Spotting
 Timeline
 Travel Tip
 Trip
 Race
 Social
 Greeting
 Poll
 Img
 PNR
 Pic
 Blog
 News
 Conf TL
 RF Club
 Convention
 Monitor
 Topic
 Bookmarks
 Rating
 Correct
 Wrong
 Stamp
 PNR Ref
 PNR Req
 Blank PNRs
 HJ
 Vote
 Pred
 @
 FM Alert
 FM Approval
 Pvt
News Super Search
 ↓ 
×
Member:
Posting Date From:
Posting Date To:
Category:
Zone:
Language:
IR Press Release:

Search
  Go  

RailFans - we wander, but never get lost - Shaurya Kumar

Full Site Search
  Full Site Search  
FmT LIVE - Follow my Trip with me... LIVE
 
Sat Sep 18 07:53:37 IST
Home
Trains
ΣChains
Atlas
PNR
Forum
Quiz Feed
Topics
Gallery
News
FAQ
Trips/Spottings
Login
Post PNRAdvanced Search
no description available
Entry# 4616494-0

TD/Tanda (1 PFs)
ٹانڈا     टांडा

Track: Single Electric-Line

Tanda Railway Station, Ambedkarnagar
State: Uttar Pradesh


Zone: NR/Northern   Division: Lucknow Charbagh NR

No Recent News for TD/Tanda
Nearby Stations in the News
Type of Station: Regular
Number of Platforms: 1
Number of Halting Trains: 0
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: 2.1/5 (7 votes)
cleanliness - average (1)
porters/escalators - poor (1)
food - poor (1)
transportation - good (1)
lodging - poor (1)
railfanning - good (1)
sightseeing - n/a (0)
safety - poor (1)

Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 25 News Items  next>>
Oct 25 2020 (06:43) माननीयों ने ट्रैफिक लाइन का बना दिया कामर्शियल ट्रैक (m.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
0 Followers
27331 views

News Entry# 422678  Blog Entry# 4757856   
  Past Edits
Oct 25 2020 (06:45)
Station Tag: Surapur/SU added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 25 2020 (06:43)
Station Tag: Tanda/TD added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 25 2020 (06:43)
Station Tag: Akbarpur Junction/ABP added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Akbarpur Junction/ABP   Surapur/SU   Tanda/TD  
अम्बेडकरनगर। ब्रिटिश सरकार ने टांडा के वस्त्र उद्योग को शिखर पर पहुंचाने और सुलभ आवागमन के लिए रेल लाइन बिछवाई थी। अकबरपुर-टांडा रेलखंड पर पर यात्री ट्रेन चलवाई थी। ब्रिटिश सरकार के ट्रैफिक रेल लाइन को देश के संसद में जनता से चुनकर पहुंचे माननीयों ने कॉमर्शियल ट्रैक बना दिया है।देश को आजाद हुए 73 से अधिक का समय बीत चुका है। देश में 17वीं लोकसभा का एक साल पहले ही गठन हो चुका है। दो तिहाई के प्रचंड बहुमत की नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्र की सरकार चल रही है। सरकार के पास इतनी बहुमत है कि विपक्ष के नेता तक का पद ही रिक्त है। सरकार की इतनी व्यापकता के बावजूद देश में आज भी अंग्रेजों के समय के तमाम कानून यथावत हैं। राजस्व महकमें के अभिलेखों में दर्ज होने शब्द और पुलिस महकमे की जीडी, चार्जशीट तक की शब्दावली तक नहीं बदली गई है। वहीं अंग्रेजों के...
more...
समय चल रही यात्री ट्रेन को अवश्य बदल दिया गया है। अंग्रेजी सरकार के ट्रैफिक ट्रैक को कामर्शियल ट्रैक में अवश्य बदल दिया गया है। अकबरपुर टांडा रेलखंड पर अंग्रेजों के समय से चलने वाली यात्री ट्रेन को देश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार ने बंद कर दिया है। ट्रेन को उस सरकार ने 10 फरवरी 1993 को पूरी तरह से बंद किया जिसने आज तक अंग्रेजों के बनाए तमाम कानून को यथावत रखा है। माननीयों की इस निर्णय को अकबरपुर टांडा रेलखंड ही नहीं पूरे जिले की उपेक्षा का सबसे बड़ा प्रमाण कहा जा सकता है। अंग्रेजों के समय समय की दो बोगियों की ट्रेन अकबरपुर टांडा के बीच दिन में तीन बार चलती थी। एक एक कर तीनों फेरा बंद किया गया। 1993 से ट्रेन का संचालन पूरी तरह से बंद है। इसमें संसद में बैठे देश के पांच सैकड़ा सांसदों के साथ स्थानीय लोकसभा के प्रतिनिधि की भी मौन स्वीकृति रही है। माननीयों की उपेक्षा और स्थानीय सांसद की मौन स्वीकृति का कारण है कि 27 साल पहले बंद हुई अकबरपुर टांडा पैसेंजर ट्रेन का संचालन फिर से होने की संभावना ही नहीं नजर नहीं आ रही है। कारण पूर्व के जनप्रतिनिधियों की तरह वर्तमान के जनप्रतिनिधि भी मौन साधे हुए हैं।माननीयों का मौन रहना रेलवे को दे रहा है बल :संसद में बैठने वाले जनप्रतिनिधियों के मौन रहने के कारण ही अकबरपुर टांडा यात्री रेलवे लाइन पूरी तरह से मालगाड़ी रेल लाइन बन कर रह गई है। यह रेल लाइन ठीक उसी तरह की रेल लाइन हो गई है जैसे तमाम बड़ी रेल लाइनों के समानांतर स्पेशल कमर्शियल लाइन होती है। अब अकबरपुर टांडा रेल लाइन पर केवल माल गाड़ी चलती है। माल गाड़ी भी केवल एनटीपीसी के लिए कोयला और सीमेंट फैक्ट्री के लिए क्लिंकर लाने का काम करती है। रेलवे ऐसा केवल माननीयों के मौन रहने के कारण ही कर पा रहा है। माननीय अगर आवाज बुलंद करते तो रेल लाइन पर यात्री ट्रेन भी चल सकती है। माननीयों के मौन रहने के कारण ही रेलवे को बल मिल रहा है और रेल मंत्रालय अकबरपुर टांडा यात्री ट्रेन का संचालन फिर से नहीं कर रहा है।
Oct 24 2020 (07:42) बंद हुई यात्री ट्रेन तो औद्योगिक नगर के तमगे पर लगा ग्रहण (m.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
0 Followers
10355 views

