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52307/Balgona Katwa PASS N G (UnReserved)
Balgona কাটোয়া পাস এন জি     Balgona कटवा पास एन जी

BGNA/Balgona --> KWF/Katwa

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Sun Nov 30, 2014 (09:33PM)
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Train News

Page#    2 News Items  
केंद्रीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने आम बजट 2016-17 में की गई घोषणा के अनुरूप आज दिल्‍ली सफदरजंग स्‍टेशन से बाघ खोज परिपथ रेल गाड़ी (टाइगर ट्रेल सर्किट ट्रेन) के उद्घाटन को हरी झंडी दिखाई। श्री सुरेश प्रभु, जो मुंबई की यात्रा पर थे, ने मुंबई एवं दिल्‍ली के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इस रेल गाड़ी को हरी झंडी दिखाई।
रिमोट के जरिये हरी झंडी दिखाए जाने वाले इस कार्यक्रम के दोनों छोरों पर इस अवसर पर कई गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर दिल्‍ली सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्‍वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सांसद (लोकसभा) श्रीमती मीनाक्षी लेखी, सांसद (राज्‍य सभा) श्री जर्नादन द्विवेदी एवं एनडीएमसी
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के उपाध्‍यक्ष श्री करण सिंह तंवर जैसे गणमान्‍य अतिथि उपस्थित थे। सफदरजंग स्‍टेशन पर उपस्थित अधिकारियों में रेलवे बोर्ड के मेम्‍बर ट्रैफिक श्री मोहम्‍मद जमशेद, मेम्‍बर स्‍टॉफ श्री प्रदीप कुमार, मेम्‍बर मैकेनिकल श्री हेमंत कुमार, मेम्‍बर इलैक्ट्रिकल श्री ए.के.कपूर , रेलवे वित्‍त आयुक्‍त श्री एस.मुखर्जी, उत्‍तर रेलवे महाप्रबंधक श्री ए.के.पुठिया एवं दिल्‍ली के डिविजनल रेलवे प्रबंधक श्री अरुण अरोड़ा एवं रेलवे बोर्ड तथा उत्‍तर रेलवे के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
विश्‍व पर्यावरण दिवस पर टाइगर एक्‍सप्रेस की शुरूआत हमारे जीवन में पर्यावरण के महत्‍व को रेखांकित करती है। रेल मंत्री ने इस रेल गाड़ी की संकल्‍पना में व्‍यक्तिगत दिलचस्‍पी ली। इस पर्यटक रेल गाड़ी का संचालन भारतीय रेल की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय रेल कैटरिंग एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) द्वारा किया जाएगा।
पांच दिनों/ छह रातों की यात्रा के कार्यक्रम के साथ यह रेल गाड़ी दिल्‍ली सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन से चलेगी तथा कटनी, जबलपुर, बांधवगढ़, कान्‍हा होते हुए यात्रा करेगी। यह सेमी-लग्‍जरी रेल गाड़ी अतिथियों को मध्‍य प्रदेश में विश्‍व प्रसिद्ध बांधवगढ़ एवं कान्‍हा राष्‍ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराएगी। इसके अतिरिक्‍त, इस यात्रा में पर्यटकों को जबलपुर के निकट भेड़ाघाट में धौधर जलप्रपात का भी भ्रमण कराया जाएगा।
इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि भारतीय रेल पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। श्री सुरेश प्रभु ने बताया कि रेल मंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद उन्‍होंने रेल मंत्रालय में एक अलग, समर्पित पर्यावरण निदेशालय बनाने की पहल की। उन्‍होंने कहा कि रेल मंत्रालय अधिक पर्यावरण हितैषी बनने के दृष्टिकोण से कई कदम उठा रहा है। टाइगर एक्‍सप्रेस को उद्धृत करते हुए श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि बाघ फूड चेन के शीर्षबिन्‍दु पर है, जिसके बेशुमार पारिस्थितकी प्रभाव हैं और इसलिए यह बिल्‍कुल उपयुक्‍त है कि इस विषय पर केंद्रित एक रेल गाड़ी प्रारंभ की जाए। श्री सुरेश प्रभु ने घोषणा की कि भारतीय रेल अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आईआरसीटीसी के माध्‍यम से एलीफैंट सर्किट, डेजर्ट सर्किट आदि जैसे अधिक पर्यटन सर्किट रेल गाडि़यां प्रारंभ करेगा।
टाइगर एक्‍सप्रेस की मुख्‍य विशेषताएं:
‘टाइगर एक्‍सप्रेस’ को प्रारंभ किया जाना रेल बजट 2016-17 में इस बारे में की गई घोषणा के अनुरूप है। इस रेल गाड़ी का उद्देश्‍य हमारे राष्‍ट्रीय पशु बाघ के बारे में जागरुकता फैलाना है।
‘टाइगर एक्‍सप्रेस’ भारतीय रेल द्वरा प्रारंभ की गई अब तक की सबसे अभिनव पर्यटन योजनाओं में से एक है।
भारतीय बाघ ने हमेशा ही भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आ‍कर्षित किया है। यह सेमी-लग्‍जरी रेल गाड़ी अतिथियों को मध्‍य प्रदेश में विश्‍व प्रसिद्ध बांधवगढ़ एवं कान्‍हा राष्‍ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराएगी।
कान्‍हा राष्‍ट्रीय उद्यान बाघों, बारहसिंगा, बारासिंघा की उ‍पस्थिति के लिए विख्‍यात है। इसे प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किप्‍लिंग के विख्‍यात उपन्‍यास ‘द जंगल बुक’ के लिए प्रेरणा के एक स्रोत के रूप में भी जाना जाता है।
बांधवगढ़ राष्‍ट्रीय उद्यान अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। बांधवगढ़़ में बाघों की आबादी का घनत्‍व भारत में लगभग सबसे अधिक है। इस उद्यान में तेंदुओं की एक बड़ी प्रजनक आबादी तथा विभिन्‍न प्रजातियों के हिरण पाये जाते हैं।
टाइ्गर एक्‍सप्रेस की पांच दिन/छह रात की यात्रा के कार्यक्रम में तीन बाघ सफारी शामिल है और यह पर्यटकों को बाघों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखने और वन्‍य जीवन का निरीक्षण करने का पर्याप्‍त अवसर प्रदान करता है।
किराया संरचना
यात्रा कार्यक्रम की किराया संरचना 38,500 रुपये से प्रारंभ होती है। फर्स्‍ट क्‍लास एसी में यात्रा करने पर एक व्‍यक्ति के लिए किराया 49,500 रुपये, दो व्‍यक्तियों के लिए 45,500 रुपये, तीन व्‍यक्तियों के लिए 44,900 रुपये तथा बच्‍चे (5 से 11) के साथ यात्रा के लिए 39,500 रुपये निर्धारित की गई है।
एसी 2टीयर में यात्रा करने पर एक व्‍यक्ति के लिए किराया 43,500 रुपये, दो व्‍यक्तियों के लिए 39,000 रुपये, तीन व्‍यक्तियों के लिए 38,500 रुपये तथा बच्‍चे (5 से 11) के साथ यात्रा के लिए 33,500 रुपये निर्धारित की गई है।
यात्रा कार्यक्रम

