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In-Coach Catering/Pantry Car
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Rake Reversal at Any Stn
Rake:
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With RSA
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Reversal:
Rake Reversal at Dep Stn

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SunMonTueWedThuFriSat
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Arr PF#:
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58219/Bilaspur - Chirimiri Passenger
     बिलासपुर - चिरमिरी पैसेंजर

BSP/Bilaspur Junction --> CHRM/Chirimiri

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Will remain partially cancelled between Bilaspur and Anuppur on 22, 23, 24, 26 and 27 Jan 2018
Wed Jan 17, 2018 (06:31PM)
Pantry/Catering
✕ Pantry Car
✕ On-board Catering
✕ E-Catering
Updated: Jul 02 2019 (10:40) by x-under SW-x
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खोडरी-भनवारटंक के बीच अप लाइन और मध्य डाउन लाइन में और भनवारटंक व खोडरी के बीच अप लाइन पहाड़ से बोल्डर गिरने की घटना हुई। पहाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से तीन दिन के भीतर यह तीसरा मौका है जब रेल लाइन के ऊपर मलवा गिरा है। इससे पहले 26 तारीख को भी पहाड़ से बोल्डर गिरने से उत्कल एक्सप्रेस प्रभावित हुई थी। रात और सुबह हुई घटना से 9 ट्रेनें प्रभावित हुईं। इससे यात्री परेशान रहे।
खोडरी-भनवारटंक के बीच रात 10.10 बजे खोडरी व खोंगसरा स्टेशनों के बीच रेल लाइन पर बोल्डर गिरने की घटना हुई। इसको रेल कर्मचारियों ने सजगता व सतर्कता के साथ समय पर सूचना देकर जहां दुर्घटना को रोकने में सफल हुए, वहीं तेजी से
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काम करके रेल लाइन पर यातायात व्यवस्था को बहाल किए। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कुछ रेल खंड जो चट्टान गिरने व भूस्खलन के लिए संवेदनशील माने जाते हैं यहां रेल पर पत्थर गिरने की घटनाएं होते रहती है। इन खंडों में खोडरी-खोंगसरा व बिजुरी-बोरीडांड का नाम विशेष रूप से आता है। जहां पर रेल लाइनों में पत्थर गिरने की घटनाएं होती हैं। रेलवे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्लोप प्रोटेक्शन का कार्य किया है। इस वर्ष अभी 5 दिनों में खोडरी क्षेत्र में 2200 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई जबकि पिछले वर्ष यह 1400 मिलीमीटर थी। इसके कारण यहां लगातार बोल्डर गिरने की घटना हो रही है।
समय रहते दी सूचना, तीन ट्रैकमैन होंगे सम्मानित
सजगता और सतर्कता से दुर्घटना को रोकने वाले ट्रैकमैन अवधेश कुमार, निवास राव, भुवनेश्वर कुमार और रामकृष्ण ने पेट्रोलिंग के दौरान रात 10.10 बजे और ट्रैकमैन कामेश्वर अनंत ने शनिवार की सुबह 9.30 बजे भनवारटंक-खोडरी के बीच बोल्डर गिरने की घटना की जानकारी संबंधित स्टेशन मास्टरों को दी। इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए बोल्डरों को लाइन से हटाकर गाड़ियों का परिचालन शुरू किया गया। इसके लिए खोडरी स्टेशन पर खड़ी आरवीएमवी मशीन व खोंगसरा स्टेशन पर खड़ी यूटीवी मशीनों का उपयोग किया गया। ये मशीनें सेक्शन पर रेल पटरियां व अन्य भारी सामानों को उठाने के उपयोग में लाई जाती है। इसके साथ ही साथ मौके पर कार्य करने के लिए 100 से अधिक मजदूर भी मौजूद रहे। इन घटनाओं के समय सजगता व सतर्कता के साथ इसकी सूचना देने वाले कर्मचारियों को रेलवे सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
ये गाड़ियां हुई प्रभावित, लेट चलीं
