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Tue Sep 27, 2016 07:24:36 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Tue Sep 27, 2016 07:24:36 IST
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Blog Posts by Pp*^~
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Rail News
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IR AffairsECR/East Central  -  
Yesterday (8:39AM)   अब रीतू बेरी की डिजाइन किये ड्रेस में दिखेंगे टीटीइ

Pp*^~   5682 news posts
Entry# 2002442   News Entry# 281248         Tags   Past Edits
This is a new feature showing past edits to this News Post.
काला पैंट, सफेद शर्ट और टाइ के साथ काले रंग की कोट रेलवे टीटीइ और टीसी की पहचान है. लेकिन, यह पहचान अब बदल जायेगी. जल्द ही टीटीइ डिजाइनर ड्रेस में नजर आयेंगे.

रेलवे बोर्ड ने टीटीइ के ड्रेस बदलने के लिए सुझाव मांगे थे. इसके बाद देश की नामचीन ड्रेस डिजाइनर रीतू बेरी ने मुफ्त में ड्रेस डिजाइन का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को दिया. इस प्रस्ताव को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने मंजूरी दे दी. रीतू बेरी ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है. ट्रेनों के साथ-साथ जंकशन
...
more...
व स्टेशन पर तैनात टीटीइ को डिजाइनर पैंट, शर्ट, कोट व टाइ उपलब्ध कराये जायेंगे, जो ड्यूटी के दौरान उन्हें पहनना अनिवार्य होगा. इस नये ड्रोस से यात्रियों को जोन पहचान करने में सुविधा होगी. वह यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराने से पहले यह जान सकेंगे कि ट्रेन किस जोन में है और वो संबंधित जोन में अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. मालूम हो कि रेलवे बोर्ड ने रेलवे को 16 जोन में बांटा है.

ड्रेस से होगी जोन की पहचान : वर्तमान में रेलवे में कार्यरत टीटीइ का एक ही ड्रेस है, जिसका सख्ती से पालन नहीं किया जाता है. टीटीइ आधे-अधूरे ड्रेस में ड्यूटी पर तैनात होते हैं. साथ ही रेल यात्री एक जोन से दूसरे जोन में पहुंच जाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि जोन कौन सा है. ऐसे में यात्रियों को चलती ट्रेन में शिकायत करने में परेशानी होती है. रेवले बोर्ड का मानना है कि देश में 16 जोन में रेलवे बंटा है, लेकिन जोन की पहचान नहीं है. टीटीइ के ड्रेस से जोन की पहचान होगी.
पूर्व मध्य रेल में पांच रेल मंडल हैं, जिसमें दानापुर, सोनपुर, समस्तीपुर, मुगलसराय और धनबाद रेल मंडल हैं. इन रेल मंडलों में पांच हजार से अधिक टीटीइ कार्यरत हैं. डेढ़ हजार से अधिक टीटीइ तो सिर्फ दानापुर रेल मंडल में ही हैं.

चल रहा है काम

रेलवे बोर्ड ने टीटीइ के ड्रेस बदलने का निर्णय लिया है. प्रत्येक जोन की अलग डिजाइन व कलर होंगे. बोर्ड के निर्णय पर ड्रेस डिजाइनर रीतू बेरी ने काम शुरू कर दिया है.
अरविंद कुमार रजक, मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी, पूमरे

  
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Yesterday (10:40AM)
vijay12987~   281 blog posts   16 correct pred (52% accurate)
Re# 2002442-1            Tags   Past Edits
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Zone ke anusar uniforms ko alag alag karna galat hai. Isse public jaldi pahchan nahi payegi.
1 nation
1 RAILWAY
1 uniform for a particular dept.
  
