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RailFans - we wander, but never get lost - Shaurya Kumar

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Rail Fanning
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Today (21:01)   12079/KSR Bengaluru - Hubballi Janshatabdi Express | GDI/Gudgeri (2 PFs) | KJM/WDP-4/20068

ಅರ್ಜುನ್ अजुॅन Arjun~   3127 blog posts   135 correct pred (68% accurate)
Entry# 4638743            Tags   Past Edits
EMD KJM WDP-4 #20068 Hauled By With 12079 KSR Bengalore City - Hubballi Janshatabdi Express
Skipping GDI/Gudgeri Railway station..!!
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Commentary/Human Interest
Today (21:00)   आरोग्य सेतु ऐप का सोर्स अब सार्वजनिक

rdb^   135929 news posts
Entry# 4638742   News Entry# 409386         Tags   Past Edits
प्रविष्टि तिथि: 26 MAY 2020 8:18PM by PIB Delhi
भारत ने 02 अप्रैल, 2020 को कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने की कोशिशों में वृद्धि करते हुए आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप लांच किया जिसका उद्देश्य ब्लूटूथ पर आधारित किसी से संपर्क साधने, संभावित हॉटस्पॉट्स का पता लगाने और कोविड-19 के बारे में प्रासंगिक जानकारी के प्रचार-प्रसार में सक्षम होना है। 26 मई की तारीख तक इस ऐप के 114 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं जो दुनिया में किसी भी अन्य संपर्क साधने वाले ऐप के उपयोगकर्ताओं से ज्यादा है। यह ऐप 12 भाषाओं और एंड्रॉयड, आईओएस एवं केएआईओएस प्लेटफार्म पर उपलब्ध है। देशभर में नागरिक आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल अपने आपको, अपने चाहने वालों और राष्ट्र को सुरक्षित रखने के
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लिए कर रहे हैं। बहुत से युवा इस ऐप को अपना अंगरक्षक भी मानते हैं।
इस आरोग्य सेतु की प्रमुख खासियत पारदर्शिता, निजता तथा सुरक्षा रहा है और भारत की ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर नीति की तर्ज पर आरोग्य सेतु के सोर्स कोड को अब सार्वजनिक कर दिया गया है। इस एप्लीकेशन के एंड्रॉयड वर्जन के लिए सोर्स कोड को समीक्षा और सहकार्य के लिए click here पर उपलब्ध करा दिया गया है। इस एप्लीकेशन के आईओएस वर्जन को अगले 2 सप्ताह के भीतर ओपन सोर्स के रूप में जारी कर दिया जाएगा और इसके बाद सर्वर कोड को भी जारी कर दिया जाएगा। आरोग्य सेतु ऐप के लगभग 98% उपयोगकर्ता अभी एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर हैं।
डेवलपर समुदाय के लिए सोर्स कोड को सार्वजनिक कर देना हमारे पारदर्शिता और सहयोग के सिद्धांत के प्रति अनवरत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आरोग्य सेतु का विकास सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और नागरिकों के बीच सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह हमारे देश के प्रतिभावान युवा प्रौद्योगिकीय विशेषज्ञों के कठिन मेहनत का फल भी है जिन्होंने इस विश्व स्तरीय उत्पाद को बनाने के लिए रात दिन काम किया है। आम लोगों (पब्लिक डोमेन) के लिए इस सोर्स कोड को जारी करने के साथ ही हम सहयोग बढ़ाने और प्रतिभावान युवाओं और देश के नागरिकों के बीच मौजूद सर्वोच्च प्रौद्योगिकीय विशेषज्ञता का लाभ उठाने और सामूहिक रूप से इस महामारी का मुकाबला मिलकर करने में शामिल अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के काम में मदद करने के लिए एक मजबूत और सुरक्षित प्रौद्योगिकी समाधान बनाने की दिशा में अग्रसर है।
यह ऐप कोविड-19 के खिलाफ विशेषताओं का एक समग्र समूह है और यह अपने लॉन्च के 8 सप्ताह के भीतर कई मामलों में प्रथम साबित हुआ है। जब हम लाक्षणिक खाका बनाते हुए इस महामारी विज्ञान के नए आंकड़ों को देखते हैं तो वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के संक्रमितों से संपर्क साधने और स्वयं आकलन करने के अन्य संसाधनों की तुलना में इस ऐप की पहुंच और प्रभाव संभवतः सबसे अधिक है। इस ऐप के 114 मिलियन से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं में से दो-तिहाई उपयोगकर्ताओं ने खुद ही कोविड-19 का शिकार होने के जोखिम का पता लगाने के लिए अपना आकलन परीक्षण किया। इसके लगभग 500,000 ब्लूटूथ संपर्कों की पहचान करने में मदद मिली है। जिन लोगों की पहचान कोविड-19 पॉजिटिव मामलों के ब्लूटूथ संपर्क या जिनका उनके आकलन के आधार पर मदद पहुंचाने की जरूरत के रूप में वर्गीकृत किया गया, उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण संपर्क करता है। अब तक इस ऐप ने 9,00,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं तक संपर्क साधा और उन्हें क्वॉरेंटाइन होने, सावधानियां बरतने और जांच कराने की सलाह देने के रूप में मदद की। कोविड-19 के लिए जांच कराने हेतु जितने लोगों को इस ऐप के जरिए सलाह दी गई उनमें से लगभग 24% लोगों में कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया। इसकी तुलना 26 मई की तारीख तक कुल 31,26,119 लोगों की जांच में से 1,43,380 लोगों में कोविड-19 पॉजिटिव यानी कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने की दर कुल मिलाकर लगभग 4.65% से की जा सकती है। इससे साफ है कि संपर्क साधने के इस ऐप से उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है जिन्हें जांच कराने की जरूरत है और इस तरह इस महामारी को काबू करने के लिए सरकारी प्रयासों में तेजी लाने में मदद मिल रही है।
ब्लूटूथ संपर्कों और इसकी स्थिति के आंकड़ों के विश्लेषण से कोविड मामलों की उचित संभाव्यता के साथ संभावित हॉटस्पॉट्स की पहचान करने में मदद मिलती है जिससे राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इस महामारी की रोकथाम के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाने में सहूलियत होती है‌। कोविड-19 पॉजिटिव लोगों से संपर्क साधने और उनकी आवाजाही के तरीकों के सिद्धांतों, जनसंख्या स्तर महामारी मॉडलिंग और देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड-19 की मौजूदगी को लेकर एक नई सोच इस बीमारी के लिए लाक्षणिक खाका तैयार करने के इस नवीन तरीकों से आरोग्य सेतु ने देशभर में उप-डाकघर के स्तर पर 3,500 से ज्यादा हॉटस्पॉट्स की पहचान की। पहले के आंकड़ों के साथ आरोग्य सेतु से प्राप्त आंकड़ों में उप-डाकघर स्तर पर उभरते हॉटस्पॉट्स का अनुमान लगाने की काफी संभावना है। आज पूरे भारत में लगभग 1,264 उभरते हॉटस्पॉट्स की पहचान की गई जिसका इस ऐप के अभाव में पता नहीं लग पाता। इसके बाद इन अनुमानित हॉटस्पॉट्स में अधिकांश का परीक्षण किया गया जो अगले 17 से 25 दिनों में वास्तविक रूप से हॉटस्पॉट बन जाएंगे। उदाहरण के रूप में आरोग्य सेतु ने जब किसी खास दिन किसी जिले में 3 मामलों की पहचान की तो उस जिले में अगले 15 दिन में 82 मामले दर्ज हो गए। उस ब्लूटूथ आधारित संपर्क साधने और हॉटस्पॉट की पहचान के इस अनूठे मेल से हासिल सटीक जानकारी इस बीमारी के संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने और लोगों की जान बचाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