बोल्डर गिरने से गाड़ी संख्या 12853 दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस को खोंगसरा स्टेशन में रात 10.38 से सुबह 3.37 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 18201 दुर्ग-नवतनवा एक्सप्रेस को बेलगहना स्टेशन में रात 11.45 से सुबह 3.39 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 15160 दुर्ग-छपरा सारनाथ एक्सप्रेस को करगीरोड स्टेशन में रात 12.16 से सुबह 3.41 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 18241 दुर्ग-अंबिकापुर एक्सप्रेस को उसलापुर स्टेशन में रात 12.08 से सुबह 3.40 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 18236 बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस को खोंगसरा स्टेशन में रात 9.58 से सुबह 4.1 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 12854 भोपाल-दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस को अनूपपुर स्टेशन में रात 2.45 से सुबह 3.50 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 15232 गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस को रायपुर मंडल में रोका गया। गाड़ी संख्या 58219 बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर को सलका रोड में रात 12.13 बजे से सुबह 3.36 बजे तक रोका गया। गाड़ी संख्या 58220 चिरमिरी-बिलासपुर पैसेंजर को अनूपपुर में रात 23.50 बजे से सुबह 4.2 बजे तक रोका गया।
Sep 29 2019 (08:23) ट्रैक पर गिरा बोल्डर, थमे रहे ट्रेनों के पहिए (naidunia.jagran.com)
Major Accidents/Disruptions
SECR/South East Central
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News Entry# 392295  Blog Entry# 4442358   
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Sep 29 2019 (08:24)
Station Tag: Khodri/KOI added by Adittyaa Sharma^~/1421836

Sep 29 2019 (08:24)
Station Tag: Bhanwar Tonk/BHTK added by Adittyaa Sharma^~/1421836

Sep 29 2019 (08:24)
Station Tag: Bilaspur Junction/BSP added by Adittyaa Sharma^~/1421836
बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि भनवारटंक से खोड़री के बीच 12 घंटे में दो बार पटरी पर बोल्डर गिरने की घटना हुई। इस प्राकृतिक बाधा से ट्रेनों के पहिए घंटों थमें रहे। कुछ ट्रेनें पूरी रात खड़ी रही। इससे यात्री परेशान हुए। शुक्रवार रात 10.10 बजे कटनी रेल खंड के खोडरी-भनवारटंक के बीच बोल्डर पहाड़ से अलग होकर ट्रैक पर गिर गया। उस समय ट्रैकमैन अवधेश कुमार, निवास राव, भुवनेश्वर कुमार व रामकृष्ण पेट्रोलिंग पर थे। इन कर्मचारियों ने इसे सबसे पहले देखा। इसके बाद निर्देश के मुताबिक अफसरों को सूचना दी गई। उनकी सजगता की वजह से ट्रेनों को नियंत्रित करने में सफलता मिली। त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर गिरे हुए बोल्डरों को हटाने में जुट गए। कुछ घंटे में बाद परिचालन सामान्य हुआ। इस घटना के बाद परिचालन शुरू हुए कुछ देर हुआ था कि शनिवार...
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सुबह 9.30 बजे फिर से इसी सेक्शन पर ट्रैकमैन कामेश्वर अनंत ने बोल्डर गिरा देखा। इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर को दी। 12 घंटे में दो बार भूस्खलन और इससे रेलमार्ग प्रभावित होने के कारण रेलकर्मियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। उससे ज्यादा दिक्कत यात्रियों को हुई। बीच रास्ते में फंसने के कारण कई ऐसे थे जो गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच सके। सुबह की घटना के कारण केवल मेमू लोकन ट्रेन प्रभावित हुई। जबकि रात की घटना ने नौ ट्रेनों के परिचालन को बाधित किया। ये ट्रेनें आधी रात को गंतव्य के लिए रवाना हुई। रेल प्रशासन द्वारा इन खंडों पर गिरे बोल्डर को हटाने और कम समय में रेल परिचालन दुरुस्त करने में प्लानिंग के साथ कार्य किया गया। इसमें खोडरी स्टेशन पर खड़ी आरवीएमवी मशीन तथा खोंगसरा स्टेशन पर खड़ी यूटीवी मशीनों का उपयोग किया गया। ये मशीनें सेक्शन पर रेल पटरियां एवं अन्य भारी सामान को उठाने के उपयोग में लाई जाती है। इसके साथ ही साथ मौके पर कार्य करने के लिए 100 से अधिक श्रमिक भी मौजूद थे। महाप्रबंधक गौतम बनर्जी पल- पल का जायज लेते नजर आए। ये ट्रेनें रही प्रभावित, बिलासपुर पहुंची लेट 0 12853 दुर्ग - भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस 22.38 से 03.37 बजे तक खोंगसरा स्टेशन 0 18201 