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News Posts by Kumaon Tiger

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Dec 16 2020 (22:48) Explained: Why Gujarat is seeing protests to save a 107-year-old railway line (
Commentary/Human Interest

News Entry# 428792  Blog Entry# 4814741   
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Dec 16 2020 (22:48)
Station Tag: Waghai/WGI added by Kumaon Tiger/1427404

Dec 16 2020 (22:48)
Station Tag: Bilimora Junction/BIM added by Kumaon Tiger/1427404

Dec 16 2020 (22:48)
Station Tag: Navsari/NVS added by Kumaon Tiger/1427404
The narrow gauge train connecting Billimora in Navsari district with Waghai in Dang district was started by rulers of the Gaekwad dynasty of the princely state of Baroda in 1913.
The Western Railways has decided to scrap 11 narrow gauge routes and branch lines in Gujarat, calling them unviable. One of these is the 107-year-old Billimora-Waghai line, once run by the Gaekwad Baroda State Railway (GBSR), against the closure of which political leaders have started a campaign pitching.
History of the Billimora-Waghai train
narrow gauge train connecting Billimora in Navsari district with Waghai in Dang district was started by rulers of the Gaekwad dynasty of the princely state of Baroda in 1913. This was much before the Western Railway came into existence in 1951 with the merger of the Bombay, Baroda & Central India Railway, the Saurashtra, Rajputana and Jaipur state Railways. At the instance of Gaekwad rulers, the British laid railway tracks and it was operated by Gaekwad Baroda State Railway (GBSR) owned by Sayajirao Gaekwad III. The Gaekwad jurisdiction was spread across parts of Saurashtra, Mehsana in north Gujarat, and Billimora in South Gujarat.
The 63-km Billimora-Waghai and the 19-km Choranda-Moti Karal routes are among those five routes the Indian Railways had proposed to be preserved as “industrial heritage” in 2018. Sources said the Billimora-Waghai train that runs among Gujarat’s most forested routes, was used for the purpose of transportation of sag timber from deep forest areas. For about 24 years the train was run by a steam engine, which was replaced by diesel engine in 1937. After Independence the Western Railway took charge of the train from GBSR. In 1994, the original steam engine was put on the display at Churchgate Heritage Gallery in Mumbai.
Before the pandemic lockdown, the five-coach train made two trips from Billimora to Waghai, covering nine railway stations — Gandevi, Chikhli, Rankuwa, Dholikuwa, Anaval, Unai, Kevdi road, Kala Amba, and Dungarda. The railway tickets were available at Unai, Billimora and Waghai Railway stations and the entire journey costs Rs 15 one way .
What was the railway order
On December 10, Mudit Chandra, executive director (Freight marketing) of the Ministry of Railwaysissued a letter to the General Manager of Western Railways, ordering permanent closure of 11 “uneconomic branch lines and narrow gauge sections” of the Western Railways which had given the proposal of its closure. The lines to be closed are Nadiad-Bhadran, Ankleshwar-Rajpipla, Boriyavi-Vadtal-Swaminarayan, Kosamba-Umarpada, Samlaya Junction-Timba road, Jhagadiya Junction-Netrang, Chhuchhapura-Tankhala, Chhota Udepur-Jambusar, Billimora-Waghai, Choranda-Moti Karal and Chandod-Malsar.
How does it affect the tribals
