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News Posts by कल हो न हो 😔😔

Page#    Showing 1 to 4 of 4 news entries  
प्राइवेट ट्रेन के किराये की कोई लिमिट तय नहीं, ना ही किसी मंजूरी की जरूरत
सरकार कुल 109 रूट पर 151 ट्रेन प्राइवेट कंपनियों को 35 साल के लिए देगी
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ट्रेन चलानेवाली प्राइवेट कंपनियां जितना मर्जी उतना किराया रख सकती हैं। इस किराये के लिए उन्हें किसी भी अथॉरिटी से कोई मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। यह कंपनियां भारतीय रेलवे के नेटवर्क
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पर ट्रेन चलाएंगी और इसके लिए वे जो चाहें किराया तय कर सकती हैं। रेलवे ने यह प्राइवेट कंपनियों पर छोड़ा है कि वह ट्रेन का किराया तय करें। इसके अलावा रेवेन्यू जेनरेट करने के लिए वे अलग-अलग तरह के विकल्पों के बारे में विचार करने और फैसला करने में स्वतंत्र होंगे।

यह किराया बाजार के मुताबिक होगा

हाल में इस तरह की बात रेलवे मंत्री पियूष गोयल ने भी कही थी। हाल में प्री-अप्लीकेशन मीटिंग में इस तरह का सवाल भी आया था। सरकार कुल 109 रूट पर 151 ट्रेन प्राइवेट कंपनियों को 35 साल के लिए देगी। रेलवे ने इस मामले में हाल में उठाए गए सवालों के जवाब में कहा कि प्राइवेट ट्रेन के किराए वही कंपनियां तय करेंगी, जो इसे चलाएंगी। यह किराया बाजार के मुताबिक होगा। इसके लिए किसी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक भारतीय रेलवे को कैबिनेट या संसद से इस तरह के मामलों के लिए अनुमति लेनी होगी। रेलवे एक्ट के अनुसार देश में केवल केंद्र सरकार या रेलवे मंत्रालय पैसेंजर ट्रेन के किराए को तय कर सकता है।

वर्तमान ट्रेनों के किराये से काफी ज्यादा होगा

अधिकारियों के मुताबिक, आनेवाली प्राइवेट ट्रेनों की किराया वर्तमान ट्रेनों के किराये से काफी ज्यादा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन ट्रेनों में किराया फिक्स करने का नियम नहीं है। वैसे अभी भी अहमदाबाद से मुंबई तक चलनेवाली शताब्दी एक्सप्रेस का किराया वर्तमान ट्रेनों के किराए से काफी महंगा है। साथ ही इन ट्रेनों की कंपनियां अपनी वेबसाइट पर टिकट बेच सकती हैं। हालांकि उन्हें वेबसाइट के बैक इंड को रेलवे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के साथ रखना होगा, जो भारतीय रेलवे के पास है।

महीने में एक या दो बार रखरखाव करना होगा

रेलवे के मुताबिक, प्राइवेटाइजेशन से रेलगाड़ियों को तेज गति से चलाने और रेल डिब्बों की टेक्नॉलॉजी में नया बदलाव आएगा। रेलवे अधिकारी के मुताबिक, टेक्नॉलॉजी के बेहतर होने से रेलगाड़ी के जिन कोचों को अभी हर 4,000 किलोमीटर यात्रा के बाद मेंटेनेंस की जरूरत होती है तब यह सीमा करीब 40,000 किलोमीटर हो जाएगी। इससे उनका महीने में एक या दो बार ही रखरखाव करना होगा।

109 रूटों पर 151 मॉडर्न प्राइवेट ट्रेनें चलाई जाएंगी

रेलवे ने प्राइवेट सेक्टर की मदद से चलाई जाने वाले ट्रेनों के लिए टाइमलाइन तय कर दी है। इसके मुताबिक, 2023 में प्राइवेट ट्रेनों का पहला सेट आएगा। इसमें 12 ट्रेनें होंगी। रेलवे के मुताबिक, सभी 151 ट्रेनों को 2027 तक पेश कर दिया जाएगा। बता दें कि रेलवे ने पहली बार देश भर में 109 रूटों पर 151 मॉडर्न प्राइवेट ट्रेनें चलाने को लेकर निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किये हैं। इस परियोजना में निजी क्षेत्र से करीब 30,000 करोड़ रुपए का निवेश अनुमानित है।