दिन
दिनों)
कहां से- कहां तक
विवरण
दिन 1
(रविवार)
दिल्‍ली सफदरजंग - ***
(*** - 15:00 बजे)
दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन से 15:00 बजे प्रस्‍थान
दिन 2
(सोमवार)
कटनी
(05:40 बजे )
IRCTC Buddhist Train Bookingकटनी रेलवे स्‍टेशन 05.40 पर आगमन। रेल गाड़ी में नाश्‍ता। होटल चेक इन एवं लंच के लिए बांधवगढ़ के लिए प्रस्‍थान। बाद में शाम की सफारी (खितौली जोन) के लिए प्रस्‍थान। बांधवगढ़ होटल में रात्रि भोजन एवं विश्राम।
दिन 3
(मंगलवार)
बांधवगढ़- कान्‍हा
(*** - 11:00 बजे)
कान्‍हा के लिए प्रस्‍थान। चेक इन एवं लंच होटल में। बाद में शाम की सफा‍री (मुक्‍की जोन) के लिए प्रस्‍थान। होटल में रात्रि भोजन एवं विश्राम।
IRCTC Buddhist Train Booking
दिन 4
(बुधवार)
कान्‍हा
कान्‍हा में सुबहIRCTC Buddhist Train Booking की सफारी

(मुक्‍की जोन)। सुबह में देर से नाश्‍ता। होटल में लंच सायं काल में विश्राम। होटल में रात्रि भोजन एवं विश्राम।