News Entry# 422568  Blog Entry# 4757118   
  Past Edits
Oct 24 2020 (07:43)
Station Tag: Tanda/TD added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Tanda/TD  
अम्बेडकरनगर। बंद हुई यात्री ट्रेन ने टांडा नगर के विकास को रोक दिया। ट्रेन की बंदी से जिले के सबसे पुराने शहर टांडा की पहचान बुनकर उद्योग का दायरा सीमित कर दिया। टांडा में बने कपड़ों को सुदूर के शहरों में पहुंच पाने में अवरोध पैदा कर दिया। और तो और टांडा को औधोगिक नगर का दर्जा भी नहीं मिलने दिया।स्थानीय ही नहीं टांडा अखंड जनपद फैजाबाद (अब अयोध्या) का सबसे पुराना शहर है। इस शहर का प्रमुख उद्योग बुनकरी है। आजादी के बहुत पहले से टांडा में कपड़ा बनता आ रहा है। यहां के बने कपड़ों को देश के कोने कोने के साथ विदेशों में भी काफी पसंद किया जाता है। देश के साथ विदेशों में भी टांडा के बने कपड़ों की बेहद मांग होने के चलते ब्रिटिश सरकार ने रेल लाइन बिछवाई थी और अकबरपुर-टांडा के मध्य यात्री ट्रेन का संचालन शुरू किया था। कालांतर में देश के आजाद...
more...
होने के बाद अंग्रेजों के समय से चलने वाली तीन फेरे वाली यात्री ट्रेन को एक एक कर बंद कर दिया गया तो टांडा शहर के बुनकर उद्योग का विकास थम सा गया। और तो और बोलचाल में औधोगिक नगरी और बुनकर नगरी कहलाने वाले शहर को वास्तविक तौर पर इसका दर्जा नहीं मिल सका है। 27 साल से बंद चल रही ट्रेन से टांडा नगर के वस्त्र उद्योग को उसका असल मुकाम नहीं मिल सका है। अंग्रेजी शासन काल की तरह अगर अब भी ट्रेन चल रही होती तो टांडा शहर का विकास हो गया होता और टांडा को औद्योगिक नगरी का दर्जा भी मिल गया होता। भले ही आगरा, कन्नौज, वाराणसी, कानपुर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद के उद्योगों के चलते इन कस्बों को मिले औद्योगिक नगरी का भले ही दर्जा न मिलता, लेकिन जिले के वस्त्र उद्योग को विशेष दर्ज जरूर मिल सकता था।
Oct 23 2020 (07:26) यात्री ट्रेन बंद करने वाली कांग्रेस का जिले से साफ हुआ सूपड़ा (m.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
0 Followers
25452 views