दुर्ग- नवतनवा एक्सप्रेस को 23.45 से 03.39 बजे तक बेलगहना स्टेशन 0 15160 दुर्ग- छपरा सारनाथ एक्सप्रेस 12.16 से 03.41 बजे तक करगीरोड स्टेशन 0 18241 दुर्ग- अंबिकापुर एक्सप्रेस 12.08 से 03.40 बजे तक उसलापुर स्टेशन 0 18236 बिलासपुर- भोपाल एक्सप्रेस 21.58 से 04.01 बजे तक खोंगसरा स्टेशन 0 12854 भोपाल- दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस 02.45 से 03.50 बजे तक अनूपपुर स्टेशन 0 15232 गोंदिया- बरौनी एक्सप्रेस रायपुर मंडल 0 58219 बिलासपुर- चिरमिरी पैसेंजर 12.13 बजे से 03.36 बजे तक सलकोरोड 0 58220 चिरमिरी- बिलासपुर पैसेंजर 23.50 बजे से 04.02 बजे तक अनूपपुर 800 मिमी अधिक बारिशलगातार हो रही भूस्खलन की मुख्य वजह बारिश को बताई जा रही है। इसका आंकलन भी किया गया। जिसमें पिछले साल 22 से 27 सितंबर 1400 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि अभी यह आंकड़ा 2200 मिलीमीटर है। 800 मिलीमीटर अधिक बारिश होने के कारण यह घटना हो रही है। पुरस्कृत किए जाएंगे कर्मचारी संरक्षा विभाग के इन कर्मचारियों के कारण जहां दुर्घटना टल गई, वहीं समय पर रेल प्रशासन ने कमर कसी और लाइन सामान्य करने के लिए मरम्मत में जुट गया। कर्मचारियों की इसी सजगता व सतर्कता सूचना देने वाले कर्मियों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।  #track boldar trens
बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
भनवारटंक से खोड़री के बीच 12 घंटे में दो बार पटरी पर बोल्डर गिरने की घटना हुई। इस प्राकृतिक बाधा से ट्रेनों के पहिए घंटों थमें रहे। कुछ ट्रेनें पूरी रात खड़ी रही। इससे यात्री परेशान हुए।
शुक्रवार रात 10.10 बजे कटनी रेल खंड के खोडरी-भनवारटंक के बीच बोल्डर पहाड़ से अलग होकर ट्रैक पर गिर गया। उस समय ट्रैकमैन अवधेश कुमार, निवास राव, भुवनेश्वर कुमार व रामकृष्ण पेट्रोलिंग पर थे। इन कर्मचारियों ने इसे सबसे पहले देखा। इसके बाद निर्देश के मुताबिक अफसरों को सूचना दी गई। उनकी सजगता की वजह से ट्रेनों को नियंत्रित करने में सफलता मिली। त्वरित कार्रवाई करते हुए घटनास्थल पर गिरे हुए बोल्डरों को हटाने में जुट गए। कुछ घंटे में बाद परिचालन सामान्य हुआ। इस घटना के बाद परिचालन शुरू हुए कुछ देर हुआ था कि शनिवार सुबह 9.30 बजे फिर से इसी सेक्शन पर ट्रैकमैन कामेश्वर अनंत ने बोल्डर गिरा देखा। इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर को दी। 12 घंटे में दो बार भूस्खलन और इससे रेलमार्ग प्रभावित होने के कारण रेलकर्मियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। उससे ज्यादा दिक्कत यात्रियों को हुई। बीच रास्ते में फंसने के कारण कई ऐसे थे जो गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच सके। सुबह की घटना के कारण केवल मेमू लोकन ट्रेन प्रभावित हुई। जबकि रात की घटना ने नौ ट्रेनों के परिचालन को बाधित किया। ये ट्रेनें आधी रात को गंतव्य के लिए रवाना हुई। रेल प्रशासन द्वारा इन खंडों पर गिरे बोल्डर को हटाने और कम समय में रेल परिचालन दुरुस्त करने में प्लानिंग के साथ कार्य किया गया। इसमें खोडरी स्टेशन पर खड़ी आरवीएमवी मशीन तथा खोंगसरा स्टेशन पर खड़ी यूटीवी मशीनों का उपयोग किया गया। ये मशीनें सेक्शन पर रेल पटरियां एवं अन्य भारी सामान को उठाने के उपयोग में लाई जाती है। इसके साथ ही साथ मौके पर कार्य करने के लिए 100 से अधिक श्रमिक भी मौजूद थे। महाप्रबंधक गौतम बनर्जी पल- पल का जायज लेते नजर आए।
ये ट्रेनें रही प्रभावित, बिलासपुर पहुंची लेट
0 12853 दुर्ग - भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस 22.38 से 03.37 बजे तक खोंगसरा स्टेशन
0 18201 दुर्ग- नवतनवा एक्सप्रेस को 23.45 से 03.39 बजे तक बेलगहना स्टेशन
0 15160 दुर्ग- छपरा सारनाथ एक्सप्रेस 12.16 से 03.41 बजे तक करगीरोड स्टेशन
0 18241 दुर्ग- अंबिकापुर एक्सप्रेस 12.08 से 03.40 बजे तक उसलापुर स्टेशन
0 18236 बिलासपुर- भोपाल एक्सप्रेस 21.58 से 04.01 बजे तक खोंगसरा स्टेशन
0 12854 भोपाल- दुर्ग अमरकंटक एक्सप्रेस 02.45 से 03.50 बजे तक अनूपपुर स्टेशन
