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Thu Mar 23, 2017 16:05:34 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Thu Mar 23, 2017 16:05:34 IST
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Blog Posts by Kishor*^~
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कहीं रेलवे को बेचने की तैयारी तो नहीं!... आज रेलवे की भयानक अराजकता और रेल कर्मचारियों की लापरवाही के साक्षात दर्शन हुए। सुबह मुझे कानपुर शताब्दी (12033) पकड़कर वापस गाजियाबाद आना था। कानपुर स्टेशन से यह गाड़ी सुबह छह बजे खुलती है। कानपुर में मैं वहां जहां रुका था, वह जूही कलाँ दो के विवेक विहार डब्लू-टू का इलाका स्टेशन से करीब सात किमी होगा। सुबह पहले तो बुकिंग के बावजूद ओला ने धोखा दे दिया। वह कैब आई ही नहीं और ड्राइवर ने फोन तक नहीं रिसीव किया। तब मेरे बहनोई स्वयं मुझे छोडऩे आए। इस तरह दो लोगों की नींद में खलल पड़ा।
हम घर से साढ़े पांच पर निकले थे और रास्ते भर यही सोचकर परेशान रहे कि कहीं
...
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टाटमिल चौराहे पर जाम न मिल जाए। खैर जब स्टेशन पहुंचे तो 5.48 हो रहा था। अपना सामान उठाए मैं भागता हुआ प्लेटफार्म में दाखिल हुआ तो गाड़ी का कहीं पता नहीं जबकि नियमत: उसे साढ़े पांच पर प्लेटफार्म पर लग जाना चाहिए। आखिर वहीं से यह ट्रेन चलती है। मगर ट्रेन प्लेटफार्म पर आई ही छह बजे। पूरी भीड़ ट्रेन के दरवाजों पर टूट पड़ी। मगर दरवाजे अंदर से ही बंद थे। सब उनके खुलने का इंतजार करते रहे। अब एक आदमी था जिसने एक के बाद एक कोच के दरवाजे खोलने शुरू किए। तेरह कोचों वाली इस ट्रेन के दरवाजे खुलने में ही 15 मिनट लग गए। सारे लोग एकदम से भड़भड़ा कर चढऩे लगे। और ट्रेन पांच मिनट बाद चल दी। अब जो चढ़ाने आए थे वे तो ट्रेन के अंदर तथा जिनको चढऩा था वे बाहर। हंगामा हुआ ट्रेन फिर रुकी और चली।
हमारा कोच सी-7 था। गाड़ी में बैठते ही मच्छरों ने घेर लिया। वृहदाकार के मच्छर जो भनभनाते तो डिस्टर्ब करते और चुप रहते तो हाथों-पांवों में काट लेते। हमे जो इंडियन एक्सप्रेस अखबार दिया गया उसे पढऩे की बजाय हम मच्छरों का शिकार करते रहे। मगर मच्छरों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि ट्रेन में चढ़ा हर मनुष्य परेशान हो गया। औरतें, बच्चे सब तंग। तब मैने अपना रौद्र रूप दिखाया और टिकट चेक करने आए बाबू से कंप्लेंट बुक लाने को कहा। बुक आ तो गई मगर उसमें पहले से जो शिकायतें थीं उन पर ही कोई जवाब नहीं आया था। दूसरी सवारियां भी उखड़ पड़ीं तब एक सफाई कर्मी आया और फर्श पर पोछा लगा गया। फिर जो चाय आई लाई गई उसका पानी ठंडा था। फिर टीटी बाबू को बुलाकर शिकायत की गई तो वेटर ने बताया कि ब्वायलर काम नहीं कर रहा। एक तो ट्रेन वैसे भी डिले थी उस पर उसकी गति ऐसी जैसे बारात चल रही हो।