News Entry# 422441  Blog Entry# 4756051   
  Past Edits
Oct 25 2020 (06:45)
Station Tag: Surapur/SU added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 23 2020 (07:26)
Station Tag: Tanda/TD added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 23 2020 (07:26)
Station Tag: Akbarpur Junction/ABP added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Akbarpur Junction/ABP   Surapur/SU   Tanda/TD  
अम्बेडकरनगर। अकबरपुर टांडा के बीच चलने वाली यात्री ट्रेन को बंद किए जाने पर भले ही जिले की जनता ने कभी हल्ला गुल्ला न किया हो मगर ट्रेन बंद करने वालों को आईना अवश्य दिखाया है। ट्रेन बंद करने वाले दल कांग्रेस को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। इसका प्रमाण ट्रेन बंदी के बाद कभी भी स्थानीय (पहले के अकबरपुर और वर्तमान में अम्बेडकरनगर लोकसभा) संसदीय सीट पर कांग्रेस का चुनाव न जीत पाना है। आजादी के बाद से ही सत्ता के शिखर पर रहने वाली अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 1984 के बाद से कभी भी जिले में खाता नहीं खुला है। जिले की जनता ने भले ही कभी टांडा यात्री ट्रेन को बंद करने का गंभीर होकर मुद्दा ना बनाया हो लेकिन यात्री ट्रेन बंद करने वाली कांग्रेस का फिर से प्रतिनिधि नहीं चुना है। 1984 में अंतिम बार उसके सांसद रामप्यारे सुमन चुने गए थे।...
more...
10 फरवरी 1993 को जब अकबरपुर टांडा पैसेंजर ट्रेन का परिचालन बंद किया गया था तब केंद्र में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली सरकार थी। तब से आज तक पूर्व के अकबरपुर सुरक्षित और वर्तमान के अम्बेडकरनगर संसदीय सीट पर कांग्रेस का प्रतिनिधि नहीं चुना गया है। ट्रेन को पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने बंद की थी। इस लोकसभा सीट पर चुनाव की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी। तब के अकबरपुर सुरक्षित सीट पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पन्नालाल चुनाव जीते थे। कांग्रेस के ही टिकट पर पन्नालाल 1957 और 1962 में भी सांसद चुन लिए गए। कांग्रेस पार्टी को 1967 व 1971 में भी इस सीट पर कांग्रेस के ही रामजी राम ने जीत दर्ज की थी। 1977 के चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर में जनता पार्टी के टिकट पर मंगलदेव विशारद सांसद चुने गए थे। 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हरा कर जनता पार्टी सेकुलर के टिकट पर रामअवध सांसद चुने गए थे। दो चुनाव बाद वर्ष 1984 में कांग्रेस को फिर कामयाबी मिली और रामपियारे सुमन सांसद चुने गए थे। इसके बाद फिर कांग्रेस को कामयाबी नहीं मिली। दिग्गज भी कांग्रेस को नहीं दिला सके जीत : ट्रेन जब 1993 में बन्द हुई तो केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी और स्थानीय सांसद राम अवध थे। ट्रेन बन्द करने से जिले के लोग इतना नाराज हुए कि 1975 में लगे आपातकाल के बाद 1977 के कांग्रेस विरोधी लहर में मिले मतों के आंकड़े को भी अब तक कांग्रेस नहीं छू सकी। अकबरपुर टांडा यात्री ट्रेन को बंद करने वाली कांग्रेस ने फिर से संसदीय सीट पर भरसक कब्जे का प्रयास किया, मगर जनता ने नकार दिया। इसके लिए कांग्रेस पार्टी ने हर तरह के दांव आजमाए, लेकिन सफलता नहीं मिली। कांग्रेस की इस दुर्गति से उसके दिग्गज भी नहीं उबार सके। कांग्रेस ने कई दिग्गजों मसलन राज्यपाल रह चुके माताप्रसाद पर, प्रदेश अध्यक्ष रहे राजबहादुर पर, बहुचर्चित फूलनदेवी के पति उमेद निषाद तक को मैदान में उतार कर सीट पर फिर से कब्जे का प्रयास किया मगर जनता ने नकार दिया। कद्दावर नेताओं के बूते भी पार्टी यहां जीत दर्ज नहीं कर पाई। वर्ष 2009 में अकबरपुर सीट अम्बेडकरनगर में तब्दील हो गई। सुरक्षित की बजाए यह सीट सामान्य श्रेणी की कर दी गई। इस परिवर्तन का भी कोई लाभ कांग्रेस के लिए सामने नहीं आ सका। ऐसे में करीब चार दशक से पार्टी को सफलता का इंतजार बना हुआ है।अन्य दलों को भी जनता ने दिखाया आईना :ट्रेन बंद करने से नाराज जनता ने फिर से कांग्रेस के प्रतिनिधि को जहां लोकसभा में नहीं भेजा वहीं अन्य दलों को भी आईना दिखाने का काम किया है। अपवाद स्वरूप जीत कर सीट छोड़ देने वाली बसपा मुखिया मायावती ही दोबारा चुनाव जीत सकी हैं। मायावती के अलावा किसी भी दल के प्रत्याशी को मतदाताओं ने दोबारा मौका नहीं दिया है। जनता ने जीत कर संसद में पहुंच कर बंद ट्रेन के बाबत चर्चा तक न करने और ट्रेन के फिर से फिर से परिचालन करने की मांग न करने के प्रतिकार में फिर से किसी को दोबारा अपना प्रतिनिधि नहीं चुना है।कहीं कांग्रेस की ही तरह भाजपा का न हो जाए हाल :अगर जल्द ही ट्रेन का संचालन शुरू नहीं हुआ तो जिले की खासकर टांडा की जनता भाजपा को भी कांग्रेस की तरह आईना दिखाने का काम करेगी। कांग्रेस की ही तरह भाजपा का भी सूपड़ा साफ कर देगी। कांग्रेस की ही तरह भाजपा भी संसद में फिर से पहुंचने के लिए तरस जाएगी।
Oct 22 2020 (07:01) अम्बेडकरनगर में बंद हुई यात्री ट्रेन तो थम गया टांडा शहर का विकास (m.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
0 Followers
11128 views

