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Bandra Garib-Rath - नाम से गरीब, लेकिन मेरे दिल के करीब - Abdul Rehman

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Entry# 2053378-0

BIA/Bhilai (4 PFs)
     भिलाई

Track: Triple Electric-Line

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NH 6, Near Water Tank, Bhilai
State: Chhattisgarh

Elevation: 309 m above sea level
Zone: SECR/South East Central   Division: Raipur

Type of Station: Regular
Number of Platforms: 4
Number of Halting Trains: 31
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: 3.8/5 (8 votes)
cleanliness - excellent (1)
porters/escalators - average (1)
food - average (1)
transportation - average (1)
lodging - good (1)
railfanning - excellent (1)
sightseeing - excellent (1)
safety - good (1)
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Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 115 News Items  next>>
Yesterday (20:29) भिलाई में अच्छी पहल, लॉकडाउन में भूखा नहीं रहेगा कोई गरीब (www.naidunia.com)
Commentary/Human Interest
SECR/South East Central
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News Entry# 448729  Blog Entry# 4940079   
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Apr 15 2021 (21:38)
Station Tag: Bhilai Nagar/BQR added by Saurabh®/1294142

Apr 15 2021 (20:29)
Station Tag: Bhilai/BIA added by Saurabh®/1294142

Apr 15 2021 (20:29)
Station Tag: Durg Junction/DURG added by Saurabh®/1294142

Apr 15 2021 (20:29)
Station Tag: Bhilai Power House/BPHB added by Saurabh®/1294142
भिलाई। सप्ताह भर के लॉकडाउन में कोई गरीब भूखा ना रहे, इसके लिए भिलाई निगम ने पहल की है। बुधवार से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य स्थानों पर रहने वाले गरीबों के लिए खाने का पैकेट बनाया गया है, जो बुधवार से जोन स्तर पर बंटना शुरू हो गया है। बता दें कि बीते लाकडाउन के दौरान सबसे बड़ी समस्या गरीब तबके के लोगों को भोजन की आई थी।
इस बार ऐसा न हो इसके लिए जोन स्तर पर उन जगहों को चिह्नित किया गया है, जहां रोज कमाने खाने वाले गरीब तबके के लोग रहते हैं। मंगलवार से ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा चुका है। भिलाई नगर रेलवे स्टेशन, पावर हाउस रेलवे स्टेशन, पावर हाउस बस स्टैंड, पावर हाउस
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ओवरब्रिज के नीचे तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कई गरीब परिवार डेरा डालकर रहते हैं। अब हर दिन इन गरीब परिवार को दोपहर व रात का भोजन पहुंचाया जाएगा।
भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी पीसी सार्वा ने बताया कि सभी चार जोन नेहरू नगर, वैशाली नगर, मदर टेरेसा नगर तथा शिवाजी नगर खुर्सीपार से डिमांड आई थी। डिमांड के आधार पर बुधवार को भिलाई निगम मुख्य में भोजन का पैकेट तैयार कराया गया। सभी जोन में डिमांड के हिसाब से दोपहर 12 बजे पैकेट रवाना कर दिया गया। पैकेट बंटना भी शुरू हो गया।
नगर निगम भिलाई के पीआरओ पीसी सार्वा ने बताया कि सभी जोन से डिमांड आ रही थी। इसके आधार पर आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देश पर बुधवार से गरीबों के लिए भोजन का पैकेट तैयार कर बांटने के लिए रवाना कर दिया गया है।
Yesterday (12:27) Fire In Bsp: भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल मिल में लगी भीषण आग, रेल पटरी उत्‍पादन प्रभावित (www.naidunia.com)
Major Accidents/Disruptions
SECR/South East Central
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News Entry# 448713  Blog Entry# 4939743   
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Apr 15 2021 (12:27)
Station Tag: Bhilai/BIA added by Adittyaa Sharma/1421836