कानपुर से इटावा आने में ही दो घंटे लग गए। उस शताब्दी से जिसकी स्पीड कम से कम 130 रखी जाती है। और कानपुर-इटावा की दूरी महज 133 किमी की है। फिर राम-राम करते ट्रेन चली तो जो नाश्ता आया वह भी ठंडा और ऊपर से मच्छरों की भरमार। टूंडला पार करने के बाद वह कर्मचारी आया जिसके कंधे पर ट्रेन की सफाई का भार था। उसने बताया कि मच्छर तो आएंगे ही ट्रेन रात को जंगल में खड़ी की जाती है। और हमारे पास हिट है नहीं। उसकी शैली से लग रहा था कि रेलवे सफाई के वास्ते जो सामान इसे मुहैया करवाता होगा उसे यह जरूर बाजार में बेच देता होगा। मजे से गुटखा खाते हुए और खूब फूला पेट लेकर वह जैसे आया था वैसे चला गया।
अलीगढ़ में स्टाप न होते हुए भी ट्रेन रोकी गई और तब कोच में एक अधिकारी आया और उसने हिट उसी कर्मचारी से मंगवाई और छिड़काव करवाया। उसके बाद ट्रेन चली मगर स्पीड वही साठ-सत्तर वाली। इस तरह जिस गाजियाबाद में हमें साढ़े दस पर पहुंच जाना था उस पर हम साढ़े बारह पर उतरे और एक बजे घर आए। समझ में नहीं आता कि रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने शताब्दी में तमाम तरह के सुविधा शुल्क लगाकर कानपुर तक का किराया लगभग 11 सौ रुपये कर दिया है मगर न तो कोई सुविधा बढ़ाई न खानपान की गुणवत्ता ही सुधारी। जबकि दस साल के मनमोहन राज और उसके पहले की सरकारों के वक्त भी शताब्दी जाड़ों के कोहरे के दौरान को छोड़ दिया जाए तो कभी लेट नहीं होती थी।
खाने का हाल यह है कि शताब्दी खाने और नाश्ते के नाम पर दो सौ रुपये और चार सौ रुपये वसूलती है पर नाश्ता ऐसा था कि उसे खाना दूभर। दो स्लाइस और एक डिब्बी मक्खन। न नमक न कालीमिर्च पाउडर। दो ही विकल्प थे या तो दो पीस कटलेट अथवा आमलेट। दोनों ही बेस्वाद और एकरस। पिछले 28 वर्षों से यही परोसते आ रहे हैं। प्रभु ने जब पैसे बढ़ाए थे तो कहा था कि खाने की क्वालिटी सुधरेगी। मगर क्वालिटी तो और गिरी। मजे की बात कि कानपुर और लखनऊ शताब्दी में इतनी भीड़ होती है कि कभी भी दो दिन पहले टिकट नहीं मिल पाती। पर इसका फायदा रेलवे उठाता है कि जो कुछ दे दो खा ही लेंगे। क्या ट्रेन को इस तरह लेट करने तथा साफ-सफाई न करने के पीछे रेलवे को निजी हाथों में देने की तैयारी तो नहीं चल रही है।