The train was majorly used by the tribals staying in the interior villages in Dangs district in South Gujarat, which has no road connectivity to reach towns like Gandevi and Billimora for work to sell their agriculture produce. The craftsmen of Dangs district also used this train to sell their products to the shop keepers in these town. So do the students from interior villages to go to colleges in the towns.
Who want to save the train and why
Soon after the announcement to scrap the services, newly BJP elected MLA from Dangs, Vijay Patel, Congress MLA of Vansda in Navsari district Anant Patel and Bipin Rawat, a social worker of Waghai, started a movement to restart the services for tribals. Patel made a written representation to Railway Minister Piyush Goyal where he has said that it was the lifeline for the tribals and should ideally be upgraded and used for tourism. MLA Anant Patel started a relay of protest at each of the railway stations on the route.
Rawat claims there is no health services in the interior villages in Dangs and during medical emergency the patients use this train to reach the towns for medical treatment in government and private hospitals. Even the tribal people, who wanted to go to Surat and Mumbai, use this train to reach Billimora station for further rail connectivity via broad gauge.
अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड, श्री विनोद कुमार यादव ने 01 दिसंबर, 2020 को बनारस रेल इंजन कारखाना, वाराणसी द्वारा नवंबर, 2020 में निर्मित 39वें रेलइंजन को लोकार्पित किया। श्री राजेश तिवारी, सदस्य (ट्रैक्शन एवं रोलिंग स्टॉक) की गरिमामयी उपस्थिति में वीडियो लिंक के माध्यम से लोकार्पण किया गया। महाप्रबंधक, बरेका और उनके अधिकरियों/कर्मचारियों ने ‘दीपशक्ति’ नामक इस रेल इंजन को बरेका में लोको टेस्ट शॉप से लोकार्पित किया। ‘दीपशक्ति’ के साथ ही इस माह के 40वें विद्युत रेल इंजन ‘आकाशदीप’ का भी लोकार्पण किया गया। अध्यक्ष रेलवे बोर्ड ने इस बात की सराहना की कि नवंबर, 2020 में 6000 अ.श. के 40वें रेलइंजन का निर्माण कर बरेका ने एक माह में निर्मित 31 रेलइंजनों (जुलाई, 2020 की उपलब्धि) के निर्माण के अपने ही रिकॉर्ड को पार कर लिया है। देव दीपावली के पवित्र अवसर पर प्राप्त किया गया यह एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। यह रिकॉर्ड नवंबर माह के...
दौरान बेहतर स्थान प्रबंधन के लिए शॉप फ्लोर की उत्कृष्ट योजना और बाधा रहित सामग्री उपलब्धता के परिणाम स्वरूप कायम हुआ है। सदस्य (ट्रैक्शन एवं रोलिंग स्टा्क) ने इस उत्पादन इकाई द्वारा नवंबर, 2020 तक प्राप्त संचयी उत्पादन की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बरेका ने नवंबर, 2019 के अंत तक 168 रेल इंजनों के निर्माण की तुलना में नवंबर, 2020 तके 169 रेल इंजनों का निर्माण किया। यह अप्रैल, 2020 एवं मई, 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के बावजूद किया गया, जबकि अप्रैल में उत्पादन शून्य था और मई, 2020 में मात्र 8 रेल इंजन निर्मित किए गए थे। इस प्रकार बरेका भारतीय रेल के विद्युतीकरण विस्ताार के साथ-साथ विद्युत रेल इंजनों की आपूर्ति करने के लिए अग्रसर हो रहा है।
अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड ने कहा कि विगत चार वर्षों में इस उत्पा‍दन इकाई ने डीजल रेल इंजन से विद्युत रेल इंजन निर्माण के लिए पूरी तरह अपना संरचनात्म्क विकास कर लिया है। कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने चुनौती का सामना करते हुए नया कौशल अर्जित किया और शॉप फ्लोर, मशीन, जिग एवं फिक्सचर तथा विद्युत रेल इंजनों के उत्पादन के लिए योजना प्रक्रिया को पुनर्गठित किया है। इस प्रक्रिया का ही यह परिणाम है कि सिंगल एसेम्बली लाइन से मात्र एक माह में 40 विद्युत रेल इंजनों के उत्पादन का रिकार्ड कायम किया गया, जबकि इसी एसेम्बली लाइन से निर्यात एवं गैर रेल ग्राहकों हेतु डीजल रेल इंजन का भी निर्माण किया जाता है। बरेका डीजल से विद्युत रेल इंजन निर्माण के लिए अपने आप को तैयार करने के साथ ही साथ रेल मंत्रालय के बहुउद्देशीय कार्य में भी संलग्न है, जिसमें ईंधन का खर्च कम करना, कार्बन फुट प्रिंट कम करना, ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना तथा ट्रेनों की हॉलिंग क्षमता एवं औसत गति में वृद्धि करना भी है।
अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड ने बरेका को मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली को शत-प्रतिशत अंगीकृत करने का आह्वान किया, जिसमें कर्मचारी के विभिन्न मद जैसे सेवा अभिलेख को देखने, छुट्टी का लेखा-जोखा, भविष्य निधि निकालने इत्यादि चुटकियों में करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि बरेका ने गुणवत्ता के अनेक प्रमाण-पत्र अर्जित किए हैं, जो इसकी उच्च गुणवत्ता के क्षेत्र में प्रतिबद्धता को साफ-साफ दर्शाता है। हालांकि, हमें अपनी गुणवत्ता स्तर से कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए और भविष्य में इसमें निरंतर सुधार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। बरेका को ‘दोष रहित’ उत्पादन का प्रयास करना चाहिए तथा वह लोको निर्माता के ऐसे ‘ब्रांड’ के रूप में उभरकर आए, जिनके लोको रास्ते में खराब न हों और शेड में केवल नियमित अनुरक्षण के लिए ही आएं। वर्तमान असफलताओं से सीख लेकर, मूल कारणों का विश्लेषण करके, भविष्य में बार-बार होने वाली खराबी की जांच के लिए समुचित सुधारात्मक उपाय से ही ऐसे मानक स्थापित किए जा सकते हैं। वे आश्वस्त थे कि बरेका की वर्तमान महाप्रबंधक सुश्री अंजली गोयल के कुशल नेतृत्व में उनकी समर्पित टीम नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी तथा इसे विश्वस्तरीय ब्रांड के रूप में देखा जाएगा।
सदस्य (कर्षण एवं रोलिंग स्टॉक), श्री राजेश तिवारी ने बरेका परिवार की उत्कृष्ट कार्यशैली और सामंजस्यपूर्ण प्रकृति के बारे में उल्लेख किया, जिसे उन्होंने बरेका में प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर के रूप में अपनी तैनाती के दौरान देखा। उन्होंने बरेका की टीम को आई.एस.ओ.:9001, आई.एस.ओ.:14001, ओहसास.:18001 आदि तथा ऊर्जा प्रबंधन के लिए आई.एस.ओ.:5001 गुणवत्ता प्रमाण-पत्रों को अल्प अवधि में प्राप्त करने पर बधाई दी। उन्होंने उच्च दक्षता के साथ एवं लंबे समय से मल-जल शोधन संयंत्र के निरंतर संचालन पर भी बरेका को पुनः बधाई दी। उन्होंने टीम बरेका को बहुत ही कम समयांतराल में डीजल रेल इंजन के उत्पादन के स्थान पर विद्युत रेल इंजनों के उत्पादन की चुनौतीपूर्ण परिवर्तन को भी सराहा।
महाप्रबंधक ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के संचालन में यह हमारा विनम्र योगदान है। यह हमने कोविड-19 महामारी के अवरोधों के बावजूद अपनी दृढ़ता से प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बरेका की यह उपलब्धि ऐतिहासिक है। विद्युत रेल इंजन उत्पादन में 98% स्वदेशी सामग्री का प्रयोग किया गया है। इससे एमएसएमई और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बड़े पैमाने पर सहायता मिल रही है। 2020-21 में बरेका की वार्षिक खरीद 3,000 करोड़ रुपये है। एमएसएमई से पर्याप्त मात्रा में सामग्री खरीदी जाती है। 2019-20 में, एमएसएमई से खरीद लगभग 1,400 करोड़ रुपये की थी। प्रति वर्ष लगभग 4,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर अर्थव्यवस्था के निर्माण क्षेत्र की जीडीपी में बरेका का महत्वपूर्ण योगदान है। बरेका अब भारत सरकार की दूरदर्शी नीति “आत्मनिर्भर भारत” को हासिल करने की दिशा में मल्टी गेज और मल्टी ट्रैक्शन रोलिंग स्टाक का उत्पादन करने के लिए अपने बहुउद्देशीय बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने की अनूठी स्थिति में है। मोजाम्बिक को 3,000 अ.श. केप गेज डीजल लोकोमोटिव के एक प्रतिष्ठित निर्यात ऑर्डर पर भी बरेका काम कर रहा है। इसे नवंबर 2020 में फास्ट ट्रैक पर डाल दिया गया है। इस आदेश के तहत, पहली बार बरेका में एक 12 सिलेंडर क्रैंककेस का निर्माण किया जा रहा है।
ई.डी.सी.सी. ने अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रेलवे बोर्ड की ओर से बरेका को प्रोत्साहन स्वरूप 1.5 लाख (एक लाख पचास हजार) रुपए के नकद पुरस्कार की घोषणा की।