Apr 15 2021 (12:27)
Station Tag: Raipur Junction/R added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Raipur Junction/R   Bhilai/BIA  
रायपुर। Fire In Bsp: भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल मिल में भीषण आग लग गई। पुलपिट नंबर 1 में बुधवार की रात भीषण आग लगी। आग की वजह से रेल पटरी का उत्‍पादन प्रभावित हो गया है। आग लगने का प्रमुख कारण टनल की सफाई नहीं होने को बताया जा रहा है। रोलर्स का ग्रीस, तेल अन्य ज्‍वलनशील पदार्थ टनल में लगातार गिर रहा था। टनल के ऊपर लगभग 1100 से 1200 डिग्री तापमान में रेल पटरी की ढलाई हो रही थी। ढलाई के समय ही आग लगी।
बताया जा रहा है कि पूरा क्षेत्र काफी गर्म होता है। चिंगारी की वजह से आग तेजी से फैल गई। आग लगने से भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई। फायर ब्रिगेड को तत्काल
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सूचना दी गई, हालांकि पूर्व से वहां पर फायर ब्रिगेड की 2 गाड़ियां तैनात थीं। बावजूद इसके अन्य स्टेशन से भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का मंगाया गया। आग पर काबू पाने के लिए एक घंटे तक दमकलकर्मी मशक्‍कत करते रहे। घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
प्रत्‍यक्षदर्शियों का कहना है कि 14 अप्रैल की रात लगभग 11:45 बजे आग लगी। देखते ही देखते आग पूरी तरह से फैल गई। आग इतनी भीषण थी कि सबसे पहले वह आग पुलपिट के नीचे रोलिंग स्टैंड के टनल से बढ़ती हुई दिखी और पूरी तरह से पुलपिट को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद वहां के हाइड्रोलिक पाइप लाइन, इलेक्ट्रिकल केबल ओर पुलपिट पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
जब तक फायर ब्रिगेड की टीम पहुंचती तब तक आग भीषण रूप ले चुकी थी। घंटों की मशक्कत के बाद आग पर तो काबू पा लिया गया, लेकिन बड़ा नुकसान हो गया। जानकारों के मुताबिक अभी काम चालू होने में कम से कम 3 से 4 दिन का समय लग सकते हैं।
आग लगने की ये भी वजह
रोलिंग एरिया में आग लगना एक सामान्य सी बात है, क्योंकि यहां पर 1100 सौ से 1200 डिग्री तापमान के ब्लूम को रोल किया जाता है। रोलर में वाटर पाइप लाइन लगी है, लेकिन इन सबके बाद भी रोलर से ग्रीस गिरता है। कई जगह हाइड्रोलिक पाइप लाइन लीकेज होती है। इस तरह से आग कई बार लगती है। लेकिन उसे तत्काल बुझा लिया जाता है।
मैनपावर की कम होना भी एक वजह है। इसके अलावा लगातार संयंत्र में करोना के मरीज बढ़ रहे हैं और लगातार मैन पावर की कमी हो रही है। प्रबंधन का दबाव यह रहता है कि किसी भी तरीके से काम को करना है और इस तरह का दबाव लगातार शिफ्ट मैनेजर ‌पर बनाया जाता है और वह दबाव आम कर्मचारियों पर भी बनाया जाता है।
इस तरह की दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है किसी भी तरीके से रोलिंग को जारी रखा जाए। अभी फिलहाल 52 केजी रेलों का आर्डर रेलवे की तरफ से आया है। 13 मीटर की रेल पटरी को लेकर प्रबंधन लगातार पिछले कुछ दिनों से दबाव बना रहा था कि किसी भी तरीके से इस आर्डर को पूरा किया जाना है।