8 posts are hidden.

  
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Yesterday (23:25)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2207014-9            Tags   Past Edits
That does not justify the poor services offered by Railways...
Quality of service is affected due to various factors : and one is 'outsourcing' :
The money Railway charges to passenger and money reaches to service provider has BIG gap ...
and those contractor's employees are 'shrewd' that they too dance to the tunes of 'important' persons only, and others are 'cattle'
...
more...
for them....
"Cattle class" word was used by M.P. Sashi Tharoor for Air travel Economy class, for Railway travel when 'economy drive' by Govt of India lead Dr.Manmohan singh was in power. but now Railways too is making us feel like cattle

  
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Yesterday (23:27)
©The Dark Lord™~   5637 blog posts
Re# 2207014-10            Tags   Past Edits
1 compliments
corrected,if needed will do further
Correction- Mr. Tharoor had used the term ''cattle class'' for Economy class of Air planes not for trains.

  
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Yesterday (23:29)
Indian Railways the life line of our Nation~   12865 blog posts   137 correct pred (84% accurate)
Re# 2207014-11            Tags   Past Edits
Railway is trying to make profit by applying Flexi fare,20% more in Humsafar tejas trains but that Idea backfires on railways

2 posts are hidden.
  
रेलवे बोर्ड द्वारा सेफ्टी (संरक्षा) से जुड़े सुपरवाइजरों को 31 मार्च के बाद ट्रेड यूूनियन में हिस्सा नहीं लेने के निर्देश दिए जाने के खिलाफ रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियनें आंदोलनरत हैं। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को फेडरेशन के नेताओं की रेलमंत्री से बात होनी है। अगर दस दिन में यह आदेश रद नहीं हुआ तो झांसी रेल मंडल में ही 112 सुपरवाइजरों को यूनियन छोड़नी पड़ेगी।
रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिए हैं कि 31 मार्च के बाद सेफ्टी से जुड़े विभागों के सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी यूनियन में हिस्सा नहीं ले सकेेंगे। बोर्ड का मानना है कि रेल संरक्षा से जुड़े स्टेशन मास्टर, रेल पथ निरीक्षक, लोको इंस्पेक्टर के अलावा सिगनल और दूरसंचार, टीआरडी, सीएंडडब्लू विभागों के सुपरवाइजरों
...
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के यूनियन में शिरकत करने से काम प्रभावित होता है। रेल संरक्षा के हिसाब से यह ठीक नहीं है। इस आदेश के बाद से भारतीय रेल की सभी मान्यता प्राप्त यूनियनें लगातार आंदोलन चला रही हैं।
झांसी रेल मंडल में भी नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन और नॉर्थ सेंट्रल इंप्लाइज संघ का विरोध प्रदर्शन जारी है। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन 23 मार्च को झांसी में जुलूस और 30 मार्च को मुख्यालय इलाहाबाद पर प्रदर्शन करने जा रही है। इसी तरह नार्थ सेंट्रल इंप्लाइज संघ 27 मार्च को डीआरएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करेगा। यूनियन नेता इस आदेश को रेल कर्मचारियों के मौलिक अधिकार का हनन बता रहे हैं।
‘फेडरेशन के नेताओं की 21 व 22 मार्च को रेल मंत्री के साथ इस मुद्दे को लेकर बैठक है। अगर यह आदेश रद नहीं होता है तो 31 मार्च के बाद यूनियनें उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।’
आरएन यादव, मंडल सचिव नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन

  
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Mar 21 2017 (10:01)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2204931-1            Tags   Past Edits
This is right step towards nailing the bully employees of all cadre
  
Rail News
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Other News
Mar 20 2017 (12:10)   Travelling by train? Railways will soon offer you TV shows, movies

Jayashree ❖ Amita*^   35790 news posts
Entry# 2204026   News Entry# 296931         Tags   Past Edits
If you are passionate about television (TV) serials and movies, you needn’t worry about missing them while you are travelling. The Indian Railways is inching closer to the dream of providing entertainment directly on your personal devices such as mobile phones, tablets and laptops, while you are on trains and at railway stations. 
The ministry of railways is set to invite bids for content on demand (CoD) and rail radio services, to be provided for travellers in April. The CoD initiative will include streaming video content such as TV serials, movies, short videos, kids’ shows and devotional content; streaming audio such as movie songs, regional songs, and devotional music; and providing electronic newspapers, gaming and educational content. 
According
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to a recent report by the Boston Consulting Group (BCG), through CoD on trains and at stations, the railways sees an overall infotainment market of around Rs 2,277 crore in three years’ time. The infotainment sectors for the railways include radio, video, digital music and digital gaming. The report says the interested parties might include content owners such as Eros Entertainment, Balaji Productions and Shemaroo Entertainment, and content aggregators like Radio Mirchi, Fever FM, Hungama and Bindass. 
Major telecom firms, internet service providers and players in the offline streaming market — such as Vodafone, Idea, Airtel, PressPlay TV, Moving Talkies, Dwingloo, Fropcorn, TouringTalkies, MyFreeTV, Zonk and CloudPlay — are expected to show interest. “Bids will be invited for non-fare initiatives like CoD. We are expecting active participation from all the major industry players. CoD contracts will be awarded for 10 years. Bids for app-based cab services will also be invited by May,” said an official close to the development. The railways had set up a non-fare revenue directorate last year headed by Executive Director R P Thakur.
Railways Minister Suresh Prabhu had launched the non-fare revenue policy in January this year. 
 