Rail News
Dec 01 2020 (22:32)
sanjay07   1118 blog posts
Re# 4798371-1            Tags   Past Edits
Very encouraging News, Keep it up.
IR Affairs

News Entry# 424358  Blog Entry# 4772825   
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Issues on Safety, Seasonal Maintenance of Track, Trespassing at Level Crossings, Yard & Loop Line Improvement, Material Management and Train Operations during Foggy Weather and Diwali-Chhat Festivals were Discussed
Sh. Ashutosh Gangal, General Manager Northern Railway held a performance review meeting with the departmental heads of Northern Railway through video conferencing from Baroda House, NR headquarter office in New Delhi today. Amongst many issues deliberations were: safety, winter maintenance of tracks, trespassing at level crossings, improvement of yards and loop lines, train operations in foggy weather and arrangements for Diwali-Chhat festivals.

The GM emphasized on keeping the maintenance of tracks in immaculate order especially during the winter season when incidences of rail fracture increase. Yard improvement has to be given importance with loop line repairs and replacement taken up expeditiously. He also advised on sensitizing the staff and crew of the trains to remain alert and vigilant. All untoward incidents should be immediately reported and the concerned department should take action on it as a priority. He also advised to maintain adequate stock pile of essential and important items needed for repair and maintenance of assets over the zone.

The Departmental heads shared with the General Manager the fog preparations for optimum running of trains. As the temperature has started dipping in the northern belt, foggy conditions are being encountered.

Northern Railway has made elaborate arrangements for tackling issues like poor visibility conditions. Fog safety devices on locomotives have been installed, tested and calibrated, signaling systems have been made fog conducive and detonators have been provided.

He advised on maintenance and availability of rakes, and locomotives for the special festival trains. Crowd management especially on stations of Delhi Area during Diwali-Chhat with Covid protocols was also discussed. He also took a serious note of increase in trespassing cases by road-users on tracks and level crossing when the gates are closed.

Expressing satisfaction on the performance of the various departments, Sh. Gangal said, “that NR is making all out effort to provide safe, comfortable and convenient travel to rail-users during the festival and winter season.”
Sep 05 2020 (09:30) कोयला लेकर हरदुआगंज जा रही मालगाड़ी में आग (