दिन 5
(गुरुवार)
कान्‍हा - जबलपुर
(***** - 22:05 बजे)
नाश्‍ते के बाद जबलपुर के लिए प्रस्‍थान (लगभग 135 किलोमीटर)IRCTC Buddhist Train Booking। जबलपुर में होटल में लंच। भेड़ाघाट में धौधर जल प्रपात के लिए प्रस्‍थान। स्‍टेशन के लिए प्रस्‍थान करने से पहले शाम में अल्‍पाहार। रेल गाड़ी में रात का खाना।
दिन 6
(शुक्रवार)
**** - दिल्‍ली सफदरजंग
(15:50 बजे )
नाश्‍ता एवं लंच। दिल्‍ली सफदरजंग रेलवे स्‍टेशन 15.50 में आगमन और सुखद यादों के साथ यात्रा का समापन।


टाइगर एक्‍सप्रेस का रास्‍ता:

click here

बुकिंग की जानकारी:
इस रेल की ऑनलाइन बुकिंग आईआरसीटीसी टूरिज्‍म पोर्टल www.irctctourism.com or tourism@irctc.com. पर की जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए 1800110139 या 9717645648, 971764718, 9717640219, 9717644085, 9717645625 पर डायल करें।

***
एसकेजे/एनआर-2864
(Release ID 52307)
Dec 01 2014 (20:26) শেষের ঘণ্টা বাজতেই বেড়েছে ভিড় (www.anandabazar.com)
Commentary/Human Interest
ER/Eastern
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Dec 01 2014 (8:26PM)
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Dec 01 2014 (8:26PM)
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Dec 01 2014 (8:26PM)
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Dec 01 2014 (8:26PM)
Train Tag: Katwa Balgona PASS N G/52302 added by জয়দীপ JOYDEEP जय़दीप*^/90119