The policy includes providing radio and video content through WiFi in stations and on trains, leasing spaces on platforms to automated teller machines, giving outdoor spaces for installing advertising hoardings and billboards, and selling the branding of rights of trains and stations to fast-moving consumer goods and other companies. The railways is expecting an overall revenue of Rs 16,000-20,000 crore through non-fare initiatives in the next 10 years. It is planning to implement CoD and rail radio on 30 per cent of the trains in the first year, 60 per cent of the trains in the second year and on all trains by the third year. According to the railways, audio and video content services are set to be provided in all trains and video content on all stations in a phased manner.
According to the BCG report, for providing offline content, the expense per coach will come to as low as around Rs 38,000. On the other hand, for content streamed through the internet, the cost to set up the infrastructure will come to around Rs 25 lakh per coach. The railways will also set up a non-fare revenue evaluation committee to monitor the projects.

  
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Mar 20 2017 (15:56)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2204026-1            Tags   Past Edits
Now one more addition to add to the sound pollution while on rail travel ...
sate called sleep, peace , relaxation.

  
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Mar 20 2017 (18:36)
vipult95   18 blog posts
Re# 2204026-2            Tags   Past Edits
2 DIN ME KHARAB HOGE BUT RLY PAISE WASOOL KARTA RAHEGA WO BHI SIRF INSTALLATION
  
Rail News
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Other News
Mar 20 2017 (14:14)   Tracks cleared for ‘Prabhadevi’ station

Jayashree ❖ Amita*^   35790 news posts
Entry# 2204023   News Entry# 296933         Tags   Past Edits
The decks have been cleared for renaming Elphinstone Road station as Prabhadevi. The Railway Ministry has given its no-objection certificate (NOC) to the Union Ministry of Home Affairs (MHA) after the latter, as per protocol, asked the railways if it had any objections to the change of name. The name-change proposal was passed on December 16 last year, at the winter session of the Maharashtra Assembly in Nagpur.
As per the rules for name changes, laid down by the Union government way back in 1953, the state government had sent the Assembly proposal to the MHA since the rules make it compulsory for states to obtain the MHA’s permission before changing the name of a place. The MHA, on its part, asks
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for the opinion of the ministry under whose jurisdiction the object of the name change falls. In this case, since it is a railway station, the onus for the all-clear fell on the railways.
Speaking to DNA, Anil Saxena, the chief spokesperson of the railway ministry, said, “The MHA had asked the railways for its objections and the Railway Ministry has said that it has no objection to Elphinstone Road station being renamed as Prabhadevi.”
Once the MHA gives its approval, the state government and the Centre can implement the name change by making announcements in the respective gazettes via a notification, said a railway official.
How name changes work: 1: Local authorities or politicians propose a new name for a place or station.
2: The proposal is sent to the Union Ministry of Home Affairs (MHA).
3: The MHA forwards it to the Department of Science and Technology, as well as the ministry under whose jurisdiction the object of the name-change falls.
4: The Department of Science and Technology sends it to the Survey of India (SoI) office.
5: The regional office of the SoI investigates the veracity of the name and its geographical implications, and then gives its decision.
6: Once approved by the MHA, the state government and the Centre make the changes in the respective gazettes via a notification.

