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News Entry# 468308
Oct 23 (23:52) दीगर जोन की मेल-एक्सप्रेस में यूटीएस की राहत, यहां लोग वंचित (www.naidunia.com)
IR Affairs
SECR/South East Central
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News Entry# 468308  Blog Entry# 5102027   
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Oct 23 2021 (23:53)
Station Tag: Korba/KRBA added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Korba/KRBA  
कोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देशभर की ट्रेनों में यात्रा के लिए रेलवे बोर्ड का नियम एक समान होता है। बावजूद इसके यात्रियों की समस्या व सुविधा दरकिनार कर बिलासपुर से चल रही ट्रेनों के लिए एक अलग ही नियम थोपा जा रहा। इसकी पुष्टि इस बात से होती है, कि दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) और पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) में चल रही मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में अनारक्षित टिकट (यूटीएस) की सुविधा बहाल कर दी गई है, पर बिलासपुर से परिचालित ट्रेनों में यात्रा करने अब भी यात्रियों को महंगा आरक्षित टिकट खरीदने मजबूर किया जा रहा।
इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (गुवाहाटी मुख्यालय) अंतर्गत न्यू जलपाईगुडी से मालदा टाउन दक्षिण मध्य रेलवे (कोलकाता मुख्यालय) के बीच
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चल रही सुपरफास्ट ट्रेन में अनारक्षित टिकट जारी किए गए हैं। यह टिकट शहर में रेल सुविधाओं के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे कन्हैया कलवानी को उनके एक परिचित ने उपलब्ध कराया। उन्होंने कहा कि कोरबा से अमृतसर तक चलने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस व यशवंतपुर एक्सप्रेस में जनरल टिकट नहीं मिलने की वजह से मजबूरन लोगों को 25 रुपये की जगह कई गुना अधिक किराया खर्च करने पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ हो या यशवंतपुर एक्सप्रेस आरक्षण कराना अनिवार्य है, जिसके लिए कम से कम 385 रुपये खर्च करना पड़ता है। जब एससीआर व एनएफआर में चलने वाली मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में जनरल टिकट (यूटीएस) की सुविधा दी जा रही है, तो यहां बिलासपुर जोन से संबद्ध स्टेशनों के यात्रियों को सुविधा से क्यों वंचित किया जा रहा है। आम यात्रियों की सुविधा में विस्तार किए जाने की पहल करने की बजाय रेल प्रशासन लगातार कोरबा के लोगों की सुविधाओं पर विराम लगाए रहने मनमानी पर आमादा है।
कटिहार डिविजन से पत्र, जारी करें यूटीएस
आफिस आफ कमर्शियल कंट्रोल कटिहार डिविजन के सीनियर डीसीएम को एक पत्र अपने क्षेत्र के लिए उस क्षेत्र के मुख्यालय से जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट लिखा गया है कि सभी यात्रियों को उनकी मांग और आवश्यकता के अनुसार अनारक्षित टिकट की सुविधा प्रदान किया जाना सुनिश्चित करें। बिलासपुर से चांपा के बीच चौथी लाइन बन रही है, पर कोरबा रूट पर पिछले दस साल से केवल दो लाइन की सुविधा उपलब्ध है। जब कोयला परिवहन का टारगेट बढ़ता जाएगा, तो उसके लिए स्वाभाविक रूप से यात्री ट्रेनें ही प्रभावित होंगी। इस समस्या को दूर करने के लिए रेल लाइन भी बढ़ाए जाने की जरूरत है, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
शिवनाथ व लोकल को बंद कर एक ओर खाली दौड़ा रहे
इतना ही नहीं, बिलासपुर से कोरबा के बीच जो ट्रेनें चल रही हैं, उनमें यात्रा की सुविधा देने की बजाय रैक बंद के दौड़ाया जा रहा। बिलासपुर से आने वाली शिवनाथ एक्सप्रेस की रैक, बंद कर कोरबा तक लाई जाती है। रैक के 24 डिब्बे बिना यात्रियों को बिठाए बिलासपुर से कोरबा तक खाली भेज दी जाती है। दोपहर 2.50 बजे बिलासपुर से छूटने वाली शिवनाथ की रैक शाम छह बजे कोरबा पहुंचती है। इस ट्रेन के दरवाजे बंद कर के बिलासपुर से गेवरारोड के बीच बिलकुल खाली दौड़ाया जा रहा है। इसी तरह सुबह साढ़े सात बजे बिलासपुर से छूट साढ़े दस बजे गेवरा आने वाली लोकल ट्रेन को भी गेवरा से सुबह 11 दरवाजे बंद कर बिलासपुर तक खाली जाती है, जो यात्रियों के साथ अन्याय है।
सुबह 6.50 के बाद नौ घंटे कोई नियमित ट्रेन नहीं
सुबह 6.50 बजे की लोकल के बाद से लेकर शाम चार बजे छूटने वाली लिंक एक्सप्रेस के बीच के समय में कोई भी एक भी नियमित ट्रेन कोरबा के यात्रियों को नहीं दी जा रही। इसी तरह हफ्ते के सातों दिन शिवनाथ व लोकल की रैक बिलासपुर से कोरबा के बीच बंद होकर आती है। आमजनों का कहना है कि जनरल टिकट न सही, इस ट्रेन में कम से कम स्लीपर के लिए आरक्षित टिकट पर आने की सुविधा मिल जाती, तो यात्रियों को काफी राहत दी जा सकती है। पर ऐसा नहीं किया जा रहा। इनमें यात्रियों को बैठने की सुविधा नहीं दी जा रही। उसी रूट पर एक दिशा में परिचालन करने से जब संक्रमण का डर नहीं, तो दूसरी ओर डिब्बे बंद क्यों कर दिए जा रहे।
लदान लक्ष्‌य से परहेज नहीं, पर लोगों को भी दें राहत
जिन तीन लोकल ट्रेनों को बिलासपुर से कोरबा के बीच परिचालन बंद कर दिया गया है, उन्हें बिलासपुर से आगे के स्टेशनों में चलाया जा रहा है, पर उनकी सुविधा से केवल कोरबा रूट के यात्रियों को वंचित रखा जा रहा है। कोयला परिवहन को प्राथमिकता देने से किसी कोई परहेज नहीं, पर आम लोगों की समस्याओं को नजरंदाज करने पर नाराजगी व्यक्त करना भी लाजमी है। इस तरह लोगों को परेशान कर लदान टारगेट हासिल कर लिया जाता है। अगले सत्र फिर टारगेट में वृद्धि के साथ मालगाड़ियों की दौड़ भी बढ़ जाती है, पर यात्री सुविधाएं बढ़ाने की बजाय कटौती कर रहे।
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