Dec 01 2014 (8:26PM)
Train Tag: Balgona-Katwa NG passenger/52301 added by জয়দীপ JOYDEEP जय़दीप*^/90119
আর এক রাত। তারপরেই ইতিহাস হয়ে যাবে কাটোয়া-বলগোনা ন্যারোগেজ লাইন। রবিবার, শেষবারের মতো ও পথে চলবে ছোটরেল।
তার আগে গত কয়েকদিন ধরেই ওই রেলের সওয়ারি হতে ভিড় জমাচ্ছেন বহু মানুষ। কাটোয়া শহর তো বটেই, কলকাতা থেকেও কাজের ফাঁকে এসে ছোটরেলে চড়ার শখ মিটিয়ে নিচ্ছেন অনেকে। স্মৃতি রোমন্থন করছেন কর্মীরা, মুহুর্মুহু ফ্ল্যাশ জ্বলছে মোবাইলেরও। রেলের এক কর্মী তো কাটোয়া স্টেশনে দাঁড়িয়ে বলেই ফেললেন, “এই ক’দিনে এত মানুষ যাত্রী হয়েছেন যে টিকিট বিক্রি অনেকটাই বেড়ে গিয়েছে। রবিবার যাত্রীদের ঠাঁই দেওয়াই কঠিন হবে।”
শেষদিনেও কাটোয়া থেকে বলগোনা, ২৭ কিলোমিটার রাস্তায় চার জোড়া ট্রেন যাতায়াত করবে। সাধারণত
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ওই পথ যেতে প্রায় পৌনে দু’ঘন্টা সময় লাগে ছোটরেলের। তবে রবিবার নানা স্টেশনে সংবর্ধনা নিয়ে সঠিক সময়ে যাত্রা যে শেষ করা যাবে না, তাতে একপ্রকার নিশ্চিত রেলের কর্তারা। কাটোয়া রেলওয়ে কর্মচারীদের পক্ষে বিশ্বজিৎ দে বলেন, “যাত্রী সমিতি-সহ বিভিন্ন সংগঠনের সাহায্য নিয়ে আমরা কাটোয়া থেকে বলগোনা পর্যন্ত যাত্রাপথে ট্রেনের কামরায় ও বিভিন্ন স্টেশনে নানারকম অনুষ্ঠান করব বলে ঠিক করেছি।”
১৯১৫-র ১ ডিসেম্বর এই রেলপথটি চালু হয়। তৎকালীন ব্রিটিশ সরকার এই রেলপথের জন্য বিনামূল্যে জমি দান করেন লন্ডনের ম্যাকলিওড ও রাসেল কোম্পানিকে। ওই কোম্পানি ‘ম্যকলিওড লাইট রেলওয়েজ’ নাম দিয়ে ট্রেন চালাতে শুরু করে ন্যারোগেজ লাইনে। চার জোড়া ট্রেন দিয়ে যাত্রা শুরু হয়। সেই সময় ছোট ট্রেনের ইঞ্জিনগুলি কোম্পানির বড় কর্তাদের নামে রাখা হয়েছিল। যেমন, চার্লস নরম্যান ম্যাকলয়েড, এস সি ঘোষ। পরে অবশ্য চার থেকে বেড়ে ছ’জোড়া ট্রেন চালানোও হতো একসময়। ৮০-র দশক পর্যন্ত আলাদা আলাদা প্রথম, দ্বিতীয় ও তৃতীয় শ্রেণিও ছিল ওই রেলে। ছোট রেল নিয়ে গবেষনা করেছেন চন্দননগরের বাসিন্দা সৌরশঙ্খ মাজি। তিনি বলেন, “অর্থনৈতিক কারণে ম্যকলিওড কোম্পানি ন্যারোগেজ (আড়াই ফুট) লাইন তৈরি করে। বিনামূল্যে জমি দেওয়ার জন্য ব্রিটিশ সরকার অবশ্য রেলভাড়া ঘোষণা করত।” তবে রেলপথটি লাভজনক হবে না ভেবে ব্রিটিশ সরকার ব্রডগেজ করার পরিকল্পনা নেয়নি। পরে ম্যাকলিওড কোম্পানি বা ভারতীয় রেলও ওই লাইন থেকে লাভের মুখ দেখেনি। ১৯৬৬ সালে রেলপথটি অধিগ্রহণ করে ভারতীয় রেল।
এখন শেষবারের ছোটরেলে চড়তেও জমেছে ভিড়। ছবি: অসিত বন্দ্যোপাধ্যায়।
রেলের পরিভাষায় বর্ধমান থেকে কাটোয়া পর্যন্ত বিস্তৃত ওই পথের নাম ছিল ‘বি কে লাইন’। কিন্তু নিত্যযাত্রীরা বিদ্রুপ করে ডাকত ‘বড় কষ্টের লাইন’। ৫৭ কিলোমিটারের রেলপথে একসময় ৩০ কিলোমিটার বেগে ট্রেন চললেও সময়ের সঙ্গে দেশলাইয়ের খোপের মতো চার কামরার ওই ট্রেনের গুরুত্ব যাত্রীদের কাছে কমতে থাকে। তার মধ্যেই ১৯৯৫ সালের মার্চে স্টিম ইঞ্জিনের বদলে ডিজেল ইঞ্জিন চালু হয়। ২০০০ সালের বন্যার পর ‘দুর্বল ট্র্যাকে’র কারণে ট্রেনের গতিবেগ কমে দাঁড়ায় ঘন্টায় ১৫ কিলোমিটার। অর্থাৎ বর্ধমান থেকে কাটোয়া, ৫৩ কিলোমিটার পথ যেতে সময় লাগত সাড়ে তিন ঘন্টা। ২০০৭ সালে কাটোয়াতে প্রস্তাবিত তাপবিদ্যুৎ কেন্দ্রকে সামনে রেখে ওই লাইনটিকে ব্রডগেজ করার জন্য বিগত বাম সরকার ও রেলের মধ্যে চুক্তি হয়। ঠিক হয়, দু’পক্ষই অর্ধেক করে খরচ বহন করবেন। ওই বছরের ৩০ জুন তৎকালীন রেলমন্ত্রী লালুপ্রসাদ যাদব কাটোয়াতে এসে শিলান্যাস করেন। মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় রেলমন্ত্রী থাকাকালীন ওই রেলপথের অর্ধেক রাস্তা, বর্ধমান থেকে বলগোনা পর্যন্ত কাজের সূচনাও হয়। ২০১২ সালের ২৮ জুলাই রাজ্যের মুখ্যমন্ত্রী হিসাবে মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় ব্রডগেজ লাইনের ট্রেনের সূচনা করেন। তারপরে কাটোয়ায় প্রস্তাবিত তাপবিদ্যুৎকেন্দ্র নির্মাণের দায়িত্ব নেওয়ার পরে এ বছরের মার্চে পূর্ব রেলের মুখ্য কনস্ট্রাকশনকে ১১২ কোটি ৫৭ লক্ষ টাকা দেয় এনটিপিসি। তারপরেই রেল বাজেটে ওই রেলপথকে ব্রডগেজ করার সিদ্ধান্ত হয়।
স্থানীয় বাসিন্দাদের অনেকেরই ধারনা, প্রস্তাবিত তাপবিদ্যুৎ কেন্দ্রের জমি নিয়ে টালবাহানা না থাকলে আগেই বিদায়ের বাঁশি বেজে উঠত কাটোয়া-বলগোনা ন্যারোগেজ লাইনের। তবে এ বিদায় বিষাদের নয় অগ্রগতিরএ কথাও বলছেন তাঁরা।

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Dec 01 2014 (20:32)
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