  
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Mar 20 2017 (15:54)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2204023-1            Tags   Past Edits
We used to here in our childhood so and so is staying in prabhadevi ...
name is linked to local memories and significant to them.
The English name too is engraved in daily travelers difficult to forget as a Landmark...
It will take some time to get used to "Prabha Devi"
Better
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late than never...
Seeing the procedure involved in implementing name change, I remember name change of State of W.Bengal' ...
Assembly has approved change... and sent to Parliament ...
Where it is halted is not known, or how much time it will take , anybody's guess :)
  
Rail News
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ML/Mumbai Local  -  
Mar 19 2017 (03:57)   मुंबई में चली भारत की पहली मेड इन इंडिया ट्रेन 'मेधा

Jayashree ❖ Amita*^   35790 news posts
Entry# 2202488   News Entry# 296804         Tags   Past Edits
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की ट्रेन मेधा शनिवार को मुंबई में चली। आजादी के करीब 70 साल बाद भारत की पहली मेड इन इंडिया ट्रेन मेधा को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने हरी झंडी दिखाई। स्वदेशी तकनीक से निर्मित मेधा ट्रेन ने पश्चिम रेलवे के दादर से बोरिवली और बोरिवली से चर्चगेट तक की यात्रा की। इस ट्रेन में खूबियों की भरमार है।
भारत की इस स्वदेशी ट्रेन में कई ऐसी खूबियां हैं जो उसे कई ट्रेनों से उसे अलग बनाती हैं। यह मेक इन इंडिया रैक स्वदेशी तकनीकी द्वारा निर्मित प्रथम रैक है। कोचों में बेहतर वायु संचारण की व्यवस्था है। इस गाड़ी में हाई पावर 3 फेज प्रोपुलशन सिस्टम है। इस रैक में मॉड्यूलर रूफ माउंटेंड फोर्सड वैंटिलेशन लगा
...
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है जो यात्रियों के क्षेत्र में प्रतिघंटा 16000 कूबिक मीटर वायु की आपूर्ति करेगा।
यात्रियों को बेहतर आरामदायक सेवा प्रदान करने हेतु कोच बनाए गए हैं। 12 कोचों सहित सिंगल रैक की कीमत 43.23 करोड रुपये है। एक हजार 168 सीटों वाली इस ट्रेन में एक साथ 6,050 यात्री यात्रा कर सकते हैं। यह ट्रेन 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। रिजेनरेटड ब्रेकिंग सिस्टम युक्त यह रेक परिचालन के दौरान 30 से 35 प्रतिशत बिजली बचत कर सकती है। पश्चिम रेलवे अधिकारी के मुताबिक मेधा को बनाने में लगभग 43.23 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं जबकि मौजूदा समय में उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर चलने वाली बॉम्बार्डियर ट्रेन की कीमत 44.36 करोड़ रुपये है।
इन लोकल ट्रेनों में इलेक्ट्रिक तकनीकी समेत अन्य तकनीकी संबंधी काम विदेशी कंपनी सीमेंस और बॉम्बार्डियर कंपनियां करती हैं। मेक इन इंडिया के तहत देश की पहली स्वदेशी लोकल मेधा हैदराबाद मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म की ओर से प्रायोजित है और चेन्नई कोच फैक्ट्री में इसे तैयार किया गया है। वर्तमान में मध्य और पश्चिम रेल पर परिचालित होने वाली लोकल चैन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में तैयार होती है।

8 posts - Sun Mar 19, 2017

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Mar 19 2017 (23:41)
©The Dark Lord™~   5637 blog posts
Re# 2202488-11            Tags   Past Edits
4000 crore ka loss hai per year Sub-urban sector se Indian Railways ko, better facilities k liye fare bhi pay kerna padta hai. You can't expect every thing on subsidized fare.

  
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Mar 19 2017 (23:45)
APV*^~   3930 blog posts   1810 correct pred (93% accurate)
Re# 2202488-12            Tags   Past Edits
have a look to this
click here
train has automatic doors it seems.

