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Mon Aug 21, 2017 19:44:41 ISTHomeTrainsΣChainsAtlasPNRForumGalleryNewsFAQTripsLoginFeedback
Mon Aug 21, 2017 19:44:41 IST
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Trains in the News    Stations in the News   

News Posts by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~

Page#    Showing 1 to 5 of 6422 news entries  next>>
  
कायापलट के फेर में बेपटरी हो गई रेल
समिति ने बोर्ड को दो हिस्सों में बांटने का दिया था सुझाव1
संजय सिंह ’ नई दिल्ली1उत्कल एक्सप्रेस हादसे ने साबित कर दिया है कि रेलवे बेहोशी में है। उस पर कायापलट का नशा चढ़ गया है। यह नशा इस कदर हावी हो चुका है कि साधारण कार्य भी अब उससे नहीं होते। यह क्या बात हुई कि जो मरम्मत हादसा रोकने हो रही हो, वही हादसे का कारण बन जाए?1यह नशा झटपट सब कुछ बदल डालने का है। जब तक इस नशे का इलाज
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नहीं किया जाता, हादसे रुकने वाले नहीं हैं। सवा तीन सालों में रेलवे में सब कुछ उलटा-पुलटा हो गया है। अब मंत्री का काम रेलवे बोर्ड, बोर्ड का काम जीएम और उसका काम डीआरएम संभाल रहे हैं। और सबका जोर इस बात पर है कि कैसे रेल में हो रहे कार्यो को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाए और यात्रियों से ज्यादा से ज्यादा पैसे वसूले जाएं। 1इस आपाधापी में निर्णय और निगरानी की बागडोर ऊपर के बजाय नीचे खिसक गई है और नीचे के स्तर पर मनमानी शुरू हो गई है। ऊपर वालों को इस मनमानी की कोई खबर नहीं है। रेल मंत्री ने स्वयं को नीतियां बनाने तक सीमित कर लिया है। उन नीतियों को लागू कराने वाला रेलवे बोर्ड कामचलाऊ चेयरमैन के कारण प्राय: अपंग है। ऐसे में जीएम और डीआरएम अपने हिसाब से फैसले ले रहे हैं।रेलवे की यह हालत बिबेक देबराय समिति की रिपोर्ट के कारण हुई है, जिसे टुकड़ों में लागू किया गया। छोटी और आसान चीजों को तो अपना लिया गया। मगर बड़ी और कठिन समस्याएं जस-की-तस छोड़ दी गईं। समिति ने बोर्ड को दो हिस्सों में बांटने तथा सदस्य, संरक्षा का नया पद सृजित करने को कहा था। परंतु इसके बजाय कुछ सदस्यों का नया नामकरण कर उनकी जिम्मेदारियों से छेड़छाड़ की गई। इतना ही नहीं, ट्रेन ऑपरेशन से जुड़े काबिल अफसरों को कायाकल्प परिषद, मिशन रफ्तार, पर्यावरण निदेशालय जैसे दीर्घकालिक कार्यक्रमों में लगा दिया गया। ट्रेनों की रफ्तार 130 और 160 किलोमीटर तक बढ़ाने की ऐसी धुन चढ़ी है कि ट्रैक की मरम्मत के लिए ब्लॉक देना लगभग बंद कर दिया गया है। नतीजतन, ज्यादातर ट्रैक की मरम्मत या तो हो ही नहीं पा रही है या हो रही है तो बेहद आधे-अधूरे ढंग से। बढ़ते ट्रेन हादसों की यह बहुत बड़ी वजह है।सच तो यह है कि रेलवे का तमाम अमला ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के बजाय इसमें उलझा रहता है कि यात्रियों की जेब कैसे ढीली की जाए?