Rail News
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New/Special TrainsER/Eastern  -  
Yesterday (8:19AM)   26 व 27 को मंदारहिल तक ही जायेगी हंसडीहा पैसेंजर

Pp*^~   5682 news posts
Entry# 2002347   News Entry# 281245         Tags   Past Edits
Sep 26 2016 (8:19AM)
Station Tag: Bhagalpur Junction/BGP added by Pp*^~/36064

Sep 26 2016 (8:19AM)
Station Tag: Mandar Hill/MDLE added by Pp*^~/36064

Sep 26 2016 (8:19AM)
Station Tag: Hansdiha/HSDA added by Pp*^~/36064

Sep 26 2016 (8:19AM)
Station Tag: Barapalasi/BRPS added by Pp*^~/36064
बाराप्लासी से हंसडीहा रेलखंड के बीच 26 से 27 सितंबर तक इंटर लाकिंग का काम होने से दोनों दिन भागलपुर-हंसडीहा पैसेंजर ट्रेन हंसडीहा स्टेशन नहीं जाकर मंदारहिल स्टेशन तक ही जायेगी. मुख्य यार्ड प्रबंधक डीसी झा नेे बताया कि 26 सितंबर की शाम 5:25 बजे जाने वाली ट्रेन और 26 सितंबर की चार बजे सुबह जाने वाली ट्रेन मंदारहिल तक ही जायेेगी.

  
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Yesterday (8:32AM)
Vikramshila Lhb coaches~   652 blog posts
Re# 2002347-1            Tags   Past Edits
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For what reason i think tayari hai bgp dumka passenger ka 28 septamber ko.

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Travel Question
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Sep 25 2016 (6:47AM)   22133/Solapur - Yesvantpur SF Express (PT)

Nalini8anish   15 blog posts   1 correct pred (50% accurate)
Entry# 2001430            Tags   Past Edits
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Is bedding provided in 3A and 2A coaches of this train

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Sep 25 2016 (6:53AM)
Pp*^~   3842 blog posts   124 correct pred (79% accurate)
Re# 2001430-2            Tags   Past Edits
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Yes.
  
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Sep 23 2016 (12:54PM)   DBG/Darbhanga Junction (5 PFs)

Abhinav Sinha   105 blog posts
Entry# 1999853            Tags   Past Edits
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15जनवरी 1934 के भूकंप के बाद दरभंगा से सहरसा और फारबिसंगज का संपर्क खत्म हो गया। जहाँ कोसी ने भी अपना रास्ता बदला वहीं ट्रेनों का परिचालन भी निर्मली तक सिमट कर रह गया। 82 साल बाद भी इस मार्ग को फिर से परिचालन का इतंजार हैं। जहाँ अब कोसी पर महासेतु का निर्माण हो चुका हैं, वही झंझारपुर से फारबिसंगज तक मेंगा ब्लॉक भी लिया जा चुका हैं। मीटर गेंज ट्रेनों का परिचालन अब बस सकरी-झंझारपुर और राघोपुर-सहरसा तक सिमट चुका हैं। कुछ दिनों में यह भी बंद हो जायेगा और वो दिन फिर से आयेगा, जब 1934 के बाद इन रेल खंड पर फिर से दौडे़गी ट्रेन।
सभार- दरभंगा राज।

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Sep 24 2016 (8:22AM)
Pp*^~   3842 blog posts   124 correct pred (79% accurate)
Re# 1999853-5            Tags   Past Edits
Sep 25 2016 (6:47AM)
भूकंप से यह मार्ग सिमट कर भपटियाही जंक्शन तक रह गया था क्यों की कोसी नदी उसके बाद बह रही थी, भपटियाही से सुपौल और प्रतापगंज बाद बंद हो गए थे जो बाद में सरायगढ़ चालू से चालु भी कर दिए गए
रहडिया थरबिटिया स्टेशन इतिहास होगये , लेकिन अगली बाढ़ में उसने रहडिया स्टेशन को तहस नहस कर दिया और अब लगभग वहीँ बहती है
भूकंप से यह मार्ग सिमट कर भपटियाही जंक्शन तक रह गया था क्यों की कोसी नदी उसके बाद बह रही थी, भपटियाही से सुपौल और प्रतापगंज बंद हो गए थे जो बाद सरायगढ़ से चालु भी कर दिए गए. रहडिया थरबिटिया स्टेशन इतिहास होगये , लेकिन अगली बाढ़ में उसने रहडिया स्टेशन को तहस नहस कर दिया और अब लगभग वहीँ बहती है. इस प्रकार निर्मली आखिरी स्टेशन रह गया, तब तक कोसी बेराज बन गया और कोसी का वापस लौटना रुक गया,
वैसे एक कोशिश कोसी ने दशक पहले की भी थी लेकिन असफल कर दी गई.