कोरोना महामारी का असर लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ प्लांट के कामकाज पर भी पड़ने लगा है। नए उत्पाद का हॉट ट्रायल थम गया है। वहीं रिपेयर मेंटेनेंस जैसे काम भी मैनपावर की कमी के कारण शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर ने प्लांट को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब तक 70 से अधिक कार्मिकों की मौत हो चुकी है। वहीं एक हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी कोरोना प्रभावित है या परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने की वजह से क्वारेंटाइन पर हैं। यह अलग बात है कि मिल और शॉप एरिया में गाइडलाइन जारी किए जाने के बाद भी उत्पादन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए रोस्टर सिस्टम लागू की मांग की थी। इस संबंध
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में आदेश मंगलवार देर शाम जारी कर दिया गया। इसके अलावा यूनियनों का कहना था कि नए उत्पाद के हॉट ट्रायल और विभिन्न मिल और शॉप एरिया में रिपेयर मेंटेनेंस का काम प्रभावित होने लगा है।
क्वारेंटाइन लीव तबीयत बिगड़ने वाले दिन से ही मिले, यूनियनों की मांग
यूनियन ने वर्तमान में सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को कोविड-19 काल तक उनके आवंटित आवास में बिना रिटेंशन की बाध्यता के रहने की मांग की है। यूनियन की यह भी मांग है कि यदि कोई कर्मचारी कोविड-19 का टेस्ट कर आता है। उसकी रिपोर्ट आने में देरी होती है। तो उसे जिस दिन से टेस्ट कराया है, उसी दिन से क्वारेंटाइन लीव दिया जाए। कोविड-19 का टेस्ट अगर कोई प्राइवेट एजेंसी से कराता है। तब भी उस पैसे की अदायगी बीएसपी से हो। कोविड-19 के इलाज में लगने वाली दवाइयों की ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था की जाए। जिससे कि दवाइयों की लगातार हो रही कमी को दूर किया जा सके। यूनियनों का कहना है कि इससे कर्मियों को काफी लाभ लाभ मिलेगा।
शहर में कोरोना की दूसरी लहर आते ही जर्मनी के एक्सपर्ट्स ने आना किया बंद प्लांट में इन दिनों बीएसपी प्रबंधन के उत्पाद हेड हार्डेंड रेल का हॉट ट्रायल चल रहा था। 4 हॉट ट्रायल सफल भी हो चुके हैं। इस प्रक्रिया को करीब दो-तीन महीने तक निरंतर बनाए रखना है। उसके बाद ही हेड हार्डेंड रेल का नियमित उत्पादन शुरू हो सकेगा। लेकिन शहर में कोरोना की दूसरी लहर शुरू होते ही हॉट ट्रायल में लगे जर्मनी के एक्सपर्ट्स की टीम ने प्लांट आना बंद कर दिया है।
ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ने पर प्लांट में ठेकेदारों का मेंटेनेंस का काम अटका
कोरोना पीड़ित मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इस वजह से इन दिनों ऑक्सीजन की मेडिकल एरिया में खपत काफी बढ़ गई है। ऑक्सीजन उत्पादक कंपनियों पर भी उत्पाद की सप्लाई मेडिकल सेक्टर में बढ़ाने का दबाव है। जिसका असर इंडस्ट्रियल एरिया के ऑक्सीजन सप्लाई पर पड़ने लगा है। डिमांड मुताबिक ऑक्सीजन में नहीं मिलने से प्लांट में ठेकेदारों का मेंटेनेंस का काम अटक गया है।
मृत कर्मियों के परिजनों को मेडिकल सुविधा मिले
स्टील एंप्लाइज यूनियन इंटक ने प्लांट में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बान दासगुप्ता और ईडी पीएंडए एसके दुबे से चर्चा की। महासचिव एसके बघेल और अतिरिक्त महासचिव संजय साहू ने बताया कि कोरोना संक्रमण से ग्रसित होकर रोजाना कर्मचारियों की मौत हो रही है।
संयंत्र के अंदर संक्रमण रोकने के लिए मैन पावर कम कर रोस्टर सिस्टम और वर्क फ्रॉम होम लागू करने की मांग थी। इस पर बीएसपी प्रबंधन ने सभी विभाग प्रमुखों की बैठक बुलाकर जल्द से जल्द सर्कुलर जारी करने का आश्वासन दिया है। मंगलवार देर शाम आदेश जारी कर दिया। इस बैठक में इसके अलावा मृत कर्मचारियों के परिजनों को मेडिकल सुविधा बंद होने का मुद्दा भी उठाया गया। उनका कहना था कि इसे जब तक कर्मचारियों का सेवाकाल है, तब तक उनके आश्रित को मेडिकल सुविधा एवं अन्य सुविधा दी जाए।