0 15232 गोंदिया- बरौनी एक्सप्रेस रायपुर मंडल
0 58219 बिलासपुर- चिरमिरी पैसेंजर 12.13 बजे से 03.36 बजे तक सलकोरोड
0 58220 चिरमिरी- बिलासपुर पैसेंजर 23.50 बजे से 04.02 बजे तक अनूपपुर
800 मिमी अधिक बारिश
लगातार हो रही भूस्खलन की मुख्य वजह बारिश को बताई जा रही है। इसका आंकलन भी किया गया। जिसमें पिछले साल 22 से 27 सितंबर 1400 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जबकि अभी यह आंकड़ा 2200 मिलीमीटर है। 800 मिलीमीटर अधिक बारिश होने के कारण यह घटना हो रही है।
पुरस्कृत किए जाएंगे कर्मचारी
संरक्षा विभाग के इन कर्मचारियों के कारण जहां दुर्घटना टल गई, वहीं समय पर रेल प्रशासन ने कमर कसी और लाइन सामान्य करने के लिए मरम्मत में जुट गया। कर्मचारियों की इसी सजगता व सतर्कता सूचना देने वाले कर्मियों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
बिलासपुर से 58 किमी दूर कटनी रेलमार्ग पर एक ऐसा स्टेशन है जो है तो डी श्रेणी का। पर यहां की सुविधा पैसेंजर हाल्ट से भी बदतर है। रेलवे 51 साल बाद भी इस स्टेशन में फुट ओवरब्रिज या ऊंचे प्लेटफार्म का निर्माण नहीं कर सकी है। इसका खामियाजा यात्रियों के साथ आम जनता को भी भुगतना पड़ता है। इन्हीं असुविधाओं के बीच यात्रा करना उनकी मजबूरी है। जबकि रेलवे का नारा है मुस्कान के साथ सफर। यहां यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान नहीं खौफ नजर आता है।
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वर्ष 1967 में टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन अस्तित्व में आया। उस समय इस क्षेत्र के ग्रामीणों में गजब की खुशी थी। यह खुशियां स्टेशन बनने के बाद ट्रेन सुविधा की थी। जैसे- जैसे समय गुजरेगा स्टेशन का विकास होगा और लोकल व पैसेंजर के अलावा एक्सप्रेस ट्रेनें भी रुकेंगी। यहां के रहवासी इस सुगम साधन के जरिए देश के किसी भी हिस्से में जा सकेंगे। उनकी यह सोच हकीकत नहीं हो पाई। यह स्टेशन विकास से कोसों दूर है। यहां नयापन कुछ भी नहीं है। प्लेटफार्म नंबर एक आज भी नीचे है। इसके कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए भारी जुगत लगानी पड़ती। यह स्थिति सामान्य यात्रियों की होती है। दिव्यांग, बीमार या बुजुर्ग यात्री तो बिना सहारे के चढ़ ही नहीं पाते। प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्री रेलवे का ऐसा कोई विभाग या अधिकारी नहीं जिनसे मिलकर प्लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग नहीं किए हो। अफसरों के दौरे के दौरान पूरा गांव उमड़ जाता है, ताकि उनकी मांग पर मुहर लग जाए। यही दिक्कत एक से दूसरे प्लेटफार्म पर जाते समय होती है। यहां प्लेटफार्म दो का निर्माण किया गया, जो ऊंचाई पर तो है लेकिन यहां तक जाने के लिए फुट ओवरब्रिज तक नहीं है। ऐसी स्थिति में यात्रियों को जान हथेली पर रखकर प्लेटफार्म बदलना पड़ता है। जबकि इस श्रेणी के स्टेशनों में यह सर्वाधिक आय देने वाला स्टेशन है। पर रेलवे हमेशा से इसकी उपेक्षा करती रही है। इसके चलते लोगों में भारी आक्रोश रहता है। इसके अलावा खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठने की मजबूरी भी यात्रियों के सामने है। यहां ने शेड की व्यवस्था है और न बैठने के लिए कुर्सी है। यात्री व स्थानीय लोग यह तक आरोप लगाने से नहीं कतराते कि रेलवे को स्टेशन में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जरा भी दिलचस्पी नहीं है।
मालगाड़ी के नीचे से गुजरते हैं स्कूली बच्चे, कांप जाते हैं देखने वाले
टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन के एक ओर करवा गांव है और दूसरी ओर टेंगनमाड़ा। टेंगनमाड़ा करवा का आश्रित गांव है। पूरी आबादी करवा में रहती है। टेंगनमाड़ा की ओर अस्पताल व हाईस्कूल है, जहां करवा के अलावा आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे पढ़ाई करने के लिए पहुंचते हैं। एफओबी नहीं होने से उन्हें लाइन पार करना पड़ता है। बच्चों को लाइन पार करने का यह नजारा इतना खतरनाक होता है कि आम यात्रियों की धड़कनें तेज हो जाती है। बच्चे मालगाड़ी के नीचे तक से पार करते हैं। पिछले दिनों जब डीआरएम व अन्य अफसरों का यहां दौरा हुआ, तब करीब 150 की संख्या में बच्चे उनके पास पहुंचकर फुट ओवरब्रिज की गुहार लगाते नजर आए थे। उन्हें आश्वासन भी दिया गया। पर डेढ़ साल गुजर गए, यह सुविधा नहीं मिल सकी।