  
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Sep 24 2016 (3:24PM)
Abhinav Sinha   105 blog posts
Re# 1999853-6            Tags   Past Edits
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कुछ लोग बताते हैं, की भूकंप के प्रभाव से कुछ सालों बाद कोसी का रास्ता बदला, वैसे कोसी अपनी धार बदलने के लिए ही ज्यादा बदनाम हैं। रेल खंड तबाह होने के कई साल बाद फारबिसंगज से सहरसा तक ललित नारायण मिश्रा के रेल मंत्री रहते फिर से रेल खंड तैयार किया गया। ललिग्राम स्टेशन को अलग तरह से तैयार किया गया ताकी यहाँ हर हाल में लोको रिर्वस्ल की व्यवस्था हो, और कोई ट्रेन इस स्टेशन पर रूके बिना आगे ना बढे़। निर्मली के आगे कोसी नदी के कारण ट्रेनों का आगे जाने बंद हो गया। कोसी नदी पर सड़क और रेल पुल का निर्माण के समय विरोध भी बहुत किया गया। कोसी के व्यवहार को जानने वाले लोग, कम से कम सात किलोमीटर लंबी महासेतु की मांग कर रहे थे, जब की सरकार ने दो किलोमीटर ही बनाने का निर्णय लिया था। महासेतु के निर्माण के बाद भी कई...
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दिनों तक यह विवाद रूका नहीं।
  
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Sep 24 2016 (1:33AM)  
 

©The Dark Lord™~   2352 blog posts
Entry# 2000481            Tags   Past Edits
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#moderator #moderator One TL monitor /members/profile/1366928 is updating Pakistani stations over this site for the last few days. first, he updated Lahore and after that a long list is there. Is he doing this with your consent and approval??? what's need of updating Pakistani stations over this site? Why making all this complex and confusing. Plz. inform us ur views about this issue.

8 posts are hidden.

  
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Sep 24 2016 (8:13AM)
Pp*^~   3842 blog posts   124 correct pred (79% accurate)
Re# 2000481-10            Tags   Past Edits
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Some Admin/FM have created non existent stations too. Sometime they created station which does not exists now.
What is your views ?

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Rail News
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IR Affairs
Sep 20 2016 (9:27AM)   परिवार के साथ ट्रेन में सफर पर वरिष्ठों को रियायत नहीं

Pp*^~   5682 news posts
Entry# 1997016   News Entry# 280635         Tags   Past Edits
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देश के वरिष्ठ नागरिक यानी बुजुर्ग अकेले या परिवार के साथ ट्रेन यात्रा करते हैं, तो बुजुर्गों को किराये में 50 प्रतिशत की रियायत दी जा रही थी, लेकिन अब रेल मंत्रालय इसमें बदलाव करने की योजना बना रहा है. इसके तहत परिवार के साथ ट्रेन में सफर करने वाले बुजुर्ग को किराये में मिलने वाली रियायत नहीं मिलेगी. इसको लेकर रेलवे बोर्ड में विचार-विमर्श किया जा रहा है. संभावना है कि रियायत में किये जा रहे बदलाव पर शीघ्र निर्णय लेकर लागू किया जायेगा. दो कोच में सफर करने पर मिलेगी रियायत : परिवार के साथ वरिष्ठ नागरिक सफर कर रहे हैं, तो उनको पूरा किराया देना होगा. लेकिन, परिवार के सदस्य और वरिष्ठ नागरिक अलग-अलग कोच में आरक्षण टिकट लेते हैं, तो वरिष्ठ नागरिक को रियायत का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिक के साथ अन्य सदस्य सफर कर रहे हों, तो प्राथमिकता के आधार पर पहले...
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बुजुर्ग दंपती या वरिष्ठ नागरिक को लोअर बर्थ देने का प्रावधान किया जा रहा है.