  
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Today (15:14)
a2z~   1763 blog posts
Re# 2386517-1            Tags   Past Edits
IR Train operation, schools, colleges, hospitals, catering, cleaning ityaadi sabhi karyon mein haath daal ke baitha hai, aur saar kamon ka kabaada ho rahaa hai. Iske bajaay IR apna saara dhyaan train operation mein hi layaaye to behtar hai.
  
Today (10:55)  हादसे की जिम्मेदारी लें,बलि का बकरा तलाशना काफी नहीं (epaper.navbharattimes.com)
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Major Accidents/DisruptionsNR/Northern  -  

News Entry# 312519     
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Aug 21 2017 (10:55)
Station Tag: Muzaffarnagar/MOZ added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Aug 21 2017 (10:55)
Station Tag: New Delhi/NDLS added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Aug 21 2017 (10:55)
Train Tag: Kalinga Utkal Express/18477 added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Posted by: ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~  6407 news posts
 
 
शनिवार को एक और ट्रेन हादसे ने देश को दहला दिया। पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस के चौदह डिब्बे उत्तर प्रदेश के खतौली कस्बे में पटरी से उतर गए। हादसे के वक्त ट्रेन इतनी स्पीड में थी कि पटरी से उतरे छह डब्बे चकनाचूर हो गए और दो डिब्बे तो पटरी के किनारे बनी इमारतों में घुस गए। ट्रेन हादसे अपने देश में कोई अनोखी चीज नहीं हैं, न ही पिछली जांच रिपोर्टों को धूल फांकने के लिए छोड़ देना रेल मंत्रालय की कोई नई आदत है। अलबत्ता इधर हाल में एक नई बात जरूर हुई है कि किसी भी भयानक घटना के बाद सत्तारूढ़ हलके की ओर से आक्रामक बयानों की झड़ी लग जाती है। रेल दुर्घटना ही नहीं, ऐसी कोई भी बड़ी घटना हो जाए, जिससे सरकार या प्रशासन की लापरवाही का या उस मोर्चे पर किसी तरह की गड़बड़ी का संकेत मिलता हो, तो तमाम मंत्री,...
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नेता और अफसर ऐसा जताने लगते हैं जैसे कोई बहुत बड़ा कदम उठाया जाने वाला है, भले ही इस कदम का समस्या से कुछ लेना-देना हो या न हो। मिसाल के लिए कुछ ही दिनों पहले गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों की मौत का मामला सामने आने पर पहले तो इस बात को झुठलाने की कोशिश हुई कि मौतें ऑक्सिजन की कमी से हुई हैं, फिर इसके तुरंत बाद ऑक्सिजन सप्लाई करने वाली कंपनी पर छापे मारे जाने लगे। इससे भी बात बनती नहीं दिखी तो मुख्यमंत्री जन्माष्टमी और कांवड़ यात्रा के बहाने सड़कों पर नमाज का मसला ले बैठे। राहुल गांधी की यात्रा के चलते यह भी कह दिया कि गोरखपुर कोई पिकनिक स्पॉट नहीं है। मगर कहीं से भी यह संकेत नहीं मिला कि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई में जारी कमिशनखोरी को लेकर सरकार गंभीर हुई है या सरकारी अस्पतालों की दशा सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाने जा रही है। न तो स्वास्थ्य मंत्री ने इसकी कोई जिम्मेदारी ली, न ही इस विभाग के किसी बड़े अफसर की जवाबदेही तय हुई कि भुगतान में विलंब क्यों हुआ। अभी भी इस मामले में सरकार का लीपापोती करने का ही रवैया ज्यादा नजर आ रहा है। कुछ ऐसा ही रवैया रेल हादसों में भी दिखता है। आतंकवाद से तार जोड़ने में एक घंटा भी नहीं लगता, लेकिन रेलवे की प्राथमिकताएं ज्यों की त्यों बनी रहती हैं। ताजा मामले में रेलमंत्री ने जिम्मेदारी तय करने की बात जरूर कही है, लेकिन इसकी शुरुआत हमेशा ऊपर से होती है। तीन साल में दसियों भीषण दुर्घटनाओं के बाद किसी निचले स्तर के शख्स को सजा देने से काम नहीं चलेगा। सरकार इस मामले में गंभीर दिखना चाहती है तो उसे कोई इतनी बड़ी पहल करनी होगी, जिससे लगे कि सरकार को जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास है। इस स्तर की पहल अभी की स्थितियों में प्रधानमंत्री ही सुनिश्चित कर सकते हैं।
  