Rail News
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Today (21:01)
rdb^   40970 blog posts   507899 correct pred (83% accurate)
Re# 4638742-1            Tags   Past Edits
Part-2/
114 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं द्वारा लगातार इस्तेमाल हो रहे इस तेजी से उभरते उत्पाद का सोर्स कोड जारी करना एक चुनौती है । सोर्स कोड को विकसित करना और उसका रखरखाव आरोग्य सेतु टीम और डेवलपर समुदाय, दोनों की एक बड़ी जिम्मेदारी है। किसी चीज के बचाव के लिए रखी जाने वाली जगह (रिपोजिटरी) को साझा करना वास्तविक उत्पादन पर्यावरण है। इस उत्पाद से संबंधित सभी नई जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
ओपन सोर्स विकास की मदद की प्रक्रिया का प्रबंधन राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) करेगा । कोड से संबंधित सुझावों
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को आग्रह समीक्षाओं के जरिए संसाधित किया जाएगा। आरोग्य सेतु के सोर्स कोड को अपाचे लाइसेंस वर्जन 2.0 के तहत लाइसेंस मिला हुआ है और यह जैसा है वैसा के आधार पर उपलब्ध है। कोड में बदलाव के साथ सोर्स कोड के किसी भी तरह के फिर से इस्तेमाल के लिए डेवलपर की जरूरत पड़ेगी। इससे संबंधित और विस्तृत जानकारीclick here पर सवाल जवाब दस्तावेजों के रूप में प्राप्त की जा सकती है।
कोड को ओपन सोर्स बनाते समय भारत सरकार ने डेवलपर समुदाय से आरोग्य सेतु को और अधिक मजबूत एवं सुरक्षित बनाने के लिए इसमें किसी प्रकार की कमी की पहचान करने या कोड में और सुधार के लिए मदद मांगा। इस उद्देश्य के लिए सरकार ने सुरक्षा अनुसंधानकर्ताओं के साथ साझेदारी करने के उद्देश्य से एक 'बग बाउंटी' कार्यक्रम भी लॉन्च किया ताकि आरोग्य सेतु की सुरक्षा कार्यसाधकता की जांच की जा सके और इसकी सुरक्षा में सुधार या बढ़ोतरी करते हुए इसमें उपयोगकर्ताओं का भरोसा बढ़ाया जा सके। 'बग बाउंटी' को लेकर विस्तृत जानकारी अलग से साझा की जा रही है। 'बग बाउंटी' कार्यक्रम के बारे में और अधिक जानकारी मायगाव के नवीन पोर्टल click here पर उपलब्ध है।
उत्पाद के डिजाइन और कोड को सार्वजनिक करने के साथ ही भारत सरकार की दुनिया की बेहतरी की दिशा में काम करते रहने की प्रतिबद्धता प्रर्दशित होती है। भारत कोविड का सामना करने में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के प्रति हमारे नजरिए से मिली सीख और बाकी दुनिया के साथ भी उपलब्ध समाधान को साझा करने का इच्छुक है। भारत का कहना है कि कोई भी सरकार इस महामारी का सामना करने में इसका इस्तेमाल कर सकती है। हम सभी एक साथ मिलकर इसका सामना कर सकते हैं और इस महामारी से संघर्ष में डॉक्टरों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों को सहायता जारी रखेंगे।
मैं सुरक्षित, हम सुरक्षित, भारत सुरक्षित