बोर्ड के निर्णय से बुजुर्गों की बढ़ेगी परेशानी : अमूमन वरिष्ठ नागरिक कमजोर और बीमार होते हैं. इस स्थिति में वरिष्ठ नागरिक को देखरेख करने के लिए परिवार के कम से कम एक सदस्य जरूर साथ में सफर करते हैं.

इतना ही नहीं, बीमार वरिष्ठ नागरिक को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू ले जाते हैं, तो साथ में कम से कम एक व्यक्ति जरूर होता है. इस स्थिति में वरिष्ठ नागरिक और साथ चल रहे सदस्यों को पूरा किराया देना होगा. इधर, पूमरे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी अरविंद कुमार रजक ने कहा कि यह निर्णय रेलवे बोर्ड को लेना है, लेकिन अब तक बोर्ड से कोई सर्कुलर नहीं मिला है. सर्कुलर मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जायेगी.

पटना : पटना जंकशन, राजेंद्र नगर टर्मिनल और पाटलिपुत्र जंकशन पर स्थित आरक्षण टिकट काउंटरों पर आधे घंटा का लंच ब्रेक होता है, लेकिन अब यह सिर्फ 15 मिनट का ही होगा. यह आदेश सोमवार से सभी स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर लागू कर दिया गया है. काउंटर सुबह आठ बजे से दो बजे तक खुला रहता है. इसके बाद बुकिंग क्लर्क का शिफ्ट बदलता है.

इसको लेकर दोपहर दो बजे से ढाई बजे तक टिकट काउंटर बंद रहता है. इस अवधि को लंच ब्रेक कहा जाता है. इसके बाद रात्रि के आठ बजे तक टिकट काउंटर खुला रहता है. अब बुकिंग काउंटर दो बजे बंद होगा और 2:15 बजे खुल जायेगा. मुख्य आरक्षण पर्यवेक्षक एएन सिंह ने बताया कि रेल मंडल के निर्देशानुसार 15 मिनट का लंच ब्रेक लागू कर दिया गया है.

ज्यादा नहीं करना पड़ेगा इंतजार : पटना जंकशन के मुख्य द्वारा के हिस्से में 17 टिकट काउंटर हैं. इन पर टिकट लेने वालों की लंबी-लंबी भीड़ लगी रहती है. काउंटर पर लंबी कतार रहते दो बजने पर काउंटर बंद हो जाता है. इसके बाद टिकट लेने वालों को आधे घंटा तक इंतजार करना पड़ता था. अब सिर्फ 15 मिनट ही इंतजार करना पड़ेगा.