क्या कहते हैं यात्री व ग्रामीण
0 छोटे स्टेशनों की अनदेखी
दैनिक यात्री हीरा यादव का कहना है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन को भारतीय रेलवे का कमाऊ पूत जोन कहा जाता है। शायद यह आंकलन लदान को देखकर किया जाता है, लेकिन स्टेशनों में सुविधाओं पर आंकलन होगा तो जोन सबसे पिछड़ जाएगा। छोटे-छोटे स्टेशनों में विकास नजर ही नहीं आता। इन्हीं में से एक टेंगनमाड़ा है। सुविधाओं की कमी और लगातार उपेक्षा के कारण यात्रियों को यहां से सफर शुरू करने में भारी दिक्कत होती है। इसके बाद भी रेलवे आंख बंद कर बैठी हुई है।
0 कई बार गिरते-गिरते बची है जान
दैनिक यात्री सागर बेन्जामीन एक पैर से दिव्यांग है। वह बतातें हैं कि प्लेटफार्म एक की ऊंचाई कम है। बिलासपुर जाने वाली ट्रेनें इसी पर आती हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेन पर चढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। वे खुद कई बार गिरते- गिरते बचे हैं। रेलवे को कई बार बार इस स्थिति से अवगत कराया गया। लेकिन सुनवाई नहीं होती। अन्य यात्रियों को भी इसी तरह की तकलीफ होती है। इसके बाद भी रेल प्रशासन केवल योजना बनाने की बात कहता है।
0 आरक्षण केंद्र जरूरी, जाना पड़ता है दूर
करवा निवासी जोहन खांडे ने टिकट आरक्षण केंद्र की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि इसकी कमी के कारण लोगों को रिजर्वेशन कराने के लिए खोंगसरा जाना पड़ता है। पता चला है कि इसे भी बंद करने की योजना है। उस स्थिति में समस्या और बढ़ जाएगी। रेल प्रशासन अपने स्टेशन से आरक्षण समाप्त कर यात्रियों की सुविधाओं पर कुठाराघात कर रहा है। आरक्षण केंद्र खुलने से यात्रियों की सुविधाओं में इजाफा होगा, साथ ही रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा।
0 एक प्लेटफार्म में पानी, दूसरे में एक बूंद नहीं
दैनिक यात्री विजय कुमार का कहना है कि प्लेटफार्म एक पर पानी की सुविधा है। दो नंबर में आज तक रेलवे यह सुविधा मुहैया नहीं करा सकी। इससे यात्रियों को प्यासे ही यात्रा शुरू करनी पड़ती है या फिर जान जोखिम में डालकर प्लेटफार्म एक पर आना पड़ता है।
0 फुट ओवरब्रिज पहली आवश्यकता
करवा की सरपंच रंजीता सिंह का कहना है कि स्टेशन बनने के बाद सोचे थे कि इस क्षेत्र में तेजी से विकास होगा। लेकिन स्थिति यह है कि आज तक एक एफओबी भी नहीं पाया है। इससे आम यात्रियों के अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लाइन पार करते समय अभिभावक खड़े रहते हैं, वे खुद उंगली पकड़कर पार कराते हैं। जब तक बच्चे स्कूल से लौटकर नहीं आ जाते उनकी सांस अटकी रहती है। स्टेशन पूरी तरह उपेक्षित है।
0 बच्चों ने कहा- डर लगता है
ट्रैक पार कर स्कूल तक पहुंचने वाले कुछ बच्चों से भी बातचीत की गई। इस दौरान कक्षा पांचवी के छात्र सुजल जायसवाल, कक्षा आठवीं के छात्र शुभम साहू व कक्षा पांचवी के ही उज्जवल कुमार ने कहा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है। हम सब खूब पढ़ाई कर माता-पिता का सपना पूरा करना चाहते हैं। लेकिन स्कूल पहुंचने और लौटते समय डर लगता है। एफओबी नहीं होने के कारण लाइन पार करते हैं। गांव में बड़े-बुजुर्ग कई बार मांग कर चुके हैं। पर इस पर आज तक कुछ नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में हम स्कूल के बच्चों ने रेल अफसर से इसकी मांग की थी। उन्होंने जब आश्वासन दिया तो लगा कि जल्द ही सुविधा मिल जाएगी। लेकिन उन्होंने झूठा आश्वासन दिया था।
गांव एक, ट्रैक ही करता है अलग
टेंगनमाड़ा स्टेशन में औसत सात मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। दूसरी ओर साप्ताहिक बाजार बुधवार को लगता है। इस पार निजी विद्यालय सरस्वती विद्यापीठ है। इन दोनों गांवों को भले ही रेल लाइन अलग करता हो पर ग्रामीणों की नजर में एक है। पूरे समय यहां ग्रामीणों की आवाजाही रहती है।