News Entry# 417622  Blog Entry# 4705997   
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Sep 05 2020 (09:30)
Station Tag: Fazalpur/FZL added by Kumaon Tiger/1427404
Stations:  Fazalpur/FZL  
अप लाइन में कोयला मालगाड़ी की एक बोगी में आग लगने की सूचना पर रेल कर्मियों में अफरा तफरी मच गई। सूचना पर फजुल्लापुर रेलवे स्टेशमें रोक कर दमकल विभाग में आग बुझाई। जिसके बाद करीब ढ़ाई घंटे तक खड़ी रही। इस दौरान ओएचई सप्लाई ब्रेक होने से पीछे के स्टेशनों में कई ट्रेने खड़ी रही।शुक्रवार को कोयला लादकर अप लाइन से हरदुआगंज जा रही मालगाड़ी में धुआं उठता देखकर रसूलाबाद के एसएम द्वारा फैजुल्लापुर में ड्यूटी पर मौजूद स्टेशन मास्टर को जानकारी दी गई। जिसके बाद मालगाड़ी को 6:28 बजे प्लेटफार्म नंबर तीन पर रोके जाने के बाद रेल कर्मियों ने धुआं उठने वाले कोच में पानी डालना शुरु कर दिया। इसके साथ ही फायर बिग्रेड को मामले की जानकारी दी गई। टीआई संदीप कुमार सिंह ने बताया कि फायर बिग्रेड की गाड़ी 7:40 बजे पहुंच गई। जिसके बाद 8:20 बजे ओएचई की सप्लाई बंद करवा दी गई।...
जिसके बाद दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के प्रयास शुरु कर दिए तथा 8:20 बजे जब धुआं उठना बंद हो गया तब सभी ने राहत की सांस ली। जिसके बाद 8:45 बजे ओएचई की सप्लाई बहाल करा दी गई। हालांकि इस दौरान ट्रेन करीब ढ़ाई घंटे बाद रवाना हो सकी, साथ ही ट्रैक सुचारू हो सका। यदि गाड़ी में उठ रहे धुएं को समय पर देखकर उसे न बुझाया जाता तो बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता था। उधर मामले की सूचना मिलने के बाद पोस्ट कमाण्डर आरपीएफ प्रवीण सिंह, थानाध्यक्ष जीआरपी अरविंद कुमार सरोज सहित सिविल पुलिस के जवान व एसएसई ओएचई देवेंद्र कुमार घटना स्थल पर पहुंचे जहां राहत कार्य शुरु कर दिया गया।ब्रेक वाहन से 32वें रैक में उठ रहा था धुआंबताते है कि मालगाड़ी के ब्रेक वाहन से 32 वें वैगन नं0 एसईसीआर 22141618210 में धुआं उठ रहा था। जिसको देखकर सभी के होश उड़ गए, आनन फानन आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए गए। धुआं उठना बंद होने के बाद मालगाड़ी के चालक उपेंद्र कुमार व गार्ड अमित राय द्वितीय द्वारा करीब 9:06 बजे गाड़ी को लेकर गंतव्य के लिए रवाना हो गए।ये हो सकता है आग लगने का कारणजानकारों की मानें तो ट्रेन के पहिए में हार्ड एक्सेल(ब्रेक शू का जाम होना) होने पर उसमें चिंगारी उठने के चलते भी आग लग सकती है। इसके साथ ही यदि कोई पार्ट्स लटकता है तो उसमें भी चिंगारी उत्पन्न होती है, जिससे पहिए के मध्य में लगी ग्रीस का छिडकाव(गिरने) होने लगता है जिसके बाद उस स्थान से सफेद रंग का धुआं उठना शुरु हो जाता है तथा आग लगने के अवसर बढ़ जाते है।लापरवाही तो नहीं धुआं निकलने का कारणविभागीय कर्मियों के बीच दबी जुबान चर्चा रही कि यदि कोयला लदी ट्रेन कहीं आउटर या संनाटे वाले स्थान पर रुक जाती है। तो उसमें से कोयला चुराने वाले लोग वैगन के ऊपर चढ़ जाते है जो कोयला फेंकना शुरु कर देते है। अनुमान लगाया कि कोयला चुराने के लिए चढ़े किसी के द्वारा उसमें जलती बीड़ी या सिगरेट को छोड़ दिया गया होगा जिससे धीरे-धीरे कोयले ने आग पकड़ना शुरु कर दिया होगा।
Sep 05 2020 (09:26) लखनऊ की ओर जा रही मालगाड़ी के चार चक्के हुए जाम (

News Entry# 417619  Blog Entry# 4705987   
  Past Edits
Sep 05 2020 (09:26)
Station Tag: Pt Ram Prasad Bismil/PRPM added by Kumaon Tiger/1427404
Stations:  Pt Ram Prasad Bismil/PRPM  
लखनऊ की ओर जा रही मालगाड़ी का चक्का जाम होने से रेलवे में हड़कंप मच गया। रोजा से पास होने के बाद गेटमैन ने चक्का जाम होने की सूचना कंट्रोल को दी गई थी। जिसके बाद मालगाड़ी को राम प्रसाद बिस्मिल स्टेशन पर राेका गया। वैगन के जाम चक्कों को सही कर मालगाड़ी को आगे के लिए रवाना किया गया। इस दौरान आधे घंटे तक खड़ी रही। रोजा से मालगाड़ी लखनऊ की ओर जा रही थी। मालगाड़ी के रोजा से पास होने के बाद गेटमैन ने चिंगारी निकलते हुए देखी। वैगन के चक्के जाम होने का अंदेशा हुआ। इसकी सूचना कंट्रोल को दी गयी। सूचना मिलने के बाद मालगाड़ी को राम प्रसाद बिस्मिल स्टेशन पर रोका गया। कैरिज विभाग की टीम ने पूरी मालगाड़ी चेक की। इस बीच इंजन से लगभग 24वें वैगन के चार चक्के जाम मिले। रेल कर्मचारियों द्वारा ही उसे सही किया गया। जिसके बाद मालगाड़ी को...
आगे के लिए रवाना किया गया। इस बीच मालगाड़ी राम प्रसाद बिस्मिल स्टेशन पर लगभग 30 मिनट तक रुकी रही।
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