News Entry# 422306  Blog Entry# 4754869   
  Past Edits
Oct 22 2020 (07:01)
Station Tag: Tanda/TD added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Tanda/TD  
अम्बेडकरनगर । टांडा बुनकरों की नगरी है। जिले का सबसे पुराना कस्बा है। इस पुराने नगर के विकास की रफ्तार बेहद मंद है। मंदी का कारण शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा है। उपेक्षा ने यात्री ट्रेन का परिचालन बंद करवा दिया था। इससे टांडा शहर का विकास थम गया है। सरयू नदी (घाघरा) के किनारे बसा टांडा शहर के विकास की संभावना तीन दिशाओं में है। पूरब और पश्चिम के साथ दक्षिण दिशा में टांडा शहर का विस्तार होने, क्षेत्रफल बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने की प्रबल संभावना के बावजूद ऐसा नहीं हो सका है। इसका कारण अकबरपुर टांडा के मध्य चलने वाली यात्री ट्रेन का बंद हो जाना है। यात्री ट्रेन के बंद हो जाने के चलते टांडा के शहर का विकास थम सा गया है। अगर 27 साल पहले अकबरपुर-टांडा यात्री गाड़ी का परिचालन अगर बंद न हुआ होता तो आज के टांडा शहर की तश्वीर...
more...
अलग ही होती।
ट्रेन के चलने के दौरान तेजी से हुआ था विकास
जब तक अकबरपुर टांडा यात्री ट्रेन चल रही थी तब तक टांडा शहर का विकास तेजी से हो रहा था। ट्रेन बंद हो जाने के बाद से टांडा शहर का क्षेत्रफल नहीं बढ़ा है। 10 फरवरी 1993 को ट्रेन बंद होने के बाद बाद टांडा शहर के साथ क्षेत्रफल में वृद्धि नहीं हुई है। भले ही टांडा रेलवे स्टेशन के सामने हाइडिल और स्टेशन के दक्षिण में विकास खंड कार्यालय टांडा स्थापित है लेकिन अपेक्षित रोजगार के अवसर नहीं पैदा हो सके हैं। इसका अहम कारण ट्रेन का परिचालन बंद होना है। जानकार बताते हैं कि आवागमन की सुविधा होती तो इस क्षेत्र में कई तरह के स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते थे। साथ ही टांडा शहर का विकास इनामीपुर तक हो गया होता।
अकबरपुर, जलालपुर, किछौछा के मुकाबले पिछड़ा टांडा
टांडा नगर पालिका परिषद का क्षेत्रफल अन्य कस्बों के मुकाबले बेहद कम बढ़ा है। जिला बनने के बाद जनपद के पांच निकायों में से तीन का सीमा विस्तार तो हुआ मगर सबसे पुराने शहर टांडा का विस्तार नहीं हो सका है। टांडा के बाद कस्बा बने जिला मुख्यालय नगर अकबरपुर, अशरफपुर किछौछा और जलालपुर कस्बे का सीमा विस्तार हो चुका है लेकिन सबसे पुराने शहर टांडा सीमा विस्तार आज तक नहीं हो सका। इसके पीछे का अहम कारण अकबरपुर टांडा के मध्य चलने वाली यात्री ट्रेन का बंद हो जाना है।
Oct 21 2020 (08:01) माननीयों की उपेक्षा बना यात्री ट्रेन की बंदी कारण (m.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NR/Northern
0 Followers
26079 views