किराया अधिक, सुविधा कुछ भी नहीं
एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में यहां 18247 बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस ही रुकती है पर किस मापदंड के तहत इसे एक्सप्रेस माना जा रहा है यह समझ से परे है। इस परिवर्तन के बाद सुविधाएं तक नहीं बढ़ी है। यह ट्रेन पहले की तरह चलती है। केवल इससे रेलवे को फायदा है। अब यात्रियों को एक्सप्रेस का किराया देना पड़ता है। यात्री बताते हैं कि एक्सप्रेस होने के बाद इस ट्रेन के यात्रियों की संख्या में गिरावट आई है। इसके निण् रेलवे खुद जिम्मेदार है। रेलवे ने आम जनता के साथ विश्वासघात किया है।
स्टेशन - टेंगनमाड़ा
श्रेणी - डी
प्रतिदिन यात्रा - 1518 यात्री
पर्व के दिनों में - 2000 से ज्यादा यात्री
आय - एक लाख 60 हजार से दो लाख रुपये
प्रतिदिन इन ट्रेनों का ठहराव
- 58219 / 58220 बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर
- 68740 / 68739 बिलासपुर-पेंड्रारोड पैसेंजर
- 18234 /18235 बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस कम पैसेंजर
- 18247 /18248 बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस
- 18236 / 18235 बिलासपुर-भोपाल पैसेंजर
- 68747 / 68748बिलासपुर-कटनी पैसेंजर
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बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
बिलासपुर से 58 किमी दूर कटनी रेलमार्ग पर एक ऐसा स्टेशन है जो है तो डी श्रेणी का। पर यहां की सुविधा पैसेंजर हाल्ट से भी बदतर है। रेलवे 51 साल बाद भी इस स्टेशन में फुट ओवरब्रिज या ऊंचे प्लेटफार्म का निर्माण नहीं कर सकी है। इसका खामियाजा यात्रियों के साथ आम जनता को भी भुगतना पड़ता है। इन्हीं असुविधाओं के बीच यात्रा करना उनकी मजबूरी है। जबकि रेलवे का नारा है मुस्कान के साथ सफर। यहां यात्रियों के चेहरे पर मुस्कान नहीं खौफ नजर आता है।
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वर्ष 1967 में टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन अस्तित्व में आया। उस समय इस क्षेत्र के ग्रामीणों में गजब की खुशी थी। यह खुशियां स्टेशन बनने के बाद ट्रेन सुविधा की थी। जैसे- जैसे समय गुजरेगा स्टेशन का विकास होगा और लोकल व पैसेंजर के अलावा एक्सप्रेस ट्रेनें भी रुकेंगी। यहां के रहवासी इस सुगम साधन के जरिए देश के किसी भी हिस्से में जा सकेंगे। उनकी यह सोच हकीकत नहीं हो पाई। यह स्टेशन विकास से कोसों दूर है। यहां नयापन कुछ भी नहीं है। प्लेटफार्म नंबर एक आज भी नीचे है। इसके कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए भारी जुगत लगानी पड़ती। यह स्थिति सामान्य यात्रियों की होती है। दिव्यांग, बीमार या बुजुर्ग यात्री तो बिना सहारे के चढ़ ही नहीं पाते। प्रतिदिन यात्रा करने वाले यात्री रेलवे का ऐसा कोई विभाग या अधिकारी नहीं जिनसे मिलकर प्लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग नहीं किए हो। अफसरों के दौरे के दौरान पूरा गांव उमड़ जाता है, ताकि उनकी मांग पर मुहर लग जाए। यही दिक्कत एक से दूसरे प्लेटफार्म पर जाते समय होती है। यहां प्लेटफार्म दो का निर्माण किया गया, जो ऊंचाई पर तो है लेकिन यहां तक जाने के लिए फुट ओवरब्रिज तक नहीं है। ऐसी स्थिति में यात्रियों को जान हथेली पर रखकर प्लेटफार्म बदलना पड़ता है। जबकि इस श्रेणी के स्टेशनों में यह सर्वाधिक आय देने वाला स्टेशन है। पर रेलवे हमेशा से इसकी उपेक्षा करती रही है। इसके चलते लोगों में भारी आक्रोश रहता है। इसके अलावा खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठने की मजबूरी भी यात्रियों के सामने है। यहां ने शेड की व्यवस्था है और न बैठने के लिए कुर्सी है। यात्री व स्थानीय लोग यह तक आरोप लगाने से नहीं कतराते कि रेलवे को स्टेशन में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जरा भी दिलचस्पी नहीं है।
मालगाड़ी के नीचे से गुजरते हैं स्कूली बच्चे, कांप जाते हैं देखने वाले
