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May 29 (19:24) अब पाकिस्तान की तरह नेपाल भी जाएंगी भारत की ट्रेनें, जानिए क्या होगा रूट (m.jagran.com)
Rail Budget
ECR/East Central
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News Entry# 338751  Blog Entry# 3464966   
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May 29 2018 (19:24)
Station Tag: Jaynagar/JYG added by amishkumar~/1702584

May 29 2018 (19:24)
Station Tag: Sitamarhi Junction/SMI added by amishkumar~/1702584
सीतामढ़ी [जेएनएन]। उत्तर बिहार के जयनगर रेलवे स्टेशन से पहली बार नेपाल के लिए अक्टूबर 2018 से ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा। जयनगर से नेपाल के बर्दीबास तक सिंगल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है। 800 करोड़ की लागत से करीब 69 किलोमीटर तक पटरी बिछाई जाएगी।
इसमें 3 किलोमीटर रेलवे लाइन बिहार और 66 किलोमीटर नेपाल में होगी। मालूम हो कि पहले जयनगर से जनकपुर तक छोटी लाइन की ट्रेन चलती थी। जिसे अमान परिवर्तन कर बड़ी लाइन बनाया गया है। साथ ही इसे बर्दीवास तक बनाया जा रहा है। 
पहले फेज में पुल,
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पुलिया का हो चुका है निर्माण 
पहले चरण में जयनगर से जनकपुर होते हुए कुर्था तक 35 किमी लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इस फेज में काफी हद तक पुल, पुलिया का निर्माण हो चुका है। स्टेशन व हाल्ट भी तैयार है। सिर्फ रेल पटरी का काम बाकी है। निर्माण कंपनी इरकॉन ने अप्रैल 2018 तक  जयनगर से नेपाल के कुर्था तक रेल पटरी का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
अक्टूबर में ट्रेन का ट्रायल भी पूरा कर लेने की योजना है। इसके बाद नियमित रूप से ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। दूसरे फेज में कुर्था से बिजलपुरा तक पटरी का निर्माण मार्च 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं तीसरे फेज में बिजलपुरा से बर्दीबास  तक 16 किलोमीटर में लाइन बिछाई जाएगी। 
नेपाल के लिए जयनगर में बना अलग स्टेशन
नेपाल के लिए जयनगर से ट्रेन खुलेगी। इसको लेकर रेलवे ने जयनगर स्टेशन के पास एक और स्टेशन बनाया है। यहां से सिर्फ  नेपाल के बर्दीबास के लिए ट्रेन खुलेगी। स्टेशन भवन का निर्माण हो गया है। प्लेटफॉर्म भी तैयार है। एक फुट ओवर ब्रिज भी बनाया गया है।
यात्रियों को पानी उपलब्ध कराने के लिए स्टेशन भवन के ऊपर टंकी लगाई गई है। बैठने के लिए सिटिंग चेयर लगा दिया गया है।  इसके अलावा अन्य सुविधा भी बेहतर की गई है। 
 2021 में पूरे रूट पर चलने लगेगी ट्रेन
 निर्माण कंपनी इरकॉन के अधिकारी ने बताया कि जयनगर से कुर्था तक अक्टूबर 2018 से ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा।  इसके लिए जोर-शोर से काम चल रहा है। नेपाल स्थित कुर्था से बिजलपुरा तक मार्च 2019 में ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। वहीं बिजलपुरा से बर्दीबास तक 2021 से ट्रेन चलेगी। यानी 2021 में 69 किलोमीटर रेलवे लाइन बनकर तैयार हो जाएगी। 
क्या है फायदा
 बिहार और नेपाल के लोगों को आने-जाने के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच व्यापार भी बढ़ेगा। पर्यटकों को काफी सुविधा होगी।
  
May 23 (13:20) Indian Railways spending Rs 9,000 cr on 43 northeast projects: Minister (economictimes.indiatimes.com)
Rail Budget
NFR/Northeast Frontier
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News Entry# 337980  Blog Entry# 3444594   
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The Railways is executing 43 projects at a cost of Rs 9,000 crore to extend rail connectivity in the border areas of northeast India and with other parts of the country, Minister of State for Railways Rajen Gohain said here on Tuesday.Of these projects, 25 are new rail line projects, which will add over 5,100 km tracks to the existing network in the mountainous region, Gohain said while flagging off a bi-weekly Humsafar Express train between Agartala and Bengaluru.The Ministry has sanctioned electrification of the entire rail network in the northeast."Work is on in full swing to connect the remaining capital cities of northeastern states. The Northeast Frontier Railway (NFR) has been extending 112 km rail line up to southern Tripura's bordering city Sanbrrom to get access to the Chittagong port in Bangladesh."The Minister said that the NFR has started work to lay the new 15-km line from Agartala to Akhaura...
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in Bangladesh.Addressing the gathering, Tripura Chief Minister Biplab Kumar Deb said that after the construction of a bridge on the Feni river by December 2019, Tripura would become a gateway to the northeastern region and Bangladesh. The Chief Minister urged Gohain to make all Express trains from Tripura to various parts of the country, including Rajdhani Express, at least bi-weekly if not daily.Tripura Transport and Tourism Minister Pranajit Singha Roy, Forest and Tribal Welfare Minister Mevar Kumar Jamatia, and NFR General Manager Sanjive Roy were also present.
  