  
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Sep 20 2016 (1:05PM)
For Better Managed Indian Railways~   719 blog posts
Re# 1997016-1            Tags   Past Edits
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Concession provided to elders is justified on the ground that
(1) they are physically weak, often suffering from (common old age) disease(s) and often dependent on others for some day to day activities
(2) are not supposed to earn today, they might have had earned throughout their life, some of them have paid taxes to Govt too. (probably not much relevant in India).
(3)
...
more...
they now survive on their (usually meagre) savings or are (often painfully) dependent on their children.
(4) concession will facilitate their travel by way of lower burden on them or lowering their dependency on their kin.
Elders are already getting lower berth on priority; there is nothing new in it.
Putting such ridiculous condition (staying in a coach other than their escorts), which is bound to put the elders and their escorts to extreme inconvenience, is a shrewd thinking. It is painful reminiscent of British Raj (Govt BY the British, FOR the British, OVER the Indians), where rules/ policies read out something else and intended something else.
It is better to straightforwardly reduce the subsidy from present level (50%) to suitably lower level, so that the quantum of additional revenue desired by IR, can be generated from the tickets sold to the elders, rather than putting such illogical conditions.
If financial condition is very bad, IR have full moral right to reduce its subsidy burden in a logical & justified way, like reducing the maximum % of concession to lower levels, eliminating concessions in higher classes, asking State Govts/ Central Govt to bear the burden etc.
Rebates and surcharges should not go together. If flexi fares are being introduced on one hand, reduction in quantum of concession given should also go hand in hand. Rebates on higher classes may be abolished. So called “poors” travelling in ac classes after paying meager & highly concessional fares, are insults to the real poor who travel in lower non ac classes after paying full/ surge fare.

  
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Sep 22 2016 (6:47PM)
Koush12461^~   72907 blog posts   5061 correct pred (78% accurate)
Re# 1997016-2            Tags   Past Edits
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shandaar idea..
  
पिछले हफ्तेलेख में हमने देखा था कि रेल विभाग कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है, ऐसे में रेल बजट को अलग पेश करने की बजाय केंद्रीय बजट में मिला देने का कोई औचित्य नहीं है। बुधवार को तो केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी इसे मंजुरी दे दी है। किंतु दुनिया में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। बाद में ऐसे कदम वापस लेने पड़े हैं। जहां तक विकसित देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और डेनमार्क की बात है तो वहां सरकार रेलवे को अरबों डॉलर की सब्सिडी देती हैं अौर उसके बाद भी रेलवे घाटे में रहती है। ब्रिटेन में यही हुआ और मार्गरेट थैचर के जमाने में वहां निजीकरण की कोशिश की गई और उससे हालत इतनी खराब हो गई कि बाद में लोग थैचर की कब्र पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। उन दिनों वहां के एक प्रमुख अखबार में लेख छपा था कि भारतीय रेल, ब्रिटिश रेल से बेहतर है।...
more...