News Entry# 422153  Blog Entry# 4753818   
  Past Edits
Oct 25 2020 (06:45)
Station Tag: Surapur/SU added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 21 2020 (08:01)
Station Tag: Tanda/TD added by Anupam Enosh Sarkar/401739

Oct 21 2020 (08:01)
Station Tag: Akbarpur Junction/ABP added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Akbarpur Junction/ABP   Surapur/SU   Tanda/TD  
अम्बेडकरनगर। 27 साल पहले जिस यात्री ट्रेन को बंद कर दिया गया था उसके लिए रेलवे को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक सच इसके इतर है। सच यह है कि अगर माननीयों ने इच्छाशक्ति दिखाई होती और आवाज बुलंद किया होता तो अकबरपुर-टांडा यात्री ट्रेन बंद नहीं हुई होती। जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा और उदासीनता के ही चलते रेलवे यात्री ट्रेन का संचालन बंद कर सका था और इसी के चलते रेलवे फिर से यात्री ट्रेन का फिर से परिचालन नहीं कर रहा है।कड़वा सच यही है कि आजाद देश भारत में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों ने उस टांडा की उपेक्षा की जिसे ब्रिटिश सरकार ने भरपूर सम्मान दिया था। विकास के लिए अकबरपुर से टांडा तक रेल लाइन बिछवाई थी। टांडा के कपड़ों को देश के कोने कोने तक पहुंचाने की व्यवस्था दी थी। देश के किसी भी कोने से टांडा तक रेल...
more...
मार्ग से पहुंचने की सुविधा प्रदान की थी। यह विडम्बना ही है कि देश को गुलाम बनाने वालों ने टांडा को विकास के शिखर पर ले जाने के लिए रेल लाइन, रेलवे स्टेशन और रेल सुविधा दी थी और आजाद देश की सरकार और उसके नुमाइंदों ने सुविधा और व्यवस्था सब कुछ खत्म कर दिया। जनता का वोट लेकर संसद में पहुंचने वाले दिवंगत राम अवध, राम पियारे सुमन से लेकर धनश्याम चन्द्र खरवार, त्रिभुवन दत्त, राकेश पांडेय, हरिओम पांडेय में से किसी ने भी बंद ट्रेन के फिर से परिचालन के बाबत संसद में आवाज नहीं उठाई। वर्तमान संसद रितेश पांडेय ने संवाद में तो बंद ट्रेन का मुद्दा रेल भवन, रेल मंत्री और संसद तक ले जाने का दम तो भरा मगर चन्द रोज पहले रेल भवन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से मिलने के बाद भी बंद ट्रेन का मुद्दा नहीं उठाया। अन्य कई मामलों से सम्बंधित मांग पत्र तो दिया मगर पूर्व सांसदों की ही तरह टांडा की उपेक्षा करते हुए बंद ट्रेन के फिर से परिचालन के बाबत मांग पत्र में उल्लेख तक नहीं किया।न जनता ने किया सवाल, न उठा मुद्दा :यह भी बहुत अहम है कि टांडा की जनता भी समय के साथ चलने को कभी तत्पर नहीं हुई। इसी कारण न माननीयों ने तवज्जों दिया और न बंद रेलवे क्रॉसिंग को खोलने के लिए महीनों आंदोलन चलाने वाले एवं रेलवे के खिलाफ संघर्ष समिति बना कर मोर्चा खोलने वाले ने ही बंद ट्रेन को मुद्दे पर कभी आंदोलन ही किया।
Page#    Showing 1 to 20 of 25 News Items  next>>

Scroll to Top
Scroll to Bottom
Go to Mobile site
Important Note: This website NEVER solicits for Money or Donations. Please beware of anyone requesting/demanding money on behalf of IRI. Thanks.
Disclaimer: This website has NO affiliation with the Government-run site of Indian Railways. This site does NOT claim 100% accuracy of fast-changing Rail Information. YOU are responsible for independently confirming the validity of information through other sources.
India Rail Info Privacy Policy