Today (10:53)  मार्च 2019 तक डबल हो जाएगा मेट्रो रेल नेटवर्क (epaper.navbharattimes.com)
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Commentary/Human InterestLMRC/Lucknow Metro  -  

News Entry# 312517     
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Aug 21 2017 (10:53)
Station Tag: Lucknow Charbagh NR/LKO added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Posted by: ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~  6407 news posts
 
 
nविस, नई दिल्ली : केंद्र सरकार को उम्मीद है कि अगर कोई बड़ी बाधा नहीं आई तो मार्च 2019 तक देश में मेट्रो नेटवर्क लगभग दोगुना हो जाएगा। अभी देश भर में मेट्रो की 370 किमी लंबी रेल लाइनें हैं। इनमें सबसे बड़ा नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर में है। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक दिल्ली में ही 82 किमी. लंबी मेट्रो रेल लाइनें चालू हो जाएंगी और अगले साल जून तक 50 किमी. की रेल लाइनें और बढ़ जाएंगी।
शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक हाल ही में मेट्रो परियोजनाओं को लेकर की गई समीक्षा से यह तथ्य सामने आया है कि अगले 20 महीने के दौरान देश के अलग-अलग शहरों में मेट्रो के 19 नए सेक्शन यात्रियों
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के लिए शुरू हो जाएंगे। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मार्च 2019 तक मेट्रो की 313 किमी. लंबी और लाइनों पर मेट्रो ट्रेनें दौड़ना शुरू हो जाएंगी।
इसी तरह से दिल्ली में इस साल सितंबर तक 28.40 किमी. के नए सेक्शन पर मेट्रो दौड़ना शुरू हो जाएगी। इसके बाद अक्टूबर में 38.20 किमी. और दिसंबर में 15.50 किमी. की नई लाइन चालू हो जाएगी। इसके बाद अगले साल मार्च में 16.30 किमी., अप्रैल में 30.20 किमी. और जून में 3.20 किमी. नई मेट्रो लाइनों पर पैसेंजर सफर कर सकेंगे। अगले साल अप्रैल तक नोएडा में भी 29.70 किमी. मेट्रो लाइन पर मेट्रो दौड़ना शुरू हो जाएगी। यह लाइन नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक जाएगी।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि लखनऊ मेट्रो को कमिश्नर रेलवे सेफ्टी का सर्टिफिकेट मिल गया है और इस मेट्रो लाइन को किसी भी वक्त चालू किया जा सकता है। इसके अलावा अहमदाबाद, हैदराबाद और नागपुर में भी मेट्रो लाइनों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मंत्रालय का दावा है कि उसने 2012 के मुकाबले मेट्रो परियोजनाओं के लिए अपने बजट में लगभग ढाई सौ फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।
  
Today (10:51)  मृतक संख्या 32 हुई, घायल 200 के पार (epaper.jagran.com)
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Major Accidents/Disruptions

News Entry# 312515     
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Aug 21 2017 (10:51)
Station Tag: Khatauli/KAT added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Aug 21 2017 (10:51)
Station Tag: Muzaffarnagar/MOZ added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Aug 21 2017 (10:51)
Train Tag: Kalinga Utkal Express/18477 added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Posted by: ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~  6407 news posts
 