मेरा ख्याल है भारतीय रेल विभाग ऐसा एकमात्र उदाहरण है, जो मुनाफा कमा रहा है। रेलवे के विकास में 15 हजार करोड़ मुनाफे से लगा भी रहा है। यह भी अनोखी बात है कि वह सरकार को 6 फीसदी लाभांश भी दे रही है। आम बजट में विलय का फायदा यही बताया जा रहा है कि यह लाभांश अब सरकार नहीं लेगी। अब अगर आप निवेश बुलाएं तो रेलवे का कायापलट हो जाए, लेकिन निवेश इसलिए नहीं आता कि आप लोक-लुभावन कदमों में उसे उड़ा डालेंगे। इसका समाधान यह है कि आप एक्सप्रेस अकाउंट बनाएं, निवेश का पैसा उसमें डालें कि पहले इसका सार्थक उपयोग होगा, फिर लोक-लुभावन घोषणाओं पर ध्यान देंगे।
पिछले लेख में मैंने बताया था कि कैसे रेलवे बजट क्षमता निर्माण, रेलवे व्यवस्था की वित्तीय आत्म-निर्भरता और परफार्मेंस के एकलक्षी विश्लेषण में सहायक रहा है। रेल बजट के विलय से रेलवे की जो खामियां अक्षमताएं हैं उनका भी एक बड़े पूल में विलय हो जाएगा। इसके साथ ही रेल व्यवस्था को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने, उसे सुधारने की पहल करने की प्रेरणा का भी विलोप हो जाएगा। इसका एक दुष्परिणाम यह भी होगा कि प्रतिस्पर्द्धी मांगों और विस्तार कार्यक्रम में संतुलन रखने की आवश्यकता की अनदेखी हो जाएगी। इससे क्षमता विस्तार पर बुरा असर होगा। अभी पृथक बजट होने से आंतरिक वित्तीय नियंत्रण पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जाता रहा है, लेकिन अब जवाबदेही घटने के साथ इसमें ढिलाई आने की आशंका रहेगी।
वित्तीय मामलों में जोर देकर अपनी बात रखने की रेल विभाग की काबिलियत भी कमजोर होगी, क्योंकि बजट की पूरी प्रक्रिया पर वित्त मंत्रालय हावी रहेगा। वह किसी एक मंत्रालय के प्रति सहानुभूति नहीं दिखा सकता। वह तो सभी मंत्रालयों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता है। जहां वित्त मंत्री के लिए ऐसा करना उचित है, लेकिन इसका विपरीत असर मुनाफा देने वाला रेल मंत्रालय भुगतेगा। जैसाकि पहले कहा गया है कि रेल बजट के विलय के बाद रेलवे को आम बजट में लाभांश नहीं देना होगा। वर्तमान में यह राशि 9,700 करोड़ रुपए हैं। इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन क्षमता विस्तार के लिए रेलवे को 2 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता है। रेल बजट में स्पष्ट संकेतों के बगैर इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन करना और भी कठिन हो जाएगा।
भारतीय रेल ने हमेशा सरप्लस बजट दिया है। इसमें सब्सिडी को कोई स्थान नहीं है, जबकि खाद्य, ऊर्जा, उर्वरक, पेट्रोलियम गैस जैसे कई मंत्रालयों को भारी सब्सिडी मिलती है। सरकार को 4 से 6 फीसदी लाभांश आमदनी के रूप में योजनागत खर्च वापस मिल जाता है। यह उतना ही होता है, जितना सरकार बॉन्ड के लिए देती है। रेलवे की क्षमता बढ़ाने पर सालाना 30 हजार करोड़ रुपए खर्च आता है, जो उतना ही है, जितना सरकार सड़कों पर खर्च करती है।
चूंकि ज्यादातर सरकारी समितियां यह मानती हैं कि रेलवे, सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल होने के साथ ऊर्जा की किफायत में 10 गुना बेहतर है, इसलिए रेलवे के ढांचे पर 3 लाख करोड़ रुपए सालाना से कम खर्च नहीं होने चाहिए। रेलवे की आमदनी करीब 2 लाख करोड़ रुपए सालाना है, किंतु यदि 10 फीसदी ऊर्जा की किफायत और कॉर्बन उत्सर्जन की बचत जोड़ें तो असर 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा होगा।
रेल बट सारी घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले कैबिनेट से मंजूरी लेता है। सारी आमदनी सरकारी कोष में जाती है और मांग संसद की अनुमति के बाद अनुदान में बदल जाती है। कुछ 'सशुल्क' खर्च छोड़ दें तो खर्च के लिए पैसा संसद की मंजूरी के बाद ही लिया जा सकता है। फर्क इस बात में है कि रेल बजट का हिस्सा होने पर बारीक ब्योरे भी सार्वजनिक रहते हैं और लोग विकास होता हुआ देख सकते हैं। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह पारदर्शिता बहुत जरूरी है।
क्या हम रेल बजट के ब्योरों का यह हश्र करके समय चक्र को उलटा घुमाना चाहते हैं? रेल बजट के विलय से रेलवे की सेहत की कीमत पर की जाने वाली लोक-लुभावन घोषणाओं पर रोक लगेगी ऐसा भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। ये घोषणाएं करते समय रेल मंत्री बहुत परिश्रम पूर्वक बताते थे कि वे अन्य राजों के हितों का किस तरह ध्यान रखेंगे। इस लोकतांत्रिक अंकुश के हटते ही एक बार आम बजट पेश हो जाए तो उसके बाद आसानी से घोषणाएं करके समर्थकों से श्रेय लिया जा सकता है। अभी तो रेलवे अन्य मंत्रालयों के लिए भी उदाहरण है कि अपने फंड्स पैदा करके सब्सिडी का बढ़ता बोझ कम करें।
जरूरत तो इस बात कि है कि रेलवे के उदाहरण को सड़क परिवहन में लगाया जाए। सड़कों के निर्माण में टोल टैक्स के कुछ क्षेत्र छोड़ दें तो यह करदाता के पैसे से होता है। इसे भी आत्मनिर्भर बनाने के कारगर उपाय खोजने होंगे। इसी तरह ऊर्जा क्षेत्र को लें। अन्य जगहों की तरह बहुप्रचारित सुधार लक्ष्य हासिल करने में विफल रहे हैं। हमंें महंगी बिजली मिलती है और नुकसान होने पर सरकार करदाता के पैसे से ही भुगतान करती है। रेग्यूलेटर की बहुत बात की गई, लेकिन बिजली के क्षेत्र में वह व्यवस्था भी कामयाब होती नज़र नहीं आती।
(येलेखक के अपने विचार हैं)
विजय कुमार दत्त
रेलवेबोर्ड के पूर्व सदस्य और रेलवे इंजीयरिंग प्रशासन का लंबा अनुभव