  
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Mar 20 2017 (07:22)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2202488-13            Tags   Past Edits
Now the situation is such :
a man is having a cake he is taking home for his kid
he is passing by a slum area which is deserted
and
suddenly few kids
...
more...
appear before him..
out of kindness he offers a piece of cake to them...
seeing this
the parents of kids and other neighbors too rush to get the cake
and suddenly man finds himself surrounded by all those hungry faces they are marching towards him with intent to get the cake... and he has no was to escape ...
he has to part his whole cake with these poor ones
Railways are a cake which everyone wants ... and there is no way to stop the passengers using it

  
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Mar 20 2017 (13:22)
©The Dark Lord™~   5637 blog posts
Re# 2202488-14            Tags   Past Edits
तीन परिस्तिथि उत्पन्न होती है...पहली, वो आदमी पूरा केक झुग्गी के लोगो को दे| दूसरी, पूरा केक अपने घर ले जाये और झुग्गी वालो को कुछ ना दे| तीसरी, केक आधा झुग्गी वालो को भी दे और आधा अपने घर भी ले जाये| क्या उचित है इसका जवाब मै आप पे छोरता हु

  
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Mar 20 2017 (15:44)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2202488-18            Tags   Past Edits
There is fourth possibility , and it is much predictable: The slum residents encircle the man who gave a piece of cake to them. They extend their hand towards man... man goes back... crowd is impatient... and thinking man is running away ... attacks man and try to snatch the remaining cake... not realizing his benevolence... cake is falling in dust and man looks at the cake and at crowd with teary eyes...
  
मुंबई। मुंबई में लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर शनिवार को आयोजित एक समारोह में रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने पूरी तरह स्वदेश निर्मित लोकल ट्रेन "मेधा" को रिमोट कंट्रोल के जरिये हरी झंडी दिखाई। 43.23 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह ट्रेन मुंबई के पश्चिम रेलमार्ग पर चलेगी। पहली ट्रेन ने शनिवार को दादर से बोरीवली और फिर बोरीवली से चर्चगेट का चक्कर पूरा किया।
अब तक मुंबई सहित देश के दूसरे शहरों में चलने वाली लोकल ट्रेनों के कोच तो भारत में बनते थे, लेकिन उनमें इलेक्ट्रिक एवं अन्य तकनीकी काम विदेशी सीमेंस एवं बाम्बार्डियर कंपनियों द्वारा किए जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "मेक इन इंडिया" पहल के तहत मेधा ट्रेन के कोच तो चेन्नाई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आइसीएफ) में
...
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तैयार किए गए हैं जबकि इलेक्ट्रिकल एवं अन्य तकनीकी काम पहली बार हैदराबाद के मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म ने किए हैं।
इससे ट्रेन की कुल कीमत में करीब एक करोड़ रुपये की कमी आई है। विदेशी बॉम्बार्डियर कंपनी द्वारा तैयार 12 कोच वाली ट्रेन की कीमत जहां 44.36 करोड़ रुपये होती थी, वहीं आइसीएफ एवं मेधा सर्वो ड्राइव्स फर्म के संयुक्त प्रयास से तैयार यह ट्रेन 43.23 करोड़ रुपये में ही तैयार हो गई है। पश्चिम रेलवे ने फिलहाल 12 कोच वाली दो ट्रेनें तैयार करवाई हैं। इस प्रकार के और अधिक कोचों के ऑर्डर देने पर इनकी कीमत और कम हो सकती है।
ट्रेन में खास
"मेधा" में 1,168 सीटें हैं और कुल 6,000 से अधिक यात्री इसमें यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। ट्रेन में रीजनरेटेड ब्रेकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। जिसके उपयोग से 30 से 35 फीसद बिजली पैदा होकर ओवरहेड वायर्स में जाएगी और इतनी बिजली की बचत होगी।
ट्रेन में रूफ माउंटेड फोर्स्ड वेंटीलेशन व्यवस्था होने के कारण ट्रेन की कूलिंग क्षमता 16,000 घन क्यूबिक मीटर प्रति घंटा है। औपचारिक शुरुआत से पहले इस ट्रेन का कई महीनों तक ट्रायल किया गया। बता दें कि मुंबई की लोकल ट्रेनों में प्रतिदिन 35 लाख यात्री सफर करते हैं।

  
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Mar 19 2017 (11:57)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2202711-1            Tags   Past Edits
Height of Hypo Talk and behavior "मेधा" में 1,168 सीटें हैं और कुल 6,000 से अधिक यात्री इसमें यात्रा कर सकते हैं
Govt does not allow even poor autos to carry more than licensed capacity carriage and look what is prepared to violate own rules...
If excess baggage is not managed 'Govt will suffer in Elections' ?

