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DQS/Dhansar
     धनसर

Track: Construction - New Line

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dhanbad , on jharia line ..
State: Jharkhand

Elevation: 223 m above sea level
Zone: ECR/East Central   Division: Dhanbad

No Recent News for DQS/Dhansar
Nearby Stations in the News
Type of Station: Regular
Number of Platforms: n/a
Number of Halting Trains: 0
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: NaN/5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
transportation - n/a (0)
lodging - n/a (0)
railfanning - n/a (0)
sightseeing - n/a (0)
safety - n/a (0)
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Station News

Page#    Showing 1 to 2 of 2 News Items  
Sep 13 2020 (19:45) हद हो गई : उखाड़ दी रेल पटरी, बसा ली बस्ती (www.jagran.com)
Other News
ECR/East Central
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36157 views

News Entry# 418290  Blog Entry# 4714867   
  Past Edits
Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Dhansar/DQS added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219

Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Jharia/JRI added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219

Sep 13 2020 (19:45)
Station Tag: Dhanbad Junction/DHN added by 03307 The First ECR Train to Hit 130 in GC/1490219
धनबाद : रांगाटांड़ की रेलवे लाइन की बात करें तो यहां दोनों किनारों पर झुग्गियां बसी हैं। बावजूद बंद हो चुकी झरिया रेल लाइन की कहानी इतर है। यहां पटरी के आसपास तो छोड़िए, उसके ऊपर भी मकान बन चुके हैं। और तो और करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की रेल पटरी, सिग्नल पोल व अन्य सामग्री तक लोग रातोंरात उखाड़ ले गए। रेल पटरी की जगह घर बना लिया है तो अंदर डर भी है, सो घरों की छतें पक्की नहीं बनाई गई है। 2002 में बंद हुई झरिया रेल लाइन की जमीन पर पार्क बनाने की तैयारी दो साल पहले हुई थी। तत्कालीन डीआरएम मनोज कृष्ण अखौरी ने नगर निगम से बातचीत की थी। रेलवे की पहल पर नगर निगम पार्क बनाने को राजी हो गया था। वहां रहने वालों को जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिया गया। इसके बाद भी जब वहां बसे लोग हटने को राजी...
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नहीं हुए तो रेलवे ने जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने की तैयारी की। मामला हाई क ोर्ट पहुंच गया। वहां बताया गया 183 परिवार वर्ष 1944 से रह रहे हैं। बिजली बिल और नगर निगम को टैक्स भी चुकाया जाता है। इसलिए नहीं उजाड़ा जाए। रेलवे ने दावा किया कि झरिया रेल लाइन की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 1914 में किया गया था। जब हाईकोर्ट ने रेलवे को दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए तो रेलवे कागजात न्यायालय के समक्ष पेश नहीं कर सकी। नतीजा हाई कोर्ट ने स्टे दे दिया। हैरतअंगेज बात ये कि हाई कोर्ट ने सिर्फ 183 परिवार को नहीं उजाड़ने के लिए स्टे आर्डर दिया। बावजूद इसका फायदा भूमाफिया उठाने लगे। नतीजा आज दो हजार से ज्यादा झोपड़ी, दर्जनों माल गोदाम और खटाल बन गए हैं।
बैंक मोड़ शांति भवन के पीछे हर ओर दिखते खटाल शहर के पॉश इलाके में शुमार बैंक मोड़ के शांति भवन के पीछे झरिया रेल लाइन के इर्द-गिर्द जहां तक नजर जाएगी, सिर्फ खटाल ही दिखेंगे। रेलवे के ढुलमुल रवैये से करोड़ों की जमीन पर कब्जा होता गया। न इंजीनियरिग विभाग और न आरपीएफ ने कभी रोकने की कोशिश की। 2002 में भूमिगत आग के कारण बंद हुई थी रेलवे लाइन : धनबाद झरिया रेल लाइन को वर्ष 2002 में भूमिगत आग का खतरा बताकर बंद किया गया था। उसके बाद बीसीसीएल ने कोयला खनन के लिए रेलवे से जमीन लीज पर ली थी। दो दशक बाद भी कोयला नहीं निकाला जा सका। हां झरिया रेल लाइन का अस्तित्व समाप्त हो गया। जहां के लिए करोड़ों का फंड सिर्फ वहीं खाली होती है जमीन
धनबाद : जमीन पर कब्जा और उसे मुक्त कराने को लेकर भी रेलवे में दो सिस्टम दिखते हैं। दरअसल ऐसी जगह का अतिक्रमण जहां रेलवे का प्रोजेक्ट स्वीकृत है और करोड़ों के फंड मिल रहा है वहां से अवैध कब्जे हटाने को रेलवे ताकत झोंक देती है। जहां प्रोजेक्ट नहीं स्वीकृत है वहां की जमीन का अतिक्रमण देख कर भी रेल अधिकारी आंखें बंद कर लेते हैं। और स्कूल से ले ली जमीन वापस : पुराना बाजार डीएवी स्कूल से सड़क निर्माण के लिए लगभग तीन करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। डायमंड क्रासिंग के पास 12 करोड़ से सबवे भी प्रस्तावित है। मामला करोड़ों का था। सो रेलवे ने पूरी ताकत झोंक दी। दशकों पहले डीएवी स्कूल प्रबंधन को लीज पर दी गई जमीन को छीन लिया। यहां तोड़ दीं फुटपाथ की दुकानें : धनबाद रेलवे स्टेशन के सामने के हिस्से का सुंदरीकरण का प्रोजेक्ट पास हुआ। इसमें तकरीबन ढाई करोड़ रुपये खर्च होने हैं। यहां भी मामला करोड़ों का है। बस रेलवे यहां भी रेस हुई। अतिक्रमण कर बनाई गई सारी फुटपाथ की दुकानों को तोड़कर हटा दिया गया। मॉडल कॉलोनी के लिए तोड़ दिए अवैध कब्जे : रांगाटांड़ रेलवे कॉलोनी को तीन करोड़ खर्च कर मॉडल कॉलोनी बनाने की योजना थी। यहां भी तकरीबन 300 अवैध कब्जे तोड़ कर हटा दिए गए। हालांकि बाद में कोरोना काल के चलते फंड की कमी के कारण इस प्रोजेक्ट को फिलहाल रोक दिया गया। यहां मिली योजना तो हटा दिए 700 कब्जे : गोमो रेलवे स्टेशन को करोड़ों खर्च कर नए सिरे से विकसित किए जाने की योजना बनी है। यहां स्टेशन के आसपास तकरीबन 700 से ज्यादा दुकानें थीं। योजना बनी तो फंड भी तय हुआ। बस इन दुकानों को तोड़कर हटा दिया गया। यहां भी अपनी जमीन को कब्जा मुक्त करने में रेलवे ने पूरी ताकत झोंकी। नतीजा सार्थक आया। यानी रेलवे चाह ले तो अवैध कब्जा हटाना मुश्किल नहीं। अतिक्रमणकारियों को मिलता नेताओं का साथ : रेलवे की जमीन पर कब्जा करने वाले वोटर हैं। उन्हें अपना वोट बैंक बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियां उनका साथ देती रहीं और अपना काम निकालती रहीं। रेलवे की जमीन पर कब्जे को उन्होंने अपने राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल कर दिया। नतीजा राजनीतिक हस्तक्षेप होने के कारण रेलवे को अवैध कब्जा हटाने से कई बार हाथ खींचने पड़े। रांगाटांड़ रेलवे कॉलोनी से कब्जा खाली कराए जाने को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि ने हस्तक्षेप किया। बाद में डीएवी स्कूल मैदान को खाली कराने के दौरान भी सांसद और विधायक दोनों रेलवे के विरोध में खड़े रहे। दूसरी राजनीतिक पार्टियों ने इसे मुद्दा बनाया तो सियासत होती रही। Posted By: Jagranडाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस
Jan 01 2018 (09:57) पैंट्रीकार प्रबंधक 14 लाख लेकर फरार (epaper.jagran.com)
IR Affairs
ECR/East Central

