मेलन के परिशिष्ट 1 में भारतीय हाथियों को भी सूचीबद्ध किया गया है। हाथी भारत के प्राकृतिक धरोहर पशु हैं और भारत भी हाथी विश्व दिवस इसके संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए मनाता है।

इस कार्यक्रम में डॉ. संजय कुमार,महानिदेशक (वन) और विशेष सचिव, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी),श्री सौमित्र दासगुप्ता,एडीजी (वन्यजीव),श्री नॉयल थॉमस,आईजीएफ और निदेशक परियोजना हाथी,एमओईएफएंडसीसी और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। राज्यों के वन विभाग और अन्य हितधारक संगठन भी वर्चुअल मोड में इस उत्सव में शामिल हुए।

‘भारत में मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के सर्वोत्तम उपाय’ के लिए यहां क्लिक करें।

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एमजी/एएम/एके/डीके





(रिलीज़ आईडी: 1644884) आगंतुक पटल : 188
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