 
दोनों कर्मियों के बीच हुई बातचीत के प्रमुख अंश1मित्र : क्या हुआ तुम्हारे यहां?1गेटमैन : मेरे जैसा, मेरी ही नामराशि का जेई आया है, उसकी कोई मानता नहीं है। यहां कोई भी काम नहीं करना चाहता। आधा घंटा काम कराकर क्वार्टर पर चले गए। की-मैनी पर कोई नहीं जा रहा। गेट पर बैठकर वापस आ जाते हैं। ऐसी ही पेट्रोलिंग का हाल है। यह कोई पूछता नहीं है कौन कहां जा रहा है। पुराने आदमी लुहार हैं, जैसे वो कहते हैं, वैसे ही वह कर लेता है।1मित्र : आखिर क्या हुआ?1गेटमैन : लाइन पर वेल्डिंग का काम चल रहा था। ब्लॉक को मना कर दिया था। पुराने लोगों ने इसे पता नहीं क्या बताया। बस काम शुरू कर दिया। उस समय लाइन का टुकड़ा काटकर रखा था, तब तक जोड़ा नहीं था। गाड़ी का हो गया टाइम। जब ब्लॉक को मना कर रखा था तो गाड़ी तो आती ही। मैंने गेट...
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बंद कर रखा था, उत्कल आ रही थी। बस फिर क्या होना था, वहां टुकड़ा नहीं था, ट्रेन पलट गई।1मित्र : लाइन का टुकड़ा अलग पड़ा था?1गेटमैन : जोड़ रखी थी, पर जोड़ी नहीं थी। वेल्डिंग नहीं की थी। 1मित्र : समझ गया मैं।1गेटमैन : चार डिब्बे तो निकल गए, फिर लाइन टूट गई वहीं से। जोड़ा भी नहीं बांधा था तब तक। लाल झंडी भी नहीं लगाई थी, ब्लाक भी नहीं मिला।
राष्ट्रपति ने रेल हादसे पर जताया दुख1राब्यू, लखनऊ : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यपाल राम नाईक को पत्र लिखकर शनिवार को मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने और उसमें अनेक लोगों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। राष्ट्रपति ने अपने शोक संदेश में दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करने और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। उन्होंने हादसे में प्रभावित लोगों के घरवालों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की है। राष्ट्रपति ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन दुर्घटना से प्रभावित लोगों को चिकित्सीय सुविधा के साथ अन्य आवश्यक सहयोग भी प्रदान करें।
जीआरपी ने अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराया, ओडिशा के विधायक भी पहुंचे
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रवि प्रकाश तिवारी ’ मुजफ्फरनगर 1खतौली में दुर्घटनाग्रस्त हुई कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस के मृतकों की संख्या 32 तक पहुंच गई है। घायल एक व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, वहीं एनडीआरएफ ने रविवार तड़के एक महिला की लाश एस-6 कोच से निकाली। घायलों की संख्या भी 200 पार कर गई है। इनमें 40 लोग गंभीर घायल हैं। हालांकि रेलवे 21 मौत और 98 लोगों के घायल होने की ही पुष्टि कर रहा है। केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री संजीव बालियान मौके पर मौजूद रहे। ओडिशा के कुचिंदा से भाजपा विधायक रबि नारायण नाईक भी मौके पर पहुंचे।1जीआरपी के एसआइ अजय कुमार ने मुजफ्फरनगर में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें आइपीसी की धारा 304 ए (लापरवाही से मौत का मामला) भी शामिल है। उधर क्षतिग्रस्त कोच पटरी से हटाने का काम जारी है। 1जांच में लगेंगे दो महीने : उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आरके कुलश्रेष्ठ ने बताया कि हादसे की जांच केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रलय के अधीन होगी। जांच रेलवे सेफ्टी कमिश्नर शैलेश पाठक करेंगे। वे सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचेंगे। जांच में उन्होंने दो महीने का वक्त लगने की बात भी कही।1खतौली में कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद रविवार सुबह ट्रैक ठीक करते रेलकर्मीरात 12.45 बजे दौड़ी मालगाड़ी1रविवार रात तक ट्रैक से सभी डिब्बे हटाकर पटरी बिछा दी गई। खंभे खड़े कर बिजली जोड़ने का काम चल रहा है। रात 12.45 बजे मालगाड़ी से इस ट्रैक पर ट्रायल लिया गया। मुजफ्फरनगर से खतौली की ओर इसी ट्रैक पर 10-12 किमी प्रतिघंटा की स्पीड से मालगाड़ी दौड़ाई गई। रेल अधिकारियों ने कहा कि सोमवार सुबह से ही यात्री ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
  