********************
एसजी/एएम/एके

(रिलीज़ आईडी: 1627102) आ
केंद्रीय मत्स्यपालन मंत्री ने कहा, “ये नीली क्रांति के माध्यम से आर्थिक क्रांति है”
श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पहली बार मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए बीमा कवरेज लाया जाएगा
सरकार तटीय मछुआरे गांवों में 3,477 “सागर मित्र” पंजीकृत करेगी और मछली किसान उत्पादक संगठन (एफएफपीओ) को प्रोत्साहित करेगी: श्री गिरिराज सिंह
प्रविष्टि तिथि: 26 MAY 2020 6:19PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री
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मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) का लक्ष्य 2018-19 के 137.58 लाख मीट्रिक टन से लगभग 9 फीसदी की औसत वार्षिक वृद्धि दर पर मछली उत्पादन को 2024-25 तक 220 लाख मीट्रिक तक बढ़ाने का है। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना से निर्यात आय दोगुनी होकर 1,00,000 करोड़ रुपये हो जाएगी और अगले पांच वर्षों में मत्स्यपालन क्षेत्र में लगभग 55 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मत्स्यपालन क्षेत्र से जुड़े मछुआरों, मछली किसानों, मछली श्रमिकों, मछली विक्रेताओं और अन्य हितधारकों के लिए पीएमएमएसवाई योजना को समर्पित करते हुए श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पहली बार मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए बीमा कवरेज को लाया जा रहा है।
यह योजना 20 मई, 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई थी। "पीएमएमएसवाई - भारत में मत्स्यपालन क्षेत्र के सतत और जिम्मेदारी पूर्ण विकास के माध्यम से नीली क्रांति लाने की एक योजना" इस विषय पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि इस योजना में 20,050 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश की परिकल्पना की गई है जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 9,407 करोड़ रुपये, राज्य की हिस्सेदारी 4,880 करोड़ रुपये और लाभार्थियों का योगदान 5,763 करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि पीएमएमएसवाई को वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 तक 5 वर्षों की अवधि में सभी राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।