  
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Sep 22 2016 (10:11AM)
12903 स्वर्ण मंदिर मेल~   2207 blog posts   39 correct pred (84% accurate)
Re# 1998667-1            Tags   Past Edits
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भारतीय रेल विभाग ऐसा एकमात्र उदाहरण है, जो मुनाफा कमा रहा है। रेलवे के विकास में 15 हजार करोड़ मुनाफे से लगा भी रहा है। यह भी अनोखी बात है कि वह सरकार को 6 फीसदी लाभांश भी दे रही है।
Railway to bahut kama rahi fir bhi ye kiraya bar bar badha rahe h. Ab pata nahi aur kya chahte h.

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Rail News
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Commentary/Human Interest
Sep 22 2016 (8:04AM)   रेल बजट खत्म होने से किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं

Pp*^~   5682 news posts
Entry# 1998662   News Entry# 280854         Tags   Past Edits
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निश्चित तौरपर अंग्रेजी जमाने की अकवर्थ कमेटी के सुझाव और जापान की नकल पर 1924 शुरू हुई अलग रेल बजट की परंपरा को 92 साल बीत चुके हैं और अगर उसे बदला जाता है तो हायतौबा की जरूरत नहीं है। चिंता वे ही ज्यादा कर रहे हैं, जिनका भावनात्मक लगाव रेलवे की अस्मिता से है। वह अस्मिता रेलवे बोर्ड से जुड़ी हो सकती है, रेलवे की ट्रेड यूनियन या उसकी राजनीति से जुड़ी हो सकती है। अलग रेल बजट पेश करने की परंपरा खत्म करने की बात करने वाली विवेक देबराय समिति की दलील यही थी कि इससे रेल से जुड़ी लोक लुभावन राजनीति खत्म होगी और रेलवे का सिर्फ हिसाब-किताब ठीक होगा बल्कि उसका विकास भी तेजी से होगा। मौजूदा रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी कहा है कि इससे रेलवे को यह फायदा होगा कि उसे सरकार को दस हजार करोड़ रुपए का लाभांश नहीं देना होगा। निश्चित तौर...
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पर उदारीकरण के 25 साल के दौर में रेलवे में आर्थिक सुधारों का वैसा प्रभाव नहीं पड़ा जैसा कि अन्य विभागों पर पड़ा, इसलिए नीति आयोग की इस दलील में एक आकर्षण जरूर हो सकता है कि आम बजट के साथ रेल का बजट मिला दिए जाने के बाद रेलवे में उसी प्रकार आर्थिक सुधार लागू किए जा सकेंगे, जिस प्रकार अन्य विभागों में लागू किए गए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि गठबंधन सरकारों के दौर में रेलवे का किराया बहुत कम बढ़ा और रेलवे का इस्तेमाल राजनीतिक दल जनाधार बढ़ाने के लिए करते रहे। चाहे नीतीश कुमार हों, लालू प्रसाद हों या ममता बनर्जी हों उन सभी ने रेलवे का नेतृत्व इसी राजनीति के तहत किया, बल्कि ममता बनर्जी ने तो अपनी पार्टी के रेल मंत्री को इस बिना पर इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया कि वे रेल का किराया बढ़ा रहे थे। किंतु अब जबकि गठबंधन सरकारों का दौर समाप्त हो चुका है तब मोदी सरकार और उनके चार्टर अकाउंटेंट रेल मंत्री सुरेश प्रभु के सामने ऐसी कौन-सी मजबूरियां थीं कि वे रेलवे में आर्थिक सुधार नहीं कर पा रहे थे। जाहिर है कि या तो उनकी और सरकार की दृष्टि बहुत साफ नहीं है या फिर रेलवे में कुंडली मारकर बैठी नौकरशाही सुधार के रास्ते में अड़ंगे लगा रही है। कई बदलावों के रास्ते में उसकी ट्रेड यूनियनें भी बड़ी अड़चन है। देखना है सरकार नए स्वरूप में रेलवे में कुछ चमत्कार कर पाती है या फिर रेलवे के पुनर्निर्माण और उसकी सुविधाओं की पुरानी स्थिति कायम रहनी है।