टेंगनमाड़ा रेलवे स्टेशन के एक ओर करवा गांव है और दूसरी ओर टेंगनमाड़ा। टेंगनमाड़ा करवा का आश्रित गांव है। पूरी आबादी करवा में रहती है। टेंगनमाड़ा की ओर अस्पताल व हाईस्कूल है, जहां करवा के अलावा आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के बच्चे पढ़ाई करने के लिए पहुंचते हैं। एफओबी नहीं होने से उन्हें लाइन पार करना पड़ता है। बच्चों को लाइन पार करने का यह नजारा इतना खतरनाक होता है कि आम यात्रियों की धड़कनें तेज हो जाती है। बच्चे मालगाड़ी के नीचे तक से पार करते हैं। पिछले दिनों जब डीआरएम व अन्य अफसरों का यहां दौरा हुआ, तब करीब 150 की संख्या में बच्चे उनके पास पहुंचकर फुट ओवरब्रिज की गुहार लगाते नजर आए थे। उन्हें आश्वासन भी दिया गया। पर डेढ़ साल गुजर गए, यह सुविधा नहीं मिल सकी।
क्या कहते हैं यात्री व ग्रामीण
0 छोटे स्टेशनों की अनदेखी
दैनिक यात्री हीरा यादव का कहना है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन को भारतीय रेलवे का कमाऊ पूत जोन कहा जाता है। शायद यह आंकलन लदान को देखकर किया जाता है, लेकिन स्टेशनों में सुविधाओं पर आंकलन होगा तो जोन सबसे पिछड़ जाएगा। छोटे-छोटे स्टेशनों में विकास नजर ही नहीं आता। इन्हीं में से एक टेंगनमाड़ा है। सुविधाओं की कमी और लगातार उपेक्षा के कारण यात्रियों को यहां से सफर शुरू करने में भारी दिक्कत होती है। इसके बाद भी रेलवे आंख बंद कर बैठी हुई है।
0 कई बार गिरते-गिरते बची है जान
दैनिक यात्री सागर बेन्जामीन एक पैर से दिव्यांग है। वह बतातें हैं कि प्लेटफार्म एक की ऊंचाई कम है। बिलासपुर जाने वाली ट्रेनें इसी पर आती हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेन पर चढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं रहता। वे खुद कई बार गिरते- गिरते बचे हैं। रेलवे को कई बार बार इस स्थिति से अवगत कराया गया। लेकिन सुनवाई नहीं होती। अन्य यात्रियों को भी इसी तरह की तकलीफ होती है। इसके बाद भी रेल प्रशासन केवल योजना बनाने की बात कहता है।
0 आरक्षण केंद्र जरूरी, जाना पड़ता है दूर
करवा निवासी जोहन खांडे ने टिकट आरक्षण केंद्र की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि इसकी कमी के कारण लोगों को रिजर्वेशन कराने के लिए खोंगसरा जाना पड़ता है। पता चला है कि इसे भी बंद करने की योजना है। उस स्थिति में समस्या और बढ़ जाएगी। रेल प्रशासन अपने स्टेशन से आरक्षण समाप्त कर यात्रियों की सुविधाओं पर कुठाराघात कर रहा है। आरक्षण केंद्र खुलने से यात्रियों की सुविधाओं में इजाफा होगा, साथ ही रेलवे का राजस्व भी बढ़ेगा।
0 एक प्लेटफार्म में पानी, दूसरे में एक बूंद नहीं
दैनिक यात्री विजय कुमार का कहना है कि प्लेटफार्म एक पर पानी की सुविधा है। दो नंबर में आज तक रेलवे यह सुविधा मुहैया नहीं करा सकी। इससे यात्रियों को प्यासे ही यात्रा शुरू करनी पड़ती है या फिर जान जोखिम में डालकर प्लेटफार्म एक पर आना पड़ता है।
0 फुट ओवरब्रिज पहली आवश्यकता
करवा की सरपंच रंजीता सिंह का कहना है कि स्टेशन बनने के बाद सोचे थे कि इस क्षेत्र में तेजी से विकास होगा। लेकिन स्थिति यह है कि आज तक एक एफओबी भी नहीं पाया है। इससे आम यात्रियों के अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। लाइन पार करते समय अभिभावक खड़े रहते हैं, वे खुद उंगली पकड़कर पार कराते हैं। जब तक बच्चे स्कूल से लौटकर नहीं आ जाते उनकी सांस अटकी रहती है। स्टेशन पूरी तरह उपेक्षित है।
0 बच्चों ने कहा- डर लगता है
ट्रैक पार कर स्कूल तक पहुंचने वाले कुछ बच्चों से भी बातचीत की गई। इस दौरान कक्षा पांचवी के छात्र सुजल जायसवाल, कक्षा आठवीं के छात्र शुभम साहू व कक्षा पांचवी के ही उज्जवल कुमार ने कहा कि पढ़ाई बेहद जरूरी है। हम सब खूब पढ़ाई कर माता-पिता का सपना पूरा करना चाहते हैं। लेकिन स्कूल पहुंचने और लौटते समय डर लगता है। एफओबी नहीं होने के कारण लाइन पार करते हैं। गांव में बड़े-बुजुर्ग कई बार मांग कर चुके हैं। पर इस पर आज तक कुछ नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में हम स्कूल के बच्चों ने रेल अफसर से इसकी मांग की थी। उन्होंने जब आश्वासन दिया तो लगा कि जल्द ही सुविधा मिल जाएगी। लेकिन उन्होंने झूठा आश्वासन दिया था।