  
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Mar 19 2017 (14:10)
Aslam Shaikh   187 blog posts
Re# 2202711-2            Tags   Past Edits
Its possible in mumbai

  
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Mar 19 2017 (15:10)
akku   799 blog posts   633 correct pred (82% accurate)
Re# 2202711-3            Tags   Past Edits
6000 is the handle count in a emu train
remember suburban trains also have standing passengers

  
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Mar 19 2017 (23:32)
KaithalKarnalMeerutRailwayProject~   1276 blog posts
Re# 2202711-4            Tags   Past Edits
This is world wide.
Even I have seen same kind of rush in Singapore Metro.
It not only in India Dude.
  
Rail News
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Crime/AccidentsSCR/South Central  -  IR Press Release 
Mar 19 2017 (11:38)   Special Drive on Unauthorized Hawking Realizes Rs. 12.3 Lakhs -112 Persons sent for Prosecution

Indian Railways Railfan~   32 news posts
Entry# 2202708   News Entry# 296815         Tags   Past Edits
South Central Railway has conducted a Fortnight long Special Drive against unauthorized hawking, overcharging and poor quality of food. The Special teams comprising of officials drawn from Catering Department, Ticket Checking and Railway Protection Force (RPF) Personnel have conducted intensive checks across all six Divisions o­n the Zone.
The Special Drive held from 1st to 15th March, 2017 led to booking of 3400 cases, which realized an amount of Rs. 12, 38, 237/- as penalty for the lapses detected. 112 persons were also sent to the Court for prosecution. These special teams involved in the Catering Drive extensively checked Railway stations and trains in all six Divisions Secunderabad, Hyderabad, Vijayawada, Guntakal, Guntur and Nanded.
The
...
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checks were also meant to inspect the cleanliness being maintained at base kitchens, quality of food items, correct weighment of food items, proper adherence to the preparation process of all food items etc. In order to ensure that the food stalls o­n railway station platforms are manned by staff properly, punitive fines have been imposed o­n them as well as vendors in trains for not carrying proper identity cards. Priority is also being given to curb any type of unauthorized hawking in the railway premises and trains. The catering licensees/vendors are also being counseled wherever corrective action is required for any type of lapse or short coming, cautioning them to strictly adhere to the rules and regulations.

  
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Mar 19 2017 (11:54)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2202708-1            Tags   Past Edits
Govt is forcing out unauthorized Hawking , but is allowing "मेधा" में 1,168 सीटें हैं और कुल 6,000 से अधिक यात्री इसमें यात्रा कर सकते हैं
Double Speak thy name is Govt /news/post/296814
  
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Commentary/Human Interest
Mar 17 2017 (18:08)   WOW! Indian farmer wins express train in legal fight with railway - Read