Apr 02 (08:22) यूनिवर्सल रेल मिल में कर्मियों ने मांगा रोस्टर सिस्टम, पौन घंटे चली बैठक (www.naidunia.com)
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News Entry# 447588  Blog Entry# 4926918   
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Apr 02 2021 (08:22)
Station Tag: Bhilai/BIA added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Bhilai/BIA  
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में कोरोना संक्रमण को देखते हुए विभिन्न विभागों में अब रोस्टर सिस्टम लागू करने की मांग तेज हो गई है। यूनिवर्सल रेल मिल में युवा कर्मचारियों ने इसकी मांग करते हुए विभाग के मुख्य महाप्रबंधक के साथ बैठक की। यह बैठक करीब पौन घंटे तक चली। दोनों ओर से तर्क वितर्क चला। बताया जाता है कि इस बैठक के बाद मुख्य महाप्रबंधक घर लौट आए। बाद में जांच में वे और उनकी पत्नी दोनों कोरोना संक्रमित निकले। इसकी जानकारी के बाद से कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है।
सर्वाधिक कोरोना संक्रमित भिलाई क्षेत्र और खासकर बीएसपी टाउनशिप से प्रतिदिन आ रहे हैं। संयंत्र कर्मियों में इससे दहशत की स्थिति भी है। कार्यस्थल पर कोरोना संक्रमण का जोखिम
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लगातार बढ़ा है। संयंत्र में 16500 कर्मचारी, 2585 अधिकारी एवं 25 हजार से अधिक ठेका श्रमिक कार्यरत हैं।
कर्मचारी अब दहशत में
बताते हैं कि बैठक करीब 45 मिनट तक चली। इस दौरान दोनों ओर से तर्क वितर्क का दौर चलता रहा। मुख्य महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उच्च प्रबंधन से इस बात पर चर्चा करते हुए जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। बताते हैं कि इसके बाद कर्मचारी वहां से निकल गए। कुद देर बाद मुख्य महाप्रबंधक भी कार्यालय से निकल कर घर लौट आए। जिसके बाद उनकी तबियत बिगड़ने लगी। जांच कराने पर वे स्वयं और उनकी पत्नी दोनों कोरोना संक्रमित पाए गए। इसकी जानकारी के बाद से बैठक में शामिल कर्मचारियों में हड़कंप है।
यूनिवर्सल रेल मिल में भी संक्रमण
बीएसपी के अहम विभागों में से एक यूनिवर्सल रेल मिल(यूआरएम) में भी कई कर्मचारी संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। स्थिति यही रही तो मैनपावर का संकट हो सकता है। इसे देखते हुए विभाग के दो दर्जन से भी अधिक कर्मचारी रोस्टर सिस्टम की मांग को लेकर विभाग के मुख्य महाप्रबंधक के पास पहुंच गए। उन्होंने संक्रमण की स्थिति को देखते हुए विभाग में रोस्टर सिस्टम लागू करने की मांग की जिससे कर्मचारियों की भीड़ जैसी स्थिति न रहे और संक्रमण की आशंका भी कम हो जाए। विभाग के इलेक्ट्रिकल, मेकेनिकल एवं आपरेशन सेक्शन से जुड़े एवं पुलपिट के कर्मचारियों ने कहा कि यदि संक्रमण बढ़ा तो उत्पादन ठप करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचेगा। इससे बेहतर है कि कर्मचारियों को रोस्टर की सुविधा दे दी जाए। जिससे हर पाली में कर्मचारियों की संख्या आधी कर दी जाए।
Mar 22 (00:18) रेलवे का 140 टन ब्रेक डाउन क्रेन दुर्घटना राहत में निभा रहा अहम भूमिका (www.naidunia.com)
IR Affairs
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News Entry# 446505  Blog Entry# 4914745   
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Mar 22 2021 (00:19)
Station Tag: Dallirajhara/DRZ added by Adittyaa Sharma/1421836