News Entry# 325826   
  Past Edits
Jan 01 2018 (09:57)
Station Tag: Dhansar/DQS added by Happy New Year 2018😊^~/1421836
Stations:  Dhansar/DQS  
संस, धनसार : अंबुज होटल एंड रियल इस्टेट प्रालि. बरमसिया में कार्यरत मुकुल कुमार सिन्हा ने तेलंगाना एक्सप्रेस के पैंट्रीकार प्रबंधक मदन श्रीवास्तव के खिलाफ चार लाख 14 हजार रुपये लेकर फरार होने का रविवार को धनसार थाना में मामला दर्ज कराया है। बरमसिया के मुकुल का कहना है कि अंबुज होटल के कार्य की देखरेख वहीं अपने आवासीय कार्यालय में करते हैं। कंपनी के अधीन तेलंगाना एक्सप्रेस 12723/24 पेंट्रीकार में मैनेजर के पद पर मदन श्रीवास्तव कार्यरत हैं। कंपनी ने 26 अक्टूबर 2017 को चार लाख 14 हजार अपनी कंपनी के दिल्ली शाखा में जमा करने को दिया। मदन दिल्ली में राशि जमा न कर उसे लेकर फरार हो गया। 31 दिसंबर को फोन करके मदन से राशि मांगा तो उन्होंने अपशब्द कहते हुए र्दुव्‍यवहार किया। मदन ने आरोप को गलत बताया है।संस, धनसार : अंबुज होटल एंड रियल इस्टेट प्रालि. बरमसिया में कार्यरत मुकुल कुमार सिन्हा ने तेलंगाना एक्सप्रेस...
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के पैंट्रीकार प्रबंधक मदन श्रीवास्तव के खिलाफ चार लाख 14 हजार रुपये लेकर फरार होने का रविवार को धनसार थाना में मामला दर्ज कराया है। बरमसिया के मुकुल का कहना है कि अंबुज होटल के कार्य की देखरेख वहीं अपने आवासीय कार्यालय में करते हैं। कंपनी के अधीन तेलंगाना एक्सप्रेस 12723/24 पेंट्रीकार में मैनेजर के पद पर मदन श्रीवास्तव कार्यरत हैं। कंपनी ने 26 अक्टूबर 2017 को चार लाख 14 हजार अपनी कंपनी के दिल्ली शाखा में जमा करने को दिया। मदन दिल्ली में राशि जमा न कर उसे लेकर फरार हो गया। 31 दिसंबर को फोन करके मदन से राशि मांगा तो उन्होंने अपशब्द कहते हुए र्दुव्‍यवहार किया। मदन ने आरोप को गलत बताया है।
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