70 फीसदी प्राइवेट ट्रेनें भारत में तैयार की जाएंगी

रेलवे ने कहा है कि 70 फीसदी प्राइवेट ट्रेनें भारत में तैयार की जाएंगी। इन ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की मैक्सिमम स्पीड के हिसाब से बनाया जाएगा। 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से यात्रा में 10% से 15% कम समय लगेगा, जबकि 160 किलोमीटर की स्पीड से 30% समय बचेगा। इनकी स्पीड मौजूदा समय में रेलवे की ओर से चलाई जा रहीं सबसे तेज ट्रेनों से भी ज्यादा होगी। हर ट्रेन में 16 कोच होंगे। बता दें कि भारत में अभी तेजस एक्सप्रेस के नाम से प्राइवेट ट्रेनें चल रही हैं।

पहली बैठक में 16 कंपनियों ने लिया हिस्सा

प्राइवेट ट्रेन चलाने को लेकर ऑपरेशन बोली में शामिल होने वाली कई बड़ी कंपनियों के नाम सामने आए हैं जिसमें आईआरसीटीसी के अलावा जीएमआर समूह, बॉम्बार्डियर इंडिया , सीएएफ, राइट्स, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स (भेल), मेधा समूह, आरके एसोसिएट्स, स्टरलाइट पावर, भारतफोर्ज और जे केबी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

19 Public Posts - Sun Aug 02, 2020

7293 views
Aug 02 (14:26)
WAG 12B in CIC
s27sidharthgmai   108 blog posts
Re# 4679670-21            Tags   Past Edits
Bhai avi thoda apna. Gyan or badao, irctc catering private venders ko deta hai per chadawa tender issue ke time official ke pass jata haii, or sabse bdi bat jab train ke privatisation ka swagat krna chahte ho to railway job ke privatisation pe logo ko rona kyu aa rha usko v hone do

7401 views
Aug 02 (14:31)
Ayushman Singh   286 blog posts
Re# 4679670-22            Tags   Past Edits
ok

6707 views
Aug 02 (14:46)
aK~   1859 blog posts
Re# 4679670-23            Tags   Past Edits
Bhai Or jo kam paise kharch me jana chahta haii wo unke liye passenger aur regular train hai he,vo kha band ho rhi hai

6720 views
Aug 02 (14:47)
aK~   1859 blog posts
Re# 4679670-24            Tags   Past Edits
Yha gyan na bate , yha pr sab gayni hai

5916 views
Aug 02 (15:07)
pallavmishra143   380 blog posts
Re# 4679670-25            Tags   Past Edits
Haan mere bacche
Cost determination market ke hisab se hota hai. Agr price high hui to har koi ignore karega or dusre option choose krega or private flop ho jaegi. To indirectly fayda hai na. Or bat to aise kr rhe ho jaise har gareeb aadmi machine me 5bar travelling krte hai.
Daru bidi gutakha to free me milta hoga na ration ki shop pr.
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Or 5-10guna pay kiya wo b mere bacche tum me se koi tha na jisne inse aisa charge kiya. Ham logo ne hmare yha pr sabko free me ration or food packet supply kre, to hmare area ka ek bhi labour bahar nhi gya. Or aaj sari factories full form me chal rhi hai. Mere bacche ground pr aao to pata lagega. Aise room me baithe baithe comment se accha hai homework krlo jo teacher ne online class me diya
रेलवे बोर्ड ने इस ट्रेन को 4 एलएचबी रेक अलॉट कर दिए हैं। इससे अब ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के हर कोच में 8-8 अतिरिक्त सीटें बढ़ जाएंगी
इन ट्रेनों की भी सूरत से काफी ज्यादा डिमांड है। सभी का सूरत से कोटा निर्धारित है, जिससे सीटें बढ़ने से यहां के यात्रियों को फायदा मिलेगा
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28 साल पुरानी ताप्ती गंगा एक्सप्रेस को चार आधुनिक
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एलएचबी रेक मिले हैं। ताप्ती गंगा वर्ष 1992 से सूरत से यूपी-बिहार के लिए चल रही है। रेलवे बोर्ड ने इस ट्रेन को 4 एलएचबी रेक अलॉट कर दिए हैं। इससे अब ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के हर कोच में 8-8 अतिरिक्त सीटें बढ़ जाएंगी। इसके अलावा उधना-दानापुर, उधना-मंडुवाडीह एक्सप्रेस समेत पांच ट्रेनों के पुराने आईसीएफ रेक भी जल्द ही बदलकर मॉडर्न एलएचबी रेक लगाए जाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि इससे सभी ट्रेनों में 150-150 अतिरिक्त सीटें बढ़ जाएंगी। सभी स्लीपर कोच में 72-72 सीटों की जगह 80 सीटें और एसी कोच में 64 की जगह 72 सीटें होंगी। यात्री क्षमता बढ़ने के साथ सुरक्षा भी बढ़ेगी।