गांव एक, ट्रैक ही करता है अलग
टेंगनमाड़ा स्टेशन में औसत सात मिनट में एक ट्रेन गुजरती है। दूसरी ओर साप्ताहिक बाजार बुधवार को लगता है। इस पार निजी विद्यालय सरस्वती विद्यापीठ है। इन दोनों गांवों को भले ही रेल लाइन अलग करता हो पर ग्रामीणों की नजर में एक है। पूरे समय यहां ग्रामीणों की आवाजाही रहती है।
किराया अधिक, सुविधा कुछ भी नहीं
एक्सप्रेस ट्रेन के रूप में यहां 18247 बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस ही रुकती है पर किस मापदंड के तहत इसे एक्सप्रेस माना जा रहा है यह समझ से परे है। इस परिवर्तन के बाद सुविधाएं तक नहीं बढ़ी है। यह ट्रेन पहले की तरह चलती है। केवल इससे रेलवे को फायदा है। अब यात्रियों को एक्सप्रेस का किराया देना पड़ता है। यात्री बताते हैं कि एक्सप्रेस होने के बाद इस ट्रेन के यात्रियों की संख्या में गिरावट आई है। इसके निण् रेलवे खुद जिम्मेदार है। रेलवे ने आम जनता के साथ विश्वासघात किया है।
स्टेशन - टेंगनमाड़ा
श्रेणी - डी
प्रतिदिन यात्रा - 1518 यात्री
पर्व के दिनों में - 2000 से ज्यादा यात्री
आय - एक लाख 60 हजार से दो लाख रुपये
प्रतिदिन इन ट्रेनों का ठहराव
- 58219 / 58220 बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर
- 68740 / 68739 बिलासपुर-पेंड्रारोड पैसेंजर
- 18234 /18235 बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस कम पैसेंजर
- 18247 /18248 बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस
- 18236 / 18235 बिलासपुर-भोपाल पैसेंजर
- 68747 / 68748बिलासपुर-कटनी पैसेंजर
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Jul 30 2018 (06:48) महिला कोच को मिली नई पहचान, गुलाबी रंग में आने लगे नजर (mnaidunia.jagran.com)
IR Affairs
SECR/South East Central
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Jul 30 2018 (06:48)
Station Tag: Bilaspur Junction/BSP added by Adittyaa Sharma^~/1421836
बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
महिला यात्रियों को अब ट्रेन में महिला कोच ढूंढने के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उनकी सुविधा के लिए अब इस आरक्षित कोच को गुलाबी रंग की पट्टी देकर नई पहचान दी जा रही है। रेलवे बोर्ड के इस आदेश पर अमल करते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने तीनों रेल मंडल को निर्देश दिए। बिलासपुर रेल मंडल में चार ट्रेनों के 18 कोच में इस तरह की व्यवस्था की गई है।
रेलवे में दो श्रेणी के
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यात्री महिला व दिव्यांगों के लिए अलग कोच का प्रावधान है। महिला कोच की पहचान केवल बोर्ड से होती थी। इसके लिए यात्रियों को मशक्कत करनी पड़ती थी। कई बार भीड़ होने की स्थिति में यात्रियों को परेशानी हो जाती है। हड़बड़ी में वे यात्रियों से भरे जनरल कोच में ही बैठ जाते हैं। असुरक्षा के बीच उन्हें गंतव्य पहुंचना पड़ता था। इस दौरान छेड़छाड़, पर्स चोरी जैसे घटनाएं होती थीं। बोर्ड ने इस मामले को गंभीरता लेते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्णय लिया। कोच में गुलाबी रंग की चौड़ी पट्टी लगाई जाएगी। इसी से यात्री दूर से पहचान कर लेंगे और सीधे बिना किसी से पूछताछ के चढ़ जाएंगे। बोर्ड ने इस संबंध में सभी जोन मुख्यालय को निर्देश भी दिए हैं।
अमरकंटक एक्सप्रेस से शुरुआतः सीनियर पीआरओ
इस संबंध में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ संतोष कुमार का कहना है कि महिला कोच को अलग पहचान देने की जोन में सबसे पहली शुरुआत दुर्ग- भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस से की गई है। आगामी दिनों में हर ट्रेन में यह व्यवस्था रहेगी।
इन ट्रेनों के महिला कोच को रंगा गया
ट्रेन रंगे कोच रैक
19239 शिवनाथ एक्सप्रेस पांच दो
18237 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सात पांच
18236 बिलासपुर- भोपाल पैसेंजर तीन पांच
58219 बिलासपुर- चिरमिरी पैसेंजर तीन दो
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