Today (10:49)  इसी रूट से फर्राटा भरते निकली थीं कई ट्रेनें ड्राइवरों का दावा, नहीं था किसी तरह का कॉशन (epaper.navbharattimes.com)
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Major Accidents/DisruptionsNR/Northern  -  

News Entry# 312514     
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Aug 21 2017 (10:49)
Station Tag: Muzaffarnagar/MOZ added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Aug 21 2017 (10:49)
Train Tag: Kalinga Utkal Express/18477 added by ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~/206964

Posted by: ☆गोंडा इलेक्ट्रिक शेङ ■☆*^~  6407 news posts
 
 
Maneesh.Aggarwal@timesgroup.com
नई दिल्ली : हादसे से कुछ देर पहले ही हमारी ट्रेनें भी उसी रूट से निकली थीं, जहां उत्कल एक्सप्रेस डीरेल हुई, लेकिन उस वक्त ना तो हमने वहां कोई गैंगमेन देखा था और न ही किसी तरह का कोई कॉशन लगा था। हमारी ट्रेनें अपनी सामान्य स्पीड से वहां से फर्राटा भरते हुए सुरक्षित गुजरी थीं। शाम को जब हमने यह सब सुना तो बहुत अचंभा हुआ कि अचानक यह सब कैसे हो गया/
यह कहना है रेलवे के उन कुछ कर्मचारियों का जो अपनी ट्रेनों को हादसा होने वाले रूट
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यानी मुजफ्फरनगर खतौली के उसी रूट से निकले थे, जहां उत्कल के डिब्बे पटरी से उतरे। इन कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर एनबीटी को बताया कि जो भी ट्रेन चलती है, उससे संबंधित ट्रेन पायलटों को एक चार्ट दिया जाता है। उसमें उस रूट के बारे में तमाम बारीक से बारीक जानकारी दी जाती है। कई जगहों पर लोको पायलटों को ट्रेन की स्पीड धीमी करके चलानी होती है। यह स्पीड पांच किलोमीटर प्रति घंटे या इससे भी कम होती है। ट्रेन की स्पीड इस बात पर निर्भर करती है कि रेलवे ट्रैक पर किस लेवल का काम हो रहा है। अगर रेलवे को लगता है कि वहां ट्रेनों को बिल्कुल रेंगते हुए निकालना है तो ड्राइवर को उसी स्पीड से वहां से ट्रेन निकाली होती है। लेकिन शनिवार को इस रूट के लिए किसी भी पायलट के चार्ट में ऐसा कुछ नहीं था। इससे शंका जताई जा रही है कि इसमें किसी तरह की कोई साजिश तो नहीं थी, क्योंकि संबंधित रेलवे स्टेशन के मास्टर ने भी इस तरह के किसी ब्लॉक लेने के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है। इस रूट पर 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड निर्धारित है। इसी से देहरादून शताब्दी गुजरती है। उत्कल एक्सप्रेस के बारे में बताया जाता है कि वह 105 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। इस हिसाब से वह ओवर स्पीड नहीं थी। रेलवे का कहना है कि अब कमिश्नर रेलवे सेफ्टी की जांच में उन तमाम कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी, जो हादसा होने के तीन-चार घंटे पहले तक इस रूट से गुजरे थे।
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