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rdb^   40970 blog posts   507899 correct pred (83% accurate)
Re# 4638741-1            Tags   Past Edits
Part-2/
श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पीएमएमएसवाई के तहत मछली उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता, स्थिरता, प्रौद्योगिकी के उपयोग, फसल कटाई पश्चात के बुनियादी ढांचे, मूल्य श्रंखला के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण, 'कैच टू कंज्यूमर' से मत्स्यपालन क्षेत्र में मानक और ट्रेसेबिलिटी लाने, एक मजबूत मत्स्यपालन प्रबंधन ढांचा स्थापित करने, मछुआरों का कल्याण करने और मत्स्य निर्यात प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी करने की दिशा में पूरा ज़ोर दिया जाएगा। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि पीएमएमएसवाई निजी क्षेत्र की भागीदारी, उद्यमशीलता के विकास, व्यापार मॉडलों, 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने, मत्स्यपालन क्षेत्र में स्टार्ट-अप, इनक्यूबेटर आदि समेत नवीनता और नवीन परियोजना गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करेगा। मंत्री महोदय ने आगे कहा कि चूंकि पीएमएमएसवाई एक मछुआरा
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केंद्रित अंब्रैला योजना है इसलिए इसमें जो विकास गतिविधियां सोची गई हैं उनमें मछुआरे, मछली किसान, मछली श्रमिक और मछली विक्रेता प्रमुख हितधारक हैं और उनके सामाजिक आर्थिक दर्जे में बढ़ोतरी करना इस योजना के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।
मत्स्यपालन मंत्री ने कहा कि पीएमएमएसवाई के कुल अनुमानित निवेश का लगभग 42 फीसदी हिस्सा मत्स्यपालन सुविधाओं के निर्माण और उन्नयन के लिए निर्धारित है। इसके प्रमुख ध्यान वाले क्षेत्रों में फिशिंग हार्बर और लैंडिंग सेंटर, पोस्ट-हार्वेस्ट और कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मछली बाज़ार और मार्केटिंग ढांचा, एकीकृत आधुनिक तटीय मछलीपालन गांव और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का विकास आदि शामिल हैं। मत्स्यपालन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करके जरूरी मत्स्यपालन बुनियादी ढांचे का निर्माण करने के अलावा, इस योजना का मकसद वैल्यू चेन का आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण करके हार्वेस्ट के बाद के नुकसान को 25 फीसदी के उच्च स्तर से घटाकर लगभग 10 फीसदी तक लाना है। स्वच्छ सागर योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए सोची गई गतिविधियों में जैव शौचालयों को बढ़ावा देना, मछली पकड़ने के जहाजों के लिए बीमा कवरेज, मत्स्य प्रबंधन योजनाएं, ई-ट्रेडिंग / मार्केटिंग, मछुआ एवं संसाधन सर्वेक्षण और राष्ट्रीय आईटी आधारित डेटाबेस का निर्माण करना शामिल है।
इससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों के साथ घरेलू मछली की खपत बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि सरकार “सागर मित्र” को पंजीकृत करेगी और पीएमएमएसवाई लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) के गठन को प्रोत्साहित करेगी। तटीय मछुआरा गांवों में 3477 सागर मित्र बनाकर युवाओं को मत्स्यपालन विस्तार में लगाया जाएगा। युवा पेशेवरों के वास्ते रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए निजी दायरे में बड़ी संख्या में मत्स्यपालन विस्तार सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना में कई नई गतिविधियों और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जैसे कि– ट्रेसेबिलिटी, प्रमाणन और प्रत्यायन, खारे / क्षारीय क्षेत्रों में एक्वाकल्चर, जेनेटिक सुधार कार्यक्रम और न्यूक्लियस ब्रीडिंग सेंटर, फिशरीज और एक्वाकल्चर स्टार्ट-अप, मछली की खपत के लिए प्रचार गतिविधियां, ब्रांडिंग, मछली में जीआई, एकीकृत एक्वा पार्क, एकीकृत तटीय मछली पालन ग्रामों का विकास, अत्याधुनिक थोक मछली बाजार, जलीय रेफरल प्रयोगशालाएं, एक्वाकल्चर एक्सटेंशन सर्विसेज, बायोफ्लोक, मछली पकड़ने की नई नावों या उन्नयन के लिए सहयोग, रोग निदान और गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं, ऑर्गेनिक एक्वाकल्चर का संवर्धन व प्रमाणन और संभावित मत्स्यपालन क्षेत्र (पीएफजेड) उपकरण।
श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पीएमएमएसवाई नई और उभरती हुई तकनीकों को ज़ोर प्रदान करती है जैसे कि री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम, बायोफ्लोक, एक्वापोनिक्स, केज कल्टीवेशन वगैरह ताकि उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ाया जा सके, एक्वाकल्चर के लिए बंजर भूमि और जल का उत्पादकता भरा उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि मैरीकल्चर, समुद्री शैवाल की खेती और सजावटी मछलीपालन जैसी कुछ गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जिनमें ग्रामीण महिलाओं के लिए खास तौर पर बड़े पैमाने का रोजगार पैदा करने की क्षमता है।
सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता में आत्मनिर्भरता हासिल करने पर जोर देते हुए श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि इस योजना के परिणामस्वरूप मत्स्यपालन औसत उत्पादकता 3 टन प्रति हेक्टेयर के वर्तमान राष्ट्रीय औसत से बढ़कर 5 टन प्रति हेक्टेयर हो जाएगी। ऐसा ऊंचे मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा देकर, सभी व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों के लिए ब्रूड बैंकों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित करके, झींगों के ब्रूड भंडार में आत्मनिर्भरता के लिए नाभिक प्रजनन केंद्रों की स्थापना और आनुवंशिक सुधार के माध्यम से, ब्रूड बैंकों, हैचरी, खेतों को मान्यता देकर, बीमारियों, एंटीबायोटिक्स और अवशेष विषयों, जलीय स्वास्थ्य प्रबंधन को संबोधित करके हासिल किया जाएगा। ये कदम गुणवत्ता औरऊंची उत्पादकता को सुनिश्चित करेंगे, निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार लाएंगे और मछुआरों व किसानों को ऊंचा मूल्य दिलवाने में मदद करेंगे।