May 23 (02:14) विलंब से रेलवे को 400 करोड़ का नुकसान (www.google.co.in)
Rail Budget
ECR/East Central
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News Entry# 337936  Blog Entry# 3443391   
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May 23 2018 (02:14)
Station Tag: Kusheshwarsthan/KHHTN added by कात्यायनी एक्सप्रेस~/1872250

May 23 2018 (02:14)
Station Tag: Alauli/ALOLI added by कात्यायनी एक्सप्रेस~/1872250

May 23 2018 (02:14)
Station Tag: Khagaria Junction/KGG added by कात्यायनी एक्सप्रेस~/1872250
ससमय पूरा होता, तो 162 करोड़ में बन जाता खगड़िया कुशेश्वर स्थान रेलखंड कार्य में तेजी लाने को सांसद ने रेल मंत्री को लिखा पत्र 2020 तक कार्य पूरा करने का है लक्ष्य, धीमी है रफ्तार खगड़िया : खगड़िया-कुशेश्वर स्थान रेल परियोजना का समय पर पूरा नहीं होने के कारण रेलवे को करोड़ों का नुकसान हुआ है. नुकसान रेलवे को ही नहीं इस क्षेत्र के लाखों की आबादी को भी हुआ है. जो नये भारत में भी बेहतर यातायात की सुविधा से अब तक महरूम होकर रह गयी है. पहले बात रेलवे को हो रहे नुकसान की करें तो महत्वपूर्ण रेल परियोजना का काम विगत 15 वर्षों से चलता आ रहा है. कहने को परियोजना का कार्य 15 वर्ष से चल रहा है. लेकिन कुछ पेच के कारण काम लगातार नहीं हुआ है. अलग-अलग कारणों से काफी समय तक काम रुका रहा है. जानकार काम रुकने का...
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मुख्य वजह भू-अर्जन में पेच व आवंटन की कमी बता रहे हैं. बात भी सही है, लेकिन इस परियोजना के पूरे होने में हुए विलंब के कारण रेलवे को 403 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. जब कुशेश्वर रेल परियोजना की स्वीकृति मिली थी. तब इस कार्य को पूरा कराने के लिए 162 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था. लेकिन समय पर काम पूरा नहीं होने की वजह से अब लागत 162 करोड़ से बढ़ कर 565 करोड़ रुपये का हो गया है. लेकिन निर्माण की गति व अब तक की उपलब्धि जो रही है, वो निराश करने वाली है. काम की स्थिति: जानकारी के मुताबिक खगड़िया से कुशेश्वर स्थान तक 42.6 किमी लंबे रेलखंड का निर्माण कराया जाना है. इन दोनों रेल जंक्शन के बीच 8 रेल स्टेशनों का निर्माण होना है फिलहाल खगड़िया जंक्शन से कामास्थान तक रेलवे लाइन बिछा दी गयी है. कामास्थान से अलौली गढ़ स्टेशन के बीच रेलवे लाइन बिछाने के लिए मिट्टी भराई का कार्य चल रहा है. 42.6 किमी के विरुद्ध महज 8 से 10 किमी की दूरी तक काम हो पाया है. यानी वर्ष 2003 से अब तक मात्र 10 किमी ही पटरी बिछायी गयी है. करीब 32 किमी रेल पटरी बिछाना अब भी बांकी है. क्षेत्र के लोगों को भी परेशानी: खगड़िया कुशेश्वर स्थान रेल परियोजना को लेकर सांसद चौधरी महबूब अली कैसर ने रेल मंत्री पियूष गोयल को पत्र लिखा है. सांसद ने इस परियोजना में विलंब होने के कारण रेलवे को हुए नुकसान को साथ साथ इस क्षेत्र के लोगों को हो रही परेशानी से अवगत कराया है. साथ ही इस परियोजना को अतिरिक्त तवज्जो पूरा कराने के लिए रेलमंत्री से अनुरोध किया है. इन्होंने लिखे पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि 18 वर्ष में भी इस परियोजना को पूरा नहीं कराया गया है, जिस कारण लागत मूल्य 162 करोड़ से बढ़ कर 565 करोड़ रुपया हो गया है. 2003 में शुरू हुआ था काम जानकारी के मुताबिक वर्ष 1996 में खगड़िया व दरभंगा जिले के कुशेश्वर स्थान को रेलवे से जोड़ने के लिए केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिली थी. लेकिन काम करीब सात साल बाद यानी 2003 में आरंभ हुआ था. जब कुशेश्वर स्थान रेल परियोजना की मंजूरी दी गयी थी तब वर्ष 2006 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन स्वीकृति के इतने वर्ष बाद भी इस रेल परियोजना का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है. अब कार्य के बात की जाय तो 25 प्रतिशत से भी कम भाग में रेल पटरी बिछायी जा सकी है. अब इस रेल परियोजना को वर्ष 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है जो कि फिलहाल यह काम मुश्किल दिख रहा है. क्यों है मुश्किल: फिलहाल एक स्टेशन तक का काम पूरा हुआ है अब भी कुशेश्वर स्थान स्टेशन तक कई जगहों पर पुल पुलिये का निर्माण कराना बांकी है. कार्य पूरा करने के लिए लाइन बिछाने के साथ साथ 54 जगहों पर छोटे पुलिया तथा 9 जगहों पर बड़े पुल का निर्माण कराया जाना बाकी है. सूत्र बताते हैं कि शहरबन्नी मौजा में भू-अर्जन का भी पेच फंसा हुआ है तथा कार्य में तेजी लाने के लिए भारी भरकम आवंटन की भी जरूरी है. अगर सभी कार्य तेजी गति से हुआ तभी वर्ष 2020 तक इस परियोजना का कार्य पूरा हो सकेगा. अन्यथा रेलवे की यात्रा करने के लिए सुदूर क्षेत्र के लाखों की आबादी को और कई वर्ष इंतजार करना पड़ेगा. कहते हैं डीएलओ इस महत्वपूर्ण परियोजना की गलातार जिला स्तर पर समीक्षा होती रही है. तथा कार्य तेजी से हो इसके लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया में भी तेजी लायी गयी है. भू-अर्जन का कहीं पेच फंसा नहीं हुआ है विभागीय प्रक्रिया के तहत यह कार्य तेजी से हो रहा है. दिनेश कुमार, डीएलओ. कहते हैं केंद्रीय संयोजक वर्तमान समय कार्य की प्रगति धीमी है भू-अर्जन सहित पटरी बिछाने व पुल पुलिया का निर्माण कार्य तेजी हो इसके लिए कम से कम दो सौ करोड़ रूपये आवंटन की जरूरत है कार्य में तेजी लाने के बाद ही वर्ष 2020 में यह परियोजना पूरी हो पाएगी. नहीं तो इसी गति से कार्य हुए तो शायद 2025 तक भी कार्य पूरे नहीं होंगे. सुभाष चन्द्र जोशी, केन्द्रीय संयोजक रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति
  
