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News Entry# 415900
कोरोनावायरस महामारी (COVID-19 Pandemic) के बीच रेलवे ने अपने अफसरों के लिए अंग्रेजों के जमाने से दी जा रही एक और सुविधा को बंद करने जा रहा है. दरअसल, रेलवे बंगलो पियून या टेलीफोन अटेंडेंट कम डाक खलासी (TADK) की सुविधा खत्म करने का निर्णय किया है. ये डाक खलासी वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करते थे. रेलवे बोर्ड के इस आदेश के बाद इस पद पर नई नियुक्ति पर रोक लग जाएगी.

विगत 6 अगस्त को जारी आदेश में रेलवे बोर्ड ने कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट कम डाक खलासी (TADK)
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का मामला विचाराधीन है. इसलिए TADK की नई नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी जाती है. इसके अलावा, पहली जुलाई 2020 से इस पदों पर नियुक्ति के सभी मामलों की समीक्षा की जा सकती है और बोर्ड को इसकी जानकारी दी जा सकती है. इसका अनुपालन सभी रेलवे जोन में सख्ती से किया जा सकता है. रेलवे में एक अस्थायी कर्मचारी के रूप में भर्ती होने वाले बंगलो पियून तीन साल के बाद में ‘समूह- घ’ के कर्मचारी बन जाते हैं.

दरअसल, पहले रेलवे के अधिकारी दूरदराज की जगहों पर कई-कई घंटे काम करते थे. ऐसे में उन्हें एक डाक खलासी यानी बंगलो पियून मुहैया कराया जाता था, जो कि उनके परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ फोन उठाने से लेकर आधिकारिक कागजात लाने ले जाने का काम करते थे.



डाक खलासी बन जाते थे टिकट परीक्षक

रेलवे के अनुसार, ये TADK कर्मचारी आमतौर पर टिकट परीक्षक, पोर्टर्स, एसी कोचेज के लिए मैकेनिक और रनिंग रूम में कूक बन जाते थे. हालांकि बाद में इनको घरेलू सहायकों और दफ्तर में चपरासी का काम दिया गया. इनके साथ गलत व्यवहार की शिकायतों के बीच रेलवे ने इस पद की समीक्षा के आदेश दिए थे और 2014 में रेलवे बोर्ड की एक ज्वाइंट सेक्रेटरी स्तर की 9 सदस्यीय कमिटी इस पॉलिसी की समीक्षा करने के लिए बनाई गई थी.

8वीं पास बन जाते थे बंगलो पियून

एक TADK कर्मचारी के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं तक पास की होती है. इन्हें 20,000-22,000 रुपये प्रति माह का भुगतान होता है और रेलवे के ग्रुप डी कर्मचारियों से जुड़ी सुविधाएं भी मिलती हैं.

Rail News
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Aug 08 (12:56)
sanjay07   883 blog posts
Re# 4683031-1            Tags   Past Edits
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