वैश्विक मछली उत्पादन के लगभग 7.73 फीसदी के बराबर होकर और 46,589 करोड़ (2018-19) की निर्यात आय प्राप्त करते हुए भारत ने आज दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मत्स्यपालक और चौथे सबसे बड़े मछली निर्यातक देश का दर्जा पा लिया है। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में हमारे पास दुनिया का पहला, सबसे अधिक मछली उत्पादन और निर्यात करने वाला देश बनने की ऊंची संभावना है और उनका मंत्रालय मत्स्यपालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री महोदय ने कहा कि हमारे मत्स्यपालन क्षेत्र ने पिछले पांच वर्षों के दौरान मछली उत्पादन और निर्यात आय के मामले में प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है। इस क्षेत्र ने 2014-15 से 2018-19 के दौरान 10.88 फीसदी की औसत वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की, मछली उत्पादन में 7.53 फीसदी की औसत वार्षिक वृद्धि और निर्यात आय में 9.71 फीसदी की औसत वार्षिक वृद्धि हासिल की, जिसमें कृषि निर्यात में 18 फीसदी की हिस्सेदारी भी शामिल थी। उन्होंने आगे कहा कि 2018-19 के दौरान राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में मत्स्यपालन क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2,12,915 करोड़ रुपये रहा, जो कुल राष्ट्रीय जीवीए का 1.24 फीसदी और कृषि जीवीए का 7.28 फीसदी हिस्सा था।
मत्स्यपालन के विकास की व्यापक संभावना को देखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2014 में, मत्स्यपालन क्षेत्र में “एक क्रांति” का आह्वान किया था और इसे “ब्लू रेवोल्यूशन”यानी नीली क्रांति का नाम दिया था। केंद्र सरकार ने मत्स्यपालन क्षेत्र में प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित नीली क्रांति को लाने के लिए कई पहल शुरू की हैं ताकि एक स्थायी और जिम्मेदार तरीके से मत्स्यपालन क्षेत्र की क्षमता का दोहन किया जा सके। केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कुछ प्रमुख सुधारों और कदमों में ये शामिल हैं - (i)केंद्र सरकार में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी का एक अलग मंत्रालय बनाना, (ii) स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचे के साथ मत्स्यपालन का एक नया और समर्पित विभाग स्थापित करना, (iii) नीली क्रांति पर आधारित केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना का कार्यान्वयन: 3,000 करोड़ रुपये के केंद्रीय परिव्यय के साथ 2015-16 से 2019-20 की अवधि के दौरान मत्स्यपालन का एकीकृत विकास और प्रबंधन, (iv) 2018-19 के दौरान 7,522.48 करोड़ के आकार के फिशरीज और एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (एफआईडीएफ) का सृजन, और (v) 20,050 करोड़ रुपये के निवेश के साथ पीएमएमएसवाई योजना का शुभारंभ जो मछली पालन क्षेत्र के लिए सबसे अधिक निवेश वाली योजना है।
इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री श्री संजीव कुमार बालियान और श्री प्रताप चंद्र सारंगी और मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. राजीव रंजन उपस्थित थे। इस अवसर पर इन गणमान्य व्यक्तियों ने पीएमएमएसवाई पर एक पुस्तिका का विमोचन किया।