May 21 (13:47) मणिपुर में बनेगा विश्व का सबसे ऊंचा रेल पुल, पांच राज्यों को होगी सहूलियत (m.jagran.com)
Rail Budget
NFR/Northeast Frontier
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News Entry# 337760  Blog Entry# 3438246   
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May 21 2018 (13:47)
Station Tag: Imphal/IMPAL added by amishkumar~/1702584
Stations:  Imphal/IMPAL  
किशनगंज [सागर चंद्रा]। नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे द्वारा उत्तर पूर्व राज्यों के आठ में से पांच राज्यों को रेलमार्ग से जोडऩे की कवायद तेज कर दी गई है। इसके लिए 40 हजार करोड़ की लागत से 795 किलोमीटर लंबी परियोजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। परियोजना के तहत मणिपुर के नोने में देश के सबसे ऊंचे रेल पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत मणिपुर, मिजोरम, मेघालय और सिक्किम के बीच देश के सबसे लंबे टनल का भी निर्माण होगा।
परियोजना के पूर्ण होने से बिहार से किशनगंज के रास्ते एनजेपी के समीप से पांच राज्यों मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम व नगालैंड तक आवागमन में सहूलियत हो जाएगी। पुल के बन जाने पर इन इलाकों से होकर रेल के जरिए
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सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण चीन की सीमा सहित म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं तक पहुंचने की सुविधा हो जाएगी। 
2020 तक पूरी होगी परियोजना
एनएफ रेलवे के मुख्य जन संपर्क पदाधिकारी प्रणव ज्योति शर्मा ने बताया कि रेल मंत्रालय ने 40 हजार करोड़ की लागत से रेल परियोजना का कार्य मणिपुर के जीरीबाम में शुरू कर दिया है। वर्ष 2020 तक इस परियोजना के पूरे होने के आसार हैं। इसके तहत मणिपुर नदी पर लगभग 350 मीटर ऊंचे रेल सह सड़क पुल का निर्माण किया जाएगा। यह डबल डेकर पुल देश के सबसे ऊंचे रेल पुल में शुमार होगा।
देश के सबसे लंबे टनल का भी निर्माण
प्रणव ज्‍याति शर्मा ने बताया कि इसके अलावा एक 11 किलोमीटर लंबा टनल का भी निर्माण होगा, जो देश का सबसे लंबा टनल होगा। इसके अलावा भी एक दर्जन से अधिक छोटे-छोटे टनल बनाए जाएंगे। इससे  मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम व नागालैंड की राजधानियां रेलमार्ग से सीधे जुड़ जाएंगी। अब तक नॉर्थ ईस्ट के सिर्फ तीन राज्य अरुणाचल प्रदेश, असोम व त्रिपुरा ही रेलमार्ग से जुड़ पाए हैं।
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