इन ट्रेनों को एलएचबी कोच अलॉट
रेलवे बोर्ड के एक पत्र के अनुसार सूरत-छपरा ताप्ती गंगा, सूरत-भागलपुर ताप्ती गंगा, उधना-दानापुर, उधना-वाराणसी, वलसाड-कानपुर, वलसाड-मुजफ्फरपुर और वलसाड-हरिद्वार एक्सप्रेस को एचएचबी कोच अलॉट किए गए हैं। इनके लिए तीन मॉडर्न रेक बनाने का आदेश कपूरथला कोच फैक्ट्री को दे दिया गया है। जिन्हें अगले दो तीन महीने के भीतर बना कर पश्चिम रेलवे को हैंडओवर किया जाना है।

ट्रेन रेक
19045/46 सूरत-छपरा ताप्ती-गंगा 02
22947/48 सूरत-भागलपुर 02
19063/64 उधना-दानापुर 01
19057/58 उधना-वाराणसी 01
12943/44 वलसाड-कानपुर 01
22959/60 सूरत-जामनगर 02

सूरत से होकर जाने वाली छह ट्रेनों को भी मिले एलएचबी रेक
सूरत की पांच ट्रेनों के अलावा बोर्ड ने मुंबई से सूरत होकर जाने वाली गोल्डन टेंपल मेल, पश्चिम एक्सप्रेस, बांद्रा-भुज, मुंबई सेंट्रल-वडोदरा, भुज-दादर और बांद्रा-अहमदाबाद एक्सप्रेस को भी मॉडर्न एलएचबी में बदलने का आदेश दिया है। इन ट्रेनों की भी सूरत से काफी ज्यादा डिमांड है। सभी का सूरत से कोटा निर्धारित है, जिससे सीटें बढ़ने से यहां के यात्रियों को फायदा मिलेगा। अगले कुछ महीने में इनके रेक पश्चिम रेलवे को हैंडओवर कर दिए जाएंगे।

Rail News
Aug 02 (00:13)
💥 KrishnaKushwaha 💥
Krishna.Kushwah~   768 blog posts
Re# 4679666-1            Tags   Past Edits
My Father Told Me that , Tapti Ganga was introduced as a Holiday Spl Train during Diwali in 1990-91 B/w Surat and Varanasi.

10846 views
Aug 02 (00:14)
Kishkindha Express
AmaravatiExpress~   254 blog posts
Re# 4679666-2            Tags   Past Edits
great news..

