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News Entry# 460757
Aug 01 (04:39) बड़ी लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण हुई नहीं, छोटी रेल की पटरियां उखाड़ने की तैयारी (www.naidunia.com)
IR Affairs
NCR/North Central
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News Entry# 460757  Blog Entry# 5030072   
  Past Edits
Aug 01 2021 (04:39)
Station Tag: Jhansi Junction/JHS added by Adittyaa Sharma/1421836

Aug 01 2021 (04:39)
Station Tag: Sheopur Kalan/SOE added by Adittyaa Sharma/1421836

Aug 01 2021 (04:39)
Station Tag: Gwalior Junction/GWL added by Adittyaa Sharma/1421836

Aug 01 2021 (04:39)
Station Tag: Morena/MRA added by Adittyaa Sharma/1421836
मुरैना(नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्वालियर-श्योपुर नैरोगेज ट्रैक को ब्रॉडगेज लाइन तब्दील करने के लिए रेलवे मुख्यालय ने बीते दिनों रेल मंत्रालय को मुरैना से सबलगढ़ के बीच छोटी रेल की पटरियों को उखाड़ने की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा है। नैरोगेज की पटरियों को हटाने से पहले ब्रॉडगेज लाइन के लिए पूरी तैयारी भी रेलवे ने की नहीं है। न तो निजी जमीनों का अधिग्रहण पूरा हुआ है और जिन किसानों की जमीन रेलवे के लिए दे दी है उनमें से अधिकांश को अब तक जमीन का पैसा नहीं मिला।
गौरतलब है कि ब्रॉडगेज लाइन के लिए मुरैना जिले में निजी क्षेत्र की 246 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। जिसमें से करीब 170 जमीन का अधिग्रहण हो चुका है। अधिग्रहित हुई 170 हेक्टेयर
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जमीन जिन किसानों से ली गई है उन्हें जमीन के बदले 169 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान होना था, लेकिन रेलवे ने मुरैना जिला प्रशासन को मात्र 65 करोड़ रुपये ही अब तक दिए हैं। इस कारण बीते साढ़े 8 महीने से मुरैना जिले में ब्रॉडगेज लाइन के लिए निजी जमीनों का अधिग्रहण रुका पड़ा है। दूसरी ओर रेलवे बानमोर से लेकर सबलगढ़ तक नैरोगेज की पटरियों को उखाड़ने की तैयारी कर रहा है, जबकि बानमौर-सबलगढ़ के बीच पड़ने वाले कैलारस में 45 हेक्टेयर, जौरा में 16 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण अब तक नहीं हुआ है। इतना ही नहीं सबलगढ़ में भी 15 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण प्रशासन इसलिए नहीं कर पाया है, क्योंकि पहले जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की है, उनको मुआवजा का पैसा अब तक प्रशासन नहीं दिला सका है। चूंकि जमीनों का अधिग्रहण जिला प्रशासन करता है, इसीलिए किसानों का मुआवजा भी जिला प्रशासन के हाथों की बंटना है। कई किसानों की जमीन के अधिग्रहण को एक साल हो गया। ऐसे में प्रशासन को भी डर है कि मुआवजा वितरण में देर होने से कहीं किसानों का आक्रोश न फूट पड़े। फिलहाल किसान मुआवजे को लेकर इसलिए गंभीर नहीं हैं, क्योंकि उनकी जमीनों का अधिग्रहण केवल सरकारी रिकार्ड में है। रेलवे ने अभी कोई काम शुरू नहीं किया, इसलिए अधिग्रहित हो चुकी जमीन पर अभी भी किसान खेती कर रहे हैं। अगर रेलवे बिना मुआवजा देकर इन जमीनों पर काम करती है तो किसानों के आक्रोश का सामना जिला प्रशासन को करना होगा।
कलेक्टर ने लिखा 104 करोड़ के लिए पत्रः
किसानों की जमीन अधिग्रहण करने के बाद उन्हें समय पर मुआवजे का पैसा नहीं मिल पाना रेलवे के लिए भारी पड़ सकता है। भूमि अधिग्रहण का नियम यह है कि जो निजी जमीन अधिग्रहित की जाती है उन्हें एक साल के भीतर मुआवजे का पैसा मिल जाना चाहिए, अन्यथा अधिग्रहण की शर्तो अनुसार अधिग्रहण को स्वतः ही निरस्त माना जाता है। चूंकि कई किसानों की जमीन अधिग्रहण को 10 से 11 महीने हो चुके हैं, इसीलिए बीते दिनों कलेक्टर बी कार्तिकेयन ने उप मुख्य अभियंता रेलवे को पत्र लिखकर मुआवजे के लिए 104 करोड़ के बजट की मांग की है। इसे लेकर रेलवे की ओर से कोई जवाब फिलहाल जिला प्रशासन को नहीं मिला है।
वर्जन
- रेलवे मुख्यालय प्रयागराज ने बानमोर से सबलगढ़ तक नैरोगेज पटरी उखाड़ने का प्रस्ताव भेजा है, जिसे रेल मंत्रालय से हरी झंडी मिलनी है। इसी के बाद ब्रॉडगेज का काम शुरू होगा। हां किसानों को मुआवजे का पैसा मिलना बाकी है। रेलवे मुख्यालय ने मुआवजे के बजट के लिए रेल मंत्रालय को पत्र लिखा है। मैं जानकारी लेने के बाद ही बता सकता हूं कि वर्तमान में इस मामले में क्या चल रहा है।
मनोज कुमार,पीआरओ, झांसी मण्डल रेलवे
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