Mar 22 2021 (00:19)
Station Tag: Maroda/MRDA added by Adittyaa Sharma/1421836

Mar 22 2021 (00:18)
Station Tag: Bhilai/BIA added by Adittyaa Sharma/1421836
Stations:  Bhilai/BIA   Dallirajhara/DRZ   Maroda/MRDA  
भिलाई। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे रायपुर रेल मंडल में चरोदा के ब्रेकडाउन यूनिट (आपात स्थिति शाखा) में 140 टन क्षमता वाले ब्रेकडाउन रेल क्रेन दुर्घटना सहित अन्य निर्माण कार्यों में अहम भूमिका निभा रहा हैं। यह दुर्घटना राहत ट्रेन का अभिन्ना अंग भी है। आधुनिकीकरण के दौर में दुर्घटना में क्षतिग्रस्त भारी माल वाहक वैगन, भारी इंजिन को ट्रैक से हटाने में सक्षम व दुर्घटना स्थल पर शीघ्र गति से पहुंचने की क्षमता भी इसमें है।
आवश्यकता अनुसार एवं सीमित क्षमता वाले पुराने डीजल के्रन के विकल्प के रूप में सन 1994 में देश में निर्मित एक आधुनिक डीजल हाइड्रोलिक 140 टन क्षमता वाले रेल क्रेन को भिलाई के दुर्घटना राहत ट्रेन में शामिल किया गया। यह के्रन रेल इंजन
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कारखाना जमालपुर द्वारा निर्मित देश का पहला (किट) क्रेन है। इसका निर्माण में उपयोग लोहे के प्लेट भिलाई में निर्मित है।
भिलाई में ब्रेक डाउन का भाप इंजन से चलने वाले क्रेन के समय से गौरव शैली इतिहास है। जिसे सन 2011 से भिलाई मार्शलिंग यार्ड के नवनिर्मित डिजास्टर मैनेजमेंट ग्रिड में स्थापित किया गया। डिजास्टर मेनेजमेंट ग्रिड चरोदा में वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (समन्वय) रायपुर एसके सेनापति के मार्गदर्शन में 140 टन क्रेन, दुर्घटना राहत ट्रेन के रख रखाव व त्रुटिरहित परिचालन के लिए डीएस ध्रुव एसएसई (ब्रेक डाउन) व कार्यकुशल में दक्ष विशेष रेल कर्मियों द्वारा किया जाता है।
140 टन हाइड्रोलिक ब्रेकडाउन क्रेन के दुर्घटना राहत ट्रेन में शामिल होने के बाद से राहत मरम्मत व वापसी के कार्य में सार्थक तेजी आई है। बड़ी ट्रेन दुर्घटना में जल्द से जल्द घटना स्थल पर पहुचने से मरमत व वापसी के कार्य में गतिशीलता आती है।
पिछले 25 वर्षों से अनवरत सेवा दे रहे इस के्रन ने निर्धारित अपनी सीमा दाधापारा से डोंगरगढ़ और लाखोली के मध्य व पड़ोसी मंडलो में विपरीत परिस्थियों में आवश्यकतानुसार दुर्घटना राहत में अभूतपूर्व कार्य किया है। दुर्घटना राहत के अलावा ब्रेकडाउन क्रेन का उपयोग जनकल्याणकारी सुविधाओं के निर्माण कार्य में भी किया जाता है। जैसे करोना काल में मंदिर हसौद की फुट ओवर ब्रिज की लांचिंग व रायपुर मंडल के अलग अलग खंडों में पांच स्थानों पर वे ब्रिज स्लैब की स्थापना, 12 नग पुराने डीजल इंजन की ग्राउंडिंग प्रमुख कार्य है।
बीते 10 वर्षों में रायपुर मंडल एवं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्ना स्टेशनों पर 37 फुट ओवर ब्रिज , लेटिस की स्थापना (लांचिंग) की गई। मरोदा दल्ली-राजहरा सेक्शन के अंर्तगत इंजीनियरिंग विभाग के साथ तीन स्थानों पर लिमिटेड हाइट सबवे निर्माण में सब वे बाक्स को स्थापित करना।
इंजीनियरिंग विभाग के 29 से ज्यादा ब्रिज के आयरन गर्डर को स्लैब से बदलने का कार्य किया गया गया है। हाल ही में मंडल रेल प्रबंधक श्याम सुंदर गुप्ता ने चरोदा प्रवास के दौरान इस क्रेन के रखरखाव के लिए कर्मियों को सराहा भी था।
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