पीएमएमएसवाई पर पुस्तिका देखने के लिए यहां क्लिक करें -

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एसजी/एएम/जीबी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 1627057)
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Woh purane din firse jarur ayenge 👍~   1610 blog posts   5 correct pred (83% accurate)
Entry# 4638716            Tags   Past Edits
Yeh Shramiks special Kab tak chalenge ?
Kaise sure Hoga ki ab migrants Nahi hai

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Today (20:46)
Ye duniya Mera desh humanity Mera dharam~   6966 blog posts   119 correct pred (66% accurate)
Re# 4638716-1            Tags   Past Edits
Abhi zyada time tak chalegi....

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Boxer Bhai~   3622 blog posts   116 correct pred (75% accurate)
Re# 4638716-2            Tags   Past Edits
15-25 days likely
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Today (20:55)  

Woh purane din firse jarur ayenge 👍~   1610 blog posts   5 correct pred (83% accurate)
Entry# 4638738            Tags   Past Edits
Two tier sleeper class introduce Hoga Chahiye ya Nahi ?
Saare UR coaches ko 2S mein convert Kar dena Chahiye
ab 1-2 Saal tak toh unreserved bhul jao
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  • Entry# 4638392
    Today (03:07AM)


    This is a notice of some changes that will soon be introduced. . We shall be expanding the site for discussion of topics beyond railways to other areas. These will be Topic Forums. The topics may pertain to News or anything else that will be beneficial to our community - like Govt. Jobs,...
  • Entry# 4605855
    Apr 02 2020 (09:26PM)


    As there is not much railway news these days, members are now allowed to post Other news on ANY Subject, for discussion purposes, NOT just railway news. . This will allow relevant/important discussions to continue in the Forum, during the lockdown period. . Thanks.
  • Entry# 4246530
    Mar 02 2019 (12:59AM)


    @all: Regarding the new SCoR zone, our VSKP and other SCoR members are excited and interested to change the train/station zones. We may let them go ahead with it. This piece of info is NOT critical for trains and TTs which would affect regular passengers - so it's FINE. . We may let them...
  • Entry# 4239625
    Feb 22 2019 (10:22PM)


    @all: This is a repeat warning to all that: Anonymous posting may NOT be used to directly address regular members -> like scolding them, commenting about their blogging habits, arguing with them, or ANY other personal comment/remark against any other member, EVEN if it is not offensive. ANY personal remark (even if not...
  • Entry# 4214881
    Feb 01 2019 (07:45PM)


    This is an advance notice of the last and CORE feature of the RailFan app - Trips/Spottings - which will be enabled next week. A week after that, RailFan will go into Open Beta, whereby all members will be able to download the app without providing their email. . The Trip/Spotting feature of...
  • Entry# 4213057
    Jan 31 2019 (05:45AM)


    A few small enhancements will be made to the site in the coming days, regarding Member profiles. . 1. Hereafter, we shall require REAL permanent names of members. Members will have the option of reporting those whose name is fake or not real. An SW will be issued, whereupon the member will have...
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