rdb*^   126975 news posts
Entry# 2200921   News Entry# 296661         Tags   Past Edits
New Delhi: An Indian farmer's battle for proper compensation for land seized to build a railway reached an unexpected conclusion this week when a court awarded him a train.Sampuran Singh has been fighting for the money since 2015, when he went to court to argue that Indian Railways had underpaid him for a piece of land in the northern state of Punjab acquired to build new tracks.
He won his case, but the railway refused to pay and he filed another plea in January.
On Friday Singh's lawyer said a court in the
...
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state had awarded him an express train in lieu of the 10 million rupees ($150,000) he was owed.
"We were tired of pleading with the railways to clear the pending dues. The court asked us to identify properties for recovering our money," Rakesh Gandhi told AFP.
Judge Jaspal Verma also granted Singh ownership of the station master`s office in Ludhiana, a city in Punjab that the train passes through.
After the hearing on Wednesday Singh and his lawyer took the court order to Ludhiana station where they waited for the train to arrive before handing the document to the driver.
Singh said he allowed the driver to carry on to its destination as stopping it "would have caused inconvenience to thousands of passengers".
Railway officials later secured an interim court order giving them control of the train until the case is heard again on Saturday.
"If they fail to pay the money by Saturday then the court can sanction an auction," Gandhi said of the 20-coach express train, which runs daily between New Delhi and the Sikh holy city of Amritsar in Punjab.
Several Indian courts in the past have unsuccessfully awarded trains to aggrieved farmers over unpaid dues.
Last year, an express train was confiscated on court orders after a 62-year-farmer in southern Karnataka state won a compensation case over land taken in 2006.
The intercity express was halted at Harihar station for two hours before officials convinced him to release it.
And in 2015, railway officials handed over 3 million rupees to two farmers at a station in the northern state of Himachal Pradesh to secure the release of an express train.

2 posts - Fri Mar 17, 2017

2 posts - Sat Mar 18, 2017

  
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Mar 18 2017 (08:14)
प्यार की एक कहानी^~   32028 blog posts   22944 correct pred (76% accurate)
Re# 2200921-5            Tags   Past Edits
This farmer is not poor
He is from rich background
He is punjabi farmer and have great wealth with dairy to crops
Media gain this attraction i m sure that ministry must look into it

  
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Mar 18 2017 (12:06)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2200921-6            Tags   Past Edits
this farmer is rich !!!
very strange logic
So rich can be looted by all ...
as the poor are exploited by all ?
Farmer must have toiled or his ancestors ... to
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more...
get rich with farm produce and dairy
to be rich in India is crime ? to be rich is a sin ?
To be rich one needs great skill,
and farming itself is a skill, a devotion in itself.
a software company can claim damages for using their wares 'unauthorized " as it is intellectual property rights violation.
What about Lands that have rich fertility in it ?
To create fertility out of barren lands requires great labor, patience and investments
By this token railways can possess any land she wants.
ask any shopkeeper whose properties are bulldozed for the reason that some rail lines are to be laid...
Govt is failing to give sufficient compensation, and then creates 'Liability' multi fold over the years. a Lakh or rupee becomes a crore ...
This is done with connivance of trinity : leaders, bureaucrats and party in question.

  
453 views
Mar 18 2017 (12:49)
प्यार की एक कहानी^~   32028 blog posts   22944 correct pred (76% accurate)
Re# 2200921-7            Tags   Past Edits
i didnt say that rich is a crime i pointed out ur statement that "Poor farmer satisfied that court did a great job"
mene ye kaha h ki ye farmer garib nhi h tv pe interview me dekha isse mene
baaki rich ho ya poor haq ka pesa milna hi chahiye
aur jo employees isme involve h unhe b suspend krna chahiye

  
416 views
Mar 18 2017 (15:14)
Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Re# 2200921-8            Tags   Past Edits
to fight with Govt of India or any legal system , a man is "POOR" whether rich or begar

  
449 views
Mar 18 2017 (17:01)
प्यार की एक कहानी^~   32028 blog posts   22944 correct pred (76% accurate)
Re# 2200921-9            Tags   Past Edits
Yup

4 posts are hidden.
  
Social
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Mar 16 2017 (23:17)  

Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Entry# 2200067            Tags   Past Edits
This PNR is confirmed .

  
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Mar 17 2017 (00:39)
mushfiquekhalid^~   3605 blog posts   2216 correct pred (74% accurate)
Re# 2200067-1            Tags   Past Edits
which PNR sir ???
  
Travel Question
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Mar 16 2017 (23:26)  

Kishor*^~   4618 blog posts   123 correct pred (63% accurate)
Entry# 2200075            Tags   Past Edits
How many stations are allowing 'RR booking on Hourly basis, as per rules" ?
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