  
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Sep 22 2016 (10:06AM)
12903 स्वर्ण मंदिर मेल~   2207 blog posts   39 correct pred (84% accurate)
Re# 1998662-1            Tags   Past Edits
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दस हजार करोड़ रुपए का लाभांश jab railway government ko de raha h to fir kyo kahte h ki railway ghate me h.

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General Travel
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Sep 22 2016 (7:45AM)   13347/Palamau Express | PNBE/Patna Junction (10 PFs)

Pp*^~   3842 blog posts   124 correct pred (79% accurate)
Entry# 1998559            Tags   Past Edits
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Sep 22 2016 (8:26AM)
BusyBusyBusy   850 blog posts
Re# 1998559-1            Tags   Past Edits
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nice augmentation !!
  
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Sep 22 2016 (8:13AM)   03572/Mokama - Kiul MEMU Special | KIUL/Kiul Junction (5 PFs)

Pp*^~   3842 blog posts   124 correct pred (79% accurate)
Entry# 1998581            Tags   Past Edits
Sep 22 2016 (8:14AM)
Station Tag: Mokama Junction/MKA added by Pp*^~/36064

Sep 22 2016 (8:14AM)
Train Tag: Kiul - Mokama MEMU Special/03571 added by Pp*^~/36064
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  • Entry# 1890598
    Jun 12 2016 (02:20AM)


    There are some new Objection rules. Pl. refer to Blog Post# 1889717-4 and Blog Post# 1889777-3 . To reiterate: . 1. There are ONLY THREE reasons for Objections allowed: a. Abusive/Offensive: Bad/rude/insulting language b. Controversial: For openly and directly targeting states/regions/zones and starting fights. ALSO, violation of Site Guidelines are considered Controversial. For example, protesting...
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  • Entry# 1762455
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    A new feature has been rolled out - "Blog-based ChatRooms". . Previously, we had one-on-one private Chat feature, which was not very successful. The reason was that Chat Invitations are sometimes intrusive. The recipient may not be free to undertake the Chat, even if they are Online, and also the other person ends...
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    It has come to our attention that several IRI members have been causing mischief on other social media sites, distressing our regular loyal members. . They have been seen to post confidential and sensitive Govt. information on IRI, and thereafter themselves have been complaining to the Ministry that, "Such RailFan sites are openly running...
  • Entry# 1645224
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    Happy Diwali to all members. Station announcements, vendor calls selling chai, loco honks, trains crossing bridges, etc. can now be recorded. Just click on the purple microphone icon while posting a blog. At this time, standard 20 second sound clips are recorded. You may preview the recording, re-record and then upload the...
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