8874 views
Aug 02 (05:21)
Ayushman Singh   286 blog posts
Re# 4679666-3            Tags   Past Edits
thanks batane ke liye
भोपाल। 15 अगस्त से क्षिप्रा एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की घोषणा करने वाला रेलवे अपनी बात पर अमल नहीं कर पाया। इंदौर से वाया सागर होते हुए हावड़ा के बीच सप्ताह में तीन दिन चलने वाली 22911/22912 क्षिप्रा एक्सप्रेस को 15 अगस्त से हर दिन चलाए जाना था, लेकिन सांसदों की चिट्ठी के कारण मामला अटक गया है। इसे चलते मंडल की ओर से भी ट्रेन के नोटिफिकेशन के लिए अभी हरी झंडी नहीं मिल पाई है। बताया जा रहा है कि सांसदों के मध्य निर्णय लेते हुए ट्रेन के रूट पर फैसला किया जाएगा।क्षिप्रा एक्सप्रेस में विदिशा, सागर, दमोह, चित्रकूट सहित उत्तर प्रदेश-बिहार के यात्री सालभर सफर करते हैं। ट्रेन में जगह नहीं मिलने से लोगों को दोगुना किराया देकर बस से सफर करना पड़ता है। अभी यह ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलती है। लेकिन इसके सप्ताह के सातों दिन किया जाना था। इस संबंध में पहले ही घोषणा...
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की जा चुकी हैं। बताया जा रहा है कि सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव और दमोह सांसद प्रहलाद पटेल इस ट्रेन के लिए वाया दमोह, सागर होते हुए चलाए जाने के प्रस्ताव रखा हैं। जबकि जबलपुर राकेश सिंह और होशंगाबाद सांसद राव उदय प्रताप सिंह ने इसको जबलपुर-इटारसी रूट से सप्ताह में 4 दिन चलाए जाने का प्रस्ताव रखा है। इसके कारण अभी ट्रेन के नए समय का नोटिफिकेशन नहीं हुआ है। सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने बताया ट्रेन के रूट को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।ट्रेनों के समय में होगा बदलावक्षिप्रा एक्सप्रेस के नियमित होने से ट्रेन के समय में बदलाव किया जाएगा। बताया जा रहा है कि चंबल व क्षिप्रा एक्सप्रेस अलग-अलग स्टेशन से अलग-अलग समय पर छूटती हैं, लेकिन माणिकपुर से हावड़ा पहुंचने तक इनका समय एक हो जाता है। इस कारण इस ट्रेन का समय निर्धारित नहीं हो पा रहा है। नए टाइम टेबल में इस ट्रेन के समय में बदलाव किया जाएगा। क्षिप्रा के रूट पर तीन दिन को छोड़कर अन्य ट्रेनें भी चलती हैं। क्षिप्रा को रोज चलाने पर कई स्टेशनों पर दूसरी ट्रेन की रनिंग प्रभावित होंगी। जिसके चलते इन ट्रेनों के समय में बदलाव होगा।
Apr 11 2018 (22:41) अनूठे हैं ये रेलवे स्टेशन, रात में भी रहता है दिन जैसा उजाला (tz.ucweb.com)
New Facilities/Technology
WCR/West Central

News Entry# 334058   
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Posted by: aK~ 4 news posts
जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आनेवाले रेलवे स्टेशनों का नजारा अब बदल गया है। ये रेलवे स्टेशन अब रात में भी दिन जैसे ही नजर आ रहे हैं। दरअसल अब यहां एलईडी लाइट्स की रोशनी चमक रहीं है। पश्चिम मध्य रेलवे के सभी 279 स्टेशन एलइडी लाइट से जगमग हो गए हैं। जबलपुर, कोटा सहित भोपाल डिवीजन के इन स्टेशनों से परम्परागत लाइटों को बदल दिया गया है। एलइडी लाइट लगने से हर साल ३५ लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। इससे पर्यावरण में २७५० टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, वहीं हर साल दो करोड़ ५८ लाख रुपए की बचत भी होगी।
होगी लाखों की बचत
सीपीआरओ
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गुंजन गुप्ता ने बताया कि जबलपुर डिवीजन के सभी १०१ स्टेशनों पर एलइडी लाइट लगा दी गई है। इन लाइटों से प्रति वर्ष लगभग 12.5 लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। इससे डिवीजन को सालाना लगभग ९४ लाख रुपए की बचत होगी। पर्यावरण में 994 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी व स्टेशनों पर प्रकाश में वृद्धि होगी। इसी तरह भोपाल डिवीजन के सभी ८९ स्टेशनों पर एलइडी लाइट लगा दिए जाने से हर साल १२ लाख यूनिट बिजली व ९० लाख रुपए की बचत होगी। भोपाल डिवीजन में ९४६ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसी प्रकार कोटा डिवीजन के भी सभी ८९ स्टेशनों पर एलइडी लाइट लग जाने से हर साल १० लाख यूनिट बिजली व लगभग ७५ लाख रुपए की बचत होगी। कोटा डिवीजन में बिजली बचत से पर्यावरण में 792 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
प्रदूषण भी होगा कम
एलईडी लाइट्स से अनेक फायदे हैं। एक ओर तो बिजली की खपत कम होगी तो दूसरी ओर पैसों की भी बचत होगी। इतना ही नहीं इससे सबसे ज्यादा फायदा प्रदूषण की कमी के रूप में होगा। एलइडी लाइट लगने से हर साल ३५ लाख यूनिट बिजली की बचत होगी। इससे पर्यावरण में २७५० टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, वहीं हर साल दो करोड़ ५८ लाख रुपए की बचत भी होगी
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